उपवास के फायदे और नुकसान – Fasting Benefits and Side Effects in Hindi

Written by , (शिक्षा- एमए इन मास कम्युनिकेशन)

आपने कभी-न-कभी उपवास तो जरूर रखा होगा, लेकिन क्या आप उपवास का वैज्ञानिक महत्व जानते हैं? क्या आपको पता है कि उपवास किस प्रकार स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाता है? बेशक, भारत में उपवास को धर्म और आस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन धार्मिक महत्व से अलग उपवास के फायदे स्वास्थ्य से भी जुड़े हैं। स्टाइलक्रेज के इस लेख में जानिए स्वास्थ्य के लिए उपवास रखने के फायदे क्या-क्या हैं। साथ ही हम उपवास के प्रकार और इसके नुकसान से भी आपको अवगत कराएंगे।

शुरू करते हैं लेख

लेख के पहले भाग में हम उपवास क्या है, इसकी जानकारी दे रहे हैं।

उपवास क्या है? – What is Fasting in Hindi

उपवास की परिभाषा हर व्यक्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। आमतौर पर उपवास के दौरान व्यक्ति किसी निर्धारित समय के लिए किसी खास भोजन व पेय आदि का त्याग करता है। कभी-कभी व्यक्ति व्रत के दौरान पानी, फल या सिर्फ जूस ही लेते हैं और कभी दिनभर में कुछ भी नहीं लेते। व्रत की अवधि एक दिन, एक हफ्ते या इससे अधिक भी हो सकती है। जैसा कि हमने ऊपर बताया कि उपवास न सिर्फ श्रद्धा और भक्ति से जुड़ा होता है, बल्कि इसके स्वास्थ्य लाभ भी कई हैं, जिनके बारे में हम लेख में आगे विस्तार से बता रहे हैं।

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उपवास क्या है, समझने के बाद उपवास रखने के फायदे और उपवास के प्रकार पर हम चर्चा करेंगे।

उपवास के प्रकार – Types of Fasting in Hindi

उपवास के प्रकार कई हैं। कुछ लोगों के लिए उपवास करने के फायदे का मतलब भगवान का आशीर्वाद और उनकी कृपा दृष्टि है। वैसे यह तो है ही, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। उपवास के कुछ आम प्रकार इस तरह हैं।

1. सुबह का उपवास – इस उपवास में सुबह का नाश्ता छोड़कर सिर्फ दो बार का खाना खाया जाता है।

2. शाम का उपवास – इसमें रात को खाना नहीं खाया जाता है। पूरे दिन में दो बार खाना खाने के बाद शाम ढलने के बाद खाना नहीं खाते हैं।

3. साप्ताहिक उपवास – कुछ लोग हर हफ्ते किसी एक विशेष दिन उपवास करते हैं। यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि उस उपवास के दौरान वो पानी पिए या फलाहार करे। बस इस दौरान नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता है।

4. जूस या रस का उपवास – इस उपवास के दौरान व्यक्ति ठोस या भारी पदार्थों का सेवन नहीं करता। इसमें व्यक्ति सिर्फ फलों के रस ही पीता है।

5. फलाहार उपवास – इसमें व्यक्ति सिर्फ फलों का सेवन करता है।

6. निराहार उपवास – इस उपवास में व्यक्ति कुछ भी नहीं खाता। वो सिर्फ पानी पी सकता है। इसे पूर्णोपवास उपवास भी कहा जाता है।

7. दूध का उपवास – इस उपवास के प्रकार में व्यक्ति सिर्फ दूध का सेवन करता है।

8. निराहार-निर्जला उपवास – यह उपवास काफी कठिन होता है, क्योंकि इसमें न कुछ खाना होता है और न ही पीना।

9. नैदानिक उपवास (Diagnostic Fast) – अगर व्यक्ति मेडिकल टेस्ट कराने जाता है और उस टेस्ट में खाली पेट रहने की जरूरत हो, तो यह उपवास रखा जाता है। इसमें जब तक टेस्ट न हो जाए, तब तक व्यक्ति बिना कुछ खाए-पिए रहता है या व्यक्ति को जब तक खाने-पीने को न कहा जाए तब तक वो नहीं खाता।

10. इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) – यह उपवास आजकल काफी चलन में है। इसे वजन कम करने के लिए किया जाता है। इसमें खाने का वक्त या पैटर्न बदला जाता है। इसमें एक-दो दिन छोड़-छोड़कर उपवास कर सकते हैं या खाने की मात्रा को कम किया जा सकता है। इसके अलावा, सुबह आठ से पांच बजे के बीच लोग खाना खाते हैं। फिर सीधे अगले दिन सुबह आठ बजे खाना खाया जाता है। हां, पेय पदार्थ जैसे – जूस, कॉफी, चाय व पानी का सेवन कर सकते हैं (1)

11. अन्य प्रकार – इनके अलावा भी उपवास के अन्य प्रकार हैं, जिसमें व्यक्ति शुगर या शुगर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करता। कुछ उपवास ऐसे होते हैं, जिसमें व्यक्ति उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों को लेना बंद कर देता है। कैसा उपवास करना है, यह पूरी तरह से व्यक्ति और उसके शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है।

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अब लेख में आगे बढ़ते हुए जानते हैं कि उपवास करने के फायदे क्या हैं।

उपवास के फायदे – Benefits of Fasting in Hindi

उपवास करने के फायदे सिर्फ मन की सुख-शांति नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी है। नीचे हम उसी के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

1. शरीर को डिटॉक्सीफाई करे

उपवास के फायदे में शरीर को साफ करना शामिल है। रिसर्च पेपर के अनुसार, अगर ऐसा उपवास रखा जाए, जिसमें खाद्य पदार्थों के सेवन के बजाय तरल पदार्थ शामिल हों, तो शरीर सही तरह से डिटॉक्सीफाई हो सकता है। इससे पाचन बेहतर होने के साथ ही पेट संबंधी परेशानियां और त्वचा संबंधी समस्याएं कम हो सकती हैं (2)

2. वजन कम करे

आधे से ज्यादा लोगों की समस्या मोटापा है। ऐसे में वक्त रहते इस पर ध्यान न दिया गया, तो यह कई शारीरिक समस्याओं का कारण बन सकता है। वैसे वजन कम करने के लिए उपवास अच्छा तरीका हो सकता है। रिसर्च पेपर के अनुसार, इंटरमिटेंट फास्टिंग से बढ़ती चर्बी को कम करने में मदद मिल सकती है। इस उपवास में ठोस पदार्थों की जगह पेय पदार्थों का सेवन किया जाता है या फिर खाने का वक्त बदला जाता है (1)

3. पाचन तंत्र के लिए उपवास के फायदे

उपवास पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी हो सकता है। उपवास करने से शरीर के खुद का हीलिंग तंत्र सही से काम करता है, जिससे शरीर कई तरह की परेशानियों से खुद-ब-खुद लड़ना शुरू कर देता है। एक शोध के अनुसार, 62.33% लोगों को उपवास के दौरान अपच की समस्या नहीं हुई, 27% लोगों की अपच की परेशानी ठीक हो गई। साथ ही उपवास को “चमत्कारिक इलाज” भी कहा जाता है, जिससे पाचन संबंधी विकार दूर हो सकते हैं (3)

4. त्वचा के लिए उपवास

कई बार सिर्फ क्रीम और कॉस्मेटिक का ही नहीं, बल्कि खान-पान का असर भी त्वचा पर होने लगता है। ज्यादा तेल-मसाले या बाहरी खाने से त्वचा बेजान दिखने लगती है और कील-मुंहासे हो सकते हैं। ऐसे में उपवास लाभकारी हो सकता है। हमने ऊपर पहले ही बताया है कि उपवास रखने से शरीर डिटॉक्सीफाई हो सकता है (2)। जब शरीर डिटॉक्सीफाई होगा, तो शरीर में मौजूद विषाक्त तत्व बाहर निकलेंगे, जिससे त्वचा में नई चमक आएगी और त्वचा खूबसूरत दिखने लगेगी।

5. ब्लड प्रेशर के लिए उपवास

उपवास उच्च रक्तचाप की समस्या से काफी हद तक राहत दिला सकता है। इसमें अनिरंतर उपवास (Intermittent Fasting), जिसमें आमतौर पर 16 घंटे का उपवास और 8 घंटे खाने की सलाह दी जाती है, काफी लाभकारी साबित हो सकता है। रिसर्च पेपर में लिखा है कि एक हफ्ते तक उपवास रखने से रक्तचाप कम हो सकता है। इस उपवास को सही तरीके से करने से उच्च रक्तचाप नियंत्रित रह सकता है (4)

6. कोलेस्ट्रॉल को कम करें

अनिरंतर उपवास से वजन कम करने में मदद मिल सकती है। इससे कोलेस्ट्रॉल का जोखिम भी कम हो सकता है (1)। एक रिसर्च पेपर में कहा गया है कि एक दिन के अंतराल के बाद किए जाने वाले उपवास से कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है। इससे ट्राइग्लरसाइड यानी एक प्रकार का वसा और खराब कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित हो सकता है (4)

एक शोध में इस बात का भी जिक्र मिलता है कि रमजान के दौरान किए जाने वाले उपवास से प्लाज्मा लिपिड्स और लिपोप्रोटीन को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इसका सकारात्मक असर कोलेस्ट्रॉल पर पड़ सकता है। इस अधार पर उपवास को कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक माना जा सकता है (5)

7. ब्लड शुगर कम करने के लिए उपवास

शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाने पर इससे पीड़ित लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे छुटकारा पाने के लिए उपवास लाभकारी माना जा सकता है। एक शोध के मुताबिक, ब्लड शुगर से पीड़ित लोगों के लिए उपवास काफी कारगर साबित हो सकता है (6)। हालांकि, जिनका ब्लड शुगर अनियंत्रित है, वो डॉक्टर की परामर्श के बाद ही उपवास रखें।

8. इम्युनिटी बढ़ाने के लिए उपवास

किसी भी संक्रमण से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम मजबूत होना आवश्यक होता है। माना जाता है कि इम्युनिटी बढ़ाने के लिए उपवास बेहद लाभकारी हो सकता है। इस पर हुए एक शोध के मुताबिक, उपवास रखने से ऑटोफेगी यानी शरीर के सेल्स को साफ करने की क्षमता बेहतर हो सकती है। इससे शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र व इम्युनिटी मजबूत हो सकती है, जिससे तमाम बिमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ सकती है (7)

9. लत छुड़वाने के लिए उपवास

उपवास का असर उन लोगों में भी देखा गया है, जिन्हें किसी चीज की बुरी लत पड़ जाती है। चाहे वो लत खाने की हो या फिर किसी अन्य पदार्थ की, उपवास से मदद मिल सकती है। एक शोध के मुताबिक, उपवास रखने से ब्रेन न्यूरो केमिस्ट्री में कुछ बदलाव हो सकता है, जिससे बार-बार किसी चीज का सेवन करने की इच्छा कम हो सकती है (8)। इसी आधार पर कहा जा सकता है कि उपवास किसी भी लत को छुड़वाने में उपयोगी हो सकता है।

10. मानसिक और भावनात्मक लाभ के लिए उपवास

उपवास का असर सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इससे एकाग्रता में सुधार हो सकता है। साथ ही ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है। यहीं नहीं, चिंता-तनाव और अनिद्रा जैसी समस्या दूर करने के लिए भी उपवास को जाना जाता है। उपवास करने से व्यक्ति को भावनात्मक रूप से शांत रहने और खुशी का एहसास करने में मदद मिल सकती है (3)

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हम लेख के अगले भाग में उपवास में क्या खाना चाहिए, ये बताने जा रहे हैं।

उपवास में क्या खाना चाहिए – What to eat during Fasting in Hindi

उपवास में क्या खाना चाहिए, यह इस पर निर्भर करता है कि व्यक्ति किस प्रकार का उपवास कर रहा है। हम नीचे कुछ खाद्य पदार्थों के बारे में बता रहे हैं, जिसका सेवन उपवास में किया जा सकता है। इनसे शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व मिल सकेंगे, जो शरीर को किसी भी तरह की कमजोरी के जोखिम से बचा सकते हैं।

  • रसदार फलों का सेवन करें
  • ड्राई फ्रूट्स खाएं
  • अगर नमक नहीं खा रहे हैं, तो हरी सब्जियों को बिना नमक के पकाकर खाएं
  • निर्जला उपवास नहीं रखा है, तो दूध को आहार में शामिल कर सकते हैं
  • अगर दूध नहीं पसंद, तो चाय या कॉफी का सेवन करें
  • फलों का जूस पिएं

नोट : ऊपर बताए गए खाद्य पदार्थ उपवास रखने वाले व्यक्ति के लिए विकल्प के रूप में हैं। उपवास के प्रकार के अनुसार इनमें बदलाव किया जा सकता है।

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उपवास रखने के फायदे और उपवास में क्या खाना चाहिए, जानने के बाद पढ़ें उपवास में परहेज।

उपवास में परहेज – What to Avoid During Fasting in Hindi

लेख के इस भाग में बताए गए परहेजों पर ध्यान दें और ज्यादा से ज्यादा उसका पालन करने की कोशिश करें, ताकि पूरी तरह से उपवास करने के फायदे मिल सकें।

  • एसिडिटी या गैस की समस्या है, तो खाली पेट चाय या कॉफी पीने से भी बचें ।
  • अगर पहली बार उपवास कर रहे हैं, तो छोटे या कम वक्त के उपवास से शुरुआत करें। बड़े या लंबी अवधी के उपवास से बचें।
  • उपवास से पहले सही और पौष्टिक भोजन करें, ताकि उपवास के दौरान कोई परेशानी न हो। बस एक बार में ज्यादा खाने से बचें।
  • उपवास के दौरान कठिन व्यायाम या ज्यादा देर तक व्यायाम करने से बचें, क्योंकि इस दौरान शरीर को एनर्जी की जरूरत होती है और व्यायाम करने से शरीर में ऊर्जा की कमी हो सकती है। इससे थकावट और कमजोरी भी महसूस हो सकती है।
  • अगर स्वास्थ्य संबंधी समस्या है या कोई दवा ले रहे हैं, तो उपवास न करें।
  • उपवास के बाद जाहिर सी बात है ज्यादा भूख लग सकती है। ऐसे में उपवास तोड़ते वक्त या उपवास खत्म होने के तुरंत बाद कुछ भारी आहार करने से बचें।

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लेख के अगले भाग में हम उपवास के नुकसान की जानकारी देंगे।

उपवास के नुकसान – Side Effects of Fasting in Hindi

उपवास सही तरीके से न किया जाए, तो उपवास के नुकसान भी हो सकते हैं, जिसके बारे में हम लेख के इस भाग में जानकारी दे रहे हैं।

  • अगर उपवास के दौरान सही पौष्टिक तत्व युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करते हैं, तो डिहाइड्रेशन, चक्कर व कमजोरी जैसी स्वास्थ्य समस्या हो सकती है।
  • अगर लंबी अवधि तक का उपवास करते हैं, तो एनीमिया भी हो सकता है (9)
  • उपवास के बाद तुरंत भारी खाने से पेट संबंधी समस्या हो सकती है।
  • कुछ लोगों को भूखे रहने से चिड़चिड़ापन या गुस्सा आने की शिकायत हो सकती है।
  • ज्यादा देर भूखे रहने से सिरदर्द व शरीर में समस्या हो सकती है।

ऊपर उपवास रखने के फायदे जानने के बाद आपको इतना तो पता चल ही गया होगा कि इससे न सिर्फ मन को शांति मिलती है, बल्कि स्वास्थ्य भी सुधर सकता है। यहां हम एक बात साफ कर देना चाहते हैं कि उपवास अपनी सेहत के हिसाब से ही रखना चाहिए। कमजोर इंसान को लंबे समय तक के उपवास करने की सलाह नहीं दी जाती है। उपवास के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी, जूस और फलों का सेवन करें, ताकि उपवास के नुकसान से बचा जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या उपवास करना सेहत के लिए अच्छा है?

हां, उपवास करना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। यह शरीर में सभी तरह के संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है। शरीर को डिटॉक्सीफाई करने का यह एक अच्छा तरीका है, जिसका सकारात्मक प्रभाव त्वचा पर भी नजर आता है (2)। यही नहीं, मानसीक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ रहने में भी उपवास लाभकारी साबित हो सकता है (3)

मुझे कब तक उपवास करना चाहिए?

आपको कब तक उपवास करना चाहिए, यह आपके शरीर और इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है। ऐसे में आपको पहले निर्धारित करना होगा कि उपवास का मकसद क्या है। श्रद्धा के आधार पर उपवास रखना हो, तो हफ्ते में एक या दो दिन का उपवास जबतक आप चाहें, तबतक के लिए रख सकते हैं। मोटापा कम करने की इच्छा हो, तो अनिरंतर उपवास रोजाना किया जा सकता है। इसमें दिन के आठ घंटे पौष्टिक खाद्य पदार्थ खा सकते हैं और फिर बचे हुए 16 घंटे ठोस खाद्य पदार्थ नहीं खाया जाता है।

वजन कम करने के लिए मुझे कब तक उपवास करना चाहिए?

इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) वजन कम करने में काफी मददगार साबित हो सकती है। इस फास्टिंग को व्यक्ति दो तरह से करते हैं। कुछ व्यक्ति 16 घंटे तो कुछ व्यक्ति 12 घंटे उपवास रखते हैं। ऐसे में जब तक वजन कम नहीं हो जाता है, तब तक इंटरमिटेंट फास्टिंग कर सकते हैं। अगर कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है, तो यह उपवास करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लें।

क्या मैं उपवास के दौरान पानी पी सकता हूं?

हां, आमतौर पर उपवास में पानी पी सकते हैं। अगर आपने निर्जला उपवास रखा है, तो इसमें पानी नहीं पीते हैं।

Sources

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  1. Intermittent Fasting: The Choice for a Healthier Lifestyle
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6128599/
  2. Detoxification Combining Fasting with Fluid Therapy for Refractory Cases of Severe Atopic Dermatitis
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3748731/
  3. An Observational Study to Assess the Physical Social Psychological and Spiritual Aspects of Fasting
    http://www.iosrjournals.org/iosr-jdms/papers/Vol14-issue3/Version-6/F014362530.pdf
  4. Intermittent Fasting in Cardiovascular Disorders—An Overview
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6471315/
  5. Fasting during Ramadan induces a marked increase in high-density lipoprotein cholesterol and decrease in low-density lipoprotein cholesterol
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/9363296/
  6. Effects of intermittent fasting on health markers in those with type 2 diabetes: A pilot study
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5394735/
  7. Intermittent fasting a possible priming tool for host defense against SARS-CoV-2 infection: Crosstalk among calorie restriction autophagy and immune response
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC7351063/
  8. Fasting: Molecular Mechanisms and Clinical Applications
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3946160/
  9. Effect of short-term food restriction on iron metabolism relative well-being and depression symptoms in healthy women
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4143608/
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