विटामिन डी के फायदे, मुख्य स्रोत और नुकसान – All About Vitamin D in Hindi

Written by , (शिक्षा- एमए इन मास कम्युनिकेशन)

हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में कई प्रकार के विटामिन अहम भूमिका निभाते हैं। इनमें से कुछ विटामिन्स त्वचा और बालों के लिए जरूरी होते हैं, तो कुछ हड्डियों के लिए। इन्हीं विटामिन्स में से एक है विटामिन (1)। विटामिन डी हमारे शरीर के के लिए क्यों अहम होता है, इसी के बार में हम स्टाइलक्रेज के इस लेख में जानकारी देने वाले हैं। यहां आप विटामिन डी क्या है, शरीर में विटामिन डी की कमी के लक्षण और विटामिन डी की कमी से होने वाले रोग की जानकारी विस्तार से पढ़ सकते हैं। साथ ही यहां आप विटामिन डी की कमी के उपचार भी जानेंगे। तो विटामिन डी से जुड़े हर मुख्य जानकारी के लिए लेख को अंत तक पढ़ें।

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विटामिन डी के प्रकार जानने से पहले पढ़ें विटामिन डी की कमी के बारे में।

विटामिन डी की कमी क्या है?

आसान शब्दों में विटामिन डी की कमी का अर्थ बताएं, तो इसका मतलब है उचित मात्रा में शरीर को विटामिन डी न मिलना (2)। वैसे तो शरीर में विटामिन डी की कमी से कई लक्षण सामने आने लगते हैं, लेकिन शरीर की कमजोर होती हड्डियां अहम लक्षणों में से एक गिनी जा सकती हैं। यही वजह है कि शरीर में विटामिन डी की कमी होने से हड्डियों से संबंधित रोग जैसे – ऑस्टियोपोरोसिस, ओस्टीयोमलेशिया और रिकेट्स के होने का जोखिम भी बढ़ सकता है। साथ ही इसकी कमी हड्डियों और जोड़ों, खासकर पैरों की हड्डियों में दर्द होने का कारण भी बन सकता है (3)।

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विटामिन डी की कमी पढ़ने के बाद आगे पढ़ें विटामिन डी के प्रकार के बारे में।

विटामिन डी के प्रकार – Types Of Vitamin D

विटामिन डी मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं, पहला विटामिन डी 2 और दूसरा विटामिन डी 3। विटामिन डी के दोनों ही प्रकार के बारे में नीचे विस्तार से जानकारी दी गई है (3)।

1. विटामिन डी 2: विटामिन डी 2 को एर्गोकैल्सीफेरोल (Ergocalciferol) भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से कुछ तरह के प्लांट्स या पौधों और यीस्ट में पाया जाता है। इसका इस्तेमाल विटामिन डी के फोर्टिफिकेशन और सप्लीमेंट्स बनाने में किया जा सकता है।

2. विटामिन डी 3: विटामिन डी 3 को कोलेकल्सीफेरोल (Cholecalciferol) के नाम से भी जाना जाता है। सामान्य तौर पर जब हमारी त्वचा सूर्य की रोशनी के संपर्क में आती है, तो त्वचा में विटामिन डी 3 का उत्पादन होता है। विटामिन डी 3 के कई स्त्रोत हैं, जिनमें विभिन्न आहार जैसे – वसायुक्त मछलियां, अंडा या अन्य मांसाहारी खाद्य शामिल हैं। इसके अलावा, कई तरह के फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों और सप्लीमेट्स के तौर पर भी विटामिन डी 3 प्राप्त किया जा सकता है।

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विटामिन डी के प्रकार जानने के बाद आगे पढ़ें शरीर और विटामिन डी के बीच का संबंध।

विटामिन डी की आपके शरीर में क्या भूमिका है?

मुख्य तौर पर 13 प्रकार के विटामिन्स होते हैं, जिनमें विटामिन डी भी शामिल है (1)। विटामिन डी ऐसा तत्व है, जो शरीर में कैल्शियम को अवशोषित (Absorption) करने में मदद कर सकता है। कैल्शियम हड्डियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी माना गया है। दरअसल, विटामिन डी की कमी के कारण हड्डियों से संबंधित विकार जैसे – ऑस्टियोपोरोसिस और रिकेट्स आदि के जोखिम बढ़ सकते हैं। साथ ही यह तंत्रिका, मांसपेशियों और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी मददगार माना जा सकता है (4)। यही वजह है कि शरीर में विटामिन डी की उपयुक्त मात्रा बेहतर स्वास्थ के लिए जरूरी है।

नोट : सामान्य रूप से एक स्वस्थ्य मनुष्य को प्रतिदिन 400 से 800 आईयू यानी 10 माइक्रोग्राम से 20 माइक्रोग्राम विटामिन डी की जरूरत हो सकती है (5)। लेख में आगे आप व्यक्ति की उम्र के अनुसार विटामिन डी की मात्रा के बारे में विस्तार से जानेंगे।

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सूर्य की रोशनी आपकी विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकती है या नहीं, जानने के लिए नीचे पढ़ें।

क्या हमें सूर्य से पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिल सकता है? – Vitamin D from sun in hindi

विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए सूर्य की रोशनी को एक बेहतर विकल्प माना गया है। कहा जाता है कि सूर्य की रोशनी में समय बिताने मात्र से ही विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा को हासिल किया जा सकता है (6)। बता दें, यह तभी संभव है, जब सूर्य की रोशनी सीधे शरीर पर पड़े।

वहीं, इससे अलग धूप के संपर्क में अधिक देर तक रहने के कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। कारण यह है कि सूरज की रोशनी में शामिल अल्ट्रावायलेट किरणें शरीर पर जलन, खुजली और अन्य त्वचा संबंधी विकार पैदा कर सकती हैं (7 )। इसलिए, विटामिन डी वाले आहार को अपनी डाइट में शामिल करके विटामिन डी की कमी से बचाव या उसकी कमी को पूरा किया जा सकता है।

नीचे पढ़ें धूप के संपर्क में जाने का सही समय और साथ ही यह भी जानें कि धूप से बचाव करने के लिए क्या करें (7 ) (8)।

  • दोपहर के समय या तेज धूप में जानें से बचें। कोशिश करें कि दिन के 10 बजे से शाम के 4 बजें तक धूप में बाहर न जाएं। अगर धूप में निकल भी रहें हैं, तो छाते का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • सनबर्न होने से बचाव करें, क्योंकि इसकी समस्या बढ़ने से स्किन कैंसर और झुर्रियों का जोखिम बढ़ सकता है। इसके लिए धूप में जाने से 20 से 30 मिनट पहले एसपीएफ यानी सन प्रोटेक्शन फैक्टर 15 युक्त सनस्क्रीन या लोशन का इस्तेमाल करें। साथ ही, हर दो घंटे बाद भी इसका इस्तेमाल करते रहें। यह खसतौर पर, उस वक्त के लिए है जब धूप तेज हो। देखा जाए तो गर्मियों के मौसम में इसकी अधिक जरूरत पड़ सकती है।
  • धूप से बचाव करने वाले कपड़े पहनें।
  • सनग्लासेज पहनें। इससे आंखों को सूर्य के हानिकारक प्रभाव से बचाया जा सकता है।
  • धूप में जाते समय टोपी पहनें।
  • धूप का तापमान कितना है, यह जानने के लिए यूवी इंडेक्स की निगरानी भी कर सकते हैं।
  • पानी, बर्फ और रेत जैसी जगहों पर जानें से बचें, क्योंकि ऐसे स्थानों पर धूप का असर तेज हो सकता है, जो सनबर्न की संभावना को बढ़ा सकते हैं।

धूप में रहने का समय : सप्ताह में कम से कम 3 बार 10 से 15 मिनट के लिए धूप के संपर्क में रहा जा सकता है (1)।

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अब हम विटामिन डी की कमी का कारण बता रहे हैं।

शरीर में विटामिन डी की कमी होने के कारण – Causes of Vitamin D Deficiency in Hindi

अब सवाल यह उठता है कि विटामिन डी की कमी का कारण क्या हो सकता है। आइए लेख के इस भाग में जानते हैं विटामिन डी की कमी का कारण क्या हो सकता है। तो विटामिन डी की कमी का कारण जानने के लिए नीचे दिए गए बिन्दुओं पर गौर करें (2) (6)।

  • पर्याप्त धूप का न मिल पाना विटामिन डी की कमी का मुख्य कारण हो सकता है।
  • त्वचा का रंग गहरा होना भी बड़ी वजह हो सकता है। माना जाता है कि गहरा रंग होने के कारण सूर्य के प्रकाश से विटामिन डी शरीर में ठीक से अवशोषित नहीं हो पाता या देर से होता है।
  • लिवर या किडनी के सही से काम न करने की वजह से भी शरीर में इसकी कमी हो सकती है।
  • हो सकता है कि किसी विशेष दवा के सेवन के कारण शरीर विटामिन डी को एक्टिव न कर पा रहा हो।
  • शरीर में विटामिन डी का कम स्तर होने के पीछे बढ़ती उम्र भी जिम्मेदार हो सकती है।
  • अन्य लोगों की तुलना में मोटे लोगों को विटामिन डी की अधिक आवश्यकता हो सकती है। इसलिए, मोटापे की समस्या भी विटामिन डी की कमी का एक कारण हो सकता है।
  • एनसीबीआई के अनुसार, गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी भी विटामिन डी की कमी का जोखिम बढ़ा सकती है। दरअसल, ऐसी स्थिति में शरीर में विटामिन डी का अवशोषित होना प्रभावित हो सकता है, जो विटामिन डी की कमी का कारण बन सकती है।
  • अत्यधिक सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना।
  • मालएब्जॉर्प्शन सिंड्रोम के कारण भी शरीर में विटामिन डी की कमी हो सकती है। यह सिंड्रोम होने से शरीर में विटामिन डी का अवशोषण प्रभावित हो सकता है।
  • मांसाहारी खाद्य के मुकाबले शुद्ध शाकाहारी और वीगन डाइट फॉलो करना भी विटामिन डी की कमी का कारण हो सकता है (a class=”citation_class” href=”https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2677010/” target=”_blank” rel=”follow noopener noreferrer”>9)।

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आगे लेख में हम विटामिन डी की कमी के लक्षण कैसे पहचाने जाए, इसके बारे में बात करेंगे।

विटामिन डी की कमी के लक्षण – Symptoms of Vitamin D Deficiency in Hindi

विटामिन डी की कमी के कारण जानने के बाद अब इसकी कमी के लक्षण जानना भी जरूरी है, ताकि वक्त रहते विटामिन डी की कमी से बचाव हो सके। तो ऐसे में विटामिन डी की कमी होने पर आपको कुछ इस प्रकार के लक्षण दिख सकते हैं (10) (11) (12) (13):

  • विटामिन डी के कमी के लक्षण के तौर पर हड्डियों में अक्सर दर्द की समस्या हो सकती है।
  • जरूरत से अधिक कमजोरी या थकान महसूस होना।
  • एक या एक से अधिक जोड़ों में दर्द (Arthralgias) होना।
  • मांसपेशियों में दर्द (Myalgias) होना।
  • मांसपेशियों में ऐंठन होना भी विटामिन डी 3 की कमी के लक्षणों में गिना जा सकता है।
  • उम्रदराज लोगों में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या हो सकती है। यह हड्डियों को कमजोर करने वाला एक प्रकार का हड्डी का रोग होता है।
  • विटामिन डी 3 की कमी के लक्षणों में मानसिक समस्याएं भी शामिल हो सकती हैं।
  • अवसाद की समस्या।
  • वहीं बच्चों में रिकेट्स का जोखिम हो सकता है, जो बच्चों की हड्डियां कमजोर कर सकता है।
  • बच्चों में आलस होना, उनका धीमा विकास होना और हड्डियों का टूटना भी विटामिन डी 3 की कमी के लक्षण हैं।

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विटामिन डी 3 की कमी के लक्षणों को जानने के बाद, इस भाग में पढ़ें विटामिन डी के फायदे।

विटामिन डी के फायदे – Vitamin D Benefits In Hindi

विटामिन डी की कमी से होने वाले रोग, उनके लक्षण और कारण जानने के बाद, चलिए अब जानते हैं कि विटामिन डी के फायदे किस तरह की स्वास्थ्य स्थितियों में लाभकारी हो सकते हैं। यहां हम विटामिन डी के सेवन से होने वाले कुछ फायदे बता रहे हैं। तो विटामिन डी के फायदे कुछ इस प्रकार हैं:

1. इम्यूनिटी के लिए

विटामिन डी में इम्यूनोमॉड्यूलेशन प्रभाव होता है, जो मजबूत इम्यूनिटी में सुधार कर सकता है (14)। विटामिन डी का इम्यूनोमॉड्यूलेशन प्रभाव शरीर की आवश्यकता के अनुसार रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम या ज्यादा कर सकता है। यह शरीर के इम्यून सेल्स जैसे टी सेल्स और मैक्रोफेज के कार्यों को बेहतर भी कर सकता है। साथ ही, विटामिन डी 3 में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया नष्ट करने का प्रभाव दिखा सकता है। इसका यह प्रभाव रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करने वाले एम. ट्यूबरकुलोसिस जैसे विभिन्न बैक्टीरिया को खत्म करके बैक्टीरियल इंफेक्शन से शरीर का बचाव कर सकता है (15)।

इसकी पुष्टि एनसीबीआई के एक अन्य शोध से भी की गई है। इस शोध में बताया गया है कि विटामिन डी इनफ्लुएंजा ए (फ्लू) के उपचार या बचाव में कारगर हो सकता है (16)। बता दें कि, इनफ्लुएंजा ए (फ्लू) एक संक्रामक बीमारी है, जो कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के कारण हो सकती है (17)। इस आधार पर कहा जा सकता है किम्यूनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ के तौर पर विटामिन डी का सेवन करना लाभकारी हो सकता है (2)।

2. नसों व मांसपेशियों के लिए

विटामिन डी की कमी सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियों जैसे – सिजोफ्रेनिया और मल्टीपल स्केलेरोसिस का जोखिम बढ़ा सकता है। वहीं, विटामिन डी का न्यूरोप्रोटेक्टिव प्रभाव ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से तंत्रिका कोशिकाओं को होने वाली क्षति को रोकने में मदद कर सकता है (13)। इसके अलावा, एनसीबीआई के एक अन्य शोध में यह भी बताया है कि विटामिन डी तंत्रिका के साथ-साथ मांसेपशियों को मजबूत बनाने व इसके कार्य को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकता है (18)।

इतना ही नहीं, विटामिन डी की खुराक नोसिसेप्टिव दर्द यानी शरीर की नसों में अचानक उठने वाले तेज दर्द से भी राहत दिला सकता है (19)। हालांकि, इस संबंध में अभी और शोध की आवश्यकता है, लेकिन मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए और दर्द से बचाव के लिए डाइट में विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है।

3. प्रोटीन लेवल के लिए

एक शोध के अनुसार, प्रोटीन पाउडर और अमिनो एडिस के साथ विटामिन डी का सेवन करने से न सिर्फ फैट फ्री मास को बढ़ाया जा सकता है, बल्कि शारीरिक शक्ति और सार्कोपेनिक (Sarcopenic) यानी बढ़ती उम्र के साथ कमजोर होती मांसपेशियों व उनके कार्यों में आ रही कमी को भी दूर किया जा सकता है। दरअसल, विटामिन डी की खुराक, मांसपेशियों में प्रोटीन के घुलने (Synthesis) की क्षमता बढ़ा सकता है। इससे न्यूरोमस्कुलर फंक्शन यानी शारीरिक गतिविधि, शक्ति और शारीरिक संतुलन बेहतर हो सकता है (20)।

4. कैल्शियम और फास्फोरस के स्तर के लिए

विटामिन डी आंतों में कैल्शियम और फास्फोरस जैसे सीरम के अवशोषण को बढ़ाने में मदद कर सकता है। इससे हड्डी में कैल्शियम के घुलने की प्रक्रिया तेज हो सकती है और गुर्दे में भी कैल्शियम के अवशेषण को बढ़ावा मिल सकता है (21)। इस वजह से विटामिन डी हड्डियों को मजबूत बनाने व आंतों के कार्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। बता दें कि कैल्शियम और और फॉस्फेट हड्डियों के सही निर्माण के लिए जरूरी मिनरल्स होते हैं (12)।

5. हड्डियों के लिए

विटामिन डी शरीर की हड्डियों के ढांचें को बेहतर बनाए रखने के लिए जरूरी माना जा सकता है (22)। दरअसल, विटामिन डी शरीर में कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद कर सकता है। वहीं, हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम जरूरी होता है। इसलिए, विटामिन डी हड्डियों को स्वस्थ रखने और उससे संबंधित ऑस्टियोपोरोसिस और रिकेट्स जैसे विकार को कम करने के लिए लाभकारी हो सकता है (4)। अध्ययनों से इसकी पुष्टि होती है, विटमिन डी कमजोर होती हड्डियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है (23)।

6. मस्तिष्क के लिए

विटामिन डी की कमी सेंट्रल नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचा सकती है। इससे मानसिक समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है (13)। शायद यही वजह है कि विटामिन डी के कम स्तर को ज्ञान संबंधी स्थितियों, जैसे – डिमेंशिया, सिजोफ्रेनिया, अवसाद, ऑटिज्म से जुड़ा हुआ पाया गया है। ऐसे में इनके जोखिम को कम करने के लिए और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए आहार में विटामिन डी को शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है, क्योंकि इसमें न्यूरोप्रोटेक्टिव प्रभाव होता है। इसका यह प्रभाव मस्तिष्क कार्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है (24)।

इसके अलावा, इटालियन लोगों पर किए गए एक शोध में इसकी पुष्टि भी होती है कि विटामिन डी का कम स्तर उम्रदराज लोगों के संज्ञानात्मक स्तर को कम कर सकता है, जिसकी वजह से उनमें याददाश्त खोने और ज्ञान-संबंधी अन्य समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है (6)। ऐसे मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए विटामिन डी का सेवन करना लाभकारी हो सकता है। हालांकि, मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर परेशानी होने पर डॉक्टरी इलाज को ही प्राथमिकता दें।

7. ह्रदय के लिए

एनसीबीआई की रिसर्च के अनुसार, शरीर में विटामिन डी की कमी हृदय संबंधी रोग का जोखिम बढ़ा सकती है। यही वजह भी है कि विटामिन डी की उचित खुराक हृदय स्वास्थ्य और उससे जुड़े रोगों से बचाव करने में मदद कर सकता है (25)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि ह्रदय संबंधी रोगों से बचाव के लिए आहार में विटामिन डी फूड चार्ट शामिल करना लाभकारी हो सकता हैं। हालांकि, विटामिन डी किस तरह से ह्रदय रोग का जोखिम कम करने में मदद कर सकता है, इस विषय में अभी भी अध्ययनों की आवश्यकता है (26)। इसलिए, अगर ह्रदय रोगों के लिए विटामिन डी सप्लीमेंट्स का सेवन करना चाहते हैं, तो डॉक्टरी सलाह लें।

8. पेट के लिए

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या है। इसके कारण पेट में गैस होना, पेट फूलना, पेट दर्द के लक्षण और कब्ज की समस्या भी हो सकती है (27)। वहीं, पाचन तंत्र से जुड़ी इस समस्या के उपचार में भी विटामिन डी सहायक हो सकता है। दरअसल, विटामिन डी इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के लक्षणों को कम कर सकता हैं। वहीं, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम कोलन कैंसर यानी पेट के कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में विटामिन डी के सेवन से पेट से जुड़ी समस्या से बचाव किया जा सकता है, जो पेट के कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। यही वजह है कि पेट से जुड़ी समस्या के उपचार में विटामिन डी की खुराक कुछ हद तक प्रभावकारी हो सकती है (28)।

9. मधुमेह के लिए

अध्ययनों के अनुसार, विटामिन डी का कम स्तर शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ा सकता है, जिससे मधुमेह का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में विटामिन डी का सेवन करने से शरीर में इंसुलिन लेवल कम किया जा सकता है, जिससे टाइप-2 मधुमेह से बचाव किया हो सकता है (29)।

वहीं, एक अन्य अध्ययन में यह भी पाया गया है कि टाइप-2 मधुमेह के इलाज के साथ विटामिन डी सप्लीमेंट देने से रक्त में शुगर की मात्रा (A1c (HbA1c), इंसुलिन रेजिस्टेंस में सुधार देखा गया। ऐसे में मधुमेह में विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ के सेवन को उपयोगी माना जा सकता है (30)। हालांकि, मधुमेह रोगी ध्यान दें कि विटामिन डी सप्लीमेंट्स डॉक्टर की सलाह पर ही लें। बता दें कि हीमोग्लोबिन A1c का स्तर बढ़ने से रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ सकती है, क्योंकि रक्त में इसका बढ़ना मधुमेह का संकेत हो सकता है, जो मधुमेह के साथ ही ह्रदय रोग, किडनी से जुड़े रोग और नसों के नुकसान का जोखिम बढ़ा सकता है (31)।

10. रक्तचाप कम करे

एनसीबीआई की अध्ययन के अनुसार, विटामिन डी में रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करने का प्रभाव होता है। ऐसे में अगर किसी को हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप की समस्या है, तो वे रक्तचाप कम करने वाली दवाओं के साथ ही विटामिन डी सप्लीमेंट्स का सेवन करके बढ़े हुए रक्तचाप को कम कर सकते हैं (32)। हालांकि, इसका सेवन करने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

इसके अलावा, अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि विटामिन डी का कम स्तर उच्च रक्तचाप का एक जोखिम कारक हो सकता है। इसलिए, हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों को समय-समय पर रक्त में विटामिन डी के स्तर की भी जांच करानी चाहिए (33)।

11. वजन घटाने के लिए

विटामिन डी की कमी से मोटापे का जोखिम बढ़ सकता है। इसकी पुष्टि एनसीबीआई की दो अलग-अलग रिसर्च से की जा सकती है। इन रिसर्च में इसका जिक्र मिलता है कि, शरीर में विटामिन डी का कम स्तर बॉडी मास इंडेक्स को बढ़ा सकता है, जो मोटापे का कारण बन सकता है (34)। इसके अलावा, मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति में विटामिन डी की कमी भी हो सकती है ( 6)।

साथ ही एक अन्य रिसर्च के अनुसार, 6 सप्ताह तक विटामिन डी सप्लीमेंट्स का सेवन करने से ओवरवेट महिलाओं के बॉडी मास इंडेक्स, शारीरिक वजन और कमर की चौड़ाई में काफी कमी देखी गई (35)। ऐसे में कहा जा सकता है कि मोटापा घटाने के घरेलू उपाय में विटामिन डी युक्त आहार भी शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इसके साथ नियमित व्यायाम और सही डाइट भी जरूरी है।

12. डिप्रेशन दूर करे

विटामिन डी मानसिक विकार से बचाव में भी उपयोगी हो सकते हैं। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध में बताया गया है कि विटामिन डी का कम स्तर मूड खराब करने और डिप्रेशन (अवसाद) जैसे मानसिक रोग का जोखिम बढ़ा सकता है (36)। वहीं, एक अन्य वैज्ञानिक रिसर्च में यह भी पाया गया है कि विटामिन डी की खुराक मूड को नियंत्रित करने और अवसाद को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है (37)। ऐसे में विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करने से मूड तो अच्छा किया ही जा सकता है, साथ ही अवसाद जैसे मूड विकार से भी बचाव या उन्हें दूर किए जा सकते हैं।

इसके अलावा, लेख में यह पहले ही बता चुके हैं कि विटामिन डी कई तरह से मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है (13)। ऐसे में विटामिन डी को विभिन्न मानसिक व मस्तिष्क संबंधी समस्याओं से बचाव में प्रभावकारी माना जा सकता है।

13. त्वचा के लिए

एनसीबीआई के एक शोध मे बताया गया है कि मुंहासों के गंभीर प्रकार नोडुलोसाइटिक एक्ने की समस्या वाले लोगों में विटामिन डी का स्तर काफी कम था। अध्ययन में इन लोगों को विटामिन डी की खुराक दी गई, जिसके बाद उनके एक्ने के लक्षणों में सुधार देखा गया (38)। एनसीबीआई के एक अन्य अध्ययन में भी इसकी पुष्टि होती है कि विटामिन डी की कमी एटोपिक डर्माटाइटिस के साथ ही सोरायसिस और स्किन कैंसर जैसी त्वचा से जुड़ी विभिन्न बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकती है (39)।

इसके अलावा, एक अन्य रिसर्च में विटामिन डी3 को त्वचा के लिए मलहम के रूप में भी इस्तेमाल करने का जिक्र मिलता है। इसके अनुसार, त्वचा पर विटामिन डी 3 लगाने से त्वचा से संबंधित समस्या सोरायसिस के इलाज में मदद मिल सकती है। इतना ही नहीं, यह सूजन पर कुछ हद कर असर करके त्वचा के घावों को भरने में भी मदद कर सकता है (40)। इस आधार पर त्वचा के लिए भी विटामिन डी आवश्यक माना जा सकता है।

14. बालों के लिए

महिलाओं पर किए गए अध्ययन से यह पता चलता है कि विटामिन डी का कम स्तर बालों के झड़ने का कारण बन सकता है। इसलिए, स्वस्थ बालों के लिए भी विटामिन डी की भूमिका अहम हो सकती है। इस शोध के अनुसार, विटामिन डी हेयर फॉलिकल साइकलिंग यानी बालों के विकास को बढ़ा सकता है और गंजेपन की समस्या एलोपेसिया को भी कम कर सकता है (39)। हालांकि, इस विषय में अभी और शोध की आवश्यकता है, लेकिन बालों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन डी को आहार में शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है।

15. कैंसर से बचाव के लिए

कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचाव करने के लिए भी विटामिन डी का सेवन किया जा सकता है। दरअसल, विटामिन डी में एंटी कैंसर और एंटी एंटी प्रोलीफेरेटिव गुण होते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकता है (41)। हालांकि, हम फिर भी सलाह देंगे कि कैंसर जैसी गंभीर स्थिति में हमेशा डॉक्टरी सलाह और उपचार को ही प्रथामिकता दी जानी चाहिए।

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अब पढ़ें विटामिन डी युक्त कुछ खाद्य स्रोत के बारे में।

विटामिन डी के मुख्य स्रोत – Vitamin D Rich Foods in Hindi

इस भाग में हम विटामिन डी के मुख्य स्रोत की जानकारी दे रहे हैं। यहां बताए गए खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करके शरीर में विटामिन डी का स्तर बढ़ाया जा सकता है। साथ ही विटामिन डी के कमी के जोखिम को कम किया जा सकता है। तो विटामिन डी के मुख्य स्रोत कुछ इस प्रकार हैं (1) (2) (12):

  • विटामिन डी के शाकाहारी स्रोत – पनीर, दही, चीज़, मक्खन और क्रीम, जैसे दूध और डेयरी उत्पाद, मशरूम।
  • विटामिन डी के मांसाहारी स्रोत – सालमन, झींगा व वसायुक्त अन्य मछलियां, कॉड लिवर ऑयल, अंडे की जर्दी या पीला भाग, आदि।

लेख में बने रहें

विटामिन डी की कमी से कैसे बचा जाए, जानने के लिए लेख को आगे पढ़ें।

विटामिन डी की कमी से बचने के उपाय – Prevention Tips for Vitamin D Deficiency in Hindi

विटामिन डी की कमी होने के कारण हम ऊपर पहले ही बता चुके हैं। उन्हीं कारणों पर ध्यान देकर और कुछ अन्य टिप्स अपनाकर विटामिन डी की कमी के जोखिम को कम किया जा सकता है (12)।

  • आहर में विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।
  • कुछ देर धूप में रहने के लिए समय निकालें।
  • जरूरत के अनुसार ही सनस्क्रीन लगाएं।
  • समय-समय पर डॉक्टर से शरीर में विटामिन डी का स्तर चेक करवाते रहें।
  • आवश्यकता होने पर डॉक्टरी सलाह पर विटामिन डी सप्लीमेंट्स का सेवन करें।

आगे पढ़ें

विटामिन डी की कमी से बचाव जानने के बाद, अब जानें विटामिन डी की सही खुराक के बारे में।

विटामिन डी की मात्रा कितनी होनी चाहिए?

प्रतिदिन विटामिन डी की आवश्यकता व्यक्ति के उम्र के आधार पर निर्भर करती है। नीचे हम उम्र के अनुसार प्रतिदिन के लिए आवश्यक विटामिन डी की खुराक के बारे में जानकारी साझा कर रहे हैं (12)।

नवजात शिशुओं के लिए प्रतिदिन आवश्यक विटामिन डी की मात्रा :

  • जन्म से लेकर 12 महीने तक के शिशु के लिए – 10 माइक्रोग्राम (लगभग 400 IU)

छोटे बच्चों के लिए प्रतिदिन आवश्यक विटामिन डी की मात्रा :

  • 1 वर्ष से 8 साल की उम्र के बच्चों के लिए – 15 माइक्रोग्राम (लगभग 600 IU)

बड़े बच्चों और वयस्कों के लिए प्रतिदिन आवश्यक विटामिन डी की मात्रा :

  • 9 वर्ष से 70 साल की उम्र तक के लोगों के लिए – 15 माइक्रोग्राम (लगभग 600 IU)
  • 70 साल से बड़ी उम्र के व्यक्तियों के लिए – 20 माइक्रोग्राम (लगभग 800 IU)
  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए – 15 माइक्रोग्राम (लगभग 600 IU)

नोट : कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में शरीर में विटामिन डी की मात्रा की आवश्यकता कम या अधिक भी हो सकती है। इसलिए, विटामिन डी युक्त आहार के साथ ही विटामिन डी सप्लीमेंट्स लेने से पहले डॉक्टरी सलाह लें।

पढ़ते रहें

अब पढ़ें विटामिन डी की कमी से कौनसा रोग हो सकता है।

शरीर में विटामिन डी की कमी से होने वाली बीमारियां

विटामिन डी की कमी से कुछ रोग भी हो सकते हैं। यही वजह है कि इस भाग में हम विटामिन डी की कमी से होने वाले रोग का नाम बता रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (2) (42) (43)।

  • शरीर में विटामिन डी का कम स्तर हड्डियों के रोग का जोखिम बढ़ा सकता है। इससे हड्डियां कमजोर और लचीली हो सकती हैं, जो ऑस्टियोपोरोसिस का कारण बन सकता है।
  • व्यस्क लोगों के अलावा, बच्चों में भी विटामिन डी की कमी से कुछ रोग हो सकते हैं, जिनमें रिकेट्स का जोखिम अधिक देखा जा सकता है। यह भी हड्डियों से जुड़ा एक रोग है। इसकी समस्या होने पर बच्चों की हड्डियां नरम होने लगती हैं।
  • इसके अलावा, वयस्क लोगों को विटामिन डी की कमी से होने वाले रोग में ऑस्टियोमलेशिया को भी शामिल किया जा सकता है। यह भी एक हड्डी रोग होता है, जिसके कारण हड्डियां नरम हो सकती हैं, उनमें दर्द की समस्या हो सकती है और मांसपेशियां भी कमजोर हो सकती हैं।
  • कुछ लोगों में विटामिन डी की कमी से कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता हो सकती है।
  • विटामिन डी की कमी से रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर के जोखिम की भी समस्या हो सकती है।
  • इसके अलावा, कुछ स्थितियों में विटामिन डी की कमी से मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसे ऑटोइम्यून डिजीज हो सकते हैं। यह मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी की नसों से जुड़ी बीमारी है।
  • कुछ स्थितियों में विटामिन डी की कमी के कारण मानसिक समस्याएं जैसे – सिजोफ्रेनिया, डिप्रेशन, ऑटिजम भी हो सकता है।
  • विटामिन डी की कमी से मोटापे की परेशानी भी हो सकती है।

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विटामिन डी की कमी से कौन सा रोग होता है, यह जानने के बाद पढ़ें इसकी अधिकता के दुष्प्रभाव।

जरूरत से ज्यादा विटामिन डी लेने से नुकसान

जैसा कि सभी जानते हैं कि किसी भी चीज की अति हमेशा बुरे ही परिणाम लेकर आती है। कुछ ऐसा ही विटामिन डी के साथ भी है। अगर शरीर में इसकी मात्रा अधिक हो जाए, तो इसके भी कुछ नुकसान हो सकते हैं, जो हम नीचे बता रहे हैं (2)।

  • अधिक मात्रा में इसका सेवन विटामिन डी टॉक्सीसिटी के नाम से जाना जाता है। इसके कारण मतली, उल्टी, अनियमित भूख, कब्ज, कमजोरी और वजन का घटना जैसे दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
  • इसका अधिक सेवन किडनी से संबंधित कई समस्याओं का कारण बन सकता है।
  • इसका सीमित मात्रा से अधिक सेवन खून में कैल्शियम का स्तर बढ़ा सकता है, जिसके कारण हाइपरकैल्सिमिआ यानी भ्रम,
  • भटकाव और ह्रदय की धड़कन से जुड़ी समस्याएं होने का जोखिम बढ़ सकता है।
  • वहीं, विटामिन डी के लिए अधिक समय तक धूप के संपर्क में रहने से त्वचा संबंधी विकार, जैसे जलन व खुजली हो सकती है (7)।

इस लेख में हमने आपको न सिर्फ विटामिन डी के फायदे बताए हैं, बल्कि विटामिन डी की कमी के लक्षण और शरीर में विटामिन डी की कमी का कारण भी बताया है। साथ ही विटामिन डी की कमी से होने वाला रोग भी यहां विस्तार दिए गए हैं। विटामिन डी का स्तर बढ़ाने के लिए आप किस तरह के खाद्य पदार्थ आहार में शामिल करें, इसकी भी पूरी जानकारी हमने दी है। ध्यान रखें कि जरूरत से अधिक मात्रा में विटामिन डी की खुराक लेने से कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। इसलिए, विटामिन डी सीमित मात्रा में विटामिन डी आहार या सप्लीमेंट्स का सेवन करें। इस लेख को अन्य लोगों के साथ शेयर कर हर किसी को विटामिन डी की अहमियत बताएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मैं अपना विटामिन डी का स्तर कैसे बढ़ा सकता हूं?

शरीर में विटामिन डी का स्तर बढ़ाने का सबसे अच्छा विकल्प सूर्य की रोशनी होती है। हालांकि, अगर आप
किसी कारण धूप से संपर्क नहीं रख पाते हैं, तो विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों के जरिए शरीर में विटामिन डी का स्तर बढ़ा सकते हैं। इसके लिए आप निम्नलिखित खाद्य सामग्रियों को आहार में शामिल कर सकते हैं (1) (12):

  • शाकाहारी लोगों के लिए : दूध, पनीर, दही, मक्खन और क्रीम जैसे अन्य डेयरी उत्पाद, मशरूम आदि।
  • मांसाहारी (नॉन वेज) लोगों के लिए : वसायुक्त मछली जैसे सालमन, कॉड लिवर ऑयल, अंडे की जर्दी आदि।

विटामिन डी शरीर में क्या करता है?

विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण यानी घुलने में मदद कर सकता है। इसलिए इसके सेवन से हड्डियों का स्वास्थ्य अच्छा हो सकता है और हड्डियों के रोगों से शरीर का बचाव किया जा सकता है (4)।

किस तरह के पेय पदार्थ में विटामिन डी होता है?

पेय के रूप में दूध को विटामिन डी से समृद्ध माना जा सकता है। दूध में शामिल विटामिन डी की मात्रा की बात करें, तो एक कप दूध (लगभग 226 मिलीलीटर) में 115 से 124 IU (इंटरनेशनल यूनिट) की मात्रा तक विटामिन डी होता है (44)।

मुझे कैसे पता चलेगा कि मुझे विटामिन डी की जरूरत है?

अगर शारीरिक तौर पर कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं, तो आपको विटामिन डी की कमी हो सकती है। ऐसे में आपको विटामिन डी के खुराक की आवश्यकता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं (2):

  • कमजोर होती हड्डियों के कारण हड्डियों में दर्द होना।
  • फ्रैक्चर होना या हड्डी से जुड़े रोग होना।
  • बच्चों में रिकेट्स के लक्षण होना।
  • मांसपेशियों में कमजोरी महसूस करना।
  • मधुमेह होना।
  • उच्च रक्तचाप की समस्या।
  • ऑटोइम्यून डिजीज होना, जैसे – मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी की नसों से जुड़ा रोग मल्टीपल स्क्लेरोसिस होना।

विटामिन डी या विटामिन डी 3 में से कौन सा अच्छा है?

वैसे तो शरीर के लिए विटामिन डी 2 के दोनों ही प्रकार जरूरी होते हैं, लेकिन अध्यननों के अनुसार, विटामिन डी 2 के मुकाबले विटामिन डी 3 की खुराक शरीर में तेजी से विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकता है (45)।

एक महिला को प्रतिदिन कितनी मात्रा में विटामिन डी की जरूरत होती है?

एक महिला को प्रतिदिन विटामिन डी की कितनी खुराक की आवश्यकता होती है, यह उसकी उम्र और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर है, जिसके बारे में आप नीचे पढ़ सकते हैं (5 )।

  • जन्म से 12 माह की उम्र की महिला शिशु के लिए – 10 माइक्रोग्राम (400 IU)
  • 1 से 18 साल उम्र की महिला के लिए, इनमें गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी शामिल हैं – 15 माइक्रोग्राम (600 IU)
  • 19 से 50 वर्ष की महिलाओं के लिए, इनमें गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी शामिल हैं – 15 माइक्रोग्राम (600 IU)
  • 51 वर्ष से 70 वर्ष की महिलाओं के लिए – 15 माइक्रोग्राम (600 IU)
  • 70 वर्ष से बड़ी उम्र की महिलाओं के लिए – 20 माइक्रोग्राम (800 IU)

विटामिन डी की खुराक लेने का सही तरीका क्या है?

अगर विटामिन डी की खुराक आहार या सप्लीमेंट्स के रूप में ले रहे हैं, तो सीधे तौर पर इसका सेवन कर सकते हैं। वहीं, अगर धूप के जरिए विटामिन डी प्राप्त करना चाहते हैं, तो सुबह और शाम के समय कुछ मिनट के लिए धूप में टहल सकते हैं।

क्या विटामिन डी की कमी से बालों के झड़ने की समस्या हो सकती है?

शरीर में विटामिन डी का कम स्तर बालों को प्रभावित कर सकता है (46)। हांलांकि, विटामिन डी की कमी झड़ते बालों का कारण हो सकता है या नहीं इस विषय में अभी और शोध की आवश्यकता है।

क्या विटामिन डी की कमी से सर्दी-खांसी की समस्या हो सकती है?

विटामिन डी की कमी रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर सकती है, जो श्वास प्रणाली से जुड़े जोखिम बढ़ा सकता है। जिस कारण से सर्दी-खांसी की समस्या भी हो सकती है (2) (47)।

मुझे विटामिन डी की खुराक सुबह में लेना चाहिए या रात में?

अपनी दिनचर्या को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए आप दिन के समय में विटामिन डी युक्त आहार या सप्लीमेंट्स का सेवन कर सकते हैं। ध्यान रखें कि अगर विटामिन डी के सप्लीमेंट्स का सेवन कर रहे हैं, तो डॉक्टरी सलाह के अनुसार उसका सेवन करें। साथ ही सप्लीमेंट्स सेवन के सही वक्त के बारे में भी डॉक्टर से पूछें।

क्या बीयर पीने से विटामिन डी का स्तर या शरीर में उसका अवशोषण प्रभावित हो सकता है?

हां, लंबे समय से बीयर या अन्य मादक पदार्थों का सेवन करने से शरीर में विटामिन डी का स्तर प्रभावित हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी भी रिसर्च जारी हैं (48)।

Sources

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अनुज जोशी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। अनुज को प्रिंट... more

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