विन्यास योग के फायदे और करने का तरीका – Vinyasa Yoga Steps And Benefits in Hindi

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योग ऐसा विकल्प है, जो शारीरिक व मानसिक रूप से चुस्त और दुरुस्त रखने में मदद कर सकता है। खास बात यह है कि इसके लिए आपको किसी उपकरण की जरूरत नहीं होती है। इसे घर के अंदर और बाहर कहीं भी किया जा सकता है। यही वजह है कि इन दिनों लोगों में योग के प्रति रुझान काफी बढ़ा है। क्या आप जानते हैं कि योग के कई प्रकार हैं और उनमें शामिल योगासन भी अलग-अलग हैं। योग के इन्हीं प्रकारों में से एक है विन्यास योग। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम विन्यास योग के बारे में बताने जा रहे हैं। इससे आपके लिए विन्यास योग के योगासन को समझने के साथ ही विन्यास योग करने के फायदे और विन्यास योग करने का तरीका जानना आसान हो जाएगा।

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आइए, सबसे पहले जानते हैं विन्यास योग किसे कहा जाता है।

विन्यास योग क्या है? – What is Vinyasa in hindi

विन्यास योग दो शब्दों के मेल से बना है। इसमें पहला शब्द है विन्यास, जिसका अर्थ है किसी भी चीज को एक विशेष क्रम में लगाना। वहीं योग का अर्थ योगासनों से है। इस कारण कुछ विशेष आसनों को एक निश्चित क्रम में करना ही विन्यास योग कहलाता है। इसमें कुछ ऐसे योगासनों को शामिल किया जाता है, जिन्हें एक के बाद एक करने से शरीर का तापमान बढ़ता है और तेजी से पसीना आता है। यही वजह है कि सूर्य नमस्कार को भी एक प्रकार का विन्यास योग कहा जाता है, जो हठ योग की श्रेणी में भी आता है। वैसे सामान्य रूप से विन्यास योग में कुछ खास योगासनों का एक निश्चित क्रम शामिल किया जाता है, जिसके बारे में हम आगे लेख में बताएंगे।

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लेख के अगले भाग में विन्यास योग करने के फायदे के बारे में जानेंगे।

विन्यास योग करने के फायदे – Benefits of Vinyasa Yoga in hindi

यहां हम क्रमवार विन्यास योग करने के फायदे बता रहे हैं। इन्हें जानने के बाद आप आसानी से विन्यास योग की उपयोगिता को समझ पाएंगे।

1. तनाव को कम करे

चिंता और तनाव जैसी समस्या से राहत पाने के लिए विन्यास योग का सहारा लिया जा सकता है। बेनिफिट्स ऑफ विन्यास योग से संबंधित एक शोध से इस बात की पुष्टि होती है। शोध में माना गया है कि विन्यास योग दिल के धड़कने की परिवर्तनशीलता (heart rate variability) को बढ़ाने का काम करता है। साथ ही यह चिंता और तनाव जैसी समस्याओं को दूर करने में भी कारगर साबित हो सकता है (1)। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि तनाव को कम करने में विन्यास योग पोजेज सहायक हो सकते हैं।

2. मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करे

विन्यास योग का नियमित अभ्यास मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने में मददगार हो सकता है। इस बात का जिक्र एक शोध में भी मिलता है। शोध में माना गया है कि नियमित विन्यास योग का अभ्यास करने से मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। साथ ही शारीरिक सहन शक्ति, कार्य करने की क्षमता और फेल्क्सिबिलिटी भी बढ़ती है (2)। इस आधार पर मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने के मामले में भी विन्यास योग पोजेज को प्रभावी माना जा सकता है।

3. पीठ दर्द में सहायक

विन्यास योग पोजेज पीठ दर्द से राहत दिलाने में भी लाभकारी हो सकते हैं। दो अलग-अलग शोध से इस बात का इशारा मिलता है। दरअसल, जर्नल ऑफ फिजिकल थेरेपी साइंस के एक शोध के मुताबिक हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों (जांघ के पिछले हिस्से में पाई जाने वाली विशेष मांसपेशियां) में खिंचाव पैदा करने से पीठ दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है (3)। वहीं, एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध के अनुसार, इस योग के अभ्यास से हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों में खिंचाव पैदा होता है, जो शरीर को लचीला बनाने में मदद कर सकता है (2)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि पीठ दर्द से राहत पाने के लिए भी विन्यास योग का अभ्यास किया जा सकता है।

4. स्टैमिना बढ़ाए

शारीरिक सहनशक्ति के साथ ही स्टैमिना यानी मानसिक सहनशक्ति को बढ़ाने में भी विन्यास योग के प्रभाव हासिल किए जा सकते हैं। इस बात को बेनिफिट्स ऑफ विन्यास योग से संबंधित एक जर्नल में भी स्वीकार किया गया है (4)। इस आधार पर स्टैमिना बढ़ाने के मामले में विन्यास योग पोजेज को सहायक माना जा सकता है।

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आगे अब हम विन्यास योग करने का तरीका बताएंगे।

विन्यास योग करने का तरीका – Steps to do Vinyasa in Hindi

जैसा कि लेख में बताया गया है कि विन्यास योग में कुछ विशेष आसनों को निश्चित क्रम में किया जाता है। विन्यास योग के योगासन में क्रमवार फलकासन, अष्टांग नमस्कार, भुजंगासन, चतुरंग दंडासन, ऊर्ध्व मुख श्वानासन, अधोमुख श्वानासन और शवासन शामिल हैं। आइए, क्रमवार इन सभी विन्यास योग के योगासन को करने के तरीके को समझ लेते हैं।

1. फलकासन करने का तरीका

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निम्न चरणों के माध्यम से फलकासन को करने का तरीका समझा जा सकता है।

  • सबसे पहले योग मैट बिछाकर उस पर सीधे खड़े हो जाएं।
  • फिर फलकासन की शुरुआत करने के लिए पुशअप की स्थिति में आ जाएं।
  • अब दाएं पैर के पंजे को जितना हो सके पीछे की ओर ले जाएं।
  • इसके बाद ठीक उसी प्रकार बाएं पैर के पंजे को जितना संभव हो पीछे ले जाएं।
  • सुनिश्चित करें कि दोनों हथेलियां छाती के अगल-बगल हों और शरीर का भार हथेलियों पर हो।
  • फिर हथेलियों पर हल्का जोर देते हुए दोनों बाजुओं को पूरा खोलें और शरीर को ऊपर की ओर उठाएं।
  • इस स्थिति में सुनिश्चित करें कि आपके पूरे शरीर का वजन आपके दोनों हाथों और पंजों पर रहे।
  • साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि सिर, रीढ़, कूल्हे और घुटने एक दम सीधे और एक सीध में रहेंगे।
    इस स्थिति में अब करीब 40 से 60 सेकेंड तक बने रहने का प्रयास करें।
  • बाद में अपने घुटनों को जमीन पर टिकाते हुए बालासन की स्थिति में आएं और कुछ देर आराम करें।
  • अंत में प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।

2. अष्टांग नमस्कार करने का तरीका

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अष्टांग नमस्कार को करने का तरीका निम्न प्रकार से है:

  • सबसे पहले योग मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं।
  • ऐसा करते समय आपके दोनों हाथ कंधों के अगल-बगल होंगे।
  • फिर गहरी सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों के बल उठने की कोशिश करें।
  • उठने के दौरान आपको यह ध्यान रखना है कि आपके दोनों हाथ, दोनों पंजे, दोनों घुटने, छाती और ठोड़ी जमीन को स्पर्श करे, जिस प्रकार ऊपर फोटो में दिखाया गया है।
  • इस अवस्था में आने के बाद सामान्य गति से सांस लेते रहें।
  • बाद में सांस छोड़कर अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।

3. भुजंगासन करने का तरीका

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भुजंगासन करने का तरीका कुछ इस प्रकार है :

  • सबसे पहले योग मैट पर पेट के बल लेट जाएं।
  • अब हाथों को सिर के दोनों तरफ रखें और माथे को जमीन से टिकाएं।
  • इस दौरान अपने पैरों को तना हुआ रखें और इनके बीच थोड़ी जगह भी छोड़ें।
  • अब अपनी हथेलियों को अपने कंधों के बराबर में लाएं।
  • फिर लंबी गहरी सांस भरते हुए हाथों से जमीन की ओर दबाव डालते हुए, नाभि तक शरीर को ऊपर उठाने का प्रयास करें।
  • आपको सबसे पहले मस्तक, फिर छाती और आखिर में नाभि वाले हिस्से को ऊपर उठाना होगा।
  • इस पोजीशन में रहकर आसमान की ओर देखने की कोशिश करें और इस पोजीशन में कुछ देर ठहरें।
  • इस दौरान अपने शरीर का भार दोनों हाथों पर बराबर बनाएं रखें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
  • अब धीरे-धीरे सांस को छोड़ते हुए अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • इस तरह आप इस योग का एक चक्र पूरा करेंगे।
  • आप अपनी क्षमतानुसार इस योग के तीन से पांच चक्र पूरे कर सकते हैं।

4. चतुरंग दंडासन करने का तरीका

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निम्न बिन्दुओं के माध्यम से चतुरंग दंडासन को करने का तरीका आसानी से समझ आ जाएगा।

  • सबसे पहले योग मैट बिछाकर उस पर पेट के बल लेट जाएं।
  • अब भुजंगासन की तरह अपने दोनों हाथों को कंधे के अगल-बगल रखें।
  • फिर अपने पंजों को जमीन पर टिकाएं, ताकि उन पर शरीर के वजन को उठाया जा सके।
  • इसके बाद धीरे-धीरे अपने पैरों के पंजे पर जोर देते हुए दोनों घुटनों को जमीन से ऊपर उठाएं।
  • अब सांस अंदर लेते हुए दोनों हाथों पर जोर देते हुए पूरे शरीर को जमीन से ऊपर उठाएं।
  • शरीर को ऊपर उठाते वक्त सुनिश्चित करें कि हाथ का ऊपरी हिस्सा और हाथ का निचला हिस्सा कोहनी से 90 अंश का कोण बना रहा हो, जैसा ऊपर फोटो में दिखाया गया है।
  • इस दौरान आपके हाथ और पैर के पंजे ही जमीन को स्पर्श करेंगे और बाकी शरीर जमीन से ऊपर उठा रहेगा।
  • करीब 30 सेकंड तक आप इसी स्थिति में बने रहने का प्रयास करें।
  • समय पूरा होने के बाद गहरी सांस छोड़ते हुए अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।

5. ऊर्ध्व मुख श्वानासन करने का तरीका

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ऊर्ध्व मुख श्वानासन करने का तरीका कुछ इस प्रकार है :

  • सबसे पहले योग मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं।
  • अपने पैर के पंजों को पीछे की ओर फैलाते हुए जमीन से लगाएं।
  • अब अपने हाथों को कोहनियों से मोड़ते हुए अपने कंधों के अगल-बगल रखें।
  • इस दौरान सुनिश्चित करें कि आपके हाथों की सभी उंगलियां आपस में जुड़ी रहें और आगे के और फैली हों।
  • अब सांस लेते हुए हथेलियों से जमीन को दबाते हुए अगले धड़ को जमीन से उठाने का प्रयास करें।
  • धीरे-धीरे अपने घुटनों, कूल्हों और धड़ को जमीन से ऊपर की ओर उठाएं।
  • सुनिश्चित करें कि इस दौरान आपके शरीर का पूरा भार पंजों और हाथों पर रहे।
  • इसके बाद जितना संभव हो सिर को पीठ की ओर ले जाने का प्रयास करें।
  • इस दौरान आपकी कलाई कंधों की सीध में ही होनी चाहिए।
  • करीब 40 सेकंड तक इसी स्थिति में बने रहें और धीरे-धीरे सांस लेते रहें।
  • समय पूरा होने के बाद अपने कूल्हों, घुटनों और धड़ को धीरे-धीरे जमीन पर वापस लाते हुए प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।

6. अधोमुख श्वानासन करने का तरीका

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निम्न बिन्दुओं के माध्यम से अधोमुख श्वानासन करने का तरीका समझा जा सकता है।

  • सबसे पहले योग मैट बिछाकर व्रजासन की मुद्रा में आ जाएं।
  • इसके बाद आगे की ओर झुकते हुए हथेलियों को जमीन से सटा लें।
  • फिर सांस छोड़ते हुए घुटनों को सीधा करें और कमर को ऊपर की ओर उठाएं।
  • बाद में हाथों के सहारे शरीर को हल्का पीछे खीचें और जितना हो सके कमर को ऊपर उठाने का प्रयास करें।
  • वहीं, यह भी सुनिश्चित करें कि ऐसा करते समय एड़ियां जमीन से सटी रहें।
  • अब सिर को नीचे की ओर झुकाते हुए अपनी नाभि की तरफ देखें।
  • इस दौरान शरीर का पूरा वजन हाथों और पैरों पर होना चाहिए।
  • करीब 20 से 30 सेकंड इसी अवस्था में रहें और सामान्य सांस लेते रहें।
  • अंत में गहरी सांस छोड़ते हुए अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।

7. शवासन करने का तरीका

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शवासन करने का तरीका निम्न चरणों के आधार पर समझा जा सकता है:

  • जमीन पर योग मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं।
  • अब अपनी हथेलियों को शरीर से कुछ दूरी पर रखें।
  • सुनिश्चित करें कि हथेलियों की दिशा आसमान की ओर रहे।
  • दोनों पैरों को सीधा रखें और उनके बीच कुछ दूरी बनाए रखें। साथ ही पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें।
  • अब अपनी आंखों को बंद कर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें।
  • हल्की-हल्की सांस लें और विचार करें कि आपका शरीर पूरी तरह से हल्का हो गया है।
  • इस दौरान दिमाग को पूरी तरह से शांत रखने पर विशेष ध्यान दें।
  • इस स्थिति में करीब चार से पांच मिनट तक रहें।
  • अंत में आप आराम की अवस्था में वापस आ जाएं।

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विन्यास योग के योगासन के बाद हम शुरुआती लोगों के लिए विन्यास योग करने के टिप्स बताएंगे।

शुरुआती लोगों के लिए विन्यास योग करने के टिप्स – Beginner’s Tip to do Vinyasa in Hindi

विन्यास योग के अभ्यास की शुरुआत करने वाले लोगों को कुछ बातें अवश्य ही ध्यान में रखनी चाहिए, जो इस प्रकार हैं :

  • विन्यास योग में कई योगासन शामिल हैं, इसलिए पहले इन सभी योगासनों का अलग-अलग अभ्यास किया जाना आवश्यक है।
  • किसी भी योगासन को करते वक्त मन को शांत रखें और उस आसन को करने के सही तरीके पर ध्यान दें।
  • शुरुआती समय में किसी भी आसन को कम समय के लिए ही करें। अभ्यास हो जाने के बाद ही उस आसन को करने के समय को बढ़ाना चाहिए।
  • सभी आसन सही ढंग से हो रहे हैं या नहीं इस बात को सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभिक समय में योग ट्रेनर की उपस्थिति में ही इस आसनों को करें।
  • विन्यास योग में शामिल किसी भी आसन को करने के दौरान अगर किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट हो रहा हो, तो शरीर के उस हिस्से पर अधिक जोर या

दबाव बिल्कुल न डालें।

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अंत में विन्यास योग से जुड़ी कुछ सावधानियों को समझ लेते हैं।

विन्यास योग के लिए कुछ सावधानियां – Precautions for Vinyasa In Hindi

विन्यास योग से जुड़ी सावधानियां कुछ इस प्रकार हैं :

  • गर्भावस्था या माहवारी के दौरान विन्यास योग को नहीं करना चाहिए।
  • अगर किसी तरह की चोट या फ्रैक्चर हो, तो इन योगासन को नहीं करना चाहिए।
  • विन्यास योग में कई आसनों को एक के बाद एक क्रम में किया जाता है। इसलिए, ऐसे लोग जिन्हें सांस लेने में तकलीफ हो या सांस की शिकायत हो, उन्हें

विन्यास योग न करने की सलाह दी जाती है।

विन्यास योग कितना फायदेमंद है और इसके सहारे किन-किन समस्याओं से राहत पाई जा सकती है, यह तो आप जान गए होंगे। ऐसे में योग के इस प्रकार को नियमित अभ्यास में शामिल कर एक स्वस्थ और निरोगी शरीर को पाने की ओर सार्थक कदम बढ़ाना बुरा नहीं होगा। विन्यास योग का लाभ उठाने के लिए विन्यास योग करने का तरीका और इससे जुड़ी सावधानियों को ध्यान में रखने की जरूरत है। अगर आप पहली बार विन्यास योग कर रहे हैं, तो बेहतर होगा कि आप इसे प्रशिक्षक की निगरानी में ही करें। उम्मीद है यह लेख आप सभी को काफी पसंद आएगा। सेहत और स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे ही अन्य लेख पढ़ने के लिए स्टाइलक्रेज वेबसाइट पर विजिट करते रहें।

संदर्भ (Source):

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Ankit Rastogi

अंकित रस्तोगी ने साल 2013 में हिसार यूनिवर्सिटी, हरियाणा से एमए मास कॉम की डिग्री हासिल की है। वहीं, इन्होंने अपने स्नातक के पहले वर्ष में कदम रखते ही टीवी और प्रिंट मीडिया का अनुभव लेना शुरू कर दिया था। वहीं, प्रोफेसनल तौर पर इन्हें इस फील्ड में करीब 6 सालों का अनुभव है। प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में इन्होंने संपादन का काम किया है। कई डिजिटल वेबसाइट पर इनके राजनीतिक, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल से संबंधित कई लेख प्रकाशित हुए हैं। इनकी मुख्य रुचि फीचर लेखन में है। इन्हें गीत सुनने और गाने के साथ-साथ कई तरह के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाने का शौक भी हैं।

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