वीरभद्रासन करने का तरीका और फायदे- Virabhadrasana Yoga in Hindi

Written by , (एमए इन मास कम्युनिकेशन)

योग से होने वाले फायदों को देखते हुए इसे हर किसी को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी जाती है। योग न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ के लिए लाभकारी है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। शरीर को तमाम समस्याओं से बचाने के लिए विभिन्न योगासन का सहारा लिया जाता है, जिसमें से एक वीरभद्रासन भी है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम बताएंगे कि वीरभद्रासन करने का तरीका क्या है। साथ ही यहां आप वीरभद्रासन करने के फायदे भी जानेंगे।

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सबसे पहले जानेंगे वीरभद्रासन क्या है।

वीरभद्रासन क्या है?

वीरभद्रासन को वॉरईयर पोज (Warrior Pose) के नाम से भी जाना जाता है। इस मुद्रा का नाम वीरभद्र, नामक योद्धा के नाम पर रखा गया है, जो कि भगवान शिव का एक अवतार है। वीरभद्रासन तीन शब्दों से मिलकर बना है, ‘वीर’ का मतलब योद्धा, जबकि दूसरे शब्द ‘भद्र’ का अर्थ मित्र यानी दोस्त होता है और आसन। यह मुद्रा बाहों, कंधों, जांघों और पीठ की मांसपेशियों में खींचाव उत्पन्न कर ताकत प्रदान करती है (1)।

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लेख के इस भाग में वीरभद्रासन करने के फायदे के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

वीरभद्रासन करने के फायदे – Benefits of Virabhadrasana Yoga in Hindi

वीरभद्रासन को करने से कई तरह के स्वास्थ लाभ हो सकते हैं, जिनके बारे में लेख में नीचे जानकारी दे रहे हैं। तो आइए जान लेते हैं वीरभद्रासन करने के फायदे क्या हैं (1)।

  • यह आसन कंधों, बाहों, पैरों और पीठ के निचले हिस्से में खिंचाव उत्पन्न कर उन्हें मजबूत बना सकता है।अधिक समय तक डेस्कजॉब करने वालों के लिए इसका अभ्यास फायदेमंद हो सकता है।
  • यह छाती, फेफड़े, कंधे, गर्दन, पेट और कमर के हिस्सों को फैलाता है।
  • इसके नियमित अभ्यास से शरीर के संतुलन में सुधार हो सकता है।
  • इसके अलावा यह सहनशक्ति को बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
  • यह कंधे की अकड़न (फ्रोजन शोल्डर) में लाभ पहुंचा सकता है।
  • यह कम समय में बेहद ही प्रभावी ढंग से कंधों में तनाव को दूर कर सकता है।
  • यह जांघों, पिंडलियों और टखनों को मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।

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आइए अब जान लेते हैं वीरभद्रासन करने से पहले किन आसनों को करना चाहिए।

वीरभद्रासन करने से पहले करें यह आसन

अध्ययन की मानें तो वीरभद्रासन करने से पहले नीचे दिए गए आसनों को करना चाहिए। इससे शरीर के हिस्से जैसे कूल्हे, जांघ व कंधे खुल जाते हैं (1)।

  • अधोमुख श्वानासन
  • गोमुखासन
  • परिवृत्त पार्श्वकोणासन
  • परिवृत्त त्रिकोणासन
  • प्रसार पादोत्तानासन
  • सुप्त विरासन
  • सुप्त बद्ध कोणासन
  • सुप्त पादंगुष्ठासन
  • उपविष्ठ कोणासन
  • उत्थिता पार्श्वकोणासन
  • विरासन
  • वृक्षासन

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आइए जान लेते हैं वीरभद्रासन करने का तरीका क्या होना चाहिए।

वीरभद्रासन आसन करने का तरीका

वीरभद्रासन करने के फायदे पाने के लिए वीरभद्रासन करने का सही तरीका पता होना चाहिए। नीचे हम वीरभद्रासन करने का सही तरीका बताने जा रहे हैं (1)।

स्टेप 1: सबसे पहले ताड़ासन मुद्रा में खड़े हो जाएं। श्वास अंदर लें और 3 से 4 फीट पैरों के बीच गैप कर लें।
स्टेप 2: अपने बाएं पैर को 45 से 60 डिग्री अंदर की ओर मोड़ें, और दाहिने पैर को 90 डिग्री बाहर की ओर मोड़ें। बाएं एड़ी के साथ दाहिनी एड़ी संरेखित करें। इसके बाद सांस को छोड़ते हुए अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को दाहिनी ओर 90 डिग्री पर घुमाने की कोशिश करें। इस दौरान ध्यान दें कि जितना हो सकता है उतना ही शरीर को घुमाएं, जबरदस्ती न करें।
स्टेप 3: इसके बाद अपने हाथ उठाएं व सीधा धड़ की सीध में लाएं, इसके बाद हथेलियों को सटाकर छत की ओर उंगलियों को पॉइंट करें।
स्टेप 4: बाईं एड़ी को जमीन पर मजबूजी से टिकाकर रखें, व दाहिने घुटने को मोड़ें जब तक की घुटना सीधा टखने की ऊपर ना आ जाए। अगर शरीर लचीला है, तो जांघ को जमीन से समांतर कर लें। अपने सिर को उठाएं व दृष्टि को उंगलियों पर रखें। इस स्थिति में करीब 5 बार सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें ताकि आप आसन में 30 से 60 सेकेंड तक रह सकें।
स्टेप 5: 5 बार सांस अंदर बाहर लेने के बाद इस आसन को खत्म किया जा सकता है, आसन से बाहर निकलने के लिए सिर नीचे की तरफ कर लें, फिर दाहिनी जांघ को उठाएं, हाथ नीचे कर लें, धड़ को वापिस सीधा कर लें और पैरों को वापिस अंदर ले व ताड़ासन मुद्रा में यह आसन खत्म करें।

अंत तक बने रहें

वीरभद्रासन करने का तरीका जानने के बाद अब जान लेते हैं कुछ सावधानियों के बारे में।

वीरभद्रासन करने के दौरान सावधानियां- Precautions to do Virabhadrasana in Hindi

वीरभद्रासन करने का तरीका तो हम ऊपर बता ही चुके हैं, लेकिन वीरभद्रासन करने के दौरान कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए, जिसके बारे में हम नीचे विस्तार से बताने जा रहे हैं (1)।

  • जिन लोगों को उच्च रक्तचाप की समस्या है वो इस आसन को करने से परहेज करें।
  • वहीं, जिन्हें कंधे से जुड़ी कोई समस्या है उन्हें वीरभद्रासन करने के दौरान हाथों को समानांतर रखना चाहिए।
  • अगर गर्दन से जुड़ी समस्या है, तो ये आसन करने के दौरान सिर को सीधा रखें, व ऊपर न उठाएं।
  • दीवार के पास खड़े होकर वीरभद्रासन का अभ्यास करें ताकि जरूरत पड़ने पर खुद को सहारा दे सकें। हालांकि इससे पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
  • हृदय रोग से संबंधित रोगियों को इस आसन को करने से बचना चाहिए।
  • इसके अलावा घुटने में दर्द या गठिया की समस्या है तो इस योग मुद्रा को धारण करने के लिए घुटने पर किसी सहारे का उपयोग करें।
  • किसी भी आसन को करने के दौरान शारीरिक क्षमता से अधिक जोर जबरदस्ती न करें।

स्वस्थ रहने के लिए योग एक बेहतरीन माध्यम है। इसे करने से न सिर्फ मन शांत होता है, बल्कि तमाम समस्याओं से भी छुटकारा मिल सकता है। ऐसे में लेख में बताए गए तरीके को अपनाकर वीरभद्रासन करने के फायदे उठाएं। यह दिमाग को शांत करने के साथ ही श्वसन प्रणाली को भी फायदे पहुंचा सकता है। बस तो निरोग रहने के लिए विभिन्न योगासन की मदद लेते रहें। अगर वीरभद्रासन करना चाह रहे हैं, तो लेख में वीरभद्रासन करने का तरीका और सावधानियां पढ़कर ही इस योग को करें।

संदर्भ (Source):

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  1. Importance of Virabhadrasana-I in day to day life
    https://www.ijrpr.com/uploads/V2ISSUE2/IJRPR163.pdf

 

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