शल्लकी के फायदे और नुकसान – Boswellia Serrata (Shallaki) Benefits and Side Effects in Hindi

Medically Reviewed By Neha Srivastava (Nutritionist), Nutritionist
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शल्लकी का नाम भले ही आप पहली बार सुन रहे हों, लेकिन लोबान के नाम से अच्छी तरह परिचित होंगे। दरअसल, शल्लकी को भारत में लोबान के नाम से ही जाना जाता है। यह एक प्रकार का गोंद है, जिसे बोसवेलिया (Boswellia) पेड़ की राल से तैयार किया जाता है। इस पेड़ की कई प्रजातियां हैं, जिसमें बोसवेलिया सेराटा (Boswellia Serrata) भी शामिल है। खास सुगंध के कारण धूप और अगरबत्ती बनाने में शल्लकी का उपयोग आम है। वहीं, शल्‍लकी के औषधीय गुण के कारण कई समस्याओं में राहत पाने के लिए भी इसे प्रयोग किया जाता है। यही कारण है कि स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम आपको शल्लकी के फायदे और उपयोग से जुड़ी जानकारी देने जा रहे हैं। ऐसे में ध्यान रखना होगा कि शल्लकी कुछ समस्याओं में राहत तो पहुंचा सकती है, लेकिन इसे उस समस्या का उपचार नहीं माना जा सकता।

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तो आइए सबसे पहले हम शल्लकी के फायदे जान लेते हैं, बाद में हम इससे जुड़ी अन्य बातों पर भी बात करेंगे।

शल्लकी के फायदे – Benefits of Boswellia Serrata (Shallaki) in Hindi

1. रूमेटाइड अर्थराइटिस

रूमेटाइड अर्थराइटिस, अर्थराइटिस (जोड़ों में दर्द की समस्या) का ही एक प्रकार है। इसमें मुख्य रूप से रोगी के हाथों और पैरों की उंगली व कलाईयों में सूजन व दर्द की शिकायत देखी जाती हैं। ऐसे में शल्लकी का उपयोग कर इस समस्या में काफी हद तक राहत पाई जा सकती है। एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध से इस बात की पुष्टि होती है। शोध में माना गया कि शल्लकी में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। यह दोनों गुण संयुक्त रूप से एंटीआर्थराइटिक (अर्थराइटिस में आराम दिलाने वाला) प्रभाव प्रदर्शित करते हैं। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि रूमेटाइड अर्थराइटिस की समस्या में इसका सेवन कर शल्लकी के लाभ पाए जा सकते हैं (1)। शल्लकी का इस्तेमाल आयुर्वेद में दर्द और सूजन को कम करने में किया जाता है। ऐसे में बेहतर है औषधि के रूप में सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

2. कैंसर

कैंसर के जोखिम को कम करने में भी शल्लकी का उपयोग कुछ हद तक लाभदायक सिद्ध हो सकता है। इस संबंध में किए गए शोध के माध्यम से खुद नेशनल सेंटर ऑफ कैंसर इंस्टीट्यूट ने इस बात को माना है। विशेषज्ञों का कहना है कि शल्लकी शरीर में इन्फ्लेमेशन को कम करके स्तन और आंतों के ट्यूमर को कम करने में मदद कर सकती है, जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकता है (2)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि इस बीमारी से बचाव में शल्लकी के लाभ पाए जा सकते हैं। हालांकि, आपको ध्यान रखना होगा कि कोई भी घरेलू उपाय कैंसर का इलाज नहीं है। कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टरी इलाज अतिआवश्यक है।

3. इंफ्लेमेटरी बोवेल डिजीज

पेट में सूजन (Inflammation) के कारण पैदा होने वाली समस्याओं को इंफ्लेमेटरी बोवेल डिजीज के नाम से जाना जाता है। इनमें क्रोंस डिजीज (Crohn’s disease) और अल्सर कोलाइटिस (Ulcerative Colitis) जैसी आंतों में सूजन की समस्या भी शामिल हैं। एनल्स ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी द्वारा इस संबंध में किए गए एक शोध में जिक्र मिलता है कि शल्लकी का उपयोग इन दोनों ही समस्याओं में सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है। साथ ही यह भी माना गया कि शल्लकी में मौजूद बोसवेलिक एसिड शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर सूजन संबंधी इन समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है (3)। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि शल्लकी के लाभ इंफ्लेमेटरी बोवेल डिजीज से राहत दिलाने में भी मददगार साबित हो सकती है।

4. अस्थमा

अस्थमा की समस्या में भी शल्लकी के लाभ पाए जा सकते हैं। दरअसल, यह बात जर्मनी के तुबिंजन विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक शोध से पुष्ट होती है। यह शोध 18 से 75 साल के उम्र के बीच 23 पुरुषों और 17 महिलाओं पर किया गया, जो लंबे समय से ब्रोंकियल अस्थमा से पीड़ित थे। इन पीड़ितों को छह हफ्ते तक 300 एमजी शल्लकी गोंद को दिन में तीन बार दिया गया। फलस्वरूप, करीब 70 प्रतिशत रोगियों में फेफड़ों की कार्य क्षमता में सुधार और सांस लेने में राहत के साथ अस्थमा अटैक की संख्या में भी कमी आई (3)। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि अस्थमा की समस्या में शल्लकी का उपयोग कुछ हद तक राहत दिलाने में मदद कर सकता है।

5. पार्किन्संस डिजीज

पार्किन्संस डिजीज एक ऐसी समस्या है, जिसमें मोटर फंक्शन (शारीरिक अंगों को चलाने की क्रिया) को नियंत्रित करने का संदेश मस्तिष्क तक पहुंचने में बाधा आती है। कारण यह है कि इस समस्या में मोटर फंक्शन के संदेशों का आदान-प्रदान करने वाले निग्रोसट्रीयटल डोपामिनार्जिक न्यूरोन्स (Nigrostriatal Dopaminergic Neurons) की संख्या में तेजी से कमी होने लगती है। ऐसे में शल्लकी में मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण इन न्यूरोन्स की घटने की प्रक्रिया को रोकने में मदद कर सकते हैं। इस तरह शल्लकी का उपयोग पार्किन्संस डिजीज की समस्या से राहत दिलाने में सहायक साबित हो सकता है। एविसेन्ना जर्नल ऑफ फाइटोमेडिसिन द्वारा किए गए एक शोध में साफ तौर पर इस बात को स्वीकार किया गया है (4)।

6. डायरिया

डायरिया की समस्या में भी शल्लकी के लाभ हासिल किए जा सकते हैं। ब्रिटिश जर्नल ऑफ फार्माकोलॉजी के मुताबिक शल्लकी का सेवन आंतों में सूजन के कारण होने वाली डायरिया की समस्या को ठीक करने में भी मदद कर सकता है। शोध में जिक्र मिलता है कि शल्लकी का उपयोग आंतों की सूजन को कम कर सकता है। साथ ही यह शिथिल हुई आंतों की प्रक्रिया को दोबारा सक्रिय करने में भी सहायक हो सकता है। इससे डायरिया की समस्या में काफी तक सुधार देखा जा सकता है (5)।

आगे है और जानकारी

शल्लकी के फायदे के बाद अब हम शल्लकी के पौष्टिक तत्वों से जुड़ी जानकारी देने जा रहे हैं।

शल्लकी के पौष्टिक तत्व – Boswellia Serrata Nutritional Value in Hindi

जैसा कि हम लेख में ऊपर बता चुके हैं कि शल्लकी बोसवेलिया पेड़ की छाल में मौजूद राल से तैयार किया जाता है। ऐसे में इसमें अन्य खाद्य पदार्थों की तरह विटामिन और मिनरल जैसे तत्वों की मौजूदगी का कोई जिक्र नहीं मिलता है। हां, यह जरूर है कि शल्‍लकी के औषधीय गुण का कारण इसमें मौजूद कुछ रसायनों की उपस्थिति मानी जाती है, जो कुछ इस प्रकार हैं (6):

  • एस्कॉर्बिक एसिड (Ascorbic acid)
  • ब्यूटिलेटेड हाइड्रोक्सीटोल्यूएन फेर्रिक क्लोराइड (Butylated Hydroxytoluene (BHT) Ferric chloride)
  • डाइमिथाइलथिजोल (Dimethylthiazol)
  • डीफेनिलटेट्रीजोलियम ब्रोमाइड (Diphenyltetrezolium Bromide)
  • सोडियम एसीटेट ट्राइहाइड्रेट (Sodium Acetate Trihydrate)
  • ट्रिफराइडल-एस-ट्रियाजाइन (Tripyridyl-s-triazine)
  • बोसवेलिक एसिड (Boswellic Acid)
  • डाईक्लोरोफ्ल्यूरोसिन डायसेटेट (Dichlorofluorescin Diacetate)
  • उर्सोलिक एसिड (Ursolic Acid)
  • थियोबॉर्बिट्यूरिक एसिड (Thiobarbituric Acid)

उपयोग जानना है जरूरी

लेख के अगले भाग में अब हम शल्लकी का उपयोग करने के कुछ आसान तरीके बताएंगे।

शल्लकी का उपयोग – How to Use Boswellia Serrata in Hindi

निम्नलिखित तरीकों के माध्यम से शल्लकी को उपयोग में लाया जा सकता है।

  • दो बूंद शल्लकी के एसेंशियल ऑयल को रुमाल या रूई में लेकर एरोमाथेरेपी के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
  • सूजन संबंधी समस्या से राहत पाने के लिए शल्लकी के एसेंशियल ऑयल की दो से चार बूंद एक चम्मच नारियल तेल में मिलाकर उपयोग की जा सकती है।
  • सेवन के लिए इसके चूर्ण की करीब 300 मिली ग्राम मात्रा का इस्तेमाल दिन में तीन बार किया जा सकता है। चूर्ण को सीधा, पानी के साथ और अन्य खाद्य पदार्थों के साथ इस्तेमाल में लाया जा सकता है (7)।

लेख अभी बाकी है

शल्लकी के उपयोग जानने के बाद अब हम शल्लकी के नुकसान से जुड़ी जानकारी देंगे।

शल्लकी के नुकसान – Side Effects of Boswellia Serrata in Hindi

निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से शल्लकी के नुकसान से जुड़ी जानकारी हासिल की जा सकती है –

  • औषधीय उपयोग के लिए इसकी करीब 900 मिली ग्राम मात्रा दिन भर लेने की सलाह दी जाती है, जो काफी कम है (7)। इसलिए, अभी तक इसके कोई ज्ञात दुष्परिणाम की जानकारी नहीं है। हां, जानवरों पर किए गए शोध में पाया गया कि प्रति किग्रा (शारीरिक वजन) के हिसाब से 1000 मिलीग्राम की खुराक अगर दी जाती हैं तो शल्लकी वजन बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है (8)।
  • त्वचा से संबंधित एलर्जी की शिकायत से बचने के लिए एक बार पैच टेस्ट जरूर कर लें। उसके बाद ही इसे उपयोग में लाएं।
  • अगर कोई इसके सप्लीमेंट को इस्तेमाल को लाने के बारे में सोच रहा है तो डॉक्टरी परामर्श जरूरी है, ताकि शल्लकी के नुकसान को खुद से दूर रखा जा सके।

इस लेख के माध्यम से आपको शल्लकी के फायदे और उपयोग के बारे में काफी कुछ जानने को मिला। साथ ही आपने यह भी जाना कि इन फायदों को हासिल करने के लिए इसे उपयोग में कैसे लाना है। तो फिर देर किस बात की, बताई गई समस्याओं के इलाज के लिए आज ही से इसे उपयोग में लाना शुरू कर दें। साथ ही इसके उपयोग का अनुभव कैसा रहा, इस बारे में हमें जरूर बताएं। उम्मीद है कि कई समस्याओं से बचाव में यह लेख मददगार साबित होगा।

Sources

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  1. Boswellia serrata extract attenuates inflammatory mediators and oxidative stress in collagen induced arthritis
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/24667331/
  2. Clinical Trials Using Boswellia serrata Extract
    https://www.cancer.gov/about-cancer/treatment/clinical-trials/intervention/boswellia-serrata-extract
  3. Herbal and plant therapy in patients with inflammatory bowel disease
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4367210/
  4. Effects of Boswellia serrata resin extract on motor dysfunction and brain oxidative stress in an experimental model of Parkinson’s disease
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6526039/
  5. Effect of Boswellia serrata on intestinal motility in rodents: inhibition of diarrhoea without constipation
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC1751779/
  6. Gum resin of Boswellia serrata inhibited human monocytic (THP-1) cell activation and platelet aggregation
    https://www.academia.edu/28808987/Gum_resin_of_Boswellia_serrata_inhibited_human_monocytic_THP_1_cell_activation_and_platelet_aggregation
  7. Effects of Boswellia serrata gum resin in patients with bronchial asthma: results of a double-blind, placebo-controlled, 6-week clinical study
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/9810030/
  8. A-90 Day Gavage Safety Assessment of Boswellia serrata in Rats
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3532773/
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Neha Srivastava (Nutritionist)

(Nutritionist)
Neha Srivastava - Nutritionist M.Sc -Life Science PG Diploma in Dietetics & Hospital Food Services. I am a focused health professional and I am determined to promote healthy living. I have worked for Apollo Hospitals in Hyderabad and gained rich experience in Dietetics and Hospital Food Services. I have conducted several Diet Counselling Sessions in various Multi National Companies like... more

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