तांबे के बर्तन में पानी पीने के फायदे और नुकसान – Benefits of Drinking Water from Copper Vessels and Side Effects in Hindi

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पहले खाने-पीने का सामान तांबे के बर्तनों में रखा जाता था, लेकिन समय के साथ यह चलन बदल गया है। आज लोग स्टील, कांच और प्लास्टिक के बर्तनों को अहमियत देते हैं। वजह यह है कि इन्हें साफ करना आसान है और किफायती भी हैं। वहीं, अगर सेहत के नजरिए से देखें, तो आज भी बड़े-बुजुर्ग तांबे के बर्तन में रखे पानी को स्वास्थ्यवर्धक मानते हैं। कहीं न कहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस बात को सही पाया गया है। यही वजह है कि स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम तांबे के बर्तन में पानी पीने के फायदे बता रहे हैं। साथ ही यहां हम तांबे के बर्तन में पानी पीने के नुकसान पर भी चर्चा करेंगे, ताकि तांबे के बर्तन की उपयोगिता को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

शुरू करते हैं लेख

चलिए, सबसे पहले तांबे के बर्तन में पानी पीने के फायदे समझ लेते हैं।

तांबे के बर्तन में पानी पीने के फायदे – Benefits of Drinking Water from Copper Vessels in Hindi

यहां हम क्रमवार तांबे के बर्तन में पानी पीने के फायदे बताएंगे, ताकि आप यह समझ सकें कि किन-किन समस्याओं में इसे उपयोग में लाना लाभकारी माना जाता है। साथ ही आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि यह केवल एक घरेलू उपाय है, जो नीचे बताई जाने वाली समस्याओं में राहत पहुंचा सकता है। समस्या का पूर्ण इलाज करने के लिए डॉक्टरी सलाह अतिआवश्यक है। तो आइए कॉपर बोतल में पानी पीने के फायदे क्या-क्या हैं, यह समझ लेते हैं।

1. थायराइड में सहायक

थायराइड की समस्या में कॉपर बोतल में पानी पीना फायदेमंद माना जाता है। दो अलग-अलग शोध में इस बात की पुष्टि की गई है। दरअसल, जर्नल ऑफ हेल्थ, पॉप्युलेशन एंड न्यूट्रीशन के शोध के मुताबिक तांबे के बर्तन में रखे पानी में तांबा शामिल हो जाता है (1)। वहीं बच्चों में हाइपोथायराइडिज्म (थायरायड हार्मोन की कमी) से संबंधित एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की साइट पर प्रकाशित एक शोध में कॉपर को थायराइड हार्मोन के लिए अहम बताया गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि शरीर में कॉपर की कमी से हाइपोथायराइडिज्म की समस्या हो सकती है (2)। इस आधार पर माना जा सकता है कि तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से हाइपोथायराइडिज्म की समस्या से राहत मिल सकती है। इसके बावजूद, थायराइड के इलाज के लिए डॉक्टरी सलाह अतिआवश्यक है।

2. अर्थराइटिस में लाभकारी

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से अर्थराइटिस की समस्या में भी राहत पाई जा सकती है। अर्थराइटिस से संबंधित एनसीबीआई की साइट पर उपलब्ध एक शोध के मुताबिक, कॉपर युक्त साल्ट के उपयोग से रुमेटाइड अर्थराइटिस और गाउटी अर्थराइटिस की समस्या में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है (3)। वहीं आपको लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि तांबे के बर्तन में रखे पानी में तांबा अपने आप ही शामिल हो जाता है (1)। इस आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि आर्थराइटिस की समस्या में भी कॉपर बोतल में पानी पीने के फायदे हासिल किए जा सकते हैं। फिर भी इसके साथ डॉक्टरी सलाह और इलाज को वरीयता दें।

3. वजन घटाने में मददगार

वजन घटाने के मामले में भी तांबे के बर्तन में पीने के फायदे सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित कर सकते हैं। दरअसल, मोटापे से संबंधित एनसीबीआई की साइट पर मौजूद एक शोध में स्पष्ट रूप से माना गया है कि तांबा चर्बी को गलाने में अहम भूमिका निभा सकता है (4)। वहीं तांबे के बर्तन में रखे पानी में तांबे की मौजूदगी के कारण यह मोटापे की समस्या में राहत पहुंचाने का काम कर सकता है। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि बढ़ते हुए वजन को नियंत्रित करने के उपाय में तांबे के बर्तन में रखा पानी लाभकारी हो सकता है।

4. पेट से जुड़ी समस्या को दूर रखे

पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर रखने के मामले में भी तांबे के बर्तन में रखा पानी उपयोगी साबित हो सकता है। इस बात का प्रमाण बेनिफिट्स ऑफ ड्रिंकिंग वाटर इन कॉपर जग से जुड़े एनसीबीआई की ओर से उपलब्ध एक शोध से मिलता है। शोध में जिक्र मिलता है कि पेट से जुड़ी कई समस्याओं की मूल वजह गंदा पानी हो सकता है। वहीं तांबे में पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है। इससे गंदे पानी के कारण होने वाली डायरिया की समस्या से बचाव संभव है (1)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर रखने के मामले में भी तांबे के बर्तन में रखा पानी फायदेमंद हो सकता है।

5. एनीमिया से करे बचाव

एनीमिया से बचाव के लिए भी तांबे के बर्तन में पानी पीना लाभकारी माना जा सकता है। दरअसल, एनीमिया की समस्या का एक मुख्य कारण तांबे की कमी भी हो सकती है। इसके उपचार के लिए तांबे के सप्लीमेंट को लेने की सलाह दी जाती है (5)। ऐसे में तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से इस कमी को पूरा करने में कुछ हद तक मदद मिल सकती है। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि तांबे की कमी के कारण होने वाली एनीमिया से बचाव में तांबे के बर्तन में रखा पानी सहायक हो सकता है। फिर भी एनीमिया के पूर्ण उपचार के लिए डॉक्टरी सलाह अतिआवश्यक है।

6. हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी

हृदय स्वास्थ्य के लिए भी तांबे के बर्तन में रखा पानी लाभदायक साबित हो सकता है। एनसीबीआई की साइट पर मौजूद शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि कॉपर की कमी के कारण हाई बीपी और आर्टीरियोस्केलेरेसिस (धमियों में वसा का जमाव) की समस्या हो सकती है। यह दोनों ही समस्या हृदय स्वास्थ्य से जुड़ी हुई हैं (6)। ऐसे में तांबे के बर्तन में रखे पानी में शामिल तांबे के कारण यह तांबे की पूर्ति कर हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा हृदय स्वास्थ्य के लिए डॉक्टरी इलाज को भी जरूर अपनाएं।

7. गर्भावस्था में फायदेमंद

गर्भावस्था में भी तांबे के बर्तन में रखा पानी सहायक साबित हो सकता है। वजह यह है कि तांबे के बर्तन में पानी रखने से पानी में भी तांबा शामिल हो जाता है (1)। इस कारण यह गर्भावस्था में तांबे का एक बेहतरीन स्रोत साबित हो सकता है। वहीं गर्भावस्था में तांबे की कमी के कारण आकस्मिक गर्भपात, जन्मजात विकार, गर्भावस्था में हाई बीपी, प्लेसेंटा का गर्भाशय से अलग होना और समय पूर्व गर्भाशय का मुंह खुलना जैसी समस्याएं हो सकती है (7)। ऐसे में तांबे के स्रोत के रूप में तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीना लाभकारी माना जा सकता है। हालांकि तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से पहले अपने चिकित्सक से जरूर बात करें।

8. पीलिया से राहत दिलाए

पीलिया से राहत पाने के लिए भी तांबे के बर्तन में रखा पानी कुछ हद तक फायदेमंद साबित हो सकता है। यह बात हाइपरबिलिरुबिनेमिया (बिलिरुबिन रसायन की अधिकता, जो लाल रक्त कणिकाओं के टूटने से बनता है) की समस्या से संबंधित एक शोध से स्पष्ट होती है। शोध में जिक्र मिलता है कि हाइपरबिलिरुबिनेमिया के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली फोटोथेरेपी शरीर में बिलिरुबिन, कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा को घटाकर जिंक और कॉपर की मात्रा को बढ़ाती है। इससे हाइपरबिलिरुबिनेमिया के कारण बच्चों में होने वाली पीलिया की समस्या में राहत मिल सकती है। वहीं, शोध में यह भी माना गया है कि कॉपर की कमी के कारण एनीमिया (लाल रक्त कणिकाओं की कमी) और लुकोपीनिया (श्वेत रक्त कणिकाओं की कमी) की समस्या हो सकती है (8)। वहीं, पीलिया की समस्या में लाल रक्त कणिकाओं का नष्ट होना अहम वजह मानी जाती है (9)।

इस आधार पर यह माना जा सकता है कि तांबे के बर्तन में रखे तांबे युक्त पानी को पीने से बिलिरुबिन को कम करने में मदद मिल सकती है। इस तरह यह पीलीया की समस्या में कुछ हद तक सहायक साबित हो सकता है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि कॉपर की अधिकता लिवर क्षति पैदा कर सकती है, जो पीलिया के जोखिम की वजह बन सकती है (10)। इसलिए तांबे के बर्तन में रखे पानी को संतुलित मात्रा में ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

9. त्वचा के लिए भी फायदेमंद

त्वचा के लिए भी तांबे के बर्तन में रखे पानी को उपयोगी माना जा सकता है। दरअसल, आपको लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि तांबे के बर्तन में रखे पाने में भी तांबा अपने आप ही शामिल हो जाता है। इस कारण तांबे के बर्तन में रखा पानी एक अच्छा तांबे का स्रोत साबित हो सकता है (1)। वहीं, करेंट केमिकल बायोलोजी के एक शोध के मुताबिक तांबा त्वचा के लिए एक आवश्यक मिनरल माना गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि यह त्वचा के स्वास्थ्य को बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है। इस कारण कई त्वचा से संबंधित प्रोडक्ट में भी कॉपर और कॉपर युक्त यौगिकों का इस्तेमाल किया जाता है। यह फाइन लाइन और झुर्रियों को दूर करने में भी मददगार साबित हो सकता है (11)। इस आधार पर त्वचा स्वास्थ्य के लिए भी बेनिफिट्स ऑफ ड्रिंकिंग वाटर इन कॉपर जग उपयोगी माने जा सकते हैं।

आगे पढ़ें लेख

लेख के अगले भाग में तांबे के बर्तन में पानी पीने के नुकसान के बारे में जानेंगे।

तांबे के बर्तन में पानी पीने के नुकसान – Side Effects of Drinking Water from Copper Vessels in Hindi

हालांकि, तांबे के बर्तन में पानी पीने के कारण शरीर में कॉपर की अधिकता होने की संभावना बहुत कम होती है, फिर भी कुछ स्थितियों में यह कॉपर की अधिकता का कारण बन सकता है। नीचे दिए बिन्दुओं के माध्यम से हम तांबे के बर्तन में पानी पीने के नुकसान समझ सकते हैं, जो कॉपर की अधिकता या कुछ विशेष स्थितियों में देखने को मिल सकते हैं (10)।

  • तांबे की अधिकता के कारण पेट में गैस की समस्या हो सकती है।
  • तांबे की अधिकता होने की स्थिति में आंत में घाव यानी बोवेल इरोजन की स्थिति पैदा हो सकती है।
  • वहीं गंभीर स्थितियों में तांबे की अधिकता विषाक्त का कारण बन सकती है, जिसके कारण हृदय का संकुचित होना, कोमा या मृत्यु की स्थिति पैदा हो सकती है।
  • कॉपर की अधिकता के कारण लिवर से जुड़ी क्षति देखने को मिल सकती है।
  • विल्सन डिजीज (एक जन्मजात समस्या, जिसमें शरीर में कॉपर अधिक मात्रा में बनता है) के रोगियों को तांबे के बर्तन में पानी पीने से बचना चाहिए।

तांबे के बर्तन में पानी पीना बेशक एक पुराना घरेलू नुस्खा है, लेकिन कुछ मामलों में यह वाकई काम कर सकता है। किन-किन समस्याओं में बेनिफिट्स ऑफ ड्रिंकिंग वाटर इन कॉपर जग हासिल किए जा सकते हैं, यह लेख में विस्तार से बताया गया है। इन्हें अच्छी तरह समझ कर तांबे के बर्तन में रखे पानी को उपयोग में लाया जा सकता है। मगर, इसके फायदों को देखते हुए तांबे के बर्तन में पानी पीने के नुकसान को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए एक बार लेख को अच्छे से पढ़ें और कॉपर बोतल में पानी पीने के फायदे और नुकसान दोनों ही पहलुओं को अच्छे से समझें। उसके बाद ही इसे उपयोग में लाएं। उम्मीद है यह लेख आपको पसंद आया होगा। ऐसे ही अन्य ज्ञानवर्धक विषयों के बारे में जानने के लिए पढ़ते रहें स्टाइलक्रेज।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या हम तांबे का पानी रोज पी सकते हैं?

हां, तांबे के बर्तन में रखे तांबा युक्त पानी को नियमित इस्तेमाल में लाया जा सकता है (1)।

एक दिन में कितना तांबा युक्त पानी पीना चाहिए?

डब्ल्यूएचओ के अनुसार एक दिन में 2 मिलीग्राम कॉपर युक्त एक लीटर पानी को पीने के लिए सुरक्षित माना जाता है। वहीं, कॉपर के बर्तन में रखे एक लीटर पानी में करीब 0.1 मिलीग्राम कॉपर मौजूद रहता है (1)। ऐसे में सुरक्षा के नजरिए से एक दिन में तांबे के बर्तन में रखे करीब एक लीटर पानी को दिन में पीने के लिए सुरक्षित माना जा सकता है।

क्या तांबा पानी को साफ करता है?

हां, तांबा पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट कर उसे साफ कर सकता है (1)।

क्या तांबा युक्त पानी पीना सुरक्षित है?

हां, 2 मिलीग्राम कॉपर युक्त एक लीटर पानी पीने के लिए सुरक्षित माना जा सकता है (1)।

क्या हम तांबा युक्त पानी को गर्म कर सकते हैं?

नहीं, तांबा युक्त पानी को गर्म नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पानी में कॉपर की अधिकता हो सकती है (12)।

क्या तांबा त्वचा के माध्यम से अवशोषित हो सकता है?

हां, तांबा त्वचा के माध्यम से सीधे अवशोषित हो सकता है (11)।

क्या तांबे में घाव भरने का गुण होता है?

हां, तांबे में घाव भरने का गुण मौजूद होता है (11)।

क्या कॉपर शरीर के लिए बुरा है?

नहीं, कॉपर एक जरूरी मिनरल है, जो कई शारीरिक समस्याओं में लाभकारी माना जाता है। इस संबंध में आपको लेख में विस्तृत जानकारी दी जा चुकी है। वहीं, कॉपर की जरूरत से अधिक शरीर में मौजूदगी विषाक्तता का भी कारण बन सकती है, जो शरीर के लिए हानिकारक है (10)।

संदर्भ (Source):

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Ankit Rastogi

अंकित रस्तोगी ने साल 2013 में हिसार यूनिवर्सिटी, हरियाणा से एमए मास कॉम की डिग्री हासिल की है। वहीं, इन्होंने अपने स्नातक के पहले वर्ष में कदम रखते ही टीवी और प्रिंट मीडिया का अनुभव लेना शुरू कर दिया था। वहीं, प्रोफेसनल तौर पर इन्हें इस फील्ड में करीब 6 सालों का अनुभव है। प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में इन्होंने संपादन का काम किया है। कई डिजिटल वेबसाइट पर इनके राजनीतिक, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल से संबंधित कई लेख प्रकाशित हुए हैं। इनकी मुख्य रुचि फीचर लेखन में है। इन्हें गीत सुनने और गाने के साथ-साथ कई तरह के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाने का शौक भी हैं।

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