विटामिन एफ के फायदे, इसकी कमी के कारण और लक्षण – Vitamin F Benefits in Hindi

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शरीर को बेहतर तरीके से कार्य करने के लिए कई तरह के विटामिन की जरूरत होती है। इसमें ए, बी, सी जैसे कई विटामिन शामिल हैं, लेकिन क्या आपने कभी विटामिन एफ के बारे में सुना है। अगर नहीं, तो इस लेख को पढ़कर जानिए कि आखिर विटामिन एफ होता क्या है और शरीर में इसकी क्या भूमिका है। स्टाइलक्रेज आपके लिए इन सबके साथ ही विटामिन एफ की कमी होने के कारण और इस कमी के लक्षण से जुड़ी जानकारी भी लेकर आया है। इनके अलावा, आप लेख में जानेंगे कि विटामिन एफ युक्त खाद्य पदार्थ कौन-कौन से हैं।

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सबसे पहले यह समझते हैं कि विटामिन एफ की कमी का मतलब क्या है।

विटामिन एफ की कमी क्या है? – What is Vitamin F Deficiency in Hindi

विटामिन एफ की कमी क्या है, इससे पहले यह समझना जरूरी है कि विटामिन एफ आखिर क्या है। दरअसल, लिनोलिक एसिड (एलए – LA) और अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (एएलए – ALA) जैसे फैटी एसिड को विटामिन एफ कहते हैं (1)। जब शरीर में इन एसेंशियल फैटी एसिड की मात्रा कम हो जाती है, तो उसे विटामिन एफ की कमी कहा जाता है।

अगर सरल शब्दों में समझा जाए, तो एसेंशियल फैटी एसिड (EFA) को ही विटामिन एफ कहा जाता है। मतलब स्पष्ट है कि विटामिन एफ कोई विशेष विटामिन नहीं, बल्कि तेलों से मिलने वाले एसेंशियल फैटी एसिड को कहते हैं (2)।

ये आवश्यक फैटी एसिड (ईएफए), लिनोलिक एसिड (ओमेगा -6 समूह) और अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ओमेगा -3 समूह) पर आधारित होते हैं। जीवित रहने के लिए हमें आवश्यक फैटी एसिड के इन दोनों समूहों की आवश्यकता पड़ती है (3)।

पढ़ते रहें

अब हम लेख में आगे विटामिन एफ की कमी के कारण का जिक्र करेंगे।

विटामिन एफ की कमी होने के कारण – Causes of Vitamin F Deficiency in Hindi

एक रिसर्च पेपर की मानें, तो ईपीएफ यानी एसेंशियल फैटी एसिड्स की कमी सामान्य हो सकती है, क्योंकि ओमेगा -3 फैटी एसिड से अधिक ओमेगा -6 फैटी एसिड का सेवन किया जाता है (3)। कुछ अध्ययन इस कमी को आम नहीं मानते हैं। खैर जो कुछ भी हो इस कमी के कारण जानना जरूरी है, जिनके बारे में हम नीचे क्रमवार बता रहे हैं (4)।

  • खाद्य पदार्थों में विटामिन एफ कम होना
  • शरीर में विटामिन एफ का ठीक तरह से अवशोषित न हो पाना
  • जन्मजात विकार
  • सिस्टिक फाइबरोसिस (फेफड़ों और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाने वाला विकार)
  • फैट मालअब्जॉर्प्शन
  • अंतिम चरण की लिवर समस्या
  • स्जोग्रेन-लार्सन सिंड्रोम (आनुवंशिक विकार)

आगे है जरूरी जानकारी

अब जानते हैं कि शरीर में विटामिन एफ की कमी होने के लक्षण क्या सब हो सकते हैं।

विटामिन एफ की कमी के लक्षण – Symptoms of Vitamin F Deficiency in Hindi

विटामिन एफ के कम होने पर शरीर में दिखने वाले लक्षण कुछ इस प्रकार हैं (4)

  • डर्मेटाइटिस यानी रूखी व पपड़ीदार त्वचा
  • एक्जिमा (लाल और खुजलीदार त्वचा)
  • इम्पेटाइगो ,एक संक्रामक स्किन इंफेक्शन, जिसमें त्वचा पर लाल घाव बनते हैं
  • बालों का झड़ना व रूखा होना
  • ग्रोथ रेट यानी विकास दर कम होना
  • त्वचा, एलिमेंट्री ट्रैक्ट (पाचन तंत्र का हिस्सा) और यूरिनरी ट्रैक्ट में सेल्युलर हाइपरप्रोलिफरेशन यानी नई कोशिकाओं का बनना
  • प्रतिरक्षा को हानि
  • घाव भरने की प्रक्रिया का धीमा होना
  • मानसिक मंदता (मेंटल रिटार्डेशन)
  • इचिथोसिस (Ichthyosis) आनुवंशिक त्वचा विकार
  • प्रारंभिक चीजें सीखने में परेशानी
  • चीजों का साफ न दिखना
  • प्रोस्टाग्लैंडीन कंपाउंड का असामान्य चयापचय

फायदे पढ़ें

विटामिन एफ के बारे में इतना सब कुछ जानने के बाद अब इससे होने वाले लाभ पर एक नजर डाल लेते हैं।

विटामिन एफ के फायदे – Vitamin F Benefits In Hindi

प्रत्येक विटामिन जरूरी होता है, क्योंकि शरीर के लिए उसकी एक निर्धारित भूमिका होती है। वह कई चीजों में सहयोग करता है, जिस कारण व्यक्ति स्वस्थ रहता है। ऐसे में विटामिन एफ के फायदे क्या हैं, यह आगे समझिए।

1. इंफ्लेमेशन यानी सूजन कम करे

विटामिन एफ यानी एसेंशियल फैटी एसिड सूजन को कम कर सकता है। दरअसल, समुद्र से मिलने वाले ओमेगा 3 पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड और गामा लिनोलेनिक एसिड (GLA) को उनमें मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी प्रभाव के लिए जाना जाता है। इससे संबंधित एक रिसर्च में कहा गया है कि ये फैटी एसिड्स इंफ्लेमेटरी संबंधी विकार का इलाज करने में मददगार साबित हो सकते हैं। इसके सेवन से रूमेटाइड गठिया जैसे इंफ्लेमेटरी डिसऑर्डर से बचा जा सकता है (5)।

इनके अलावा, अल्फा लिनोलेनिक एसिड में भी एंटी इंफ्लेमेटरी एजेंट होते हैं। ये शरीर में इंफ्लेमेशन यानी सूजन के स्तर को कम करके इससे संबंधित परेशानियों को कम कर सकते हैं। रिसर्च में बताया गया है कि यह पेट व पाचन से संबंधित इंफ्लेमेशन को कम करने में सहायक साबित हो सकता है (6)।

2. हार्ट हेल्थ के लिए

वैसे तो फैट को हृदय रोगों का कारण कहा जाता है, लेकिन ओमेगा-3 फैटी एसिड हार्ट हेल्थ के लिए अच्छा हो सकता है। तीन मुख्य ओमेगा-3 फैटी एसिड यानी अल्फा-लिनोलिक एसिड (ALA), इकोसापेंटेनोइक एसिड (EPA) और डोकोसाहेक्सैनोइक एसिड (DHA) को हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। अल्फा-लिनोलिक एसिड को जैतून, सोयाबीन, कैनोला और अखरोट व अलसी के साथ ही इनके तेल में पाया जाता है। ईपीए और डीएचए, समुद्र से मिलने वाली वसा युक्त मछलियों में मिलता है (7)।

एनसीबीआई पर पब्लिश एक रिसर्च पेपर में भी इस बात का जिक्र मिलता है। उसमें कहा गया है कि डोकोसाहेक्सैनोइक एसिड (DHA) शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। कुछ अध्ययन यह भी बताते हैं कि ओमेगा -3 फैटी एसिड की खुराक धमनी में रक्त प्रवाह को बेहतर करने और हार्ट फंक्शन में सुधार कर सकती है (8)।

3. विकास में सहायक

विटामिन एफ को शिशु के लिए भी जरूरी बताया जाता है। दरअसल, ओमेगा 3 और 6 फैटी एसिड नवजात व शिशु के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से महिला को गर्भावस्था और स्तनपान जैसे समय में विटामिन एफ लेने की सलाह दी जाती है। खासकर, ओमेगा 3 व 6 फैटी एसिड को डाइट में जगह जरूर देनी चाहिए (9)।

4. मानसिक स्वास्थ्य

एसेंशियल फैटी एसिड यानी विटामिन एफ का सेवन करने से मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। रिसर्च इन्हें रोजमर्रा के मानसिक और शारीरिक प्रदर्शन के लिए जरूरी मानते हैं। अन्य शोध में कहा गया है कि ओमेगा-3 और 6 फैटी एसिड विशेष रूप से डीएचए मस्तिष्क विकास में अहम भूमिका निभाता है। गर्भावस्था और प्रारंभिक जीवन में इसे आहार में शामिल करने से शिशु के विकास और बौद्धिक क्षमता पर अच्छा असर पड़ सकता है (9)।

इतना ही नहीं, कुछ रिसर्च यह भी कहती हैं कि ओमेगा-3 फैटी एसिड में महत्वपूर्ण एंटीडिप्रेसेंट यानी अवसादरोधी प्रभाव देखे गए हैं। इससे अवसाद से ग्रस्त होने के खतरे से बचा जा सकता है। हालांकि, शोध में आगे यह भी कहा गया है कि इस विषय पर स्पष्टता लाने के लिए बड़े स्तर पर इससे संबंधित स्टडी करने की जरूरत है (10)।

5. मधुमेह नियंत्रण

डायबिटीज के जोखिम को कम करने में भी विटामिन एफ सहायक हो सकता है। रिसर्च बताती हैं कि अल्फा लिनोलेनिक एसिड (एएलए – ALA) मधुमेह के जोखिम को कम कर सकता है (11)। अन्य अध्ययन में कहा गया है कि ओमेगा फैटी एसिड युक्त आहार का सेवन करने से टाइप 2 मधुमेह की रोकथाम पर अच्छा प्रभाव पड़ सकता है। एशियाई देशों में ओमेगा 3 सप्लीमेंट लेने से टाइप 2 मधुमेह मरीजों की संख्या में कमी देखी गई है। रिसर्च में कहा गया है कि ऐसे में ओमेगा 3 को प्रारंभिक सालों में ही आहार में शामिल करके मधुमेह की रोकथाम हो सकती है (12)।

लेख में बने रहिए

आगे पढ़िए विटामिन एफ युक्त खाद्य पदार्थों के बारे में।

विटामिन F के स्रोत – Vitamin F Food Sources in Hindi

विटामिन एफ के लाभ जानने के बाद आपके मन में जरूर विटामिन एफ के स्रोत को जानने की जिज्ञासा पैदा हुई होगी। बस तो लेख में आगे बढ़ते हुए जानिए कि विटामिन एफ के स्रोत क्या-क्या हैं (2) (13) (14)।

आगे है जरूरी जानकारी

अब समझिए कि विटामिन एफ की कमी से किस तरह से बचा जा सकता है।

विटामिन एफ की कमी से बचने के उपाय – Prevention Tips for Vitamin F Deficiency in Hindi

विटामिन एफ की कमी से बचाव करने के एक से दो ही तरीके हैं। इन्हें नीचे जानिए।

  • विटामिन एफ की कमी से बचने का सबसे बेहतरीन उपाय इससे भरपूर खाद्य पदार्थ को डाइट में शामिल करना है।
  • कुछ बीमारियों के कारण भी विटामिन एफ की कमी होती है। ऐसे में विटामिन एफ की कमी की वजह बनने वाली समस्या का इलाज करके भी विटामिन एफ डेफिशियेंसी से बचा जा सकता है।

अब आप समझ ही गए होंगे कि विटामिन एफ भी अन्य विटामिन की तरह ही शरीर के लिए कितना जरूरी है। इसके फायदे पढ़ने के बाद आप इसे डाइट में ऊपर बताए गए खाद्य पदार्थों के माध्यम से शामिल कर सकते हैं। साथ ही अगर विटामिन एफ की कमी के लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। चिकित्सक समय रहते सही कदम उठाने की सलाह देंगे। बस खुद से विटामिन एफ के सप्लीमेंट लेने से बचें, क्योंकि इसे आसानी से खाद्य पदार्थों के माध्यम से लिया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विटामिन एफ कम होने पर क्या होगा?

शरीर विटामिन एफ का उपयोग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए करता है। इसकी कमी होने पर दोनों प्रभावित हो सकते हैं (3)।

विटामिन एफ किन खाद्य पदार्थों में अधिक होता है?

अलसी के बीज, भांग का तेल, कद्दू के बीज और मछली व उससे बनने वाले तेल में विटामिन एफ की अच्छी मात्रा होती है।

क्या मैं रोज विटामिन एफ ले सकता हूं?

हां, आप खाद्य पदार्थ के माध्यम से रोजाना विटामिन एफ ले सकते हैं।

Sources

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