सूंघने और मुंह के स्वाद को ठीक करने के घरेलू उपाय – Home Remedies For Loss Of Taste And Smell in Hindi

Medically Reviewed By Dr. Zeel Gandhi, Ayurvedic Doctor, BAMS
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क्या हो अगर किसी की सूंघने और चखने की शक्ति अचानक चली जाए? ये दोनों समस्याएं किसी के साथ भी और उम्र के किसी भी पड़ाव में हो सकती हैं। ऐसा होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सामान्य सर्दी, सांस संबंधी समस्या या विटामिन की कमी सबसे आम है (1) (2)। अगर समय के साथ-साथ कोई इन परेशानियों की चपेट में आ रहा हैं और भविष्य में इनके नकारात्मक प्रभाव से बचना चाहता है, तो ऐसे में यह लेख काफी मददगार होगा। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम सूंघने और स्वाद लेने की शक्ति को ठीक करने के सबसे सटीक घरेलू उपाय बता रहे हैं। हालांकि, इसके साथ ही यह समझना जरूरी है कि घरेलू उपाय इस समस्या में राहत पहुंचा सकते हैं। पूर्ण उपचार डॉक्टरी परामर्श पर ही निर्भर करता है।

विस्तार से पढ़ें लेख

चलिए, सबसे पहले समझ लेते हैं कि गंध और स्वाद किस प्रकार से काम करते हैं।

गंध और स्वाद किस प्रकार काम करते हैं? – How Do Smell And Taste Work in Hindi

गंध और स्वाद इंद्रियां आपस में जुड़ी होती हैं। उम्र के हिसाब से इन इंद्रियों में बदलाव आ सकता है, जिससे किसी भी व्यक्ति को गंध या स्वाद में बदलाव या कमी का अनुभव हो सकता है। दरअसल, गंध और स्वाद इंद्रियां मनुष्य के रसायन विज्ञान प्रणाली का ही एक हिस्सा हैं। आसपास की चीजों को सूंघने की क्षमता विशेष सेंसरी कोशिकाओं से आती हैं, जिसे ओल्फेक्ट्री सेंसरी न्यूरॉन्स कहा जाता है। ये नाक के अंदर टिशू के एक छोटे से भाग में पाए जाते हैं। इनमें से प्रत्येक ओल्फेक्ट्री न्यूरॉन्स में एक गंध रिसेप्टर होता है, जो आसपास के पदार्थों द्वारा जारी सूक्ष्म अणुओं (माइक्रोस्कोपिक मॉलिक्यूल्स) द्वारा उत्तेजित होता है। गंध दो मार्गों के माध्यम से ओल्फेक्ट्री रिसेप्टर्स तक पहुंचती है। पहली नासिका के माध्यम से और दूसरी एक चैनल के माध्यम से, जो गले के ऊपरी हिस्से को नाक से जोड़ता है। भोजन की सुगंध को इस चैनल के माध्यम से महसूस किया जाता है (3)

वहीं स्वाद को पहचाने की क्षमता की बात करें, तो इस काम में स्वाद की पहचान करने वाली कोशिकाएं काम करती हैं, जो जीभ से होकर गुजरती हैं। इन्हें ‘गस्टोरी रिसेप्टर’ के नाम से भी जाना जाता है। गस्टोरी रिसेप्टर्स सेल्स टेस्ट बड (जीभ की ऊपरी सतह पर मौजूद उभारनुमा आकृति का भीतरी हिस्सा) में मौजूद होती हैं। टेस्ट बड में मुख्य रूप से पांच अहम और बड़े टेस्ट शामिल होते हैं (4):

  • मिठास
  • खट्टापन
  • कड़वापन
  • नमकीन
  • चटपटा

जीभ के जरिए मस्तिष्क संकेत प्राप्त करता है और उन्हें अलग-अलग स्वादों में बांटता है। स्वाद इंद्रियां अन्य इंद्रियों जैसे सूंघने और मस्तिष्क के कार्यों से भी जुड़ी हो सकती हैं (4)

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नीचे जानिए स्वाद और सूंघने की शक्ति को प्रभावित करने के विभिन्न कारणों के बारे में।

स्वाद और सूंघने की शक्ति कमजोर होने के कारण – What causes the loss of taste and smell in Hindi

स्वाद और सूंघने की शक्ति कमजोर होने के कारण कई हो सकते हैं। आइए, सबसे पहले जान लेते हैं कि सूंघने की शक्ति कमजोर होने के कारण (2)

  • साइनस
  • नाक या गले का संक्रमण
  • एलर्जी
  • इंडोक्राइन डिसॉर्डर (हॉर्मोन के अधिक उत्पादन से संबंधी परेशानी )
  • डिमेंशिया या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं
  • पोषक तत्वों की कमी
  • सिर या नाक की चोट
  • साइनस की सर्जरी
  • सिर या चेहरे पर विकिरण चिकित्सा
  • कुछ दवाएं जैसे- एम्फैटेमिन, एस्ट्रोजन व नेफाजोलिन आदि।
  • सांस संबंधी समस्या
  • बढ़ती उम्र
  • नाक से जुड़ी एलर्जी
  • नाक के छिद्रों को विभाजित करने वाली कार्टिलेज का अपनी जगह से हटना (Deviated  Nasal Septum)
  • नाक की हड्डी बढ़ना (Hypertrophy of Turbinates)
  • नाक का मांस बढ़ना (Nasal Polyps)

चलिए, अब स्वाद चले जाने के कारण जान लेते हैं (1)

  • बेल्स पाल्सी (चेहरे के एक तरफ की मांसपेशियों का कमजोर होना)
  • सामान्य जुकाम
  • फ्लू और अन्य वायरल संक्रमण
  • नाक में संक्रमण
  • साइनसिसिस
  • फैरिन्जाइटिस (ग्रसनी में सूजन)
  • स्ट्रेप थ्रोट (संक्रमण के कारण गले में सूजन होने)
  • लार ग्रंथि संक्रमण
  • सिर में चोट

स्वाद के बिगड़ने के कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं –

  • साइनस या खोपड़ी की सर्जरी
  • धूम्रपान (विशेषकर पाइप या सिगार धूम्रपान)
  • मुंह, नाक या सिर में चोट लगना
  • मुंह का सूखापन
  • मसूड़े की सूजन
  • विटामिन-बी12 की कमी
  • जिंक की कमी
  • कुछ दवाएं जैसे- थायराइड ड्रग्स, कैप्टोप्रिल, ग्रिसोफुल्विन, लिथियम व पेनिसिलिन आदि।
  • अल्जाइमर रोग या पार्किंसंस रोग

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चलिए, अब हम गंध और स्वाद को ठीक करने के घरेलू उपाय के बारे में जान लेते हैं।

गंध और स्वाद को ठीक करने के घरेलू उपाय – Home Remedies To Treat Loss Of Smell And Taste in Hindi

अगर किसी के मन में यह सवाल हो कि मुंह का टेस्ट कैसे ठीक करें, तो यहां हम क्रमवार गंध और स्वाद को ठीक करने के घरेलू उपाय बता रहे हैं। इनके माध्यम से इस बात को आसानी से समझा जा सकता है। गंध और स्वाद ठीक करने के यह घरेलू नुस्खे कुछ इस प्रकार हैं –

1. अरंडी का तेल

सामग्री :

  • एक चम्मच गर्म कोल्ड-प्रेस्ड कैस्टर ऑयल

उपयोग करने का तरीका :

  • अरंडी के तेल की एक-एक बूंद अपनी दोनों नाक की नलियों में डालें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में एक बार और रात में एक बार दोहराया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

अरंडी का तेल फ्लू, सर्दी और सूजन में मददगार साबित हो सकता है (5)। एक अन्य शोध के मुताबिक, अरंडी के तेल में एंटी माइक्रोबियल गुण (बैक्टीरिया से लड़ने वाला) और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण (सूजन को कम करने वाला) होते हैं। इन गुणों के कारण यह तेल कई संक्रमणों से भी बचाने में भी मदद कर सकता है (6)। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि अगर बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण या फिर सामान्य सर्दी की वजह से स्वाद और गंध से जुड़ी समस्या होती है, तो अरंडी का तेल मददगार साबित हो सकता है।

2. लहसुन

सामग्री :

  • लहसुन की दो-तीन कलियां बारीक कटी हुईं
  • एक कप पानी

उपयोग करने का तरीका :

  • पानी को एक बर्तन में गर्म करने के लिए रखें।
  • अब इसमें कटे हुए लहसुन को डालें और कुछ मिनट तक पानी को उबलने दें।
  • अब पानी को छान लें और हल्का ठंडा होने पर चाय की तरह पिएं।
  • यह प्रक्रिया दिन में दो बार दोहराई जा सकती है।

कैसे है फायदेमंद :

सूंघने और मुंह के स्वाद के लिए लहसुन के फायदे भी उपयोगी हो सकते हैं। दरअसल, लहसुन एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से समृद्ध होता है, जो सूजन को कम करने में मदद कर सकता है (7)। इसके अलावा, सर्दी, फ्लू और सांस संबंधित समस्याओं को भी कम करने में लहसुन उपयोगी साबित हो सकता है (8)। एक शोध से पता चलता है कि लहसुन अल्जाइमर से भी बचाव करने में भी मदद कर सकता है (9)। बता दें कि सूंघने और स्वाद लेने की शक्ति के कमजोर होने के पीछे का एक कारण अल्जाइमर रोग को भी माना जाता है (10)। इसके अलावा, सामान्य सर्दी, फ्लू, सांस संबंधी समस्या या सक्रमंण के कारण मुंह का स्वाद और सूंघने की शक्ति प्रभावित होती है। ऐसे में लहसुन का उपयोग मददगार माना जा सकता है।

3. अदरक

सामग्री :

  • आवश्यकतानुसार छिला हुआ अदरक

उपयोग करने का तरीका :

  • दिनभर बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा अदरक चबाते रहें।
  • विकल्प के तौर पर अदरक की चाय भी पी जा सकती है।
  • रोजाना इस प्रक्रिया को इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

जैसा कि हमने लेख के शुरुआत में बताया कि सामान्य सर्दी, फ्लू, एलर्जी या किसी प्रकार का संक्रमण सूंघने और मुंह के स्वाद को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में अदरक का सेवन फायदेमंद हो सकता है। एक रिसर्च के अनुसार, अदरक का इस्तेमाल आम सर्दी, फ्लू व एलर्जी जैसे लक्षणों को दूर करने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाया जाता है, जो सूजन से बचाने में मदद कर सकता है (11)। इस आधार पर अदरक का इस्तेमाल गंध और स्वाद को ठीक करने के घरेलू उपाय के तौर पर किया जा सकता है।

4. लाल मिर्च

सामग्री : 

  • एक चम्मच लाल मिर्च
  • एक चम्मच शहद
  • एक कप गर्म पानी

उपयोग करने का तरीका :

  • एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद और लाल मिर्च पाउडर मिलाएं।
  • अब इसे आराम से पिएं।
  • रोजाना एक बार इस उपाय को इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

लाल मिर्च खोए हुए स्वाद और गंध को वापस लाने में मदद कर सकती है, क्योंकि इसमें कैप्साइसिन होता है। कैप्साइसिन नॉन-एलर्जी राइनाइटिस (गंभीर रूप से नाक का बंद होना या बहना) की समस्या में मददगार हो सकता है (12)। वहीं, नाक बंद होने के कारण भी सूंघने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिसका जिक्र हमने लेख में पहले ही किया है। इसके अलावा, कैप्साइसिन में सूजन को कम करने के प्रभाव भी मौजूद होते है। साथ ही यह लार के स्राव को भी उत्तेजित कर सकता है (13)। मुंह का सूखापन भी स्वाद से जुड़ी समस्या का एक कारण माना जाता है (1)। इसके अलावा, बात करें शहद की, तो शहद का इस्तेमाल एलर्जिक रायनाइटिस से राहत दिलाने में मदद कर सकता है, जिसमें एलर्जी के कारण बंद नाक की समस्या हो सकती है (14)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि लाल मिर्च और शहद का सेवन गंध और स्वाद को ठीक करने के घरेलू उपाय के तौर पर उपयोगी साबित हो सकता है।

5. नींबू

सामग्री: 

  • आधा नींबू
  • एक गिलास पानी
  • शहद (आवश्यकतानुसार)

उपयोग करने का तरीका : 

  • एक गिलास पानी में आधे नींबू का रस मिलाएं।
  • अब शहद डालकर अच्छी तरह मिलाएं और पी जाएं।
  • भोजन से पहले दिन में दो बार इसे पिएं।

कैसे है फायदेमंद :

एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, नींबू का उपयोग एलर्जिक राइनाइटिस से होने वाली समस्या जैसे- एलर्जी के कारण नाक में होने वाली सूजन से राहत दिला सकता है (15)। इसके अलावा, नींबू और शहद का मिश्रण शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल प्रभाव प्रदर्शित करता है, जो बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होने वाली सांस संबंधी समस्याओं से बचाने में मदद कर सकता है (16)। एक अन्य रिसर्च के मुताबिक, नींबू का इस्तेमाल ओलफैक्टोरी डिसऑर्डर (olfactory disorders) यानी सुंघने की क्षमता में सुधार कर सकता है। इस शोध में इस बात का साफ तौर से जिक्र मिलता है कि कैंसर के इलाज के बाद अक्सर सूंघने की क्षमता में कमी देखी जाती है। ऐसे में नींबू की महक का उपयोग लाभकारी साबित हो सकता है (17)। वहीं बंद नाक, सांस संबंधी संक्रमण और ओलफैक्टोरी डिसऑर्डर स्वाद और गंध की समस्या के मुख्य कारणों में शामिल हैं (3) (2) (1)। इस आधार पर माना जा सकता है कि शहद और नींबू के पानी के साथ उपयोग इस समस्या में सहायक हो सकता है।

6. शहद

सामग्री : 

  • एक चम्मच शहद
  • एक गिलास पानी

उपयोग करने का तरीका : 

  • एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद मिलाएं।
  • अब इस मिश्रण को पी जाएं।
  • एक दिन छोड़कर इस प्रक्रिया को इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध से इस बात की जानकारी मिलती है कि शहद एलर्जिक रायनाइटिस (एलर्जी के कारण नाक में होने वाली सूजन की समस्या) से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। वहीं, एलर्जिक रायनाइटिस के लक्षण में बंद नाक की समस्या भी शामिल है, जिससे राहत पाने में शहद कारगर हो सकता है (14)। वहीं, शहद एंटी बैक्टीरियल प्रभाव से भी समृद्ध होता है, जो बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होने वाली सांस संबंधी समस्या में कुछ हद तक कारगर साबित हो सकता है (18)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि अगर नाक से जुड़ी एलर्जी या फिर किसी संक्रमण के संपर्क में आने के कारण सूंघने और स्वाद लेने की शक्ति कमजोर हो जाती है, तो ऐसे में शहद का उपयोग करना फायदेमंद हो सकता है। फिलहाल, इस संबंध में अभी और शोध की आवश्यकता है।

7. सेब का सिरका

सामग्री : 

  • एक बड़ा चम्मच सेब का सिरका
  • एक कप पानी
  • शहद (आवश्यकतानुसार)

उपयोग करने तरीका :

  • एक गिलास गर्म पानी में सेब का सिरका मिलाएं।
  • आवश्यकतानुसार थोड़ा शहद मिलाएं और धीरे-धीरे पिएं।
  • बेहतर लाभ के लिए इस मिश्रण को रोज एक बार पिया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

मुंह का स्वाद और नाक में सुगंध न आने के उपचार में सेब के सिरके के फायदे भी सहायक हो सकते हैं। दरअसल, सेब के सिरके से जुड़े एक शोध से पता चलता है कि सेब के सिरके में एंटीबायोटिक (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाला) और एंटीइंफ्लेमेट्री (सूजन को कम करने वाला) गुण पाया जाता है। यह दोनों गुण श्वसन संबंधी समस्या को ठीक करने में मदद कर सकते हैं (19)। वहीं लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि श्वसन संबंधी समस्या के कारण स्वाद और गंध न आने की परेशानी हो सकती है (2) (1)। ऐसे में सेब के सिरके का सेवन श्वसन संबंधी समस्या के कारण गंध और स्वाद चले जाने की स्थिति में लाभकारी माना जा सकता है।

8. ऑयल पुलिंग

सामग्री :

  • एक बड़ा चम्मच नारियल या तिल का तेल

उपयोग करने का तरीका :

  • मुंह में नारियल या तिल का तेल भर लें।
  • तेल को लगभग 10 से 15 मिनट तक मुंह के अंदर ही घुमाएं।
  • अब कुल्ला कर लें और दांतों को ब्रश कर लें।
  • रोजाना सुबह-शाम एक बार जरूर करें।

कैसे है फायदेमंद :

ऑयल पुलिंग के फायदे भी सूंघने और मुंह के स्वाद को ठीक करने में देखे जा सकते हैं। दरअसल, ऑयल पुलिंग ओरल हेल्थ को बढ़ावा देता है, जिससे मुंह में मौजूद दुर्गंध से छुटकारा मिल सकता है। साथ ही यह शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों और रोगाणुओं को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा ऑयल पुलिंग इंद्रियों को मजबूत करने के लिए सहायक माना जाता है। यही नहीं, गले में खराश, शुष्क चेहरा और स्वाद हानि में भी ऑयल पुलिंग की प्रक्रिया फायदेमंद हो सकती है (20)

9. अजवाइन

सामग्री : 

  • अजवाइन एक चम्मच
  • एक गिलास पानी

उपयोग करने का तरीका :

  • सबसे पहले अजवाइन को पानी में उबाल लें।
  • फिर इसे एक ग्लास में छानकर इसका सेवन करें।
  • इस प्रक्रिया को रोजाना एक बार इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

जीभ का स्वाद चले जाने और नाक से सुगंध न आने के उपचार में अजवाइन के फायदे भी उपयोगी हो सकते हैं। जैसा कि हमने लेख में बताया कि सामान्य सर्दी, फ्लू या फिर गले में सूजन के कारण सूंघने या स्वाद लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं एक शोध के मुताबिक, सर्दी, फ्लू, कफ, बंद नाक और सूजन संबंधी समस्याओं को कम करने में अजवाइन के बीज मददगार साबित हो सकते हैं (21)। ऐसे में अगर आजवाइन का सेवन किया जाए तो स्वाद और गंध से संबंधित समस्या को सुधरने में मदद मिल सकती है।

10. दालचीनी

सामग्री :

  • आधा चम्मच दालचीनी पाउडर
  • एक चम्मच शहद

उपयोग करने का तरीका :

  • आधा चम्मच दालचीनी पाउडर को एक चम्मच शहद के साथ मिलाएं।
  • इस पेस्ट को अपनी जीभ पर लगाएं और इसे लगभग 10 मिनट के लिए छोड़ दें।
  • ऐसा रोजाना दो बार कर सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

एक रिसर्च के मुताबिक, दालचीनी का उपोयग घरेलू उपाय के तौर पर बहुत लाभकारी हो सकता है। दरअसल, सर्दी, जुकाम खांसी और साइनस से राहत दिलाने में यह काफी कारगर माना जाता है। यही नहीं, इसमें एंटी फंगल (फंगस से लड़ने वाला), एंटी बैक्टीरियल (बैक्टीरियाओं से बचाने वाला) और एंटी वायरल (वायरल संक्रमण को रोकने वाल) गुण मौजूद होते हैं। इसके अलावा दालचीनी अल्जाइमर रोग के विकास को रोकने में भी मदद कर सकती है (22)। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि दालचीनी का उपयोग संक्रमण, जुकाम या फिर साइनस के कारण प्रभावित मुंह के स्वाद या सूंघने की क्षमता को ठीक करने में मदद कर सकता है।

11. पिपरमिंट

सामग्री :

  • 10-15 पिपरमिंट की पत्तियां
  • एक कप पानी
  • शहद

उपयोग करने का तरीका :

  • एक कप पानी में 10 से 15 पिपरमिंट की पत्तियां डालें।
  • इसे सॉस पैन में उबाल लें।
  • अब पानी को छान लें।
  • थोड़ा ठंडा होने पर इसमें शहद मिलाएं।
  • अब धीरे-धीरे पिएं।
  • रोजाना दो बार यह प्रक्रिया दोहराएं।

कैसे है फायदेमंद :

सर्दी जुकाम, फ्लू, साइनस या फिर संक्रमण इन सभी कारणों से सूंघने और मुंह के स्वाद लेने की शक्ति कमजोर हो सकती है। ऐसे में अगर पिपरमिंट और शहद के मिश्रण का सेवन किया जाए, तो इसमें सुधार देखे जा सकते हैं। दरअसल, एक शोध की मानें तो, पिपरमिंट की पत्तियां एंटी बैक्टीरियल गुण से समृद्ध होती हैं। इस कारण यह बैक्टीरिया से लड़ने में मदद कर सकती हैं। इसके अलावा यह सर्दी, फ्लू, बुखार, साइनस और ग्रासनली में होने वाली समस्याओं को कम करने में मदद कर सकती है (23)। इसके अलावा इसमें मौजूद मेथनॉल एंटीइंफ्लेमेटरी गुण से भी समृद्ध होता है, जो सूजन को कम करने में प्रभावी हो सकता है  (24)। चूंकि यह सभी स्वाद और गंध को प्रभावित करने वाले कारणों में शामिल हैं, इसलिए पिपरमिंट के उपयोग को भी स्वाद और गंध से जुड़ी समस्या में लाभकारी माना जा सकता है।

12. करी पत्ता

सामग्री : 

  • 10-15 करी पत्ते
  • एक गिलास पानी

उपयोग करने का तरीका :

  • एक गिलास पानी में 10 से 15 करी पत्ते डालें।
  • उन्हें लगभग 30 मिनट या उससे अधिक समय के लिए भिगोएं।
  • अब इस मिश्रण को पिएं।
  • इसे रोजाना दो बार जरूर पिएं।

कैसे है फायदेमंद :

एक शोध से पता चलता है कि करी पत्ता एंटी इंफ्लामेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुणों से समृद्ध होता है, जो सूजन और बैक्टीरियाओं के कारण होने वाली समस्याओं से निजात दिलाने में मदद कर सकता है (25)। इसके अलावा अगर करी पत्ते का उपयोग अल्जाइमर रोग में भी प्रभावी पाया गया है (26)। वहीं संक्रमण और अल्जाइमर की समस्या के कारण भी स्वाद और गंध महसूस करने की क्षमता कमजोर हो सकती है। ऐसे में माना जा सकता है कि ऊपर बताई गई समस्याओं के लक्षणों में सुधार करके स्वाद और सुगंध की क्षमता को सुधारने में करी पत्ता उपयोगी साबित हो सकता है।

13. नीलगिरी का तेल

सामग्री :

  • नीलगिरी के तेल की एक बूंद
  • एक कटोरी पानी
  • एक तौलिया

उपयोग करने का तरीका : 

  • एक कटोरी गर्म पानी में नीलगिरी के तेल की एक बूंद डालें।
  • अपने सिर को तौलिए से ढक लें और भाप लें।
  • 10 से 15 मिनट तक भाप लेने की प्रक्रिया जारी रखें।
  • रोज कम से कम एक से दो बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।

कैसे है फायदेमंद :

एनसीबीआई की वेबसाइट पर मौजूद एक रिसर्च पेपर के अनुसार, निलगिरी के तेल में एउकल्यप्टॉल  (Eucalyptol) नाम का एक तत्व मौजूद होता है, जो एंटीइंफ्लेमेटरी गुण (सूजन को कम करने वाल) प्रदर्शित करता है। यह प्रभाव ऊपरी और निचले वायुमार्ग में सूजन के कारण होने वाली समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकता है (27)। इसके अलावा, नलगिरी का तेल वायरल इंफेक्शन के कारण होने वाली सांस संबंधी समस्याओं (जैसे:- बंद नाक) में भी आराम दिला सकता है (28)। वहीं लेख में पहले ही बताया है कि सांस संबंधित रोगों और वायरल संक्रमण के कारण भी सूंघने और स्वाद की इंद्रियां प्रभावित हो सकती हैं। इस आधार पर संक्रमण और सांस संबंधी समस्याओं के कारण जीभ का स्वाद और सुंगध को पहुंचने वाली क्षति को कम करने में निलगिरी तेल का उपयोग लाभकारी माना जा सकता है। यही कारण है कि जीभ का स्वाद चले जाने और नाक से सुगंध न आने के उपचार में नीलगिरी के तेल के फायदे देखे जा सकते हैं।

14. विटामिन

सामग्री :

  • विटामिन डी

उपयोग करने का तरीका :

  • खाने में विटामिन डी का सेवन किया जा सकता है।
  • अगर चाहें तो डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी को सप्लिमेंट के तौर पर भी ले सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

खाने में विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन (जैसे- मछली, अंडे की जर्दी, दूध) या फिर डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी को सप्लिमेंट के तौर पर भी लेकर सुगंध न आने की समस्या से बचाव  किया जा सकता है। दरअसल, इससे जुड़े एक शोध से पता चलता है कि विटामिन डी की कमी से सूंघने की इंद्रियां कमजोर हो सकती है। ऐसे में विटामिन डी का सेवन इस समस्या में कुछ हद तक राहत पहुंचा सकता है (29) (30)

और भी है कुछ खास

लेख के इस भाग में हम सूंघने और मुंह के स्वाद के लिए आहार संबंधी कुछ सलाह दे रहे हैं।

सूंघने और मुंह के स्वाद के लिए आहार Diet Tips for Loss Of Smell And Taste in Hindi

जब स्वाद और गंध की इंद्रियां कमजोर हो जाती हैं, तो सभी पसंदीदा व्यंजनों के स्वाद एक जैसे लगते हैं। इन परिवर्तनों से निपटने के लिए यहां हम कुछ बेहतर आहार संबंधी सलाह दे रहे हैं। सूंघने और स्वाद से जुड़ी समस्या में जो खाद्य सहायक हो सकते हैं, वो कुछ इस प्रकार हैं : ।

  • मीट, ताजे फल, कॉफी, अंडा, कार्बोनेटेड पेय का सेवन कर सकते हैं (31)
  • मीठे पेय, कैंडी, लेमन जूस (32)
  • जिंक युक्त खाद्य पदार्थ के सेवन की सलाह दी जाती है (33)। ऐसे जिंक की पूर्ति के लिए मांस, मछली, नट्स, साबुत अनाज और फलियों का इस्तेमाल किया जा सकता है (34)
  • इसके अलावा जैसा कि हमने लेख में बताया कि विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन भी सूंघने और मुंह के स्वाद के लिए लाभकारी हो सकते हैं (29)। ऐसे में विटामिन डी युक्त मछली, अंडे की जर्दी और दूध का सेवन उपयोगी साबित हो सकता है (30)

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यहां हम मुंह का स्वाद और नाक में सुगंध न आने का उपचार बता रहे हैं।

गंध और स्वाद ठीक करने कके लिए उपचार Treatment for Loss Of Smell And Taste in Hindi

मुंह का स्वाद जाना और  नाक में सुगंध न आने का उपचार एक ओटोलरींगोलॉजिस्ट (कान, नाक, गले, सिर और गर्दन के रोगों का विशेषज्ञ) द्वारा किया जाता है (3)। इसके लिए ओटोलरींगोलॉजिस्ट नाक में सुगंध न आने का उपचार करने के लिए निम्न तरीकों को इस्तेमाल में ला सकता है।

  1. नाक में सुगंध न आने का उपचार – एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, नाक से सुगंध न आने का उपचार सीमित है। दरअसल, इसका इलाज इसके कारणों पर निर्भर करता है। जिसमें सर्जिकल और नॉन सर्जिकल दोनों शामिल है। वहीं, आयु से संबंधित और जन्म जात गंध की समस्याओं का सफलतापूर्वक इलाज नहीं किया जा सकता है (4)
    • सर्जिकल ट्रीटमेंट – इसमें पॉलिपेक्टॉमी (polypectomy) और पैनसाइनस प्रोसेड्यूर (pansinus procedures) शामिल है।

(i) पॉलिपेक्टॉमी  प्रोसेड्यूर – इस तकनीक का उपयोग आमतौर पर कोलोनिक पॉलीप्स (असामान्य टिशू का बढ़ना) को हटाने के लिए किया जाता है (35)

(ii) पैनसाइनस प्रोसेड्यूर –  इस प्रक्रिया के द्वारा स्फेनॉइड साइनस (नाक और आंख के पीछे की हड्डी) और फ्रॉन्टल साइनस (आंख और फॉरहेड के पीछे का साइनस) को खोला जाता है (36)

  • नॉन सर्जिकल ट्रीटमेंट फॉन साइनुनल स्मेल डिसॉर्डर – इसमें कॉर्टिकोइड्स का उपयोग किया जाता है। हालांकि 2 से 3 सप्ताह से ज्यादा तक इसके इस्तेमाल की सलाह नहीं दी जाती है।
  • अन्य गंध विकारों के लिए  नॉन सर्जिकल ट्रीटमेंट – इसमें एस्ट्रोजेन के साथ जिंक और विटामिन-ए दिया जाता है। इसके अलावा, मिनोसाइक्लिन (एक प्रकार की एंटीबायोटिक दवा) के उपयोग की भी सलाह दी जा सकती है।
  1. मुंह का स्वाद जाने का उपचार –  इसके लिए डॉक्टर निम्न इलाज के तरीकों को इस्तेमाल में ला सकता है, जो कुछ इस प्रकार हैं (4):
    • फिलहाल स्वाद विकार के लिए कोई स्पष्ट इलाज नहीं है। फिर भी कॉर्टिकोइड्स और विटामिन ए का इस्तेमाल इस समस्या से राहत दिलाने के लिए किया जाता है।
    • इसके अलावा, जिंक ग्लूकोनेट (3 महीने के लिए 140 मिलीग्राम प्रतिदिन) का भी उपयोग किया जा सकता है।
    • वहीं, असामान्य स्वाद जाने की स्थिति को सुधारने के लिए ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स (अवसाद की स्थिति को दूर करने वाली दवा)  का उपयोग भी किया जा सकता है।
    • स्वाद विकार के लिए क्लोनजेपम या डायजेपाम जैसी दवाओं का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

पढ़ते रहें लेख

लेख के अंत में  गंध और स्वाद को ठीक करने के कुछ टिप्स बता रहे हैं।

 रोकथाम के उपाय – Prevention Tips for Loss Of Smell And Taste in Hindi

जीभ का स्वाद चले जाने और नाक से सुगंध न आने के उपचार जानने के बाद यहां हम इससे बचाव के लिए कुछ टिप्स भी बता रहे हैं (1) (2):

  • डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें।
  • आहार में परिवर्तन करें।
  • धूम्रपान न करें।
  • नसल डिकन्जेस्टेंट (नाक खोलने की दवा) का अधिक उपयोग करने से बचें। इससे बार-बार नाक बंद होने की समस्या हो सकती है।
  • खूब पानी पिएं और हाइड्रेट रहें।
  • भाप लेने का प्रयास करें।
  • मुंह को साफ-सुथरा रखें।
  • ठंड और फ्लू जैसे संक्रमण से बचने के लिए आवश्यक सावधानी बरतें। 

स्वाद और गंध हर मनुष्य के जीवन का हिस्सा होता है। इन इंद्रियों में आए असंतुलन को ठीक करने के लिए आप लेख में बताए गए उपायों को अपना सकते हैं। इसके साथ ही खानपान संबंधी सावधानियों का भी पालन करना जरूरी है। लेख में कई आहार विकल्प भी दिए गए हैं, जिन्हें दैनिक जीवन में जगह देकर इस समस्या की रोकथाम में मदद मिल सकती है। मगर, यह जरूर ध्यान रखें कि लेख में शामिल उपाय केवल इस समस्या में राहत पहुंचा सकते हैं। पूर्ण इलाज डॉक्टरी परामर्श पर ही निर्भर करता है। इसलिए यदि घरेलू उपायों से कोई फर्क नहीं दिखाई पड़ता है तो बिना देर किए डॉक्टर से सम्पर्क करें। उम्मीद है, सभी को यह लेख पसंद आया होगा। ऐसे ही अन्य विषयों के बारे में जानने के लिए पढ़ते रहें स्टाइलक्रेज।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

टेस्ट बड्स को वापस आने में कितना समय लगता है?

एक शोध के मुताबिक हर दिन जीभ में 10 प्रतिशत स्वाद कोशिकाओं का दोबारा निर्माण होता है (37)। ऐसे में माना जा सकता है कि अगर सामान्य सर्दी-जुकाम या संक्रमण के कारण मुंह का स्वाद जाता है। तो इस स्थिति में दो से तीन सप्ताह के अंदर टेस्ट बड्स वापस आ सकते हैं।

क्या तनाव आपके स्वाद इंद्री को प्रभावित कर सकता है?

हां, अधिक समय तक तनाव ग्रस्त रहने और गंभीर मामलों में स्वाद लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है (38)

कोविड -19 से ठीक होने के बाद गंध और स्वाद कब तक ठीक होता है?

कोविड -19 से ठीक होने के बाद गंध और स्वाद ठीक होने लगभग 2 हफ्ते लग सकते हैं (39)

कोविड-19 से ठीक होने के बाद गंध और स्वाद कैसे वापस मिलेगा?

कोविड-19 से ठीक होने के बाद गंध और स्वाद को ठीक करने के लिए लेख में बताए गए घरेलू उपयों को अपना सकते हैं। वहीं फायदा न मिलने की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

कोविड -19 के बाद मुंह का स्वाद कब वापस आएगा?

कोविड -19 के बाद मुंह का स्वाद ठीक होने में 2 हफ्ते लग सकते हैं (39)

मुंह का स्वाद कैसे ठीक करें?

लेख में बताए गए घरेलू उपायों को अपना कर मुंह का स्वाद ठीक करने में मदद मिल सकती है।

क्या बेंटोनाइट क्ले की मदद से सूंघने और मुंह के स्वाद को ठीक कर सकते हैं?

हां, सूंघने और मुंह के स्वाद को सुधारने में  बेंटोनाइट क्ले मदद कर सकता है (40)

धुपाना क्या है?

धुपाना एक ऐसी विधि है, जिसमें हर्बल दवाओं का उपयोग कर धुंआ किया जाता है। यह कई प्रकार के संक्रमण को खत्म करने में मदद कर सकता है। इससे कई समस्याओं जैसे- कर्ण रोग (कान की समस्या), नासा रोग (श्वसन संबंधी समस्या), गुदा रोग (मलद्वार से जुड़ी समस्या) आदि में मदद मिल सकती है (41)

Sources

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आवृति गौतम ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। इन्होंने अपने करियर की शुरूआत डिजिटल मीडिया से ही की थी। इस क्षेत्र में इन्हें काम करते हुए दो वर्ष से ज्यादा हो गए हैं। आवृति को स्वास्थ्य विषयों पर लिखना और अलग-अलग विषयों पर विडियो बनाना खासा पसंद है। साथ ही इन्हें तरह-तरह की किताबें पढ़ने का, नई-नई जगहों पर घूमने का और गाने सुनने का भी शौक है।

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