वजन बढ़ाने के लिए 10 आसान योगासन – Yoga for Weight Gain in Hindi

Medically reviewed by Shivani Aswal Sharma, Nutritionist, Diabetes Educator, and Yoga Trainer
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मोटापे की तरह शरीर का कम वजन होना भी कई शारीरिक परेशानियों का कारण बन सकता है। अगर कोई व्यक्ति कम वजनी है, तो इसका मतलब उसे जरूरी पोषण नहीं मिल रहा है। पोषण के अभाव में शरीर कमजोर होने लगता है और शारीरिक विकास की प्रक्रिया धीमी या फिर रुक जाती है। हालांकि, अंडरवेट होने के पीछे और भी कई कारण हो सकते हैं, जिनमें आनुवंशिक, कोई गंभीर बीमारी या फिर कुपोषण शामिल है। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि अंडरवेट की स्थिति को ठीक नहीं किया जा सकता है। इस लेख में हम आपको कुछ कारगर योगासन बता रहे हैं, जो आपके कम वजन को बढ़ाने का काम करेंगे। इन योगासन का फायदा तभी है, जब आप नियमित रूप से स्वस्थ खान-पान का सेवन भी करें और संतुलित जीवनशैली का पालन करें। वहीं, अगर आप किसी गंभीर बीमारी के कारण अंडरवेट हैं, तो साथ में डॉक्टरी इलाज भी जरूरी है।

आइए, सबसे पहले जानते हैं कि वजन बढ़ाने में योग किस प्रकार आपकी मदद करता है।

वजन बढ़ाने के लिए योग कैसे मदद करता है? – How Yoga Helps in Weight Gain in Hindi

अगर आप योग का अभ्यास करते हैं या इसके बारे में जानकारी रखते हैं, तो आपको योग के शारीरिक लाभों के विषय में जरूर पता होगा। प्राचीन काल से चली आ रही इस विद्या को आज पूरा विश्व अपना रहा है। योग को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की कुंजी माना गया है। योग शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है और आंतरिक रूप से शरीर को शुद्ध करता है। शरीर से जुड़ी किसी भी तकलीफ का इलाज योग द्वारा संभव है, लेकिन इसके लिए आपको नियमित योगाभ्यास करना होगा और खानपान पर नियंत्रण करना होगा।

योग से न सिर्फ मोटापा कम किया जा सकता है, बल्कि वजन को बढ़ाया भी जा सकता है। अगर आप अंडरवेट का शिकार हैं, तो आप योगासन की मदद ले सकते हैं। योग की कई ऐसी क्रियाएं हैं, जो जल्द वजन बढ़ाने का काम करेंगी। ये यौगीक क्रियाएं आपकी भूख को बढ़ाएंगी, जिससे बॉडी मास भी बढ़ेगा। हम कुछ ऐसे ही योगासनों के बारे में बताएंगे, जो आपके कम वजन को ठीक करने का काम करेंगे (1)।

वजन बढ़ाने के लिए योग का महत्व समझने के बाद उन योग के बारे में जानते हैं, जो वजन बढ़ाने में कारगर हैं।

वजन बढ़ाने के लिए योगासन – Yoga for Weight Gain in Hindi

योग से न सिर्फ आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) बढ़ता है, बल्कि इम्यून सिस्टम, मांसपेशियां और हड्डियों भी मजबूत होती हैं। योग के संबंध में एक बात को गंभीरता से समझने की जरूरत है कि प्रत्येक योगासन में सांस का बेहद महत्व है। लंबी गहरी सांस लेने पर पेट गुब्बारे की तरह फूलना चाहिए और सांस छोड़ने पर बिना हवा वाले गुब्बारे की तरह अंदर जाना चाहिए।

1. भुजंगासन

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कैसे है लाभदायक :

अंडरवेट की समस्या से निजात पाने के लिए आप भुजंगासन कर सकते हैं। यह आसन सीधा पाचन तंत्र पर काम करता है, जिससे भूख में सुधार होता है। इसके अलावा, यह आसन करने से मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है और सांस लेने में सुधार होता है।

कैसे करें :
  • सबसे पहले आप पेट के बल लेट जाएं।
  • पैरों के बीच की दूरी को कम करें और पैरों को सीधा रखें।
  • अब अपनी हथेलियों को कंधे के सीध में लाएं।
  • अब सांस लेते हुए छाती से लेकर नाभि तक शरीर को ऊपर उठाएं।
  • कुछ सेकंड इसी अवस्था में बने रहे और धीरे-धीरे सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • फिर गहरी सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में नीचे आ जाएं।
  • इस तरह से आप एक चक्र पूरा कर लेंगे।
  • शुरुआत में आप इस योगासन को चार से पांच बार कर सकते हैं।
  • नियमित अभ्यास करें और चक्र की संख्या बढ़ाएं।

2. वज्रासन

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कैसे है लाभदायक :

यह एकमात्र ऐसा आसन है, जिसका अभ्यास भोजन के तुरंत बाद किया जा सकता है। यह आसन सीधा पाचन तंत्र पर काम करता है और मेटाबॉलिजम को नियंत्रित करने का काम करता है। इसके अलावा, यह आसन मन भी शांत करता है। अंडरवेट की समस्या को ठीक करने के लिए आप वज्रासन का अभ्यास कर सकते हैं।

कैसे करें :
  • सबसे पहले पैरों को जमीन पर फैलाकर बैठें।
  • दाहिना पैर को घुटने से मोड़ें और दाहिने कूल्हे के नीचे रखें।
  • इसी तरह से बाएं पैर को मोड़ें और अपने बाएं कूल्हे के नीचे रखें।
  • अब नितम्बों को एड़ियों के बीच में लाएं।
  • हाथों को घुटनों पर रखें और रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
  • सांस लेने व छोड़ने की प्रक्रिया जारी रखें और शांत रहने की कोशिश करें।
  • पहली अवस्था में आने के लिए अपने दाहिने पैर को आगे लेकर आए फिर बाएं को।

3. सूर्य नमस्कार

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कैसे है लाभदायक :

अंडरवेट की समस्या से निजात पाने के लिए आप सूर्य नमस्कार का अभ्यास कर सकते हैं। सूर्य नमस्कार को आसनों का समूह कहा जाता है, जिसमें 12 मुद्राएं शामिल होती हैं और इन्हें आपको एक के बाद एक करना होता है। यह सभी आसन मिलकर पाचन तंत्र से लेकर हृदय स्वास्थ्य, तंत्रिका तंत्र व मांसपेशियों को स्वस्थ रखने का काम करते हैं। घटते वजन को संतुलित करने के लिए आप सूर्य नमस्कार का सहारा ले सकते हैं। यह आसन इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का काम भी करता है, जिससे आपकी भूख न लगने की आदत में सुधार होगा और आपका बीएमआई बढ़ेगा।

कैसे करें :
  1. प्रणाम आसन : इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप सीधे खड़े हो जाएं और हाथों को छाती के पास लाएं और नमस्कार की मुद्रा में रखें।
  1. हस्तउत्तानासन : सांस लेते हुए हाथों को ऊपर करें और कानों के पास ले जाएं। अब पीछे झुकने की कोशिश करें।
  1. पादहस्तासन : अब सांस छोड़ते हुए पेट के बल झुकें और हथेलियों को जमीन पर रखने का प्रयास करें। इसके साथ ही घुटनों को बिना मोड़े माथे से घुटने को छुने का प्रयास करें।
  1. अश्व संचालनासन : इस आसन में सबसे पहले आपको सांस लेते हुए बाएं पैर पर बैठना होता है और फिर दाएं पैर को पीछे ले जाना होता है। इस मुद्रा में आपका दायां घुटना जमीन पर लगा रहना चाहिए। साथ ही छाती को आगे की ओर फैलाते हुए ऊपर देखने का प्रयास करें।
  1. पर्वतासन : अब सांस छोड़ते हुए बाएं पैर को पीछे करें और शरीर को बीच से उठाने का प्रयास करें। इस आसन के दौरान बाजुओं को सीधा रखें और एड़ियों को जमीन से सटाने की कोशिश करें।
  1. अष्टांगासन : पर्वतासन से अष्टांगासन में जाते समय पहले सांस लेते हुए घुटनों को जमीन से सटाएं। साथ ही छाती और ठुड्डी को जमीन के साथ स्पर्श करें।
  1. भुजंगासन : इस आसन के लिए बिना सांस छोड़े कमर से ऊपर के हिस्से को नाभी तक उठाने का प्रयास करें। आसन के दौरान हथेलियां जमीन से सटाए रखें।
  1. पर्वतासन : अब सांस छोड़ते हुए शरीर को बीच से उठाने का प्रयास करें। आसन के दौरान बाजुओं को सीधा रखें और एड़ियों को जमीन का स्पर्श कराएं ।
  1. अश्व संचालनासन : सांस लेते हुए दाएं पैर को आगे लाएं और बैठ जाएं। अपना बायां पैर सीधा रखें और बाएं घुटने को जमीन से सटाएं।
  1. पादहस्तासन : इस आसन के लिए सांस छोड़ते हुए बाएं पैर को आगे लाएं और हथेलियों को जमीन से व माथे को घुटनों से सटाएं।
  1. हस्तउत्तानासन : सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएं और पीछे झुकने की कोशिश करें।
  1. प्रणाम आसन : अब अंत में सीधे हो जाएं हाथों को नमस्कार मुद्रा में ले आएं।

4. पवनमुक्तासन

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कैसे है लाभदायक :

अंडरवेट से राहत पाने के लिए आप इस आसन का भी अभ्यास कर सकते हैं। यह आसन पाचन तंत्र पर अच्छी तरह काम करता और उसे नियंत्रित करता है। पवनमुक्तासन अतिसक्रिय मेटाबॉलिज्म को शांत करने का काम करता है। इसके अलावा, यह आसन शरीर के द्वारा बेहतर तरीके से पोषक तत्वों को अवशोषित (Absorption) करने में मदद भी करता है। कम वजनी शरीर का वजन बढ़ाने के लिए आप इस आसन का नियमित अभ्यास जरूर करें।

कैसे करें :
  • इस आसन के लिए सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं । इस बात का ध्यान रखें कि आपके हाथ शरीर के साथ सटे रहने चाहिए।
  • अब गहरी सांस लेते हुए दाएं पैर को मोड़ें। अब आप अपने दोनों हाथों से घुटनों को पकड़ें और उन्हें छाती से लगाने की कोशिश करें।
  • अब आपको सांस छोड़ते हुए सिर को उठाना होगा और नाक को घुटने का स्पर्श करना होगा।
  • इस अवस्था में कुछ सेकंड रहें।
  • अब सांस छोड़ते हुए अपने पैरों और सिर को प्रारंभिक अवस्था में ले आएं।
  • दाएं पैर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह आसन बाएं और फिर दोनों पैरों से एकसाथ करें।
  • इस आसन को आप चार से पांच बार कर सकते हैं।

5. मत्स्यासन

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कैसे है लाभदायक :

वजन बढ़ाने के लिए मत्स्यासन बहुत ही फायदेमंद योग मुद्रा है। यह आसन थायरायड ग्रंथि सहित कई प्रणालियों पर काम करता है। थायरायड ग्रंथि वजन कम करने का कारण बन सकती है और यह आसन इस ग्रंथी को नियंत्रित करने का काम करता है। इसके अलावा, यह आसन पाचन तंत्र व मेटाबॉलिज्म के साथ-साथ ह्रदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी मदद करता है। आप इस आसन का नियमित अभ्यास कर अपने कम वजन को बढ़ा सकते हैं।

कैसे करें :
  • सबसे पहले पद्मासन में बैठ जाएं।
  • अब धीरे-धीरे पीछे झुकना शुरू करें और पीठ के बल लेट जाएं।
  • अब आपको अपने दाएं हाथ से बाएं पैर और बाएं हाथ से दाएं पैर को पकड़ना होगा।
  • अब दोनों कोहिनियों को जमीन पर टिकाकर रखें और घुटनों को जमीन से सटाएं।
  • अब सांस लेते हुए जितना हो सकता है, सिर को पीछे की ओर ले जाएं।
  • इस अवस्था में सांस धीरे-धीरे लें और धीरे-धीरे छोड़ें।
  • अब आप लंबी सांस लेते हुए प्रारंभिक अवस्था में आएं।
  • इस चक्र को चार से पांच बार करें।

6. सर्वांगासन

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कैसे है लाभदायक :

सर्वांगासन रक्त और ऑक्सीजन के संचालन में सुधार करने के लिए प्रभावी आसन है। रक्त का संचालन शरीर में पोषक तत्वों को बढ़ावा देता है, जिससे शरीर के सभी अंग पोषित होते हैं। शरीर में ऊर्जा और मजबूती के लिए आप इस आसन का अभ्यास नियमित रूप से कर सकते हैं।

कैसे करें :
  • सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं और दोनों हाथों को जांधों के पास रखें।
  • पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाते हुए 90 डिग्री तक ले जाएं।
  • हथेलियों के सहारे नितंब को सहारा दें।
  • शरीर को इस प्रकार सीधा करें कि ठोड़ी आपकी छाती से लगे।
  • कुछ देर इस मुद्रा में रहें फिर धीरे-धीरे प्रारंभिक अवस्था में आएं।

7. धनुरासन

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कैसे है लाभदायक :

धनुरासन पेट के बल किया जाने वाला एक प्रभावी आसन है, जो कब्ज सहित पाचन तंत्र में सुधार का काम कर सकता है। यह आसन थायराइड से भी आपको निजात दिला सकता है, जो शरीर के कम वजनी होने का कारण बन सकता है। शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण (Absorption) के लिए आप इस आसन का नियमित रूप से अभ्यास कर सकते हैं।

कैसे करें :
  • पेट के बल लेट जाएं।
  • अब घुटनों को मोड़ें और हाथों से टखनों को मजबूती से पकड़ें।
  • अब सांस लेते हुए अपने सिर, छाती व जांघ को ऊपर की ओर उठाएं।
  • ध्यान रहे कि इस मुद्रा में आपके शरीर का आकार किसी धनुष के समान लगना चाहिए।
  • क्षमता के अनुसार इस मुद्रा में रहे और धीरे-धीरे सांस लेने व छोड़नी की प्रक्रिया जारी रखें।
  • प्रारंभिक अवस्था में आने के लिए लंबी गहरी सांस छोड़ते हुए नीचे आएं।
  • आप इस आसन को चार से पांच बार कर सकते हैं।

8. चक्रासन

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कैसे है लाभदायक :

चक्रासन पीठ के बल किया जाने वाला एक आसन है, जो शरीर को कई रूपों में फायदा पहुंचाता है। यह आसन पाचन तंत्र पर प्रभावी रूप से काम करता है, जिससे भोजन को ग्रहण करने और निकासी का कार्य सुचारू रूप से चलता है। शरीर को पोषित करने के लिए पांचन तंत्र का मजबूत होना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, यह आसन रक्त संचालन में भी मदद करता है।

कैसे करें :
  • सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं।
  • अब धीरे-धीरे घुटनों को मोड़ें और अपनी एड़ियों को नितंबों से स्पर्श कराएं।
  • अपने पैरों के बीच लगभग 12 इंच का फासला रखें।
  • अब अपनी बांहों को उठाएं और कोहनियां को मोड़ लें।
  • हथेलियों को सिर के ऊपर से ले जाते हुए जमीन पर सटाएं।
  • अब आप सांस लें और धीरे-धीरे सिर को उठाते हुए पीठ को मोड़ने का प्रयास करें।
  • अपनी बांहों तथा पांवों को तान लें।
  • धीरे-धीरे सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया जारी रखें।
  • कुछ देर इसी मुद्रा में रहें। फिर आरंभिक अवस्था में आने के लिए शरीर को धीरे-धीरे नीचे लाएं और लेट जाएं।
  • इस आसन को आप पांच-छह बार कर सकते हैं।

9. शीर्षासन

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कैसे है लाभदायक :

शीर्षासन बेहद लाभकारी है। इसके जितने भी फायदे बताए जाएं, उतने कम हैं। यह थाइराइड में काफी फायदा पहुंचाने का काम करता है, जो वजन न बढ़ने का कारण बन सकता है। यह आसन रक्त संचालन और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने का काम भी करता है। शरीर के वजन को नियंत्रित करने के लिए आप रोजाना इस आसन का अभ्यास कर सकते हैं।

कैसे करें :
  • इस आसन के लिए सबसे पहले एक योग मैट बिछाकर बैठ जाएं।
  • अब दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा लें और सामने की तरफ झुकते हुए उंगलियों पर अपना सिर रखें।
  • अब पैरों को ऊपर ले जाएं और उन्हें सीधा करने का प्रयास करें।
  • इस बात का ध्यान रखें कि इस आसन में आपको सिर के बल खड़ा होना है।
  • कुछ देर इस अवस्था में रहें और फिर घुटनों को मोड़ते हुए धीरे-धीरे पैरों को नीचे करें।
  • इस आसन को आप तीन से पांच बार कर सकते हैं।

10. शवासन

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कैसे है लाभदायक :

अंडरवेट की समस्या से निजात पाने के लिए आप शवासन का सहारा ले सकते हैं। यह एक प्रभावी योगाभ्यास है, जो सीधा रक्त और ऑक्सीजन के प्रवाह पर काम करता है। यह आसन रक्त के संचालन में मदद करता है और शरीर में पोषक तत्वों को बढ़ावा देता है। इससे शरीर को ऊर्जा प्राप्त होती है और शरीर मजबूत बनता है। यह आसन शरीर के सभी अंगों को ज्यादा से ज्यादा आराम देने के लिए किया जाता है।

कैसे करें :
  • सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं।
  • अपने हाथों को शरीर से लगभग एक फुट दूर रखें।
  • पैरों के बीच की दूरी लगभग 2 फुट होनी चाहिए।
  • हथेलियों की दिशा ऊपर की ओर होनी चाहिए।
  • अब आंखें बंद करें और सांस को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करें।
  • आप इस आसन में लगभग 15 से 20 मिनट तक रह सकते हैं।

लेख में बताए गए आसनों को करने से पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि आप इन्हें करने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार हैं कि नहीं। अगर आप इन योगासनों को पहली बार कर रहे हैं या फिर किसी गंभीर रोग से ग्रस्त हैं, तो किसी योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही इसे करें। अंडरवेट की समस्या से निजात पाने के लिए ये सभी योगासन कारगर हैं, जिनसे जल्द परिणाम मिल सकता है। आपको यह लेख कैसा लगा हमें कमेंट बॉक्स में बताना न भूलें।

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Nripendra Balmiki

नृपेंद्र बाल्मीकि एक युवा लेखक और पत्रकार हैं, जिन्होंने उत्तराखंड से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर (एमए) की डिग्री प्राप्त की है। नृपेंद्र विभिन्न विषयों पर लिखना पसंद करते हैं, खासकर स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर इनकी पकड़ अच्छी है। नृपेंद्र एक कवि भी हैं और कई बड़े मंचों पर कविता पाठ कर चुके हैं। कविताओं के लिए इन्हें हैदराबाद के एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।

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