सर्वांगासन करने का तरीका और फायदे – Sarvangasana (Shoulder Stand) Steps And Benefits in Hindi

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भागदौड़ भरे जीवन में स्वास्थ्य का ख्याल रखना थोड़ा मुश्किल हो गया है। समय का अभाव शारीरिक गतिविधियों से दूर कर रहा है। ऐसे में योग अपनाकर थोड़े समय में ज्यादा स्वास्थ्य लाभ उठाए जा सकते हैं। योग के अंतर्गत ऐसे कई प्राणायाम और आसन हैं, जिनके अनगिनत फायदे हैं। ऐसा ही एक आसन है सर्वांगासन (Sarvangasana)। इस आसन को नियमित रूप से करने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। बेशक, योगासन फायदेमंद है, लेकिन तभी जब इसके साथ संतुलित खान-पान का भी पालन किया जाए। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम जानेंगे कि सर्वांगासन क्या है और शरीर के लिए सर्वांगासन के फायदे क्या-क्या हो सकते हैं। इसके अलावा, इस लेख में सर्वांगासन करने का सरल तरीका भी आपको बताएंगे।

सर्वांगासन के फायदे जानने से पहले आइए जान लेते हैं कि सर्वांगासन क्या है।

सर्वांगासन क्या है? – What is Sarvangasana in Hindi

सर्वांगासन योगशास्त्र में वर्णित एक उत्तम योगासन है। जैसा की नाम से पता चलता है – सर्व+अंग+आसन, यानी इस आसन से सभी अंग प्रभावित होते हैं। सर्वांगासन में शरीर उल्टी अवस्था (Inverted Position) में रहता है। माना जाता है कि ऐसे सभी आसन जिनमें शरीर उल्टा रहता है, मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं (1)। साथ ही इसे करने के अन्य लाभ भी हैं, जिनके बारे में लेख में आगे विस्तार से बताया गया है। सर्वांगासन करते समय व्यक्ति का सारा वजन उसके कंधों पर रहता है, इसलिए इसे शोल्डर स्टैंड पोज (Shoulder Stand Yoga) भी कहते हैं।

आइए, अब जानते हैं कि सर्वांगासन स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है।

सर्वांगासन के फायदे – Benefits of Sarvangasana

सर्वांगासन के लाभ अतुलनीय हैं। इसे करने से पूरे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह आसन उत्तम स्वास्थ्य चाहने वाले व्यक्ति के लिए वरदान है। यहां हम स्वास्थ्य के लिए सर्वांगासन के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

1. अवसाद कम करने में सहायक है सर्वांगासन

अवसाद के प्रभाव को कम करने में सर्वांगासन के लाभ देखे जा सकते हैं। दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि जिन आसनों में सिर नीचे और पैरों को ऊपर किया जाता है, वो अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। इन आसनों में सर्वांगासन का भी नाम शामिल है। अवसाद के लक्षणों में मानसिक विकार – जैसे कुछ नुकसान होने का डर व असफलता का डर शामिल है। ऐसे कई लक्षणों को सर्वांगासन की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए, कहा जा सकता है कि अवसाद से उबरने में सर्वांगासन एक सहायक भूमिका अदा कर सकता है (1)

2. तनाव में आराम देता है

विशेषज्ञों के अनुसार सर्वांगासन तनाव को नियंत्रित करने का काम भी कर सकता है (2)। इसके अलावा यह आसन ऊपर बताए गए अवसाद के लक्षण जो कुछ तनाव की अवस्था में भी देखे जा सकते हैं, उनसे पार पाने में मदद कर सकता है (1)। फिलहाल, इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।

3. मेटाबॉलिज्म (चयापचय) बढ़ाने में सहायक है सर्वांगसन

भोजन से एनर्जी बनने की क्रिया को चयापचय कहा जाता है। चयापचय में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी श्वसन तंत्र से लेकर रक्त संचार और यहां तक की पाचन क्रिया को प्रभावित कर सकती है (3)। यहां सर्वांगासन आपकी मदद कर सकता है। दरअसल, एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में कुछ विशेष प्रकार के आसनों का उल्लेख किया गया है, जो मेटाबॉलिज्म पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इन आसनों में सर्वांगासन भी शामिल है (4), लेकिन इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।

4. पाचन शक्ति बढ़ाता है

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि सर्वांगासन से शरीर के सभी अंगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसमें अपच (Dyspepsia) में सुधार कर पाचन क्रिया को मजबूत बनाना भी शामिल है (5)। इसके अलावा, यह इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आंत से जुड़ा विकार) को नियंत्रित करने का काम भी कर सकता है, जिसमें कब्ज जैसी समस्या भी शामिल है (6)।

5. नींद और चिंता को कम करता है

चिंता को दूर करने और नींद को बढ़ावा देने में भी सर्वांगासन के लाभ देखे जा सकते हैं। दरअसल, इस आसन का नियमित अभ्यास चिंता, अवसाद और तनाव जैसी समस्याओं को दूर करने का काम करता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव नींद को बढ़ावा देने का काम कर सकता है। हालांकि, यह आसन सीधे तौर पर किस प्रकार काम करता है, इस पर अभी और शोध की आवश्यकता है (2)

6. साइनसाइटिस और अस्थमा का इलाज करने में मदद करता है

अस्थमा और साइनसाइटिस जैसी श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्याओं से बचाव व आराम दिलाने में भी सर्वांगासन का लाभ देखा जा सकता है। दरअसल, एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में उन आसनों को शामिल किया गया है, जो पल्मोनरी फंक्शन (फेफड़ों से संबंधित) में सुधार कर सकते हैं (7)। इसके अलावा, कुछ विशेषज्ञ अस्थमा और साइनसाइटिस के वैकल्पिक उपचार के लिए सर्वांगासन के नियमित अभ्यास की भी सलाह देते हैं (8)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि सर्वांगासन श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्याओं पर सकारात्मक प्रभाव दिखा सकता है। इन समस्याओं के सटीक इलाज के लिए योगाभ्यास के साथ-साथ डॉक्टरी उपचार को प्राथमिकता जरूर दें।

7. थायराइड ग्रंथि को सक्रिय करने में सहायक है सर्वांगासन

थायराइड गले में मौजूद एक ग्रंथि होती है। यह ग्रंथि मेटाबॉलिज्म और व्यक्ति के विकास में सुधार के लिए हार्मोन बनाने का काम करती है। कई बार इस पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव थायराइड संबंधी समस्याओं जैसे – हाइपर थायरॉयडिज्म (थायराइड द्वारा अधिक हार्मोन का उत्पादन) और हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड द्वारा पर्याप्त हार्मोन का न बन पाना) को उत्पन्न कर देते हैं। यहां भी सर्वांगासन के लाभ देखे जा सकते हैं। दरअसल, विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ चुनिंदा योगासन थायराइड ग्रंथि से जुड़ी समस्याओं के वैकल्पिक उपचार में मदद कर सकते हैं (8)। इस आसनों में सर्वांगासन को भी शामिल किया गया है। हालांकि, यह कितना कारगर होगा, इस पर अभी सटीक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

आगे लेख में जानिए सर्वांगासन करने का तरीका।

सर्वांगासन योग मुद्रा करने का तरीका – Steps to do Sarvangasana (Shoulder Stand) in Hindi

सर्वांगासन करने का तरीका जटिल नहीं हैं। बहुत कम समय में नीचे बताए गए स्टेप का पालन कर इस आसन को किया जा सकता है –

  • सबसे पहले स्वच्छ वातावरण में एक योग मैट बिछा लें।
  • अब मैट पर पीठ के बल लेट जाएं और दोनों हाथों को शरीर से सटाकर सीधा कर लें।
  • अब सांस लेते हुए पैरों, कूल्हों और कमर को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
  • साथ ही हाथों से कमर को सहारा देते हुए कोहनियों को जमीन से सटा लें।
  • ध्यान रहे कि आपके दोनों पैर आपस में सटे और सीधे रहें।
  • इस दौरान आपके शरीर का भार कंधों, कोहनियों और सिर पर होगा।
  • साथ ही आपकी ठुड्डी छाती को स्पर्श करेगी।
  • कुछ देर इसी मुद्रा में बने रहें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
  • फिर धीरे-धीरे वापस अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।

यह तो था सर्वांगासन करने का तरीका, अब आगे जानते हैं कि इस आसन को करने में किन-किन बातों का खास ख्याल रखना जरूरी है।

शुरुआती लोगों के लिए सर्वांगासन करने के टिप्स – Beginner’s Tip to do Sarvangasana in Hindi

इस आसन को पहली बार करने जा रहे व्यक्ति नीचे बताई जा रही बातों को ध्यान में जरूर रखें –

  • किसी योग गुरु या अनुभवी व्यक्ति की देखरेख में इस आसन को करें।
  • अपने शरीर के साथ कोई जबरदस्ती न करें।
  • पैरों को धीरे-धीरे ऊपर ले जाएं।
  • गर्दन का खास ख्याल रखें। सर्वांगासन करने का तरीका ऐसा हो कि आपका वजन कंधों पर हो गर्दन पर नहीं।

लेख के अगले भाग में जानिए सर्वांगासन से जुड़ी कुछ सावधानियों को बारे में।

सर्वांगासन योग के लिए कुछ सावधानियां – Precautions for Sarvangasana in Hindi

अगर कोई निम्न अवस्थाओं का सामना कर रहा है, तो सर्वागासन न करें –

  • गर्भावस्था
  • उच्च रक्तचाप
  • गंभीर ह्रदय रोग
  • रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या
  • गर्दन में असहनीय दर्द

उम्मीद है कि अब आप स्वास्थ्य के लिए सर्वांगासन के फायदे क्या-क्या हो सकते हैं, इससे भलिभांति परिचित हो गए होंगे। लेख में सर्वांगासन करने का तरीका भी बताया गया है, जिसका पालन कर इस आसन का अभ्यास सही प्रकार से किया जा सकता है। साथ ही इस लेख में बताई गईं सावधानियों का भी पूरा ध्यान रखना जरूरी है। यहां एक बार फिर से बता दें कि सर्वांगासन का फायदा तभी होगा, जब अनुशासित दिनचर्या व पौष्टिक आहार का सेवन किया जाए। साथ ही किसी भी गंभीर शारीरिक समस्या के लिए डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। इसके अलावा, इस आसन से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स के जरिए हमसे पूछ सकते हैं।

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