साइनस के इलाज के लिए योग – Yoga For Sinus in Hindi

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योग का नियमित अभ्यास कई शारीरिक समस्याओं से बचाव में मदद कर सकता है। इसमें साइनस की समस्या भी शामिल है। दरअसल, स्कल यानी खोपड़ी में हवा से भरे कुछ क्षेत्र होते हैं, जिन्हें साइनस कहा जाता है। जब साइनस क्षेत्र में अधिक बलगम का जमाव होने लगता है, तो इससे वहां बैक्टीरिया और अन्य कीटाणु पनपने लगते हैं। इससे साइनस संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है (1)। वहीं, कुछ योगासनों की मदद से इस समस्या के प्रभाव को कम किया जा सकता है और साथ ही भविष्य में इसके जोखिम से भी बचा जा सकता है। आइये, स्टाइलक्रेज के इस लेख में जानते हैं साइनस के उपचार के लिए योग और उन्हें करने का तरीका और संबंधित सावधानियां।

नीचे पूरी जानकारी है

चलिए जानते हैं कि साइनस को ठीक करने में योग किस तरह फायदेमंद है।

कैसे साइनस में लाभदायक है योग – How Does Yoga Help with Sinus in Hindi

साइनस के उपचार के लिए योग की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक वैज्ञानिक रिसर्च में भी इस बात का जिक्र मिलता है। शोध की मानें, तो योग में प्राणायाम का नियमित अभ्यास साइनस की समस्या में मददगार हो सकता है। इसमें भ्रामरी प्राणायाम का जिक्र किया गया है, जो साइनस को साफ करके और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव प्रदर्शित कर साइनस की समस्या में आराम दिलाने में मदद कर सकता है (2)। इस आधार पर हम योगाभ्यास को साइनस में लाभकारी मान सकते हैं। नीचे साइनस के लिए विभिन्न योगासनों का जिक्र किया गया है।

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आइये, अब जान लेते हैं साइनस के लिए योग के बारे में।

साइनस के लिए योग – Yoga For Sinus in Hindi

साइनस के लिए योगासन की सूची में कई योग शामिल हैं, जिनमें से कुछ कारगर योग के बारे में हम नीचे विस्तार से बता रहे हैं। वहीं, इस बात का ध्यान रखें कि साइनस के लिए योग एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है। इसे साइनस का त्वरित इलाज न समझें। योगाभ्यास इस समस्या से बचाव और इसके प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। वहीं, समस्या गंभीर है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अब पढ़ें आगे :

1. गोमुखासन (Gomukhasana)

Gomukhasana

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साइनस के लिए योग की लिस्ट में गोमुखासन को शामिल किया जा सकता है। इस योग को अंग्रेजी में ‘काऊ फेस पॉज’ के नाम से भी जाना जाता है। इस आसन का अभ्यास साइनस की समस्या में आराम दिलाने में मददगार हो सकता है। दरअसल, इससे जुड़े एक शोध में साइनस के लिए कुछ योगासनों को शामिल किया गया है, जिसमें गोमुखासन को भी जोड़ा गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि गोमुखासन का अभ्यास वायुमार्ग को लचीला बनाने में मदद कर सकता है, जिससे साइनस में आराम मिल सकता है (3)।

योग करने का तरीका :

  • गोमुखासन करने के लिए सबसे पहले एक साफ जगह पर योग मैट बिछाकर दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएं यानी दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर, हाथ को शरीर से और हथेलियों को जमीन से सटाकर रखें। वहीं, दोनों हाथ कूल्हों के पास होंगे।
  • अब बाएं (Left) पैर को घुटने से मोड़कर दाईं (Right) जांघ के नीचे से नितंब के पास ले आएं और जमीन पर रख दें।
  • फिर दाएं (Right) पैर को मोड़कर बाईं जांघ के ऊपर से बाएं नितंब के पास लाकर जमीन पर रख दें।
  • इसके बाद बाएं (Left) हाथ को ऊपर उठाकर कोहनी से मोड़कर पीठ के पीछे की ओर ले जाएं।
  • वहीं, दाएं (Right) हाथ को नीचे से कोहनी से मोड़कर पीठ के पीछे ले जाएं और बाएं हाथ की उंगलियों को पकड़ने की कोशिश करें।
  • इस समय रीढ़ की हड्डी पूरी तरह सीधी होनी चाहिए।
  • लगभग 30 सेकंड तक इसी मुद्रा में बने रहने का प्रयास करें और सामान्य रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • अब शुरुआती मुद्रा में आने के लिए इस प्रक्रिया को विपरीत क्रम में करें।
  • इसके बाद इस प्रक्रिया को दूसरी ओर से भी करें।
  • इस आसन के चार से पांच चक्र किए जा सकते हैं।

सावधानियां :

2. जानुशीर्षासन (Janu Sirsasana)

Janu Sirsasana

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जानुशीर्षासन करने पर साइनस की समस्या से राहत मिल सकती है। इस संबंध में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में उन योगासनों का जिक्र मिलता है, जो साइनस की समस्या में लाभकारी हो सकते हैं। इसमें जानुशीर्षासन का नाम भी शामिल है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि साइनस के उपचार के लिए यह योग फायदेमंद हो सकता है (3)। हालांकि, इसकी कार्यप्रणाली को लेकर अभी और शोध की आवश्यकता है।

योग करने का तरीका :

  • जानु शीर्षासन करने के लिए योग मैट बिछाकर बैठ जाएं।
  • अब पैरों को सीधे सामने की तरफ फैला लें।
  • फिर बाएं पैर को घुटनों से मोड़कर, तलवे को दाईं जांघ से टीका दें।
  • इस दौरान कमर को सीधा रखें।
  • इसके बाद एक लंबी सांस लें और दोनों हाथों को ऊपर उठाएं।
  • फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए सामने की ओर झुकें और दोनों हाथों से दाएं पैर के अंगूठे को पकड़ने की कोशिश करें।
  • थोड़ी देर इसी मुद्रा में बने रहें और सामान्य रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • यही प्रक्रिया दूसरे पैर के साथ भी करें।
  • इस आसन को चार से पांच बार कर सकते हैं।

सावधानियां :

  • जिन्हें पीठ के निचले भाग में दर्द रहता है, वो इस आसन को करने से बचें।
  • घुटनों को मोड़ने में तकलीफ महसूस होती है, तो इस योग को करना बंद कर दें।
  • गर्भवती महिलाएं इस आसन को न करें।

3. भुजंगासन (Bhujangasana)

Bhujangasana

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भुजंगासन योग को दो शब्दों के मेल से बनाया गया है। इसमें पहला भुजंग यानी सांप व दूसरा आसन यानी मुद्रा। इस योग को अंग्रेजी में ‘कोबरा पोज’ के नाम से जाना जाता है। इस नाम के पीछे की वजह यह है कि इसे करते वक्त शरीर की आकृति कुछ सांप की तरह नजर आती है। वहीं, एक अध्ययन के अनुसार, भुजंगासन का नियमित अभ्यास फेफड़ों और श्वसन तंत्र के अन्य अंगों का विस्तार करने के साथ-साथ खिंचाव लाने का काम कर सकता है, इससे साइनस में बलगम के जवाब को कम करने में मदद मिल सकती है (4)।

योग करने का तरीका :

  • इस योग को करने के लिए एक शांत और साफ जगह पर योग मैट बिछाएं और पेट के बल लेट जाएं।
  • साथ ही पैरों को तना हुआ रखें और इनके बीच थोड़ी दूरी बनाएं।
  • इसके बाद अपने दोनों हाथों को छाती के पास लाएं और हथेलियों को जमीन से टिका दें।
  • अब गहरी सांस के साथ हथेलियों से जमीन पर जोर देते हुए नाभि तक के हिस्से को ऊपर उठाएं और आकाश की तरह देखने का प्रयास करें।
  • कुछ देर इसी मुद्रा में बने रहने की कोशिश करें और सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया जारी रखें।
  • फिर सांस को धीरे-धीरे छोड़ते हुए अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • इस आसन के चार से पांच चक्र रोजाना किये जा सकते हैं।

सावधानियां :

  • गर्भवती महिलाएं इस आसन को न करें।
  • हाथों में फ्रैक्चर होने पर इस योग को करने से बचना चाहिए।

4. उष्ट्रासन (Ustrasana)

Ustrasana

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साइनस के लिए योग में उष्ट्रासन को भी शामिल कर सकते हैं। इस आसन को अंग्रेजी में ‘कैमल पोज’ भी कहा जाता है। यह आसन भी साइनस की समस्या में कुछ हद तक लाभकारी हो सकता है। इससे जुड़े एक शोध में जिक्र मिलता है कि उष्ट्रासन का अभ्यास नसल एयरवेज यानी वायु मार्ग में आई रुकावट को कम करने में मदद कर सकता है (5)। बता दें कि साइनस की समस्या के कारण नसल पैसेज (नाक के माध्यम से जुड़ा वायुमार्ग) बलगम के जमाव और सूजन के कारण ब्लॉक हो सकता है (6)। इस आधार पर हम मान सकते हैं कि ये आसन साइनस में कुछ हद तक लाभकारी हो सकता है। फिलहाल, इस पर अभी और वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है।

योग करने का तरीका :

  • सबसे पहले योग मैट या चटाई बिछाकर वज्रासन की मुद्रा में आ जाएं।
  • अब घुटनों के बल खड़े हो जाएं।
  • फिर लंबी सांस लेते हुए पीछे की तरफ झुक कर दाएं हाथ से दाएं पैर की एड़ी व बाएं हाथ से बाएं पैर की एड़ी को पकड़ने की कोशिश करें। शुरुआती
  • अभ्यासक के लिए ऐसा करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में हाथों को नीचे की तरफ जितना हो सके, उतना ले जाने की कोशिश करें।
  • इस मुद्रा में आने के बाद आसमान की ओर देखें।
  • इस समय शरीर का भार पैरों और हाथों पर होगा।
  • कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहें व नियमित तौर पर सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • अब धीरे-धीरे वापस प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • इस आसन को रुक-रुक कर तीन से चार बार कर सकते हैं।

सावधानियां :

  • हर्निया से पीड़ित लोग इस योग को न करें।
  • उच्च रक्तचाप के मरीज भी इस आसन को न करें।
  • अगर किसी के घुटनों में दर्द या सूजन है, तो वो इस योग से दूर रहें।
  • गर्भवती महिलाएं इस आसन को न करें।

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5. सेतु बंध सर्वांगासन (Setu Bandha Sarvangasana)

Setu Bandha Sarvangasana)

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अगर कोई साइनस की समस्या से परेशान है, तो इसके लक्षणों से कुछ हद तक राहत पाने के लिए सेतु बंध सर्वांगासन का अभ्यास किया जा सकता है। विषय से जुड़े एक अध्ययन में साफ तौर से जिक्र मिलता है कि सेतु बंध सर्वांगासन का अभ्यास साइनस की समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसकी कार्यप्रणाली को लेकर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है (7)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि साइनस के लिए योगासन के रूप में सेतु बंध सर्वांगासन को शामिल किया जा सकता है।

योग करने का तरीका :

  • इस योग को करने के लिए योग मैट या चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं।
  • अब पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए हिप्स यानी नितंब से टिका दें।
  • इस समय दोनों पैरों के घुटने सीधे व तलवे जमीन पर होंगे।
  • फिर अपने हाथों से अपनी एड़ियों को पकड़ें।
  • अब लंबी सांस लेते हुए कमर को ऊपर की तरफ उठाएं।
  • इस मुद्रा में ठुड्डी छाती से सटी होगी और सिर, गर्दन और कंधे जमीन से सटे होंगे।
  • कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहें और नियमित रूप से सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • अब सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • इस आसन को रोजाना पांच से छह बार तक कर सकते हैं।

सावधानियां :

  • अगर कंधे और पीठ में दर्द है, तो इस योग को करने से बचें।
  • गर्भवतियां इस आसन को न करें।

6. अधोमुख श्वानासन (Adho Mukha Svanasana)

Adho Mukha Svanasana

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अधोमुख श्वानासन करने के फायदे साइनस से राहत दिलाने में भी देखे जा सकते हैं। इस बात का जिक्र एक वैज्ञानिक अध्ययन में मिलता है। इस अध्ययन में अधोमुख श्वानासन करने के अन्य फायदों के साथ साइनस की समस्या में आराम दिलाना भी शामिल है। हालांकि, इसकी कार्यप्रणाली का जिक्र इस शोध में नहीं किया गया है (7)।

योग करने का तरीका :

  • इस आसन को करने के लिए एक समतल स्थान पर योग मैट बिछाकर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  • फिर दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाकर सामने की ओर झुकें और दोनों हाथों जमीन पर रखें। दोनों हाथों के बीच एक फिट की दूरी होनी चाहिए।
  • इसके बाद लंबी सांस लेते हुए कमर वाले भाग को ऊपर की तरफ उठाते हुए घुटनों को सीधा कर लें।
  • इस समय शरीर का भार दोनों हाथों और पैरों पर एक समान होगा।
  • थोड़ी देर इसी मुद्रा में बने रहें और नियमित तौर पर सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए वापस पहली वाली मुद्रा में आ जाएं।
  • इस योग के चार से पांच चक्र कर सकते हैं।

सावधानियां :

  • अगर किसी के हाथों में दर्द है, तो इस आसन को करने से बचें।
  • जिन लोगों को उच्च रक्तचाप की समस्या है, वो इस योग को न करें।
  • कंधे या कमर से जुड़ी किसी तरह की परेशानी होने पर इस योग से दूर रहें।
  • गर्भवती इस आसन को न करें।

7. सलंब सर्वांगसान (Salamba Sarvangasana)

Salamba Sarvangasana

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साइनस के उपचार के लिए योग में सलंब सर्वांगासन को भी शामिल किया जा सकता है। इस बात की पुष्टि एक शोध में होती है। शोध में सलंब सर्वांगासन को करने के फायदों में साइनोसाइटिस (साइनस की समस्या) से आराम दिलाना भी शामिल है। ऐसे में कहा जा सकता है कि जो इस समस्या से परेशान हैं, वो इस योग को कर सकते हैं (7)। हालांकि, इसकी कार्यप्रणाली को लेकर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

योग करने का तरीका :

  • सबसे पहले एक स्वच्छ और शांत जगह पर योग मैट या चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं व दोनों हाथों को सीधा करके शरीर के पास रखें।
  • अब लंबी सांस लेते हुए दोनों पैरों को एक साथ ऊपर की तरफ उठाते हुए पीछे की ओर लाने का प्रयास करें।
  • अब हाथों की मदद से कमर या हिप्स को सहारा दें और दोनों पैरों को सीधा कर लें।
  • अब पीठे को सहारा देते हुए कोहनी को जमीन पर टीका दें।
  • इस अवस्था में दोनों घुटने सीधे व जुड़े हुए होना चाहिए। इसके साथ ही शरीर का भार कंधे, कोहनी और सिर पर होने चाहिए।
  • इस समय ठुड्डी छाती को स्पर्श करती हुई नजर आएगी।
  • थोड़ी देर इसी स्थिति में बने रहें और सामान्य तौर पर सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • अब सांस छोड़ते हुए पहली वाली मुद्रा में आ जाएं।
  • इस आसन को रोजाना पांच से छह बार तक कर सकते हैं।

सावधानियां :

  • हृदय रोग से परेशान व्यक्ति इस आसन को न करें।
  • अगर गर्दन और कंधों में तकलीफ है, तो इस आसन से दूर रहें।
  • गर्भवती महिलाएं इस आसन को न करें।

नोट : पहली बार ऊपर बताए गए आसनों को करने वाले लोग योग ट्रेनर की मदद लें।

दोस्तों, जैसा कि हमने बताया कि योग की मदद से कई शारीरिक समस्याओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है और साथ ही कई बीमारियों से बचे रहने में मदद मिल सकती है। ऐसे में अगर कोई साइनस की समस्या से परेशान है, तो वो ऊपर बताए गए योगासनों को कर इस समस्या से कुछ हद तक राहत पा सकता है। वहीं, ऊपर बताए गए किसी भी योग को करने से पहले बताई गई सावधानियों का ध्यान जरूर रखें। हम आशा करते हैं कि हमारे इस लेख में दी गई सभी जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। आप चाहें, तो इस लेख को अन्य लोगों के साथ शेयर कर सकते हैं।

नीचे हम साइनस के लिए योग से जुड़े कुछ सवालों के जवाब दे रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :

साइनोसाइटिस के लिए कौन-सा प्राणायाम अच्छा है?

साइनसाइटिस के लिए भ्रामरी प्राणायाम को सबसे अच्छा माना जा सकता है (2)।

क्या योग मेरी साइनोसाइटिस की समस्या को पूरी तरह से ठीक करने में मदद करेगा?

ऊपर बताए गए योगासनों की मदद से इस समस्या में कुछ हद तक आराम पाया जा सकता है, लेकिन योग पूरी तरह इसे ठीक कर पाएगा कि नहीं, इससे जुड़े सटी वैज्ञानिक शोध का अभाव है।

साइनोसाइटिस की स्थिति को ठीक करने के लिए कितनी बार योग का अभ्यास करना चाहिए?

साइनोसाइटिस की समस्या से राहत पाने के रोजाना सुबह योग का अभ्यास किया जा सकता है। वहीं, एक बार में किसी भी योग के तीन से चार चक्र (जो पहली बार कर रहे हैं) पूरे कर सकते हैं।

Sources

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भूपेंद्र वर्मा ने सेंट थॉमस कॉलेज से बीजेएमसी और एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी से एमजेएमसी किया है। भूपेंद्र को लेखक के तौर पर फ्रीलांसिंग में काम करते 2 साल हो गए हैं। इनकी लिखी हुई कविताएं, गाने और रैप हर किसी को पसंद आते हैं। यह अपने लेखन और रैप करने के अनोखे स्टाइल की वजह से जाने जाते हैं। इन्होंने कुछ डॉक्यूमेंट्री फिल्म की स्टोरी और डायलॉग्स भी लिखे हैं। इन्हें संगीत सुनना, फिल्में देखना और घूमना पसंद है।

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