आंतों में सूजन (अल्सरेटिव कोलाइटिस) के कारण, लक्षण और इलाज -Ulcerative Colitis in Hindi

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पेट हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसमें हल्की-सी भी समस्या, हमारे पूरे जीवन शैली को प्रभावित करने लगती है। इन्हीं समस्याओं में से एक है अल्सरेटिव कोलाइटिस, जिसे आम भाषा में आंतों में सूजन कहा जाता है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम इसी बीमारी के बारे में जानकारी लेकर आए हैं। यहां हम आंतों में सूजन के कारण, लक्षण और इलाज के बारे में बताने के साथ-साथ आंतों की सूजन का घरेलू उपचार भी बताने वाले हैं।

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लेख के सबसे पहले भाग में जानेंगे अल्सरेटिव कोलाइटिस आखिर है क्या।

अल्सरेटिव कोलाइटिस क्या है? – What is Ulcerative Colitis in Hindi

अल्सरेटिव कोलाइटिस, आंतों से संबंधित एक बीमारी है जो, बड़ी आंत व मलाशय में सूजन और घाव के कारण होती है, जिसे अल्सर कहा जाता है। यह बीमारी इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज यानी ये सूजन आंत्र रोग के समूह में से एक है। वैसे तो अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन सामान्य तौर पर 15 से 30 साल की उम्र के बीच में इसके होने की संभावना अधिक होती है। कई बार तो यह समस्या आनुवंशिक भी हो सकती है (1)। लेख में आगे हमने इसके कारण और लक्षणों के बारे में विस्तार से चर्चा की है।

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अब बारी है आंतों में सूजन के कारण जानने की।

आंतों में सूजन के कारण – Causes of Ulcerative Colitis in Hindi

अगर बात करें अल्सरेटिव कोलाइटिस के कारण की, तो बता दें कि फिलहाल अभी इसके सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या को बढ़ाने में निम्नलिखित कारक भूमिका निभा सकते हैं, जिसके बारे में हम नीचे विस्तृत रूप से जानकारी दे रहे हैं (2) :

  • आनुवंशिक: कई बार आंतों की सूजन का कारण आनुवंशिक भी हो सकता है। शोध की मानें तो कुछ हद तक जीन भी अल्सरेटिव कोलाइटिस के होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं।
  • असामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया: कुछ मामलों में इम्यून सिस्टम की असामान्य प्रतिक्रिया भी अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, क्योंकि इससे बड़ी आंत में सूजन आ सकती है।
  • माइक्रोबायोम: माइक्रोबायोम उन बैक्टीरिया, वायरस और फंगी को कहा जाता है, जो पाचन तंत्र में मौजूद होकर पाचन क्रिया में मदद करते हैं। एक शोध की मानें तो स्वस्थ व अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित लोगों केमाइक्रोबायोम में अंतर पाया गया। ऐसे में माइक्रोबायोम को भी पेट की आंतों में सूजन आने की समस्या के लिए जिम्मेदार माना जा सकता है। फिलहाल, इस विषय पर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।
  • वातावरण: विशेषज्ञों का मानना ​​है कि किसी व्यक्ति का परिवेश और बाहरी कारक भी अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या को जन्म देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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आंतों में सूजन के कारण जानने के बाद जानेंगे अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षणों के बारे में।

अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षण – Symptoms of Ulcerative Colitis in Hindi

आंत में सूजन के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। नीचे हम क्रमवार तरीके से अल्सरेटिव कोलाइटिस के सामान्य लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जो इस प्रकार हैं (2):

बता दें कि आंतों में सूजन के गंभीर लक्षणों में एक दिन में 6 से अधिक बार मल त्याग करना और अधिकांश समय मल के साथ खून निकलना शामिल हो सकता है। वहीं, अधिक गंभीर मामलों में एक दिन में 10 से अधिक बार खूनी मल त्याग हो सकता है। इन लक्षणों के अलावा, अल्सरेटिव कोलाइटिस के कुछ अन्य लक्षण भी हैं, जो इस समस्या के अधिक गंभीर होने पर दिखाई दे सकते हैं (2):

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लेख के अगले भाग में जानते हैं अल्सरेटिव कोलाइटिस के जोखिम कारक क्या होते हैं।

अल्सरेटिव कोलाइटिस के जोखिम कारक – Risk Factors of Ulcerative Colitis in Hindi

अल्सरेटिव कोलाइटिस के निम्नलिखित जोखिम कारक कुछ इस प्रकार हैं (3) :

  • पारिवारिक इतिहास: अगर परिवार में किसी सदस्य को आंतों में सूजन की समस्या है, तो ऐसे में इस समस्या के होने का जोखिम 4 गुना अधिक बढ़ जाता है।
  • पर्यावरण प्रभाव: अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या को बढ़ाने में पर्यावरणीय कारक भी जिम्मेदार माना गया है।
  • धूम्रपान: सिगरेट या धूम्रपान भी आंतों में सूजन की समस्या को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
  • दवाइयों का सेवन: इसके अलावा कई तरह की दवाएं, जैसे- गर्भ निरोधक, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी या नॉन-स्टेरायडल और एंटी इंफ्लेमेटरी दवाएं भी अल्सरेटिव कोलाइटिस के जोखिम कारक माने जाते हैं।

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स्क्रॉल कर पढ़ें आंतों की सूजन का इलाज किस प्रकार से किया जा सकता है।

अल्सरेटिव कोलाइटिस का निदान- Diagnosis of Ulcerative Colitis in Hindi

आंतों में सूजन का निदान कई प्रकार से किया जा सकता है। नीचे हम क्रमवार तरीके से अल्सरेटिव कोलाइटिस का निदान बता रहे हैं (4):

  • मेडिकल हिस्ट्री: इस प्रक्रिया में डॉक्टर मरीज से उस समस्या से जुड़े लक्षणों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में पूछ सकता है। इसके अलावा, डॉक्टर जीवनशैली से जुड़े सवाल जैसे धूम्रपान करते हैं या नहीं, किस तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं आदि पूछ सकता है।
  • शारीरिक परीक्षण : इसमें डॉक्टर आंतों की सूजन के सटीक कारणों को जानने के लिए रक्तचाप की समस्या, हृदय गति व तापमान की जांच कर सकता है। इसके अलावा, पेट के भीतर की स्थिति जानने के लिए स्टेथोस्कोप का उपयोग भी किया जा सकता है।
  • डिजिटल रेक्टल टेस्ट: इन सबके अलावा, चिकित्सक मल में रक्त की जांच के लिए डिजिटल रेक्टल टेस्ट की भी सलाह दे सकता है। इसमें डॉक्टर ग्लव्स पहनकर गुदा में उंगली डालकर असमानता का पता लगाते हैं।
  • ब्लड टेस्ट : इसके माध्यम से डॉक्टर अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षणों और एनीमिया की समस्या से जुड़ी जटिलताओं के बारे में पता लगा सकता है। यही नहीं ब्लड टेस्ट के माध्यम से संक्रमण या अन्य पाचन रोगों की भी जानकारी मिल सकती है।
  • स्टूल टेस्ट : आंतों में सूजन के लक्षणों की जांच के लिए डॉक्टर मल परीक्षण का भी उपयोग कर सकते हैं। इसके जरिए संक्रमण का पता लगाया जा सकता है, जो अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षणों का कारण हो सकता है।
  • एंडोस्कोपी टेस्ट : एंडोस्कोपी का उपयोग करके डॉक्टर यह पता लगा सकते हैं कि अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या कितनी गंभीर है और बड़ी आंत इस समस्या से कितनी प्रभावित हुई है। इसमें कैमरा लगे एक उपकरण की मदद से शरीर के अंदरूनी अंगों को देखा जाता है।

आगे है और जानकारी

आंतों में सूजन से निदान के बाद चलिए जानते हैं आंतों की सूजन का इलाज कैसे किया जाता है।

अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज – Treatment of Ulcerative Colitis in Hindi

आंतों की सूजन का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितना गंभीर है। इसके अनुसार ही डॉक्टर दवाओं और सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। चलिए जानते हैं अल्सरेटिव कोलाइटिस ट्रीटमेंट किस-किस प्रकार से की जा सकती है (5):

  • दवाइयां : आंतों की सूजन का इलाज करने के लिए डॉक्टर कुछ दवाइयों के सेवन की सलाह दे सकते हैं। ये दवाइयां बड़ी आंत की सूजन को कम करने करने के साथ-साथ अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षणों को कम करने में मददगार साबित हो सकती हैं।
  • सर्जरी : समस्या की गंभीरता के आधार पर डॉक्टर कुछ खास प्रकार की सर्जरी, जैसे इलियोअनल रिसर्वर सर्जरी या इलियोस्टॉमी की सलाह दे सकते हैं।
  • इलियोअनल रिसर्वर सर्जरी : इस सर्जरी में सर्जन छोटी आंत के अंतिम भाग से एक आंतरिक थैली बनाते हैं, जिसे इलियम कहा जाता है। फिर उस थैली को गुदा से जोड़ा जाता है। इसके लिए अक्सर दो या तीन ऑपरेशन की आवश्यकता होती है। ऑपरेशन के बाद मल आंतरिक थैली में जमा होने लगता है और मल त्याग के दौरान वह गुदा से होकर निकलता है।
  • इलियोस्टॉमी : इसमें सर्जन इलियम को पेट के शुरुआती भाग के साथ जोड़ते हैं, जिसे स्टोमा कहा जाता है। इलियोस्टॉमी के बाद मल स्टोमा से होकर गुजरता है। इसके लिए मरीज को ऑस्टॉमी पाउच के इस्तेमाल की आवश्यकता हो सकती है, जिसमें मल को एकत्रित किया जाता है।

इन सबके अलावा, अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षण या जटिलताओं को कम करने के लिए डॉक्टर अन्य उपचारों की भी सिफारिश कर सकते हैं। हालांकि, इन दवाओं के सेवन से पहले एक बार डॉक्टरी सलाह लेना जरूरी है। अब जानें कुछ अन्य अल्सरेटिव कोलाइटिस ट्रीटमेंट :

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आंतों की सूजन का इलाज जानने के बाद अब बारी है आंतों में सूजन के उपाय की।

आंतों में सूजन से बचने के उपाय – Prevention Tips for Ulcerative Colitis in Hindi

आंतों में सूजन का इलाज बताने के बाद यहां हम आंतों में सूजन से बचने के उपाय बता रहे हैं, जो इस प्रकार हैं (1) (6):

  • दिन भर में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन करें।
  • शरीर को डिहाइड्रेट होने से बचाएं, जिसके लिए खूब पानी पिएं।
  • उच्च फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ के सेवन से बचें। यह उसके लक्षणों को और खराब कर सकता है।
  • ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें, जो गैस का कारण बनते हैं, जैसे बीन्स, मसालेदार भोजन, गोभी, ब्रोकली, फूलगोभी, कच्चे फलों का रस और फल (खासकर खट्टे फल)।
  • इसके अलावा, शराब और कैफीन से भी परहेज करें। यह दस्त को बदतर बना सकते हैं।
  • वसायुक्त, चिकना या तले हुए खाद्य पदार्थ या सॉस के सेवन से बचें।
  • यदि लैक्टोज इंटॉलरेंस की समस्या है, तो दूध उत्पादों को सीमित करें।
  • तनाव इस समस्या को बढ़ावा दे सकता है, ऐसे में तनाव मुक्त रहने का प्रयास करें।

आज के समय में अपने स्वास्थ्य को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। इस लेख में हमने अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षण व कारण बताने के साथ-साथ अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज भी बताया है। इसके अलावा, यहां आंतों में सूजन से बचने के उपाय हमने बताए हैं। ऐसे में अगर आंतों की सूजन से संबंधित एक भी लक्षण दिखे, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें, तभी इस समस्या से बचा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या में मल त्याग कैसा होता है?

अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या से पीड़ित व्यक्ति के मल के साथ खून व मवाद आ सकता है (2)।

क्या अल्सरेटिव कोलाइटिस ठीक हो सकता है ?

हां, अल्सरेटिव कोलाइटिस को दवा या फिर सर्जरी के माध्यम से ठीक किया जा सकता है (7)। इन दोनों प्रक्रियाओं के बारे में ऊपर विस्तार से बताया गया है।

किसी को अल्सरेटिव कोलाइटिस कैसे होता है?

अल्सरेटिव कोलाइटिस के सटीक कारणों के बारे में फिलहाल अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि, विशेषज्ञों की मानें तो यह आनुवंशिक, इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी, माइक्रोबायोम या फिर वातावरण के कारण भी हो सकता है (2)।

अल्सरेटिव कोलाइटिस पीड़ित व्यक्ति के मल से दुर्गंध क्यों आती है?

पेट के अंदर की परत में सूजन, पाचन संबंधी समस्या जैसे – पेट, छोटी आंत या कोलन में रक्तस्राव होने के कारण स्टूल काला व तेज दुर्गंध वाला हो सकता है (8)। वहीं, अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या भी पेट की सूजन से जुड़ी समस्या है, जिसकी वजह से इसके मरीजों का मल अधिक दुर्गंध वाला हो सकता है।

क्या आंत में सूजन का आयुर्वेदिक इलाज संभव है?

हां, आंत में सूजन का आयुर्वेदिक इलाज संभव है। इस विषय पर हुए एक शोध की मानें तो आंत में सूजन का आयुर्वेदिक इलाज इस समस्या से जुड़े लक्षण को कम करने में मददगार हो सकता है (9)।

संदर्भ (Sources):

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  1. Ulcerative Colitis
    https://medlineplus.gov/ulcerativecolitis.html
  2. Symptoms & Causes of Ulcerative Colitis
    https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/ulcerative-colitis/symptoms-causes
  3. Ulcerative colitis
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6487890/
  4. Diagnosis of Ulcerative Colitis
    https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/ulcerative-colitis/diagnosis
  5. Treatment for Ulcerative Colitis
    https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/ulcerative-colitis/treatment
  6. Ulcerative colitis – discharge
    https://medlineplus.gov/ency/patientinstructions/000203.htm
  7. Ulcerative colitis: Diagnosis and management
    https://www.researchgate.net/publication/6885546_Ulcerative_colitis_Diagnosis_and_management
  8. Black or tarry stools
    https://medlineplus.gov/ency/article/003130.htm
  9. Effects of Ayurvedic treatment on forty-three patients of ulcerative colitis
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3202252/
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