विल्सन रोग के कारण, लक्षण और इलाज – Wilson Disease in Hindi

Written by , (शिक्षा- बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मीडिया कम्युनिकेशन)

स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही कई बीमारियों को जन्म देती है, जबकि कुछ ऐसी भी बीमारियां हैं, जो एक व्यक्ति को उसके माता-पिता के जरिए मिलती हैं, जिन्हें आनुवंशिक बीमारी कहा जाता है। ऐसी ही एक बीमारी है विल्सन रोग। हो सकता है कि यह नाम आपने पहली बार सुना हो, लेकिन इसके बारे में जानकारी होना जरूरी है, ताकि समय रहते इसके प्रभाव को कम किया जा सके। यही वजह है कि स्टाइलक्रेज के इस लेख में हमने विल्सन रोग के कारण, इसके लक्षण और इसके इलाज संबंधी जानकारी साझा की है। पूरी जानकारी के लिए लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

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आर्टिकल में सबसे पहले जानिए विल्सन रोग क्या है।

क्या है विल्सन रोग? – What is Wilson Disease in Hindi

विल्सन रोग एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है, जिसके कारण शरीर में कॉपर की अधिकता हो जाती है। यह रोग लिवर और मस्तिष्क के साथ-साथ शरीर के बाकी अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। बता दें कि विल्सन रोग को हेपेटोलेंटिकुलर डिजनरेशन (Hepatolenticular Degeneration) के नाम से भी जाना जाता है। (1)। चूंकि यह एक आनुवंशिक विकार है, इसलिए इससे पूरी तरह छुटकारा पाया नहीं जा सकता है, लेकिन समय रहते कुछ आवश्यक ट्रीटमेंट के जरिए इसके प्रभाव को कुछ हद तक कम और इससे होने वाली अन्य शारीरिक समस्याओं से बचाव किया जा सकता है। आगे लेख में विल्सन रोग के कारण, इसके लक्षण और इसके इलाज संबंधी जानकारी को विस्तार पूर्वक बताया गया है।

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यहां हम आपको बता रहे हैं विल्सन रोग के कारण के बारे में।

विल्सन रोग का कारण – Causes of Wilson Disease in Hindi

विल्सन रोग एटीपी7बी (ATP7B) जीन में म्यूटेशन (परिवर्तन) के कारण होता है। यह जीन कॉपर-ट्रांसपोर्टिंग एटीपीएसे 2 (ATPase 2) नामक प्रोटीन को बनाने का निर्देश देता है, जो लिवर से शरीर के बाकी अंगों तक कॉपर को पहुंचाने का काम करता है। इसके अलावा, यह एटीपीएसे 2 नामक प्रोटीन शरीर से अतिरिक्त कॉपर को निकालने का काम भी करता है।
वहीं, जब एटीपी7बी जीन में परिवर्तन आता है, तो यह कॉपर-ट्रांसपोर्टिंग प्रोटीन की कार्यप्रणाली को बाधित करता है, जिससे शरीर में अतिरिक्त कॉपर नहीं निकल पाता है और शरीर में कॉपर की अधिकता हो जाती है। परिणामस्वरूप, कॉपर का जमाव टॉक्सिक रूप लेता है और शरीर को क्षति पहुंचाने का काम करता है (2)।

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कारण जानने के बाद यहां हम आपको बता रहे हैं विल्सन रोग के लक्षण के बारे में।

विल्सन रोग के लक्षण – Symptoms of Wilson Disease in Hindi

विल्सन रोग होने पर लक्षण आमतौर पर मस्तिष्क और लिवर से संबंधित होते हैं। जो कुछ इस प्रकार हैं (1) :

लिवर से संबंधित लक्षण :

  • उल्टी
  • कमजोरी
  • पेट में अत्यधिक तरल पदार्थ का जमाव
  • पैरों की सूजन
  • पीली त्वचा
  • खुजली

मस्तिष्क या न्यूरोलॉजिकल लक्षण :

  • झटके (Tremors)
  • मांसपेशियों में अकड़न
  • बोलने में परेशानी
  • व्यक्तित्व में बदलाव
  • चिंता
  • सुनने और देखने में भ्रम की स्थिति पैदा होना

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लक्षणों को जानने के बाद जानते हैं कि विल्सन रोग होने पर डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए।

विल्सन रोग के लिए डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

निम्नलिखित स्थितियों में विल्सन रोग के लिए डॉक्टर से संपर्क किया जा सकता है (3) :

  • ऊपर बताए गए विल्सन रोग के किसी भी लक्षण के दिखने पर।
  • अगर घर के किसी सदस्य को यह रोग है और पिता बनने की सोच रहे हैं, तो किसी जेनेटिक काउंसलर से संपर्क किया जाना जरूरी है।

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आर्टिकल के इस हिस्से में हम आपको बता रहे हैं विल्सन रोग का इलाज।

विल्सन रोग का इलाज – Treatment For Wilson in Hindi

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि यह एक आनुवंशिक विकार है और इसका कोई सटीक उपचार नहीं है। फिर भी समय रहते कुछ थेरेपी के जरिए इसके प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है और जटिलताओं से बचा जा सकता है – (3) :

  • कॉपर केलेशन थेरेपी : इस थेरेपी का उद्देश्य होता है, शरीर से कॉपर की बढ़ी हुई मात्रा को कम करना। इसके लिए डॉक्टर कुछ दवाइयों के सेवन की सलाह दे सकते हैं, जिसमें पेनिसिलेमाइन, ट्राईएंटाइन और जिंक एसीटेट शामिल हैं। ध्यान रहे, बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाइयां का सेवन न करें।
  • विटामिन-ई सप्लीमेंट : विल्सन रोग से पीड़ित मरीज को विटामिन-ई के सप्लीमेंट भी दिए जा सकते हैं।
  • लो कॉपर डाइट : डॉक्टर लो कॉपर डाइट की सलाह दे सकते हैं।
  • लिवर ट्रांसप्लांट : विल्सन रोग के कारण अगर लिवर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, तो लिवर ट्रांसप्लांट का फैसला लिया जा सकता है।

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विल्सन रोग के उपचार के बाद जानते हैं कि इस समस्या में क्या खाएं और क्या नहीं।

विल्सन रोग में क्या खाना चाहिए – Foods to Eat for Wilson Disease in Hindi

विल्सन रोग के दौरान उन खाद्य-पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है, जिनमें कम कॉपर पाया जाता है। नीचे जानिए कुछ ऐसे ही खाद्य-पदार्थों के बारे में (4) –

  • डेयरी प्रोडक्ट (जैसे दूध और दही)
  • वे प्रोटीन
  • इसके अलावा, जिंक से समृद्ध खाद्य पदार्थ, जो शरीर में कॉपर के अवशोषण को बाधित कर सकते हैं (5)।
  • इसके अलावा, समस्या की गंभीरता के अनुसार डॉक्टर से आहार संबंधी जानकारी ली जा सकती है।

कॉपर की अधिकता वाले निम्नलिखित खाद्य पदार्थों से बचें (1)-

  • मशरूम
  • चॉकलेट
  • नट्स
  • ड्राई फ्रूट्स
  • लिवर
  • शेलफिश

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क्या विल्सन रोग से बचाव किया जा सकता है?

विल्सन रोग से बचाव – Prevention Tips for Wilson Disease in Hindi

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि विल्सन एक वंशानुगत बीमारी है, जो माता-पिता के जरिए बच्चे में दाखिल हो सकती है। इसलिए, इससे बचा नहीं जा सकता है। अगर घर के किसी सदस्य को यह बीमारी है, तो डॉक्टर से खुद की और बाकी सदस्य की जांच करवाई जा सकती है। समय पर जरूरी इलाज ऑर्गन डैमेज के जोखिम से बचाव या कम कर सकता है (6)।

विल्सन रोग के कारण, उसके लक्षण और जरूरी ट्रीटमेंट से जुड़ी जानकारी के बाद, अब हम उम्मीद करते हैं कि आप इस रोग के बारे में बहुत कुछ जान गए होंगे। साथ ही इस दौरान खान-पान से जुड़ी बातों की भी आपको जानकारी हो गई होगी। ऐसे में, अगर ऊपर बताए गए विल्सन रोग के लक्षण आप में या परिवार के किसी सदस्य में नजर आते हैं, तो एक बार डॉक्टर से संपर्क जरूर करें, ताकि इस रोग की पुष्टि की जा सके और समय रहते इसकी जटिलताओं से बचा जा सके। हम आपके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विल्सन रोग के साथ कितने समय तक रह सकते हैं?

यह एक आनुवंशिक बीमारी है। अगर यह किसी को हो जाए, तो जीवन भर यह मरीज के साथ रह सकती है। हालांकि, ऊपर बताए गए जरूरी ट्रीटमेंट और लो कॉपर डाइट का पालन कर इस रोग की गंभीर जटिलताओं से बचा या उन्हें कम किया जा सकता है।

क्या आप विल्सन की बीमारी के साथ शराब पी सकते हैं?

शराब लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा, अल्कोहल इस बीमारी की स्थिति को बिगाड़ सकता है। इसलिए, वे व्यक्ति शराब का सेवन बिल्कुल न करें, जिन्हें विल्सन रोग है (1)।

विल्सन की बीमारी मस्तिष्क को कैसे प्रभावित करती है?

विल्सन रोग के कारण मस्तिष्क संबंधी समस्याएं, जैसे बोलने में परेशानी, व्यक्तित्व में बदलाव और चिंता जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

विल्सन की बीमारी का पता किस उम्र में लगता है?

विल्सन रोग जन्म के समय से मौजूद हो सकता है, लेकिन लक्षण आमतौर पर 5 से 35 वर्ष की उम्र के बीच शुरू हो सकते हैं (7)।

विल्सन रोग होने पर क्या होता है?

विल्सन रोग होने पर शरीर में कॉपर की अधिकता होती है। इसके अलावा, यह लिवर और मस्तिष्क संबंधी समस्याओं का कारण भी बन सकता है (7)।

Sources

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