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स्वाइन फ्लू के लक्षण और घरेलू इलाज – Home Remedies for Swine Flu in Hindi

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स्वाइन फ्लू के लक्षण और घरेलू इलाज – Home Remedies for Swine Flu in Hindi February 28, 2019

स्वाइन फ्लू के बारे में लगभग सभी ने पढ़ा और सुना है। एक समय था, जब स्वाइन फ्लू दुनियाभर में खौफ का दूसरा नाम बन गया था। यह वायरस तेजी से पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले रहा था। बेशक, अब इसका प्रकोप पहली से कम हुआ है, लेकिन यह आज भी किसी को भी बीमार करने में सक्षम है। स्वाइन फ्लू (swine flu) की चपेट में आए व्यक्ति को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही एक तरह से वह सभी से कट जाता है, क्योंकि यह संक्रामक बीमारी है, जो तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे को होती है।

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स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम स्वाइन फ्लू से जुड़ी तमाम जानकारियां लेकर आए हैं। यहां हम आपको स्वाइन फ्लू के लक्षण तो बताएंगे ही, साथ ही कुछ घरेलू उपचार भी आपके समक्ष रखेंगे, जिनकी मदद से स्वाइन फ्लू को ठीक किया जा सकता है। अंत में कुछ जरूरी टिप्स भी देंगे।

स्वाइन फ्लू क्या है? – What is Swine Flu in Hindi

स्वाइन इंफ्लुएंजा जिसे आम भाषा में स्वाइन फ्लू कहा जाता है। यह बीमारी H1N1 वायरस यानी ए टाइप के इंफ्लुएंजा वायरस के कारण फैलती है। सबसे पहले यह बीमारी 2009 में महामारी के रूप में सामने आई थी। इस वायरस की पहचान अप्रैल 2009 में मैक्सिको में हुई थी। यह वायरस सुअरों के श्वसन तंत्र के जरिए फैला था। यह नए किस्म का वायरस था और उस समय इससे लड़ने में प्रतिरक्षा प्रणाली सक्षम नहीं थी। यह वायरस एक देश से दूसरे देश तक तेजी से फैला और कई लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था (1)।

वर्ष 2010 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने घोषणा की थी कि स्वाइन फ्लू महामारी को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। हालांकि, स्वाइन फ्लू वायरस पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है और सामान्य फ्लू की तरह आज भी कई लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है, लेकिन अब यह जानलेवा साबित नहीं होता। यह मौसम बदलने पर सर्दी-खांसी के रूप में लोगों को प्रभावित करता है।

स्वाइन फ्लू क्या है, यह जानने के बाद आगे हम उन कारणों की चर्चा करेंगे, जिनके चलते स्वाइन फ्लू होता है।

स्वाइन फ्लू के कारण – Causes of Swine Flu in Hindi

स्वाइन फ्लू इंसानों से लेकर सुअरों तक को हो सकता है। इंसान निम्न कारणों से इस वायरस से संक्रमित होते हैं (2):

  • संक्रमित सुअरों के संपर्क में आना : यह सबसे आम कारण है, जिसके चलते कोई भी इंसान इस वायरस की चपेट में आ सकता है। अगर कोई सुअर स्वाइन इंफ्लुएंजा से ग्रस्त है, तो किसी भी व्यक्ति के उसके संपर्क में आने पर उसे भी यह रोग हो सकता है। आमतौर पर सुअरों का व्यापार करने वाले या उन्हें पालने वालों के इस संक्रमण की चपेट में जल्द आने की आशंका रहती है।
  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से : इस लेख के शुरुआत में बताया गया था कि यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे को तेजी से होती है। इसलिए, अगर आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है, जो H1N1 से प्रभावित है, तो उसके खांसने या छींकने पर आप पर भी इस वायरस का असर हो सकता है। किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर यह वायरस बलगम या लार के रूप में हवा में फैल जाते हैं और फिर ठोस जगह पर जाकर जम जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस अवस्था में यह वायरस करीब 24 घंटे तक सक्रिय रहता है।

आगे हम H1N1 की पहचान करने के लिए प्रमुख लक्षणों के बारे में बता रहे हैं :

स्वाइन फ्लू के लक्षण – Symptoms of Swine Flu in Hindi

Symptoms of Swine Flu in Hindi Pinit

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स्वाइन फ्लू सिम्पटम्स भी सामान्य फ्लू की तरह ही होते हैं। संक्रमण के प्रभाव में आने के दो-चार दिन के अंदर ही ये लक्षण नजर आने लगते हैं। आमतौर पर ये लक्षण दो सप्ताह तक रहते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में अधिक समय तक रह सकते हैं। स्वाइन फ्लू के लक्षण कुछ इस प्रकार होते हैं (3):

  • बुखार यानी 100.4 फारेनहाइट से अधिक
  • सर्दी
  • खांसी
  • गले में खराश
  • नाक बहना
  • लाल आंखें
  • सिर में दर्द
  • थकावट
  • दस्त
  • उल्टी
बच्चों में नजर आने वाले गंभीर लक्षण :
  • तेज या मुश्किल से सांस लेना
  • त्वचा का रंग नीला या भूरा होना
  • पर्याप्त तरल पदार्थ न पीना
  • लगातार उल्टी
  • चिड़चिड़ापन
  • गंभीर रूप से खांसी
  • बुखार के साथ रैशेज

स्वाइन फ्लू सिम्पटम्स जानने के बाद हम स्वाइन फ्लू का इलाज प्राकृतिक रूप से करने के लिए घरेलू उपाय की चर्चा करेंगे।

स्वाइन फ्लू के घरेलू इलाज – Home Remedies for Swine Flu in Hindi

1. तुलसी

Basil Pinit

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सामग्री :
  • तुलसी की चार-पांच पत्तियां
प्रयोग की विधि :
  • इन पत्तियों को अच्छी तरह धोकर सेवन करें।
कब सेवन करें :
  • प्रतिदिन सुबह खाली पेट सेवन करना फायदेमंद रहेगा।
लाभ :

तुलसी एक आयुर्वेदिक औषधि है और इसका पौधा लगभग हर भारतीय घर में पाया जाता है। तुलसी में प्राकृतिक रूप से एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटी बैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं। इसके सेवन से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। हालांकि, तुलसी H1N1 वायरस को ठीक तो नहीं कर सकती, लेकिन उससे लड़ने के लिए शरीर को तैयार जरूर कर सकती है। कई वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि तुलसी में यूजेनॉल नामक यौगिक पाया जाता है, जो स्वाइन फ्लू में कारगर है (4)। स्वाइन फ्लू का इलाज तुलसी की मदद से आसानी से किया जा सकता है।

2. लहसुन

सामग्री :
  • लहसुन की दो-तीन कलियां
  • एक गिलास पानी
प्रयोग की विधि :
  • इन्हें कच्चा चबाकर खाया जा सकता है।
  • आप पानी को हल्का गुनगुना कर, उसके साथ भी लहसुन का सेवन कर सकते हैं।
कब सेवन करें :
  • रोज सुबह इसका सेवन करें।
लाभ :

बेशक लहसुन का स्वाद कड़वा और इसकी गंध अच्छी नहीं होती, लेकिन गुणों के मामले में इसका कोई मुकाबला नहीं है। इसमें एंटीवायरल, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं, जो स्वाइन फ्लू से लड़ने में मदद करते हैं। इसके सेवन से रोगप्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है (5)।

3. गिलोय

Giloy Pinit

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सामग्री :
  • गिलोय की एक फुट लंबी शाखा
  • तुलसी की पांच-छह पत्तियां
  • काली मिर्च, मिश्री, सेंधा नमक, काला नमक (स्वादानुसार)
  • थोड़ा-सा पानी
प्रयोग की विधि :
  • गिलोय की शाखा और तुलसी की पत्तियों को पानी में डाल दें।
  • अब इसे करीब 15-20 मिनट तक उबालें।
  • इसके बाद काली मिर्च, काला नमक, सेंधा नमक और मिश्री को इस पानी में मिक्स कर दें।
  • जब पानी हल्का गुनगुना हो जाए, तो इसका सेवन करें।
कब सेवन करें :
  • आप प्रतिदिन कम से कम एक बार यह पानी पी सकते हैं।
लाभ :

आयुर्वेद में गिलोय को गुणकारी औषधि माना गया है। इसके सेवन से स्वाइन फ्लू सहित हर तरह के बुखार का इलाज संभव है। यह दिव्य औषधि शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करती है (6)।

4. कपूर

प्रक्रिया नंबर-1

सामग्री :
  • गोली के आकार का कपूर
प्रयोग की विधि :
  • बड़े इसे पानी के साथ निगल सकते हैं।
  • बच्चों को यह केले या आलू में मिलाकर देना चाहिए।

प्रक्रिया नंबर-2

सामग्री :
  • पांच ग्राम कपूर
  • पांच ग्राम इलायची
प्रयोग की विधि :
  • कपूर व इलायची को एक कपड़े में बांधकर मसल दें।
  • अब थोड़ी-थोड़ी देर में इसकी सुगंध लेते रहें।
लाभ :

जहां एक तरफ कपूर को जलाने से घर में कीड़े-मकोड़े और मच्छर नहीं आते, वहीं इसके सेवन से स्वाइन फ्लू जैसी बीमारी से निपटा जा सकता है। कूपर में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह शरीर में जमा हो चुके फ्री रेडिकल्स को खत्म करने का काम करता है (7)। साथ ही इसमें एंटीसेप्टीक गुण भी होता है, जो संक्रमण और दर्द से राहत दिलाता है (8)। इस प्रकार कह सकते हैं कि स्वाइन फ्लू का इलाज करने में कपूर सक्षम है।

5. विटामिन-सी

vitamin C Pinit

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सामग्री :
  • विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ
प्रयोग की विधि :
  • अपने भोजन में विटामिन-सी वाले खाद्य पदार्थ को शामिल करें।
कब सेवन करें :
  • प्रतिदिन सेवन करने से जल्द फायदा होगा।
लाभ :

विटामिन-सी में एंटीवायरल और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। इसके सेवन से किसी भी प्रकार के बुखार से निपटा जा सकता है। साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बेहतर करता है। शरीर में विटामिन-सी की कमी होने से टी सेल (श्वेत रक्त कोशिकाएं) कम होने लगती हैं। इसलिए, स्वाइन फ्लू जैसी बीमारी में इसका सेवन करना जरूरी होता है, क्योंकि श्वेत रक्त कोशिकाएं की कमी होने पर शरीर किसी भी तरह की बीमारी से लड़ने में सक्षम नहीं रहता। वैज्ञानिकों ने लैब में किए गए शोध के जरिए इसकी पुष्टि की है (9)। नींबू, आंवला, अंगूर और संतरे में विटामिन-सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

6. एलोवेरा

सामग्री :
  • एक चम्मच एलोवेरा जेल
  • एक गिलास पानी
प्रयोग की विधि :
  • पानी के साथ एलोवेरा जेल का सेवन करें।
कब सेवन करें :
  • दिन में एक बार इसका सेवन किया जा सकता है।
लाभ :

इन दिनों एलोवेरा का प्रयोग काफी बढ़ गया है। दवाइयों के साथ-साथ ब्यूटी प्रोडक्ट्स में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, स्वास्थ्य की बात करें, तो उस लिहाज से भी एलोवेरा का काफी महत्व है। वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि एलोवेरा जेल में एंटी इंफ्लुएंजा गुण होते हैं। साथ ही इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं (10)।

7. नीम

Azadirachta indica Pinit

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सामग्री :
  • नीम की तीन-चार पत्तियां
प्रयोग की विधि :
  • प्रतिदिन नीम की पत्तियों को चबाने से फायदा होता है।
कब सेवन करें :
  • दिन में कम से कम एक बार इसका सेवन किया जा सकता है।
लाभ :

नीम की पत्तियों में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं। इसके सेवन से न सिर्फ बुखार कम होता है, बल्कि खून भी साफ होता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है (11)।

8. हल्दी

सामग्री :
  • एक चम्मच हल्दी पाउडर
  • एक गिलास दूध
प्रयोग की विधि :
  • सबसे पहले दूध को गर्म कर लें।
  • फिर इसमें हल्दी मिक्स करके पिएं।
कब सेवन करें :
  • हर रात सोने से पहले हल्दी का दूध पीना चाहिए।
लाभ :

आयुर्वेद में हल्दी का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। विभिन्न बीमारियों के लिए वर्षों से इसका उपयोग किया जा रहा है। इसमें करक्यूमिन गुण पाया जाता है, जो एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीवायरल, एंटीफंगल व एंटीबैक्टीरियल की तरह काम करता है। हल्दी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर कर बीमारियों से लड़ने में मदद करती है (12)। दूध में डालने से इसके औषधीय गुण बढ़ जाते हैं। इसलिए, स्वाइन फ्लू होने पर इसका सेवन करना फायदेमंद हो सकता है।

स्वाइन फ्लू होने पर क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिएं, आगे हम उसी बारे में बता रहे हैं।

स्वाइन फ्लू के लिए कुछ टिप्स – Other Tips for Swine Flu in Hindi

  • बाहर की तली-भुनी और जंक फूड की जगह घर में बना ताजा खाना खाएं।
  • ताजे फलों व सब्जियों का सेवन जरूर करें।
  • बासी चीजें और फ्रिज में कई दिनों से रखी चीजों का सेवन न करें।
  • जितना हो सके तरल पदार्थ लें यानी पानी और जूस का सेवन करें। इससे आप हाइड्रेट रहेंगे और पाचन तंत्र भी अच्छी तरह काम करेगा।
  • नियमित रूप से योग प्रशिक्षक की देखरेख में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले योगाभ्यास करें। इनमें ताड़ासन, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, उत्तानपादासन आदि शामिल हैं।
  • जितना हो सके आराम करें और खुद को जितना हो सके हाइजीन रखें। कुछ खाने से पहले हाथों को जरूर साफ करें।
  • अगर घर से बाहर निकलें, तो मास्क जरूर पहनें।
  • जितना हो सके आराम करें, ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बीमारी से लड़ने में मदद मिले।

आर्टिकल के अंतिम भाग में हम बता रहे हैं कि किस तरह स्वाइन फ्लू से बचा जा सकता है।

स्वाइन फ्लू से बचाव – Prevention Tips for Swine Flu in Hindi

जब मौसम बदलता है, तब स्वाइन फ्लू होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। इस दौरान, अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है, ताकि इस बीमारी से बचा जा सके।

  • इसका सबसे पहला बचाव टीकाकरण है। छह माह से अधिक उम्र के सभी लोगों को स्वाइन फ्लू का टीका लगवाना चाहिए। इससे विभिन्न तरह के इंफ्लुएंजा वायरस से सुरक्षा मिलती है।
  • कुछ खाने से पहले और कहीं बाहर से घर वापस आने के बाद हाथों को अच्छी तरह धोएं।
  • छींकते या खांसते समय मुंह के आगे रूमाल रखें। अगर रूमाल नहीं है, तो हाथ रखें, लेकिन ध्यान रहे कि इसके बाद हाथ मुंह, नाक और आंखों को हाथ से न छुएं। ऐसा करने पर फ्लू होने की आशंका बढ़ जाती है।
  • अगर सामान्य बुखार है या फिर जुकाम और गला खराब है, तो घर में रहकर आराम करें।
  • बिना कोई देरी किए डॉक्टर को दिखाएं और उचित दवा का सेवन करें।
  • अनजान लोगों से हाथ मिलाने या गले मिलने से बचें।
  • अपने आसपास हमेशा सफाई रखें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
  • अगर आपके आसपास किसी को स्वाइन फ्लू है, तो उससे दूर रहें, क्योंकि यह वायरस एक से दूसरे में तेजी से फैलता है।
  • भीड़-भाड़ वाली जगह पर जाने या फिर भीड़ में जाने से बचें।

बेशक, स्वाइन फ्लू अब पहले की तरह खतरनाक नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है। साधारण फ्लू से भी संक्रमित होने पर पूरा इलाज करवाना जरूरी है, वरना यह स्वाइन फ्लू का कारण बन सकता है। इसकी अनदेखी करने पर यह गंभीर रूप ले सकता है। इस आर्टिकल में बताए गए घरेलू उपचार स्वाइन फ्लू को ठीक करने में काफी हद तक मददगार साबित हो सकते हैं। अगर इन उपायों को आजमाने के बाद भी स्वास्थ्य में कोई फर्क नजर नहीं आता, तो तुरंत डॉक्टर से चेकअप करवाएं और तय समय पर दवाइयों का सेवन करें।

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