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टॉप 10 स्कोलियोसिस व्यायाम और उनके लाभ – Top 10 Scoliosis Exercises And Their Benefits in Hindi

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टॉप 10 स्कोलियोसिस व्यायाम और उनके लाभ – Top 10 Scoliosis Exercises And Their Benefits in Hindi Hyderabd040-395603080 December 15, 2018

स्कोलियोसिस (मेरुवक्रता) के साथ रहना काफी कठिन और दर्दनाक हो सकता है। यह एक प्रकार का विकार है, जिसमें रीढ़ की हड्डी सीधी न होकर अन्य दिशा में मुड़ जाती है। स्कोलियोसिस से पीड़ित व्यक्ति का मेरुदण्ड अंग्रेजी के अक्षर ‘एस’ और ‘सी’ की तरह दिखाई पड़ता है। स्कोलियोसिस को ‘रीढ़ वक्रता’ या ‘पार्श्वकुब्जता’ के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इसे ठीक करने के कई नॉन सर्जिकल उपाय मौजूद हैं। कई ऑर्थोपेडिक सर्जनों के मुताबिक, स्कोलियोसिस का इलाज करने का सबसे अच्छा तरीका व्यायाम और सक्रिय रहना है। आप दीवार का सहारा लेकर भी मेरूदंड संबंधी व्यायाम कर सकते हैं। ऐसे ही कुछ व्यायाम के बारे में हम इस लेख के जरिए बता रहे हैं।

विषय सूची


सबसे पहले जानते हैं कि रीढ़ वक्रता को ठीक करने के लिए व्यायाम क्यों जरूरी है।

स्कोलियोसिस व्यायाम आपके लिए क्यों जरूरी है? Why Scoliosis Exercises Are Good For You in hindi

Why Scoliosis Exercises Are Good For You in Hindi Pinit

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शारीरिक मुद्रा (पोश्चर) को सीधा और मजबूत करने के लिए सबसे कारगर माध्यम व्यायाम है। वहीं, जब बात स्कोलियोसिस की हो, तो व्यायाम को लेकर सावधान रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि कोई भी गलत व्यायाम आपकी तकलीफ बढ़ा सकता है। हालांकि, स्कोलियोसिस के लिए श्वास व्यायाम (Breathing Exercise) किया जाता है, लेकिन यह अस्थायी राहत देता है। रीढ़ वक्रता पर काबू पाने का यह सटीक उपाय नहीं है। मांसपेशियों के संतुलन पर काम करने वाले योगासनों को भी स्कोलियोसिस का प्रभावी उपाय नहीं कहा जा सकता है। स्कोलियोसिस ब्रेसिंग भी एक अस्थायी समाधान है, क्योंकि जब आप ब्रेस पहनना बंद करते हैं, तो रीढ़ की हड्डी फिर से वक्राकार अवस्था में आ जाती है। स्कोलियोसिस से निजात पाने के लिए आप इस लेख में बताए जा रहे व्यायामों को कर सकते हैं, लेकिन इन्हें करने से पहले एक बार ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से सलाह जरूर कर लें।

आइए, सबसे पहले जानते हैं कि स्कोलियोसिस व्यायाम कितने प्रकार के होते हैं।

स्कोलियोसिस व्यायाम के प्रकार – Types Of Scoliosis Exercises in Hindi

  • मांसपेशियों और मस्तिष्क को प्रशिक्षित करने के लिए इन्वॉलन्टरी एक्सरसाइज
  • एंटी-स्कोलियोसिस पोश्चर
  • वक्रता संतुलन के लिए मिरर इमेज एक्सरसाइज
  • श्वास यांत्रिकी और कार्य (Breathing mechanics and functions)

स्कोलियोसिस व्यायाम के लाभ – Benefits Of Scoliosis Exercises in Hindi

  • इससे रीढ़ की वक्रता कम होती है।
  • मस्तिष्क और मांसपेशी के समन्वय (कोआर्डिनेशन) में सुधार होता है।
  • स्कोलियोसिस को बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है।
  • मौजूदा वक्रता को स्थिर और कम करता है।
  • सर्जरी और ब्रेसिंग की आवश्यकता को कम करता है।

स्कोलियोसिस व्यायाम के लिए जरूरी उपकरण

Equipment needed for Scoliosis Exercise in Hindi Pinit

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  • फोम रोलर – फोम रोलर्स न केवल दर्द से छुटकारा दिलाता है, बल्कि शारीरिक क्षमता को भी बढ़ाता है। यह कोर एक्सरसाइज के दौरान अहम भूमिका निभाता है।
  • स्टेबिलिटी बॉल – स्टेबिलिटी बॉल आपकी कमर को सहारा और स्थिरता प्रदान करती है। इसके साथ ही यह गेंद पेट की मांसपेशियों को भी मजबूत करती है।
  • ट्रेनिंग वेज – यह सॉफ्ट वेज मैट होते हैं, जो रीढ़ की हड्डी में ज्यादा वक्रता होने पर अतिरिक्त सहारा प्रदान करते हैं।
  • बोसु (BOSU) बैलेंस ट्रेनर- यह गुंबद के आकार का बैलेंस ट्रेनर पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है।
  • स्कॉलिस्मार्ट एक्टिविटी सूट – यह उपयोगी और प्रभावी सूट है, जिसे आप दैनिक काम के दौरान पहन सकते हैं। यह उचित शारीरिक पोश्चर को बनाए रखने और मेरुदण्ड की वक्रता को कम करने में मदद करता है।

नीचे जानिए, स्कोलियोसिस के लिए कौन सा व्यायाम आपके लिए लाभकारी होगा।

1. बर्ड डॉग स्ट्रेचिंग

यह स्कोलियोसिस व्यायाम का एक रूप है, जिसे करने के लिए जिम बॉल की आवश्यकता होती है। यह शुरुआती लोगों के लिए एक बहुत ही फायदेमंद व्यायाम है, क्योंकि इससे चोट लगने डर कम होता है। यह शरीर का सही पोश्चर बनाने में आपकी मदद करता है। इस स्कोलियोसिस एक्सरसाइज के फायदे के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें।

टारगेट

  • हैमस्ट्रिंग्स (टांग के ऊपरी हिस्से में पीछे की ओर नसें)
  • ग्लूटियस (कूल्हों की ओर नसें)
  • कंधा
  • लेट्स (शरीर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियां)
  • पीठ का निचला हिस्सा
  • ट्राइसेप्स
  • क्वाड (जांघों की मांसपेशियां)

शुरुआती चरण

एक जिम बॉल लें और बॉल पर अपने पेट के बल लेट जाएं। अब अपने पैर की अंगुलियों से शरीर को संभालें।

प्रक्रिया

  • अपना बायां पैर और दाहिना हाथ ऊपर उठाएं। तीन सेकंड के लिए इस अवस्था में रहें।
  • अब अपना बायां पैर और दायां हाथ नीचे रखें और दायां पैर व बायां हाथ ऊपर उठाकर तीन सेकंड तक रुकें।
  • इस प्रक्रिया को 10 बार दोहराएं।

अवधि: 7 मिनट

सावधानी : जिम बॉल पर अपने शरीर को अच्छी तरह स्थिर करें, ताकि आप गिरे न और चोटिल होने से बच सकें।

2. पिलेट्स एक्सरसाइज

पिलेट्स स्कोलियोसिस एक्सरसाइज का एक प्रकार है, जो मेरुदंड के सही पोश्चर, लचीलेपन और संतुलन पर काम करता है। इसे आप नीचे लेटकर या दीवार के सहारे खड़े होकर कर सकते हैं। यह व्यायाम रोगी की प्रतिरोध शक्ति को बढ़ाता है। यहां हम बता रहे हैं कि किस प्रकार इसे किया जाता है –

टारगेट

  • हैमस्ट्रिंग्स
  • ग्लूटियस
  • लेट्स
  • पीठ का निचला हिस्सा

शुरुआती चरण

अपनी पीठ का सहारा लेकर सीधे लेट जाएं और अपने घुटनों को मोड़ लें।

प्रक्रिया

  • एक छोटी जिम बॉल लें और इसे अपने घुटनों के बीच रखें।
  • दोनों हाथों को उनकी दिशा में ही नीचे रखें।
  • शरीर के मध्यम भाग को उठाने के लिए धीरे-धीरे कूल्हों पर दबाव दें।
  • तीन सेकंड इस अवस्था में रहें।
  • फिर शरीर को प्रारंभिक अवस्था में लाएं।
  • इस प्रक्रिया को 10 बार करें।

अवधि: 10 मिनट

सावधानी : व्यायाम के लिए नीचे लेटने से पहले पीठ को धनुर आकार में लाकर आगे के चरणों के लिए आगे बढ़ें।

3. ट्राइसेप्स रेज या रो

रो रेज को बोलचाल की भाषा में ट्राइसेप्स रेज के नाम से जाना जाता है। यह एक्सरसाइज मांसपेशियों को अच्छे से काम करने में मदद करती है। इस व्यायाम को करने के लिए फ्री वेट्स सबसे बेहतर हैं, लेकिन आप मशीन का भी उपयोग कर सकते हैं। नीचे जानिए कैसे करें यह व्यायाम।

टारगेट

  • ट्राइसेप्स
  • लेट्स
  • कमर का निचला हिस्सा

शुरुआती चरण

पैरों के बीच में दूरी बनाकर जिम बॉल पर बैठें।

चरण

  • अपने दाहिने हाथ से भार पकड़ें और इसे अपने सिर के ऊपर तक उठाएं।
  • अब बाएं हाथ से अपने दाहिने हाथ को पकड़ें।
  • अपनी दाहिनी कोहनी झुकाएं और कलाई को नीचे ले जाएं।
  • फिर दाहिनी कलाई को नीचे से ऊपर ले जाएं।
  • इस प्रक्रिया को 10 बार दोहराएं।
  • इसके बाद यह प्रक्रिया बाएं हाथ से भी करें।

अवधि: 12 मिनट

सावधानी : कोहनी को मोड़ने के दौरान सांस लें और सीधे करने के दौरान सांस छोड़ें। सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया जारी रखें।

4. हिप रोल एंड ब्रिज

हिप रोल एंड ब्रिज स्कोलियोसिस एक्सरसाइज का ही एक रूप है, जिसे मेरुदंड के लिए काफी कारगर माना गया है। यह व्यायाम कूल्हे पर ज्यादा असर डालता है। इस स्कोलियोसिस एक्सरसाइज के फायदे के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें।

टारगेट

  • हैमस्ट्रिंग्स
  • ग्लूटियस
  • पीठ का निचला हिस्सा
  • पीठ का ऊपरी हिस्सा
  • पीठ का मध्यम भाग
  • क्वाड

शुरुआती चरण

  • कमर के बल नीचे लेट जाएं।
  • गर्दन को सीधा रखें।
  • दोनों हाथों को शरीर से दूर फैलाकर सीधा रखें।
  • अब पैरों को ऊपर उठाएं और घुटनों से मोड़े दें।
  • अब कूल्हे को दाएं और बाएं ले जाएं।
  • इस प्रक्रिया को 20 बार दोहराएं।

अवधि: 7 मिनट

सावधानी : दर्द का अनुभव होने पर व्यायाम रोक दें।

5. प्लैंक

Planck Pinit

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प्लैंक एक्सरसाइज करने के कई तरीके हैं। यह व्यायाम कोर मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है। शुरुआती में प्लैंक एक्सरसाइज काफी सरल है। इसमें पैरों की उंगलियों और कोहनियों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। यहां हम बता रहे हैं कि किस यह व्यायाम किस प्रकार किया जाए।

टारगेट

  • एब्स
  • कंधा
  • पीठा का ऊपरी, निचला और मध्यम हिस्सा
  • क्वाड
  • हैमस्ट्रिंग्स
  • बाइसेप्स
  • पिण्डली

शुरुआती चरण

गर्दन को उठाएं, कोहनी को मोड़ें और पैर की अंगुलियों का सहारा लेकर शरीर को सीधा करें, ध्यान रहे कि कोहनी और पैर की अंगुलियों को छोड़कर पूरा शरीर हवा में रहेगा।

प्रक्रिया

  • अब अपने पेट की मांसपेशियों को थोड़ा सिकोड़ें और पांच सेकंड तक इसी अवस्था में रहें।
  • सपेशियों को आराम दें और सांस अंदर-बाहर करें।
  • इस प्रक्रिया को 10 बार करें।

अवधि: 10 मिनट

सावधानी : इस प्रक्रिया के दौरान अपने घुटनों को न मोड़ें।

6. स्पाइन रिलीज

शारीरिक मुद्रा और रीढ़ वक्रता को सही करने का यह एक उत्कृष्ट व्यायाम है। इस स्कोलियोसिस एक्सरसाइज के फायदे के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें।

टारगेट

  • पीठा का ऊपरी और निचला हिस्सा
  • हैमस्ट्रिंग्स
  • ग्लूटियस

शुरुआती चरण

कमर के बल लेटकर अपने घुटनों को मोड़ लें। आपकी जांघें, पिंडलियों के समकोण होनी चाहिए और हाथ सीधे रहने चाहिए।

चरण

  • अपनी टांगों और कमर को दाईं ओर मोड़ें, जबकि शरीर का ऊपरी हिस्सा, गर्दन व हाथ स्थिर रहने चाहिए।
  • पांच सेकंड तक इसी अवस्था में रहने के बाद वापस प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • विपरित दिशा में भी इस प्रक्रिया को करें।
  • दस बार यह प्रक्रिया दोहराएं।

अवधि: 10 मिनट

सावधानी : शरीर को ज्यादा देर तक मोड़कर न रखें।

7. स्कोलियोसिस योग – कैट पॉज

Scoliosis Yoga - Cat Pose in Hindi Pinit

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रीढ़ की हड्डी को मजबूत और आराम पहुंचाने का कारगर अभ्यास है। यह पीठ दर्द को भी कम करने का काम करता है।

टारगेट

● पीठा का ऊपरी और निचला हिस्सा
● ग्लूटियस

शुरुआती चरण

धड़ और हथेलियों का सहारा लेकर कैट पॉजिशन में आ जाएं।

प्रक्रिया

● सांस लेते हुए छत की तरफ देखें और पीठ के निचले हिस्से (लोअर बैक) को नीचे की ओर दबाएं। खिंचाव आपकी पीठ के निचले हिस्से तक महसूस होना चाहिए।
● अब सांस छोड़ें और कमर को ऊपर की ओर ले जांए। साथ ही सिर को नीचे मोड़कर नाभि की तरफ देखें।
● इस प्रक्रिया को 20 बाद दोहराएं।

अवधि: 8 मिनट

सावधानी : व्यायाम के दौरान आपकी सांस अंदर-बाहर होनी चाहिए।

8. स्कोलियोसिस योग – वृक्षासन

Scoliosis Yoga - Vrikshasan in Hindi Pinit

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वृक्षासन एक लाभकारी योगासन है, जो शरीर का संतुलन बनाएं रखने में काफी मदद करता है। इस स्कोलियोसिस एक्सरसाइज के फायदे के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें।

टारगेट

  • पीठा का ऊपरी और निचला हिस्सा
  • बाइसेप्स
  • ट्राइसेप्स
  • अडक्टर
  • क्वाड

शुरुआती चरण

बिल्कुल सीधे खड़े हो जाएं।

चरण

  • हाथों को ऊपर ले जाकर हथेलियों को जोड़ लें। बाजुएं, कान के साथ सटी होनी चाहिए।
  • दायां पैर उठाकर तलवे को बाईं जांघ के ऊपरी भाग पर रखें।
  • पंजों की दिशा नीचे की ओर होनी चाहिए।
  • एक मिनट तक इसी अवस्था में शरीर का संतुलन बनाए रखें।
  • अब धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं।
  • फिर इसी प्रक्रिया को दूसरे तरफ से भी करें।
  • पांच बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।

अवधि: 15 मिनट

सावधानी : अगर आप पहली बार वृक्षासन कर रहे हैं, तो संतुलन बनाने के लिए किसी अन्य चीज का सहारा ले सकते हैं।

9. स्कोलियोसिस ब्रीथिंग एक्सरसाइज

रक्त संचार को सुचारू रूप से चलाने में ब्रीथिंग एक्सरसाइज काफी मदद करती है।

टारगेट

  • पीठ का ऊपरी हिस्सा
  • पीठ का निचला हिस्सा

शुरुआती चरण

पीठ के बल मैट पर लेट जाएं और अपने कंधों को आराम दें।

प्रक्रिया

  • अपनी अंगुलियों को छाती पर रखें और सांस अंदर-बाहर करें। यह क्रिया 10 बार दोहराएं।
  • अब अपने घुटनों को मोड़ें और अपने पैरों को उठाएं।
  • अपने पैरों को ऊपर-नीचे करें। ध्यान रहे जांधों को न हिलाएं, पैर का बाकी का हिस्सा हिलना चाहिए। यह प्रक्रिया भी 10 बार दोहराएं।
  • इसके बाद दाईं या बाईं तरफ करवट लेकर लेट जाएं और कमर के नीचे तकिए रख लें।
  • अब सांस अंदर-बाहर करें। यह प्रक्रिया भी 10 बार करें।
  • पीठ के बल लेट जाएं, घुटनों को मोड़ें और पैर जमीन से सटे होने चाहिए।
  • अब सांस अंदर-बाहर सांस करें। यह प्रक्रिया भी 10 बार करें।

अवधि: 20 मिनट

सावधानी : बिना हड़बड़ी के इस एक्सरसाइज को आराम से करें।

10. श्रोथ विधि

श्रोथ विधि जर्मनी की देन है, जो शरीर के लिए कई मायनों में खास है।

टारगेट

  • पीठ का ऊपरी हिस्सा
  • पीठ का निचला हिस्सा

शुरुआती चरण

कमर के बल सीधे जमीन पर लेट जाएं।

चरण

  • अपना बायां पैर उठाएं तीन सेकंड ऐसे ही रहें और वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस प्रक्रिया को 10 बार करें।
  • अब किसी रॉड के नीचे खड़े हो जाएं और हाथों से उसे पकड़ लें। ध्यान रहे कि रॉड की ऊंचाई इतनी हो कि आप उसे आसानी से पकड़ सकें और पैर जमीन से सटे रहें।
  • अब शरीर को नीचे की तरफ खींचते हुए शरीर में खिंचाव महसूस करें और 10 तक गिने।
  • अब बार की ऊंचाई इतनी हो कि आप बैठने की अवस्था में आ सकें और इसी अवस्था में रहते हुए 10 तक गिने।
  • इस प्रक्रिया को तीन बार दोहराएं।

अवधि: 25 मिनट

सावधानी : इस एक्सरसाइज को करने के लिए ट्रेनर की मदद लें।

ये थे 10 कारगर स्कोलियोसिस व्यायाम, जो आपके बॉडी पोश्चर को ठीक करने में मदद करेंगे। हम कुछ खेलों के बारे में भी बता रहे हैं, जो स्कोलियोसिस की समस्या को हल करने में मदद कर सकते हैं।

स्कोलियोसिस के लिए स्पोर्ट्स :

  • फुटबॉल
  • तैराकी
  • स्कीइंग
  • साइकलिंग
  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग

स्कॉलिस्मार्ट के प्रारंभिक चरण – ScoliSMART Early Stage Intervention

स्कॉलिस्मार्ट (ScoliSMART) का प्रारंभिक चरण पांच दिवसीय उपचार है, जो जटील न्यूरोमस्क्यूलर रीट्रेनिंग को शुरू करने में मदद करता है। इस प्रक्रिया में घरेलू उपचार भी शामिल हैं। साथ ही शारीरिक विकास का भी आंकलन किया जाता है। इस उपचार में निम्नलिखित प्रक्रियाएं भी शामिल हैं।

  • जेनेटिक रिक्स असेसमेंट – स्कोलियोसिस की संभावना को खोजने के लिए लार के नमूनों को लिया जाता है।
  • न्यूरोट्रांसमीटर परीक्षण – हार्मोन असंतुलन का पता किया जाता है, जो मस्तिष्क की मांसपेशियों के बीच गलत संपर्क का कारण बनते हैं।
  • होम मसल्स ट्रेनिंग प्रोग्राम : इन्वॉलन्टरी एक्सरसाइज कार्यक्रम।
  • पोषण परीक्षण व मदद – हार्मोनल असंतुलन को सही करने के लिए सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं।

सावधानी : किसी भी स्कोलियोसिस व्यायाम को करने से पहले पूरी तरह से अपनी जांच करवा लें और किसी ट्रेनर के मार्गदर्शन में ही इन्हें करें। जैसे-जैसे आप इन व्यायामों को करते जाएंगे, उसी तरह आपको लाभ मिलता जाएगा। अब इंतजार न करें और आज ही डॉक्टर से परामर्श लेकर इन व्यायामों का अभ्यास शुरू कर दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल : क्या ठंडा मौसम स्कोलियोसिस दर्द को प्रभावित करता है?
जवाब : हां, ठंडा मौसम स्कोलियोसिस के दर्द को बढ़ा सकता है। इसलिए, गर्म कपड़े पहनें और गर्म जगह पर रहने की कोशिश करें।

सवाल : इन्फंटाइल स्कोलियोसिस क्या है?
जवाब : यदि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे स्कोलियोसिस से प्रभावित होते हैं, तो इसे इन्फंटाइल स्कोलियोसिस कहा जाता है।

सवाल : स्कोलियोसिस के लिए पैदल चलना ठीक है ?
जवाब : हां, लेकिन स्कॉलिसमार्ट एक्टिविटी सूट पहन कर चलें।

सवाल : क्या तैराकी स्कोलियोसिस की लिए ठीक है ?
जवाब : हां, स्कॉलिओटिक के लिए तैराकी अच्छा अभ्यास है।

सवाल : स्कोलियोसिस की अवस्था में मुझे कैसे सोना चाहिए?
जवाब : इस विषय पर अपने डॉक्टर से सलाह करें कि आपके लिए कौन सा स्लीपिंग पोश्चर ठीक रहेगा।

स्कोलियोसिस एक गंभीर समस्या है और अगर आप बिना सर्जरी के इससे निजात पाना चाहते हैं तो लेख में बताए गए व्यायाम डॉक्टर की सलाह पर शुरु कर सकते हैं। अच्छा होगा आप ये सभी एक्सरसाइज किसी प्रशिक्षित की देखरेख में करें। यह लेख आपको कैसा लगा हमें कमेंट बॉक्स में बताना न भूलें।

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Nripendra Balmiki

नृपेंद्र बाल्मीकि एक युवा लेखक और पत्रकार हैं, जिन्होंने उत्तराखंड से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर (एमए) की डिग्री प्राप्त की है। नृपेंद्र विभिन्न विषयों पर लिखना पसंद करते हैं, खासकर स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर इनकी पकड़ अच्छी है। नृपेंद्र एक कवि भी हैं और कई बड़े मंचों पर कविता पाठ कर चुके हैं। कविताओं के लिए इन्हें हैदराबाद के एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।

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