टॉप 10 स्कोलियोसिस व्यायाम और उनके लाभ – Scoliosis Exercises And Their Benefits in Hindi

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शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और व्यायाम बेहतर विकल्प माने गए हैं। यही वजह है कि कई शारीरिक समस्याओं में इन्हें उपयोग किया जाता है। इन शारीरिक समस्याओं में स्कोलियोसिस का नाम भी शामिल है। दरअसल, स्कोलियोसिस (मेरुवक्रता) एक ऐसा विकार है, जिसमें रीढ़ की हड्डी सीधी न होकर अन्य दिशा में मुड़ जाती है। ऐसे में स्कोलियोसिस से पीड़ित व्यक्ति का मेरुदण्ड अंग्रेजी के अक्षर ‘एस’ और ‘सी’ की तरह दिखाई देने लगता है (1)। यह एक तकलीफदेह स्थिति है, जिसे ‘रीढ़ वक्रता’ या ‘पार्श्वकुब्जता’ के नाम से भी जाना जाता है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम स्कोलियोसिस उपचार में सहायक व्यायाम की जानकारी देने जा रहे हैं, ताकि इन्हें अपना कर स्कोलियोसिस ग्रस्त व्यक्ति को इस समस्या से राहत मिल सकें।

अंत तक पढ़ें

चलिए, सबसे पहले जानते हैं कि स्कोलियोसिस व्यायाम क्यों जरूरी होता है।

स्कोलियोसिस व्यायाम आपके लिए क्यों जरूरी है? Why Scoliosis Exercises Are Good For You in hindi

जिन लोगों को स्कोलियोसिस की समस्या है, वो इस समस्या से राहत पाने के लिए व्यायाम का सहारा ले सकते हैं। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, व्यायाम शारीरिक मुद्रा (पोश्चर) को सीधा करने का एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। स्कोलियोसिस से राहत पाने के लिए व्यायाम को ब्रेसिंग और सर्जरी के साथ या अकेले ही अभ्यास में लाया जा सकता है। वहीं, रिसर्च में इस बात का भी जिक्र मिलता है कि व्यायाम को स्कोलियोसिस का स्थाई इलाज नहीं कहा जा सकता है। साथ ही न इसे ब्रेसिंग और सर्जरी का विकल्प माना जा सकता है। ये बस समस्या में राहत पहुंचा सकते हैं (2)

ऐसे में इस लेख में बताए जा रहे स्कोलियोसिस में राहत पहुंचाने वाले व्यायामों को अभ्यास में लाना लाभकारी हो सकता है, लेकिन इन्हें करने से पहले एक बार ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।

नीचे है मुख्य जानकारी

इस लेख के अगले भाग में हम स्कोलियोसिस व्यायाम के प्रकार बताएंगे।

स्कोलियोसिस व्यायाम के प्रकार – Types Of Scoliosis Exercises in Hindi

स्कोलियोसिस के लिए कई अलग-अलग प्रकार के व्यायाम किए जा सकते हैं, जिससे कि इससे जुड़ी समस्या को ठीक किया जा सके। इन व्यायाम को हम स्कोलियोसिस व्यायाम के प्रकार भी कह सकते हैं, जो इस तरह से हैं (3):

  • मांसपेशियों और मस्तिष्क को प्रशिक्षित करने के लिए इन्वॉलन्टरी एक्सरसाइज
  • एंटी-स्कोलियोसिस पोश्चर
  • वक्रता संतुलन के लिए मिरर इमेज एक्सरसाइज
  • श्वास यांत्रिकी और कार्य (Breathing mechanics and functions)

पढ़ते रहें यह आर्टिकल

आइए, अब जानते हैं कि स्कोलियोसिस व्यायाम के लाभ किस तरह के हो सकते हैं।

स्कोलियोसिस व्यायाम के लाभ – Benefits Of Scoliosis Exercises in Hindi

स्कोलियोसिस की स्थिति में व्यायाम करने पर कई लाभ हो सकते हैं, जो इस समस्या से राहत दिलाने का काम कर सकते हैं। स्कोलियोसिस व्यायाम के लाभ कुछ इस तरह के हो सकते हैं (4):

  • इस व्यायाम से रीढ़ की वक्रता यानी कर्व को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • इससे दर्द को कम किया जा सकता है।
  • स्कोलियोसिस को बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है।
  • सांस लेने की तकलीफ में सुधार कर सकता है।
  • सर्जरी और ब्रेसिंग की आवश्यकता को कम कर सकता है।

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इस लेख के अगले भाग में हम स्कोलियोसिस व्यायाम के लिए जरूरी उपकरणों के बारे में बताएंगे।

स्कोलियोसिस व्यायाम के लिए जरूरी उपकरण

स्कोलियोसिस व्यायाम को करने के लिए सही उपकरणों का पता होना भी जरूरी होता है, ताकि इन उपकरणों के मदद से व्यायाम को अच्छे से किया जा सके। स्कोलियोसिस व्यायाम के लिए जरूरी उपकरण में निम्न चीजें शामिल हैं:

  • फोम रोलर फोम रोलर्स न केवल दर्द से छुटकारा दिला सकता है, बल्कि शारीरिक क्षमता को भी बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। यह कोर एक्सरसाइज के दौरान अहम भूमिका निभाता है।
  • स्टेबिलिटी बॉल स्टेबिलिटी बॉल कमर को सहारा और स्थिरता प्रदान कर सकती है। इसके साथ ही यह गेंद पेट की मांसपेशियों को भी मजबूत कर सकती है।
  • ट्रेनिंग वेज यह सॉफ्ट वेज मैट होते हैं, जो रीढ़ की हड्डी में ज्यादा वक्रता होने पर अतिरिक्त सहारा प्रदान करते हैं।
  • बोसु (BOSU) बैलेंस ट्रेनर यह गुंबद के आकार का बैलेंस ट्रेनर पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
  • स्कॉलिस्मार्ट एक्टिविटी सूट यह उपयोगी और प्रभावी सूट है, जिसे दैनिक काम के दौरान पहन सकते हैं। यह उचित शारीरिक पोश्चर को बनाए रखने और मेरुदण्ड की वक्रता को कम करने में मदद कर सकता है।

आगे है और जानकारी

चलिए, अब स्कोलियोसिस पोश्चर में सुधार व दर्द कम करने वाले व्यायाम के बारे में जानते हैं।

स्कोलियोसिस पोश्चर में सुधार और दर्द को कम करने के लिए व्यायाम -10 Best Scoliosis Exercises To Improve Posture And Reduce Pain in Hindi

व्यायाम के मदद से स्कोलियोसिस की स्थिति में सुधार किया जा सकता है। साथ ही इससे होने वाले दर्द को भी कम किया जा सकता है। इसके लिए हम नीचे 10 व्यायाम और उससे जुड़ी सावधानियों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं:

1. पिलेट्स

Pilates

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स्कोलियोसिस की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति के लिए पिलेट्स व्यायाम करना लाभकारी साबित हो सकता है। इस व्यायाम की मदद से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाने में मदद मिलती है, जिससे हड्डियों की वक्रता यानी कर्व को कम किया जा सकता है। इसके अलावा, यह व्यायाम दर्द में कमी और पोश्चर में सुधार करने में मदद कर सकता है (5)

इसे करने का तरीका:

  • सहारा लेते हुए सीधे लेट जाएं और अपने घुटनों को मोड़ लें।
  • एक छोटी जिम बॉल लें और इसे अपने घुटनों के बीच रखें।
  • दोनों हाथों को शरीर से थोड़ा दूर सीधा जमीन से सटाकर रखें।
  • अब सांस लेते हुए शरीर के मध्यम भाग को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
  • तीन सेकंड इस अवस्था में रहें।
  • फिर सांस छोड़ते हुए शरीर को प्रारंभिक अवस्था में लाएं।
  • इस प्रक्रिया को 10 बार दोहरा सकते हैं।
  • यह व्यायाम 10 मिनट तक किया जा सकता है।

सावधानी : व्यायाम के लिए नीचे लेटने से पहले पीठ को धनुर आकार में लाकर आगे के चरणों के लिए आगे बढ़ें।

2. कैट पोज

Cat pose

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कैट पोज स्कोलियोसिस की स्थिति में रीढ़ की हड्डी को मजबूत और आराम पहुंचाने का कारगर तरीका हो सकता है। इस व्यायाम के मदद से रीढ़ की हड्डियों से जुड़ी समस्या को ठीक किया जा सकता है। साथ ही रीढ़ की हड्डी में स्कोलियोसिस के कारण होने वाले दर्द को भी कम करने में यह आसन सहायक की भूमिका अदा कर सकता है। यही वजह है कि स्कोलियोसिस एक्सरसाइज में कैट पोज को शामिल किया गया है (6)

इसे करने का तरीका:

  • धड़ और हथेलियों का सहारा लेकर कैट पॉजिशन में आ जाएं।
  • सांस लेते हुए छत की तरफ देखें और पीठ के निचले हिस्से (लोअर बैक) को नीचे की ओर दबाएं। खिंचाव पीठ के निचले हिस्से तक महसूस होना चाहिए।
  • अब सांस छोड़ें और कमर को ऊपर की ओर ले जांए। साथ ही सिर को नीचे मोड़कर नाभि की तरफ देखें। कोशिश करें कि ठोड्डी छाती से लगे।
  • इस प्रक्रिया को लगभग 8 मिनट तक कर सकते हैं।

सावधानी : व्यायाम के दौरान सांस अंदर-बाहर होनी चाहिए।

3. श्वसन व्यायाम (ब्रीथिंग एक्सरसाइज)

Respiratory Exercise -Breathing Exercise

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ब्रीथिंग एक्सरसाइज यानी श्वसन व्यायाम के मदद से भी स्कोलियोसिस को ठीक कर सकते हैं। इस संबंध में प्रकाशित एक मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, ब्रीथिंग एक्सरसाइज से रीढ़ की हड्डी को एक सीध में बनाए रखने में मदद मिल सकती है। ऐसे में रीढ़ की हड्डी के कर्व को ठीक करने में भी ब्रीथिंग एक्सरसाइज मदद कर सकती है (7)

इसे करने का तरीका:

  • सबसे पहले पीठ के बल मैट पर लेट जाएं और अपने कंधों को आराम दें।
  • फिर उंगलियों को छाती पर रखें और सांस अंदर-बाहर करें। यह क्रिया 10 बार दोहराएं।
  • अब घुटनों को मोड़ें और पैरों को उठाएं।
  • इसके बाद पैरों को ऊपर-नीचे करें। ध्यान रहे जांधों को न हिलाएं, पैर का बाकी का हिस्सा हिलना चाहिए। यह प्रक्रिया भी 10 बार दोहराएं।
  • इसके बाद दाईं या बाईं तरफ करवट लेकर लेट जाएं और कमर के नीचे तकिया रख लें।
  • अब सांस अंदर-बाहर करें। यह प्रक्रिया भी 10 बार करें।
  • फिर पीठ के बल लेट जाएं, घुटनों को मोड़ें और तलवे जमीन से सटे होने चाहिए।
  • अब सांस अंदर-बाहर सांस करें। यह प्रक्रिया भी 10 बार करें।
  • इस व्यायाम को लगभग 20 मिनट तक कर सकते हैं।

सावधानी : बिना हड़बड़ी के इस एक्सरसाइज को आराम से करें।

4. श्रोथ मेथड (Schroth Method)

एनसीबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, स्कोलियोसिस की समस्या को ठीक करने के लिए कुछ हफ्तों तक श्रोथ मेथड एक्सरसाइज की गई। इस एक्सरसाइज से स्कोलियोसिस की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति के हड्डी के कर्व में सुधार हुआ। साथ ही इससे होने वाले दर्द में भी कमी देखी गई (5)। ऐसे में कहा जा सकता है कि स्कोलियोसिस व्यायाम के लाभ में श्रोथ मेथड को भी शामिल किया जा सकता है।

इसे करने का तरीका:

  • सबसे पहले कमर के बल सीधे जमीन पर लेट जाएं।
  • फिर बायां पैर उठाकर उसे तीन सेकंड ऐसे ही रखें और वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस प्रक्रिया को 10 बार करें।
  • अब किसी रॉड के नीचे खड़े हो जाएं और हाथों से उसे पकड़ लें। ध्यान रहे कि रॉड की ऊंचाई इतनी हो कि उसे आसानी से पकड़ सकें और पैर जमीन से सटे रहें।
  • अब शरीर को नीचे की तरफ खींचते हुए शरीर में खिंचाव महसूस करें और 10 तक गिने।
  • अब रॉड की ऊंचाई इतनी हो कि आप बैठने की अवस्था में आ सकें और इसी अवस्था में रहते हुए 10 तक गिने।
  • इस प्रक्रिया को तीन बार दोहराएं।
  • इस व्यायाम को 15 से 20 मिनट तक कर सकते हैं।

सावधानी : इस एक्सरसाइज को करने के लिए ट्रेनर की मदद लें।

5. बर्ड डॉग स्ट्रेचिंग

Bird dog stretching

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यह स्कोलियोसिस व्यायाम का एक रूप है, जिसे करने के लिए जिम बॉल की आवश्यकता होती है। यह शुरुआती लोगों के लिए फायदेमंद व्यायाम है, क्योंकि इससे चोट लगने का डर कम होता है। यह शरीर का सही पोश्चर बनाने में मदद कर सकता है, जिससे रीढ़ की हड्डी में स्कोलियोसिस की समस्या कम हो सकती है (8)

इसे करने का तरीका:

  • एक जिम बॉल लें और बॉल पर पेट के बल लेट जाएं। अब पैर की उंगलियों से शरीर को संभालें।
  • अपना बायां पैर और दाहिना हाथ ऊपर उठाएं। तीन सेकंड के लिए इस अवस्था में रहें।
  • अब अपना बायां पैर और दायां हाथ नीचे रखें और दायां पैर व बायां हाथ ऊपर उठाएं।
  • इस व्यायाम को लगभग 7 मिनट तक कर सकते हैं।

सावधानी : जिम बॉल पर अपने शरीर को अच्छी तरह स्थिर करें, ताकि गिरने और चोटिल होने से बच सकें।

6. ट्राइसेप्स राइज या रो राइज

Triceps rise or row rise

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ट्राइसेप्स राइज या रो रेज को बोलचाल की भाषा में ट्राइसेप्स रेज के नाम से जाना जाता है। यह एक्सरसाइज मांसपेशियों को अच्छे से काम करने में मदद कर सकती है। इस व्यायाम को करने के लिए फ्री वेट्स सबसे बेहतर हैं, लेकिन इसके लिए मशीन का भी उपयोग कर सकते हैं। यह व्यायाम स्कोलियोसिस में सुधार करने के लिए भी जाना जाता है। हालांकि, स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध न होने के कारण यह स्कोलियोसिस में कितना प्रभावी है, यह कह पाना मुश्किल है।

इसे करने का तरीका:

  • सबसे पहले पैरों के बीच में दूरी बनाकर जिम बॉल पर बैठें।
  • फिर दाहिने हाथ से भार पकड़ें और इसे अपने सिर के ऊपर तक उठाएं।
  • अब बाएं हाथ को सिर के पीछे से ले जाते हुए दाहिने हाथ को पकड़ें।
  • इसके बाद दाहिनी हाथ को मोड़ते हुए पीठ की तरफ नीचे ले जाएं।
  • फिर दाहिनी नीचे से ऊपर ले जाएं।
  • इस प्रक्रिया को 10 बार दोहराएं।
  • इसके बाद यह प्रक्रिया बाएं हाथ से भी करें।
  • इसे 10 से 15 मिनट तक कर सकते हैं।

सावधानी : कोहनी को मोड़ने के दौरान सांस लें और सीधे करने के दौरान सांस छोड़ें। सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया जारी रखें।

7. हिप रोल और ब्रिज

Hip roll and bridge

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हिप रोल एंड ब्रिज एक्सरसाइज को भी स्कोलियोसिस से राहत पाने के लिए किया जा सकता है। इस संबंध में प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध में दिया गया है हिप जॉइंट और हिप मसल्स से रिलेटेड व्यायाम को स्कोलियोसिस के लिए लाभदायक बताया है (9)। वहीं, हिप रोल एंड ब्रिज व्यायाम का असर हिप जॉइंट और हिप मसल्स के साथ पूरी पीठ पर पड़ता है, जिससे रीढ़ की हड्डी में स्कोलियोसिस के कारण बने कर्व को कुछ हद तक ठीक करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, स्कोलियोसिस के लिए हिप रोल एंड ब्रिज एक्सरसाइज से जुड़ा कोई स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

इसे करने का तरीका:

  • सबसे पहले पीठ के बल नीचे लेट जाएं और गर्दन को सीधा रखें।
  • फिर दोनों हाथों को शरीर से दूर फैलाकर सीधा रखें।
  • अब पैरों को ऊपर उठाएं और घुटनों से मोड़े दें।
  • अब कूल्हे को दाएं और बाएं ले जाएं।
  • इस प्रक्रिया को 20 बार दोहराएं।
  • इस प्रक्रिया को लगभग 10 मिनट तक कर सकते हैं।

सावधानी : दर्द का अनुभव होने पर व्यायाम रोक दें।

8. प्लैंक

Planck

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प्लैंक एक्सरसाइज और साइड प्लैंक एक्सरसाइज करने से भी स्कोलियोसिस में फायदा हो सकता है। एक वैज्ञानिक अध्ययन में दिया हुआ है कि 6 से 8 महीने तक साइड प्लैंक एक्सरसाइज को करने पर रीढ़ की हड्डी से बने कर्व ठीक करने में मदद मिल सकती है (10)

इसे करने का तरीका:

  • सबसे पहले पेट के बल ले जाएं और कोहनियां को मोड़कर हाथ आगे की तरफ करें और शरीर का पूरा भार हाथों व पैरों की उंगलियों पर ले जाएं, जैसा ऊपर फोटो में है।
  • इस अवस्था में कोहनी और पैर की उंगलियों को छोड़कर पूरा शरीर हवा में रहेगा।
  • अब अपने पेट की मांसपेशियों को थोड़ा सिकोड़ें और 5 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें।
  • फिर मांसपेशियों को आराम दें और सांस अंदर-बाहर करें।
  • इस प्रक्रिया को 10 बार करें।
  • इस व्यायाम को 10 मिनट तक कर सकते हैं।

सावधानी : इस प्रक्रिया के दौरान अपने घुटनों को न मोड़ें।

9. लाइंग स्पाइनल ट्विस्ट आसन

Lying spinal twist posture

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शारीरिक मुद्रा और रीढ़ वक्रता को सही करने का यह एक उत्कृष्ट व्यायाम है। एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक, स्पाइनल एक्सरसाइज यानी रीढ़ की हड्डी का व्यायाम को स्कोलियोसिस की कमी के लिए प्रभावी माना गया है। इस एक्सरसाइज को नियमित रूप से करने पर रीढ़ की हड्डियों में लचीलापन आ सकता है, जिससे स्कोलियोसिस के कर्व को कम करने में मदद मिल सकती है (11)

इसे करने का तरीका:

  • कमर के बल लेटकर अपने घुटनों को मोड़ लें। इस दौरान जांघें, पिंडलियों के समकोण होनी चाहिए और हाथ सीधे रहने चाहिए।
  • फिर टांगों और कमर को दाईं ओर मोड़ें, जबकि शरीर का ऊपरी हिस्सा, गर्दन व हाथ स्थिर रहने चाहिए।
  • पांच सेकंड तक इसी अवस्था में रहने के बाद वापस प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • विपरित दिशा में भी इस प्रक्रिया को करें।
  • 10 बार यह प्रक्रिया दोहराएं।

सावधानी : शरीर को ज्यादा देर तक मोड़कर न रखें।

10. ट्री पोज

Tree pose

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वृक्षासन एक लाभकारी योगासन है, जो शरीर का संतुलन बनाएं रखने में काफी मदद करता है। इस आसन से शरीर की मांसपेशियों (खासकर रीढ़ को सहारा देने वाली) में सुधार हो सकता है, जो शरीर को सही पोश्चर में लाने में मदद कर सकता (12) । इसका सकारात्मक असर स्कोलियोसिस को ठीक करने के लिए दिखाई दे सकता है। फिलहाल, ट्री पोज और स्कोलियोसिस को लेकर किसी तरह का वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है।

इसे करने का तरीका:

  • सबसे पहले बिल्कुल सीधे खड़े हो जाएं।
  • हाथों को ऊपर ले जाकर हथेलियों को जोड़ लें। बाजुएं, कान के साथ सटी होनी चाहिए।
  • दायां पैर को उठाकर तलवे को बाईं जांघ के ऊपरी भाग पर रखें।
  • पंजों की दिशा नीचे की ओर होनी चाहिए।
  • एक मिनट तक इसी अवस्था में शरीर का संतुलन बनाए रखें।
  • अब धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं।
  • फिर इसी प्रक्रिया को दूसरे तरफ से भी करें।
  • पांच बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।
  • लगभग 15 मिनट तक इस व्यायाम को कर सकते हैं।

सावधानी : अगर कोई पहली बार वृक्षासन कर रहे हैं, तो संतुलन बनाने के लिए किसी अन्य चीज का सहारा ले सकते हैं।

नोट: अगर किसी ने स्कोलियोसिस के लिए सर्जरी करवाई है, तो यहां बताए गए व्यायाम करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

नीचे भी पढ़ें

चलिए, अब जान लेते हैं कि स्कोलियोसिस में कौन से एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए।

स्कोलियोसिस में न करने वाली एक्सरसाइज- Scoliosis Exercises To Avoid – Exercises NOT To Do If You Have Scoliosis

जिन लोगों को स्कोलियोसिस की समस्या है, उन्हें ऐसी एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए, जिनके कारण रीढ़ की हड्डी या उससे जुड़ी मांसपेशियों पर अधिक जोर आए। ऐसे में नीचे दी एक्सरसाइज को न करने की सलाह दी जाती है (13):

  • जिन लोगों को स्कोलियोसिस की समस्या है, वो भारी वजन उठाने वाले व्यायाम करने से बचें।
  • ऐसे व्यायाम न करें, जिसमें आगे की ओर अधिक झुकना पड़े।
  • जिन व्यायाम में पीठ के निचले हिस्से को अधिक घुमाकर कर्व बनाने की आवश्यकता होती है, उन व्यायाम से बचें।
  • अधिक ऊंचा कूदने वाले एक्सरसाइज न करें।
  • पेट के बल सोने से बचें।
  • ऑफ-रोड साइक्लिंग न करें।
  • बटरफ्लाई स्विमिंग करने से बचें ।

पढ़ना जारी रखें

इस लेख के अगले हिस्से में स्कॉलिस्मार्ट के प्रारंभिक चरण के बारे में जानकारी देंगे।

स्कॉलिस्मार्ट के प्रारंभिक चरण – ScoliSMART Early Stage Intervention

स्कॉलिस्मार्ट (ScoliSMART) का प्रारंभिक चरण पांच दिवसीय उपचार है, जो जटिल न्यूरोमस्क्यूलर रीट्रेनिंग को शुरू करने में मदद कर सकता है। इस प्रक्रिया में घरेलू उपचार भी शामिल हैं। साथ ही शारीरिक विकास का भी आंकलन किया जाता है। इस उपचार में निम्नलिखित प्रक्रियाएं शामिल हैं।

  • जेनेटिक रिक्स असेसमेंट स्कोलियोसिस की संभावना को खोजने के लिए लार के नमूनों को लिया जाता है।
  • न्यूरोट्रांसमीटर परीक्षणहॉर्मोन असंतुलन का पता किया जाता है, जो मस्तिष्क की मांसपेशियों के बीच गलत संपर्क का कारण बनते हैं।
  • होम मसल्स ट्रेनिंग प्रोग्राम इन्वॉलन्टरी एक्सरसाइज कार्यक्रम।
  • पोषण परीक्षण मदद हॉर्मोनल असंतुलन को सही करने के लिए सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं।

सावधानी : किसी भी स्कोलियोसिस व्यायाम को करने से पहले पूरी तरह से अपनी जांच करवा लें और किसी ट्रेनर के मार्गदर्शन में ही इन्हें करें। जैसे-जैसे इन व्यायामों को करते जाएंगे, उसी तरह लाभ मिलता जाएगा।

स्कोलियोसिस एक गंभीर समस्या है और अगर कोई बिना सर्जरी के इससे निजात पाना चाहता है, तो लेख में बताए गए व्यायाम को डॉक्टर की सलाह पर शुरू कर सकते हैं। अच्छा होगा ये सभी एक्सरसाइज किसी प्रशिक्षित की देखरेख में करें। इससे व्यायाम को गलत तरीके से करने पर होने वाले नुकसान से बचने में मदद मिल सकती है। हम उम्मीद करते हैं कि हमारे इस लेख में दी सभी जानकारी रीडर के लिए उपयोगी साबित होंगी।

13 संदर्भ (Sources):

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Bhupendra Verma

भूपेंद्र वर्मा ने सेंट थॉमस कॉलेज से बीजेएमसी और एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी से एमजेएमसी किया है। भूपेंद्र को लेखक के तौर पर फ्रीलांसिंग में काम करते 2 साल हो गए हैं। इनकी लिखी हुई कविताएं, गाने और रैप हर किसी को पसंद आते हैं। यह अपने लेखन और रैप करने के अनोखे स्टाइल की वजह से जाने जाते हैं। इन्होंने कुछ डॉक्यूमेंट्री फिल्म की स्टोरी और डायलॉग्स भी लिखे हैं। इन्हें संगीत सुनना, फिल्में देखना और घूमना पसंद है।

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