वज्रासन करने का तरीका और फायदे – Benefits of Vajrasana in Hindi

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रोग मुक्त जीवन जीने के लिए योग को रूटीन में शामिल करना अच्छा माना जाता है। शायद इसी वजह से विश्वभर के लोग योग को अपनाने लगे हैं। एक या दो नहीं, बल्कि स्वस्थ रहने के लिए कई तरह के योग किए जा सकते हैं। इन योग में से एक वज्रासन भी है। वज्रासन को शरीर के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। आप इस योग को करने का सही तरीका और इससे होने वाले शारीरिक लाभ के बारे में स्टाइलक्रेज के इस लेख में जान सकते हैं। यहां वज्रासन करने के फायदे और सावधानियों के साथ ही कुछ जरूरी टिप्स भी दिए गए हैं।

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लेख में आगे बढ़ने से पहले जान लेते है कि वज्रासन क्या है।

वज्रासन क्या है – What is Vajrasana

वज्रासन घुटनों को मोड़ने के बाद पैरों पर बैठकर किया जाने वाला आसन है। यह संस्कृत के शब्द ‘वज्र’ से बना है, जिसका अर्थ आकाश से गिरने वाली बिजली है। इसे डायमंड पोज के नाम से भी जाना जाता है। इस योगासन में बैठकर प्राणायाम, कपालभाति व अनुलोम-विलोम किया जा सकता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि वज्रासन शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बेहतरीन योग है। वज्रासन से होने वाले फायदे जानने के लिए इस लेख को आगे पढ़ें।

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चलिए, अब वज्रासन से जुड़ी कुछ जरूरी बातों के बारे में जानते हैं।

वज्रासन के बारे में कुछ जरूरी बातें – Things To Know About Vajrasana in Hindi

वज्रासन से जुड़ी कई ऐसी बातें है, जिनके बारे में इस योग करने वालों को पता होना चाहिए। इन बातों के बारे में हम नीचे बता रहे हैं।

  • इसे खाना खाने के बाद भी कर सकते हैं, बल्कि खाना खाने के बाद वज्रासन करना पाचन तंत्र के लिए अच्छा माना जाता है (1)।
  • यह योग का शुरुआती और आसान स्तर है।
  • वज्रासन को करने की अवधि  5 से 10 मिनट हो सकती है।
  • इसकी पुनरावृत्ति की कोई जरूरत नहीं है।
  • वज्रासन के दौरान टखने, जांघ, घुटने, कूल्हे स्ट्रेच होते हैं।
  • बताया जाता है कि वज्रासन से पैर और पीठ की मांसपेशियां मजबूत हो सकती हैं।

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वज्रासन करने की विधि से पहले वज्रासन के फायदे पर एक नजर डाल लेते हैं।

वज्रासन के फायदे – Benefits Of Vajrasana In Hindi

दूसरे योग की तरह ही वज्रासन करने के कई लाभ हो सकते हैं। वज्रासन योग के इन फायदों के बारे में हम नीचे कुछ बिंदुओं के माध्यम से बता रहे हैं।

1. मधुमेह के लिए

वज्रासन के लाभ में मधुमेह को नियंत्रित करना शामिल हो सकता है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन ) की वेबसाइट पर पब्लिश एक अध्ययन में दिया हुआ है कि वज्रासन को करने से फास्टिंग ग्लूकोज को कम किया जा सकता है। बताया जाता है कि यह योगासन पूरे एंडोक्राइन मैकेनिज्म के साथ इंटरेक्ट करके ग्लूकोज के साथ ही इंसुलिन को बेहतर करता है, जिससे मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है (2)। योग के साथ ही मधुमेह के लिए सही डाइट और डॉक्टर द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का भी पालन करते रहें।

2. मांसपेशियों की मजबूती

वज्रासन से घुटने के जोड़, जांघ, पैर, पीठ और स्केलेटल (मानव शरीर का ढांचे) की मांसपेशियों की स्थिरता में सुधार हो सकता है। बताया जाता है कि इस आसन के नियमित अभ्यास से इलियोपोसा (नितंब के मसल्स), एरेक्टर स्पाइना (रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ की मांसपेशियां), क्वाड्रेट्स लुंबोरम (पेट की मांसपेशियां), एडेप्टर (हिप्स के जोड़ो की मांसपेशियां) और पिंडली यानी काफ मसल्स को मजबूती मिल सकती है (1)।

3. हृदय और मस्तिष्क में सुधार

वज्रासन के नियमित अभ्यास से हृदय और मस्तिष्क के कार्य करने की क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है। इससे हृदय और मस्तिष्क से जुड़ी समस्याएं कुछ कम हो सकती हैं। बताया जाता है कि यह मस्तिष्क और हृदय की धमनी में ऑक्सीजन युक्त रक्त का संचार (आर्टेरिअल सप्लाई) बढ़ाकर उनकी कार्यक्षमता को बेहतर करने में मदद कर सकता है (1)।

4. दर्द से राहत

अगर किसी के हाथ या पैर (एक्सट्रीमिटीज) की मांसपेशियों में दर्द रहता है, तो उन्हें वज्रासन करने से राहत मिल सकती है। एक अध्ययन की मानें, तो इस आसन को करने से हाथ और पैर के दर्द से राहत मिल सकती है। साथ ही यह पीठ के निचले हिस्से की समस्याओं और मांसपेशियों के दर्द से राहत दिला सकता है। रिसर्च में कहा गया है कि साइटिका के दर्द और गठिया से संबंधित घुटनों के दर्द को भी कुछ कम करने में वज्रासन मदद कर सकता है (1)।

5. पाचन के लिए

वज्रासन करने से पाचन संबंधी समस्याओं से राहत पाने में मदद मिल सकती है। दरअसल, इस योगासन से पाचन अंगों की वस्कुलेरिटी यानी ब्लड फ्लो बढ़ सकता है। इससे पेट के भारीपन, एसिडिटी, कब्ज, आंतों की गैस, पाइल्स की समस्या से राहत मिल सकती है (1)।

6. रक्त संचार में सुधार

वज्रासन के फायदे में रक्त संचार भी शामिल है। दरअसल, यह योगासन पेट के हिस्से और उससे नीचे के हिस्से यानी पेल्विक भाग में ब्लड सर्कुलेट कर सकता है। इससे पेट और पेल्विक दोनों से संबंधित अंग में मजबूती आती है। इतना ही नहीं, घुटने मोड़कर जब इस योगासन के लिए बैठा जाता है, तो रक्त पैरों से लेकर हृदय तक अच्छे से  पहुंचता है (1)।

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अब हम वज्रासन के फायदे की जानकारी देने के बाद वज्रासन करने का तरीका बता रहे हैं।

वज्रासन करने का तरीका – How To Do The Vajrasana

वज्रासन करने के फायदे के बारे में जानने के बाद इसे अपने रूटीन में शामिल करने की सोच रहे हैं, तो वज्रासन करने की विधि जानना जरूरी है। यह विधि कुछ इस प्रकार है :

  • वज्रासन करने के लिए सबसे पहले घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं।
  • इस दौरान दोनों पैरों के अंगूठे को साथ में मिलाएं और एड़ियों को अलग रखें।
  • अब अपने नितंबों को एड़ियों पर टिकाएं।
  • फिर हथेलियां को घुटनों पर रख दें।
  • इस दौरान अपनी पीठ और सिर को सीधा रखें।
  • दोनों घुटनों को भी आपस में मिलाकर रखें।
  • अब आंखें बंद कर लें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
  • इस अवस्था में पांच से 10 मिनट तक बैठने की कोशिश करें।
  • अगर घुटनों पर ज्यादा दर्द हो रहा है, तो शरीर के साथ जबरदस्ती न करें। एक-दो मिनट के बाद उठ जाएं और धीरे-धीरे रोजाना इसका समय बढ़ाते रहें।

सावधानी:

यूं तो यह आसन पूरी तरह से सुरक्षित है, लेकिन नीचे बताई गई बातों का ध्यान रखना काफी जरूरी है (1)।

  • जब तक टखने और घुटने में ठीक तरह से लचीलापन नहीं आता है, तब तक वज्रासन का ज्यादा देर तक अभ्यास नहीं करना चाहिए ।
  • घुटने या टखने की हड्डी के खिसकने पर इस आसन को न करें।
  • हाइपोटेंशन यानी कम रक्तचाप की समस्या से परेशान व्यक्ति को वज्रासन नहीं करना चाहिए।
  • अगर किसी के घुटनों में कोई समस्या है या हाल ही में घुटने की सर्जरी हुई है, तो यह आसन करने से बचें।
  • गर्भवतियों को इस आसन को करने से बचना चाहिए।
  • रीढ़ की हड्डी में किसी तरह की समस्या है, तो इस आसन को करने से बचें। खासतौर पर रीढ़ की जोड़ में कोई परेशानी होने वालों को इसे बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
  • हर्निया, आंतों के अल्सर और छोटी व बड़ी आंत में किसी तरह की समस्या से पीड़ित है, तो प्रशिक्षक की निगरानी में ही यह आसन करें।

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लेख के अगले भाग में वज्रासन को पहली बार दिनचर्या में शामिल करने वालों के लिए कुछ जरूरी टिप्स दिए गए हैं।

वज्रासन की शुरुआत करने वाले लोगों के लिए टिप्स

पहली बार वज्रासन करने वालों को कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इससे सही मायने में वज्रासन के लाभ हो सकते हैं और वज्रासन के नुकसान से बचा जा सकता है।

  • इस आसन के शुरुआत में पैरों में दर्द महसूस हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो वज्रासन से उठकर पैरों को आगे की ओर ले आएं। फिर टखनों, घुटनों और पिंडलियों की मालिश करें। ऐसा में नियमित रूप से अभ्यास करने से कुछ समय में इस आसन को 20 मिनट तक कर पाएंगे।
  • किसी तरह की समस्या है, तो इस आसन को बिना प्रशिक्षक के न करें।
  • शुरुआत में वज्रासन को 5 से 10 मिनट तक ही करना चाहिए।
  • इस आसन को करते समय मन को पूरी तरह शांत रखें।
  • अपने ध्यान को किसी एक बिंदु पर केंद्रित करें।

इसमें कोई दो राय नहीं कि योगासन से तन और मन को स्वस्थ बनाया जा सकता है। खासकर जब बात वज्रासन योग की हो, तो इसे करना न सिर्फ आसान है, बल्कि इसे किसी भी वक्त किया जा सकता है। साथ ही इसे करने से कई फायदे भी मिलते हैं। अगर लेख को पढ़ने के बाद आप भी इस योगासन को करने की सोच रहे हैं, तो यहां बताई गई सावधानियों और टिप्स पर भी जरूर गौर करें। इससे वज्रासन कब नहीं करना चाहिए और किन स्थिति में थोड़ा ध्यान देना आवश्यक है, यह सब समझने में मदद मिलेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वज्रासन की मुद्रा में कितनी देर तक बैठा जा सकता है?

अगर मन में यह सवाल है कि वज्रासन कितनी देर करना चाहिए, तो जान लीजिए कि शुरुआती अभ्यासी इसे 5 से 10 मिनट रुक-रुककर कर सकते हैं। ऐसे लोग जो इसका कई महीनों से अभ्यास कर रहें है, वो इसे 20 से 30 मिनट तक कर सकते हैं (1)। इसके अलावा, इस आसन में निपूर्ण अभ्यासी सुप्त वज्रासन भी कर सकते हैं।

सुप्त वज्रासन क्या है?

वज्रासन के एडवांस पोज को सुप्त वज्रासन कहा जाता है। इस दौरान वज्रासन की मुद्रा में बैठने के बाद पीछे की तरफ झुककर हाथों और कोहनियों को जमीन से टिकाया जाता है।

वज्रासन किसे नहीं करना चाहिए?

इस आसन को ऑस्टियोअर्थराइटिस (हड्डी से संबंधित रोग) के मरीज और गर्भवती को न करने की सलाह दी जाती है (1)।

वज्रासन से पेट की चर्बी कम होती है?

जी हां, वज्रासन करने से पेट की चर्बी कम हो सकती है (3)।

क्या वज्रासन वॉकिंग से बेहतर है?

वज्रासन योग और वॉकिंग दोनों अपनी-अपनी जगह बेहतर है। इन दोनों क्रियाओं का ज्यादा असर पैर की मांसपेशियों पर पड़ता है। ऐसे में यह स्पष्ट रूप से कहा नहीं जा सकता है कि वज्रासन और वॉकिंग में क्या बेहतर है।

3 Sources

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भूपेंद्र वर्मा ने सेंट थॉमस कॉलेज से बीजेएमसी और एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी से एमजेएमसी किया है। भूपेंद्र को लेखक के तौर पर फ्रीलांसिंग में काम करते 2 साल हो गए हैं। इनकी लिखी हुई कविताएं, गाने और रैप हर किसी को पसंद आते हैं। यह अपने लेखन और रैप करने के अनोखे स्टाइल की वजह से जाने जाते हैं। इन्होंने कुछ डॉक्यूमेंट्री फिल्म की स्टोरी और डायलॉग्स भी लिखे हैं। इन्हें संगीत सुनना, फिल्में देखना और घूमना पसंद है।

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