सुदर्शन क्रिया करने का तरीका और फायदे – Sudarshan Kriya Steps And Benefits in Hindi

Written by , (शिक्षा- एमए इन मास कम्युनिकेशन)

आजकल शरीर को बीमारियों से मुक्त रखना एक चुनौती बन गया है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दिनचर्या में योग के कई आसन को शामिल करने की सलाह दी जाती है, जिसमें एक नाम सुदर्शन क्रिया का है। इसे करना बहुत आसान है, लेकिन फिर भी लोग इसे सही तरीके से नहीं कर पाते हैं। यही वजह है कि स्टाइलक्रेज के इस लेख में आज हम सुदर्शन क्रिया क्या है व सुदर्शन क्रिया करने का सही तरीका क्या है, इसके बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। साथ ही यहां सुदर्शन क्रिया करने के फायदे भी बताए गए हैं।

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आइए, सबसे पहले जानते है कि सुदर्शन क्रिया क्या है।

सुदर्शन क्रिया क्या है – What is Sudarshan Kriya in Hindi

सुदर्शन क्रिया सांस लेने की लयात्मक और शक्तिशाली श्वसन तकनीक है। इसका नाम संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें सु का मतलब सही और दर्शन का मतलब देखना होता है। यह तनाव, थकान, नकारात्मक विचार, अवसाद जैसी मानसिक स्थितियों को दूर करने में सहायक हो सकता है। इस योगासन को खासतौर से तनाव प्रबंधन के लिए किया जाता है (1)। सुदर्शन क्रिया करने के ओर भी कई फायदे हैं, जिनके बारे में लेख में आगे विस्तार से बात करेंगे।

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सुदर्शन क्रिया क्या है जानने के बाद अब बात करेंगे सुदर्शन क्रिया करने के फायदे के बारे में।

सुदर्शन क्रिया करने के फायदे – Benefits of Sudarshan Kriya in hindi

सुदर्शन क्रिया करने के फायदे कई सारी स्वास्थ समस्याओं में देखे जा सकते हैं, जिसके बारे में हम नीचे विस्तार से बताने जा रहे हैं।

1. तनाव से मुक्ति

सुदर्शन क्रिया यानी सांस लेने की ये तकनीक तंत्रिका तंत्र को संतुलित रखने का एक अनोखा तरीका है, जो मानसिक व तनाव संबंधी परेशानियां को कम कर सकता है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर उपलब्ध एक अध्ययन में पता चलता है कि इसके नियमित अभ्यास से एंटीडिप्रेसेंट प्रतिक्रिया होती है, जिससे कोर्टिसोल और एड्रेनोकॉर्टिकोट्रोपिक जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर कम हो सकता है (1)।

इसके अलावा, सुदर्शन क्रिया का अभ्यास एल्कोहल के आदी लोगों में भी तनाव का स्तर कम कर सकता है (1)। इस आधार पर माना जा सकता है कि सुदर्शन क्रिया करने के फायदे में तनाव से राहत पाना शामिल है।

2. नींद में सुधार

नींद में सुधार के लिए सुदर्शन क्रिया का अभ्यास फायदेमंद हो सकता है। दरअसल, अनिद्रा का एक कारण तनाव भी होता है, वहीं लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि सुदर्शन क्रिया तनाव प्रबंधन में सहायक है। यही वजह है कि सुदर्शन क्रिया योग के नियमित अभ्यास से तनाव दूर करने के साथ ही नींद की गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है (1)।

3. कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में सहायक

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए भी सुदर्शन क्रिया करने के फायदे हासिल किए जा सकते हैं। एनसीबीआई पर उपलब्ध एक अध्ययन में चार महीने तक जिन लोगों ने नियमित रूप से सुदर्शन क्रिया का अभ्यास किया, उनके शरीर में न सिर्फ ब्लड शुगर के स्तर में कमी देखी गई, बल्कि टोटल कोलेस्ट्रॉल व ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर में भी कमी पाई गई (1)। ऐसे में माना जा सकता है कि दैनिक रूप से सुदर्शन क्रिया का अभ्यास कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में सहायक हो सकता है।

4. उर्जा में सहायक

सुदर्शन क्रिया का नियमित रूप से अभ्यास करने से शरीर में उर्जा की बढ़ोत्तरी हो सकती है। दरअसल शोध की मानें तो सुदर्शन क्रिया का निरंतर अभ्यास करने से शरीर में उर्जा की पुनस्थापना होती है, जिससे व्यक्ति ऊर्जावान महसूस कर सकता है। यही नहीं सुदर्शन क्रिया ध्यान व सतर्कता को बढ़ावा देने में भी सहायक हो सकती है (1)।

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आइए जान लेते हैं सुदर्शन क्रिया करने का तरीका क्या है।

सुदर्शन क्रिया करने का तरीका

सुदर्शन क्रिया योग में गर्दन को घुमाने से लेकर शोल्डर रोटेशन, पीकॉक आसन, स्विंग, हाफ मून स्ट्रेच, ब्रीद ऑफ जॉय, कैट पोज, बटरफ्लाई पोज, क्रैडल पोज, टिड्डी मुद्रा और पर्वत मुद्राएं शामिल हैं। इसे करने के लिए चार अलग-अलग चरण को पूरा करना होता है, जिसके बारे में हम नीचे विस्तार से बताने जा रहे हैं। तो आइए जानते हैं सुदर्शन क्रिया स्टेप्स क्या हैं (2):

1. उज्जायी प्राणायाम (Victorious Breath): सबसे पहले ध्यान मुद्रा में बैठ जाएं। यह एक स्लो ब्रीथ टेक्निक है। इसे करते समय सांस लेते व छोड़ते समय पूरा ध्यान सांसों पर लगाएं। इस तरह एक मिनट में कम से कम दो से चार बार सांस लेनी चाहिए। इस क्रिया को करने से व्यक्ति में सतर्कता के साथ शारीरिक और मानसिक शांति मिलती है।

2. भस्त्रिका प्राणायाम (Bellow Breath): अब भस्त्रिका प्राणायाम करेंगे। यह डीप ब्रीदिंग टेक्निक है। इसे करते समय सांस तेजी से अंदर ली जाती है और 1 मिनट में लगभग 30 बार सांस लेनी व छोड़नी होती है।

3. ओम का जाप (Om Chanting): भस्त्रिका प्राणायाम के बाद, आंखों को बंद कर ध्यान लगाते हुए तीन बार ओम का जाप करें। प्रत्येक मंत्र के बाद 15 सेकंड का विश्राम करें। इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलने के साथ मन को शांति प्राप्त होती है।

4. सुदर्शन क्रिया (Sudarshan Kriya): इसके बाद सुदर्शन क्रिया करेंगे, जिसे सांस पर नियंत्रण पाने की तकनीक के रूप में माना जाता है। यह चक्रीय श्वास का एक अनूठा रूप है। इसमें एक लय में सांसों की अलग-अलग गतिविधि की जाती हैं। यही वजह है कि सुदर्शन क्रिया सीखने के लिए खास ट्रेनर की जरूरत पड़ती है।

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सुदर्शन क्रिया करने का तरीका जानने के बाद बारी आती है सावधानियों की।

सुदर्शन क्रिया के लिए कुछ सावधानियां

यहां हम कुछ सावधानियां बताने जा रहे हैं, जिसे सुदर्शन क्रिया करते समय ध्यान में रखना आवश्यक है।

  • सुदर्शन क्रिया एक सांसों की एक तकनीक है। ऐसे में अगर किसी तरह के श्वांस संबंधी विकार या समस्या से ग्रस्त हैं, तो यह अभ्यास ना करें।
  • सुदर्शन क्रिया करने से पहले किसी प्रमाणित योग ट्रेनर से परामर्श अवश्य लें व उनकी देखरेख में इसका अभ्यास करें।
  • गर्भावस्था के दौरान सुदर्शन क्रिया योग करने से पहले महिला को चिकित्सक की सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए।
  • मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को इस क्रिया को डॉक्टर के परामर्श के बाद ही करना चाहिए।
  • खाना खाने के तुरंत बाद सुदर्शन क्रिया को कभी भी ना करें।
  • सुबह के समय खाली पेट योग ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
  • खुली हवा व स्वस्च्छ जगह पर पर योगा मैट बिछाकर योग करें।

इस लेख के माध्यम से यह स्पष्ट हो गया होगा कि सुदर्शन क्रिया क्या है व सुदर्शन क्रिया करने के फायदे क्या हो सकते हैं। वाकई में यह बेहद असरदार योग है, जिसे आसानी से किया जा सकता है। अगर इससे होने वाले फायदों को प्राप्त करना चाहते हैं, तो एक्सपर्ट की देखरेख में इसका अभ्यास करें। साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि यह किसी बीमारी का इलाज नहीं है। यह सिर्फ आपको स्वस्थ रखने के साथ कुछ बीमारियों से सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

संदर्भ (Sources):

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  1. Sudarshan kriya yoga: Breathing for health
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3573542/
  2. Sudarshan Kriya A Novel Breathing Technique
    https://www.researchgate.net/publication/321376819_Sudarshan_Kriya_A_Novel_Breathing_Technique
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