ब्रोंकाइटिस के लिए योग और व्यायाम – Yoga And Exercise For Bronchitis in Hindi

Written by , (शिक्षा- एमए इन मास कम्युनिकेशन)

सर्दी-जुकाम जैसी छोटी-छोटी समस्याओं को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। बाद में इन छोटी जटिलताओं से ब्रोंकाइटिस जैसी बड़ी बीमारी होने का खतरा हो सकता है। यह श्वसनीशोध के नाम से भी जाना जाता है। यदि ब्रोंकाइटिस के लिए योग और व्यायाम द्वारा इलाज किया जाए, तो समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है। ऐसे में स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम आपको ब्रोंकाइटिस के लिए योगासन और व्यायाम के फायदे से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं। साथ ही यहां ब्रोंकाइटिस के लिए योग व व्यायाम करने के तरीके भी बताएंगे। तो ब्रोंकाइटिस के लिए योगासन और एक्सरसाइज के बारे में अधिक जानकारी के लिए लेख पूरा पढ़ें।

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लेख में सबसे पहले हम आपको बता रहे हैं ब्रोंकाइटिस के लिए योगासन किस प्रकार से फायदेमंद है।

ब्रोंकाइटिस में कैसे लाभदायक है योग और व्यायाम – How Does Yoga and Exercise Help with Bronchitis in Hindi

जिन नलिकाओं से हम सांस लेते हैं उन ट्यूब्स को ब्रोंकियल या ब्रोंकाई नलियां कहा जाता है। ये फेफड़ों तक हवा को पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। कभी-कभी बैक्टीरिया या वायरस की वजह से जब इन श्वसन नलियों में किसी भी प्रकार का संक्रमण, सूजन या बलगम की समस्या हो जाती है, तो इस स्थिति को ब्रोंकाइटिस कहा जाता हैं (1)। वहीं, सांस से संबंधित योग व एक्सरसाइज ब्रोंकाइटिस की समस्या को कम करने में मददगार हो सकते हैं। इस विषय पर हुए एक शोध से यह पता चला है कि यदि चार हफ्तों तक योगासन और प्राणायाम किया जाता है, तो इससे फेफड़ों की कार्य प्रणाली में सुधार होने के साथ ही क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस की समस्या में राहत मिल सकती है (2)।

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ब्रोंकाइटिस के लिए योगासन के फायदे के बाद जानते हैं कि कौन से योग इस समस्या में लाभदायक हो सकते हैं।

ब्रोंकाइटिस के लिए व्यायाम और योग – Exercise and Yoga For Bronchitis in Hindi

ब्रोंकाइटिस की समस्या में कई प्रकार के योग और व्यायाम लाभदायक हो सकते हैं। यहां हम आपको उन व्यायाम व योग के फायदे और करने की विधि के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। तो ब्रोंकाइटिस के लिए योगासन और व्यायाम कुछ इस प्रकार हैं:

1. सुखासन

2 सुखासन

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ब्रोंकाइटिस की समस्या में सुखासन करने के फायदे देखे गए हैं। सुखासन एक प्रकार का महत्वपूर्ण सांस लेने और छोड़ने का व्यायाम है। यह फेफड़ों को आराम देने के साथ ही सांस से संबंधित समस्या में लाभदायक हो सकता है। इसके अलावा, यह व्यक्ति की रीढ़, चयापचय और आंतरिक शांति के लिए भी लाभदायक माना जाता है (3)। हालांकि, यह किस प्रकार से लाभदायक है यह अभी शोध का विषय है, लेकिन इसे ब्रोंकाइटिस के लिए लाभकारी योग की श्रेणी में रखा गया है।

सुखासन करने का तरीका:

  • सबसे पहले किसी समतल सतह पर योग मैट या चादर बिछाएं।
  • अब इस पर पद्मासन की मुद्रा में आराम से बैठ जाएं।
  • फिर अपने हाथों को अपने घुटनों पर रखें, जैसे कि ध्यान की मुद्रा में हों।
  • कमर, रीढ़ और सिर को सीधा रखें।
  • अब आंखें बंद करें।
  • इस मुद्रा में सामान्य रूप से सांस लें।
  • फिर धीरे-धीरे आंखें खोलें।
  • अपनी सुविधानुसार इसे कुछ देर तक दोहराएं।

सावधानियां:

  • सुखासन में कभी भी शरीर को ना ज्यादा ढीला छोड़कर और ना ही एक दम अकड़कर बैठना चाहिए।
  • जिनके हिप्स की सर्जरी हुई है, उन्हें सुखासन योग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

2. सिंहासन

3 सिंहासन

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ब्रोंकाइटिस के प्रभाव को कम करने के लिए सिंहासन करना फायदेमंद हो सकता है। इससे जुड़ी जानकारी में इस बात का जिक्र मिलता है कि सिंहासन करने से यह सांस से जुड़ी समस्या में मददगार हो सकता है। इसके अलावा, यह गले के लिए भी उपयोगी योग हो सकता है (4)। इसे करने का तरीका हम नीचे साझा कर रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार है:

सिंहासन करने का तरीका:

  • सबसे पहले किसी शांत व समतल सतह पर योग मैट या साफ चादर बिछाएं।
  • अब इस आसन को करने के लिए सबसे पहले वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  • फिर दोनों घुटनों के बीच 12-15 इंच की दूरी ले आएं। ध्यान रहे कि दोनों पैरों के पंजे एक दूसरे से सटे हों।
  • अब दोनों हथेलियों को घुटनों के बीच रखें और बांह को सीधा रखें। उंगलियों की दिशा अंदर की तरफ होगी।
  • इस दौरान पूरा भार हथेलियों पर देते हुए अपने सिर को ऊपर की ओर उठाएं।
  • ध्यान रहे सिर को इतना ऊपर उठाना है कि गर्दन में थोड़ा खिंचाव महसूस हो।
  • अब आंखों को पूरी तरह खोल लें और जीभ को जितना हो सके बाहर निकालते हुए शेर की तरह दहाड़ने की आवाज निकालें।
  • अब अपनी सुविधानुसार कुछ देर इस मुद्रा में रहें और फिर धीरे-धीरे अपनी सामान्य अवस्था में आ जाएं।
  • इस प्रक्रिया को अपनी सुविधानुसार चार से पांच बार कर सकते हैं।

सावधानियां:

  • अगर किसी को घुटने में चोट या दर्द की शिकायत है, तो इस योग को न करें।
    साथ ही कमजोर कलाई वाले लोगों को इस योग को करते समय हाथों पर ज्यादा
  • दबाव नहीं डालना चाहिए।
    गर्भावस्था के दौरान इस योग को करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना अनिवार्य है।

3. उत्तानासन

4 उत्तानासन

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उत्तानासन करने से यह ब्रोंकाइटिस की समस्या को कुछ हद तक कम करने में मददगार हो सकता है। रिसर्च के अनुसार उत्तानासन सायनस में रक्त प्रवाह को बढ़ा सकता है, बलगम के जमाव को कम कर सकता है और हल्के संक्रमण के कारण होने वाली सांस संबंधी समस्याओं से बचाव में मदद कर सकता है। इतना ही नहीं यह रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार कर सकता है (5)। इस आधार पर इसे ब्रोंकाइटिस के लिए उपयोगी योग मान सकते हैं।

उत्तानासन करने का तरीका:

  • सबसे पहले साफ व समतल जगह पर योग मैट बिछा लें।
  • अब उस मैट पर दोनों पैरों को सटाकर सीधे खड़े हो जाएं और हाथों को सीधा ऊपर ले जाएं।
  • इसके बाद आराम-आराम से सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें।
  • आगे की ओर झुककर हाथों से अपने पैरों को या जमीन को छूने का प्रयास करें।
  • ध्यान रहे इस अवस्था में झुकते वक्त घुटने मुड़ने नहीं चाहिए।
  • जब हाथों से जमीन को छू रहे हों, तो सिर को घुटनों से लगाने की कोशिश करें।
  • इस मुद्रा में आने के बाद सामान्य रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • कुछ सेकंड के लिए इस स्थिति में रहें। इसके बाद आराम से सांस लेते हुए पहले की स्थिति में आ जाएं।
  • शुरुआत में उत्तानासन योग को 10 मिनट तक रुक-रुक कर किया जा सकता है।

सावधानियां:

  • अगर पीठ दर्द की समस्या या चोट है, तो इसे न करें।
  • योग करते वक्त अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक तनाव न लें।
  • अगर कमर दर्द बढ़ने लगे, तो तुरंत रुक जाएं और डॉक्टर से सलाह लें।
  • गर्भवती इस योग को न करें।

4. कपालभाती

5 कपालभाती

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कपालभाति यानी ब्रीद ऑफ फायर से भी ब्रोंकाइटिस में राहत मिल सकती है। जैसा की हम पहले ही बता चुके हैं कि ब्रोंकाइटिस की समस्या होने पर श्वसन संबंधी योग और प्राणायाम राहत का कार्य कर सकते हैं। वहीं, कपालभति को भी श्वसन संबंधी प्राणायाम की श्रेणी में रखा जाता है। यह न सिर्फ पूरे श्वसन प्रणाली को शुद्ध कर सकता है, बल्कि फेफड़ों और श्वसन तंत्र को डिटॉक्स करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है (6)। इतना ही नहीं, यह शरीर में ऑक्सीजन फ्लो को भी बेहतर कर सकता है और लंग्स को स्वस्थ बना सकता है (7)। इस आधार पर माना जा सकता है कि यह ब्रोंकाइटिस की समस्या पर कुछ हद असरदार हो सकता है।

कपालभाती करने का तरीका:

  • योगासन करने के लिए किसी शांत जगह को चुनें।
  • अब उस जगह पर योग मैट या साफ चादर बिछा लें।
  • अब इस पर सुखासन, पद्मासन या फिर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  • इसके बाद अपने दोनों हाथों को अपने घुटनों पर ध्यान मुद्रा में रख लें।
  • ध्यान रहे इस दौरान रीढ़, कंधे और कोहनी एकदम सीधे होने चाहिए।
  • अब आंख बंद करके आराम से लंबी सांस लें।
  • इसके बाद अपने पेट काे अंदर की ओर लेते हुए झटके के साथ नाक से सांस को छोड़ें।
  • ध्यान रहे इस योग को करते वक्त सांस तेज झटकों के साथ जल्दी-जल्दी छोड़ना चाहिए और मुंह बंद रहना चाहिए।
  • इसमें सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया नाक से ही होनी चाहिए, मुंह से नहीं।
  • इस प्रक्रिया को कम से कम 15 से लेकर 20 बार तक किया जा सकता है, इस प्रकार इसका एक चक्र पूरा हो जाता है।
  • ध्यान रहे कि कपालभति को अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।

सावधानियां:

  • गर्भवती इस योग को करने से बचें।
  • जिन्हें दमा की समस्या है, वे लोग इसे करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
  • अगर कंधे में चोट है, तो इस आसन को करने से बचें।
  • हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

5. अर्धमत्स्येंद्रासन

6 अर्धमत्स्येंद्रासन

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अर्धमत्स्येंद्रासन योग का अभ्यास ब्रोंकाइटिस की समस्या को कम करने में मददगार हो सकता है (3)। दरअसल, यह आसन मांसपेशियों, पसली और पेट की मांसपेशियों को टोन करने में मदद कर सकता है। इससे पेट, सांस और हृदय की कार्यप्रणाली में सुधार हो सकता है। यह योग फेफड़ों की कार्य क्षमता में भी सुधार कर सकता है। इससे शरीर में ऑक्सीजन प्रवाह बेहतर हो सकता है, जो ब्रोन्कियल अस्थमा में सुधार करने में सहायक हो सकता है (6)। इस आधार पर कह सकते हैं कि अर्धमत्स्येंद्रासन ब्रोंकाइटिस में फायदेमंद हो सकता है। बता दें यह योग रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

अर्धमत्स्येंद्रासन करने का तरीका:

  • सबसे पहले एक समतल जमीन का चुनाव कर वहां योग मैट बिछा लें।
  • इसके बाद उस पर बैठें और दोनों पैरों को आगे की ओर सीधा कर के फैला लें। इस दौरान ध्यान रखें कि रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी होनी चाहिए।
  • अब दाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए बाएं पैर के ऊपर से ले जाएं और बाएं पैर के घुटने से सटाते हुए अपने दाएं पैर को जमीन पर रखें।
  • इसके बाद बाएं पैर को भी घुटने से मोड़कर एड़ी को दाएं कूल्हे से सटाकर रखें।
  • फिर बाएं हाथ को दाएं घुटने के ऊपर से ले जाते हुए दाएं टखने को पकड़ने की कोशिश करें।
  • अब गर्दन व कमर दोनों को दाएं तरफ घुमाएं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
  • कुछ सेकंड तक इसी स्थिति में बने रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएं।
  • इसके बाद दोबारा से इस प्रक्रिया को दूसरी तरफ से दोहराएं।

सावधानियां:

  • हर्निया की समस्या और पेप्टिक अल्सर से पीड़ित लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • मासिक धर्म के समय इस आसन को न करें।
  • गर्भवती महिलाओं और जिनकी हाल ही में सर्जरी हुई है, उनको यह आसन नहीं करना चाहिए।

6. डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज

7 डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज

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ब्रोंकाइटिस के लिए डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी उपयोगी हो सकता है। शोध में बताया गया कि डीप ब्रीदिंग द्वारा फेफड़ों के कार्यों में सुधार कर सांस संंबंधी समस्या में आराम मिल सकती है। दरअसल, डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज फेफड़ों के कार्य को बेहतर कर सकती है और ब्रोन्कियल अस्थमा में फायदेमंद हो सकती है (8)। इतना ही नहीं, यह व्यायाम निमोनिया की परेशानी व फेफड़ों से संबंधित अन्य समस्याओं में भी लाभकारी हो सकता है (9)। हालांकि, यह किस प्रकार से कार्य कर सकता है, इस विषय को लेकर और शोध किए जाने की जरूरत है।

डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने का तरीका:

  • सबसे पहले योग मैट या चटाई पर सुखासन में बैठ जाएं।
  • इसके बाद रीढ़ की हड्डी को सीधा और अपना मन शांत करें।
  • अब आंखों को बंद करके आराम-आराम से गहरी सांस लें।
  • जितना हाे सके उतनी गहरी सांस लें और फिर छोड़ें।
  • ध्यान रहे इस दौरान नाक से सांस लेना है, मुंह से नहीं।
  • इस प्रक्रिया को कम से कम 15 से कम 20 बार कर सकते हैं।

सावधानियां:

  • हृदय रोग से पीड़ित लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • अगर गर्दन और कंधों की समस्या है, तो इस आसन से दूर रहें।
  • गर्भवती महिलाएं ये आसन बिल्कुल न करें।

7. शवासन

8 शवासन

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शवासन करने पर यह ब्रोंकाइटिस के साथ ही पूरे शरीर को आराम देने में मदद कर सकता है। यह शरीर के ऊर्जा संतुलन को बेहतर कर सकता है। इसके साथ ही शरीर को आराम मिलने और सभी नाड़ियों के कार्य में सुधार होने पर ब्रोन्कियल अस्थमा विकार को ठीक करने में भी मदद मिल सकती है (6)। ब्रोंकाइटिस की समस्या में लाभकारी होने के साथ-साथ शवासन योग एकाग्रता को बेहतर करने में भी सहायक हो सकता है (10 )।

शवासन करने का तरीका:

  • सबसे पहले फर्श पर योग मैट या चादर बिछा दें।
  • अब मैट पर पीठ के बल आराम से लेट जाएं।
  • फिर पैरों को फैला लें, ध्यान रहे पैरों के बीच कुछ दूरी रखें।
  • अब अपने आप को आराम दें और इसी मुद्रा में रहें और सामान्य तरीके से सांस लेते रहें।
  • याद रखें कि यह आसन सोने के लिए नहीं है, यह आपके मन और शरीर को आराम देने के लिए है।
  • यह एक बहुत ही आसान योगासन है और इसे हर दिन किया जा सकता है।

सावधानियां:

  • पीठ दर्द या स्पाइनल डिस्क से पीड़ित लोगों को यह आसन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए।
  • गर्भावस्था के दौरान यह योग करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।
  • सांस लेते समय सांस पर ध्यान केंद्रित करने के अलावा यह भी याद रखना है कि इस दौरान सोना नहीं है।
  • इस योगासन को हमेशा शांत जगह पर करें।

8. इक्वल ब्रीदिंग एक्सरसाइज

9 इक्वल ब्रीदिंग एक्सरसाइज

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इसे समावृत्ति प्राणायाम भी कहा जाता है। इसे करने से सांस लेने और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं को कम किया जा सकता है। वहीं, ऊपर हमने पहले ही जानकारी दी है कि ब्रोंकाइटिस की समस्या भी श्वास संबंधी समस्या ही है। इसके साथ ही, यह पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र यानी शरीर को आराम देने वाले नर्व्स को उत्तेजित कर सकता है (11)। इस आधार पर हम इसे ब्रोंकाइटिस के लिए लाभदायक मान सकते हैं।

इक्वल ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने का तरीका:

  • इक्वल ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने के लिए किसी भी आरामदायक आसन जैसे कि पद्मासन या फिर सुखासन में बैठा जा सकता है।
  • आराम से बैठने के बाद अपनी पीठ को सीधा रखें और आंखों को बंद कर लें।
  • अब अपनी उंगली पर 4 गिनते हुए नाक से आराम-आराम से गहरी सांस लें।
  • इसके बाद पुन: 4 गिनते हुए मुंह बंद किए हुए नाक से ही सांस छोड़ें।
  • इस प्रकार इस प्रक्रिया को कम से कम 20 से 30 बार किया जा सकता है।

सावधानी:

  • इस एक्सरसाइज को करते वक्त सांस को झटके या जोर से न छोड़ें।

9. बुटेयको नोज ब्रीदिंग एक्सरसाइज

10 बुटेयको नोज ब्रीदिंग एक्सरसाइज

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ब्रीदिंग एक्सरसाइज में एक नाम बुटेयको नोज ब्रीदिंग का भी शामिल किया जा सकता है, जो ब्रोंकाइटिस के लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकता है। इस विषय पर हुए एक शोध के अनुसार इस ब्रीदिंग एक्सरसाइज से बच्चों में न सिर्फ ब्रोन्कियल अस्थमा ke लक्षणों में कमी पाई गई, बल्कि ब्रोन्कियल अस्थमा वाले बच्चों के जीवन की बेहतर गुणवत्ता को बढ़ावा भी मिला। इसके आधार पर हम कह सकते हैं कि इस एक्सरसाइज से ब्रोंकाइटिस को कुछ हद तक काबू किया जा सकता है (12)। बता दें कि यह ब्रोंकाइटिस के साथ-साथ अस्थमा के लक्षणों पर भी प्रभावकारी हो सकता है (13)।

बुटेयको नोज ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने का तरीका:

  • इसे करना आसान है। इसे फर्श या कुर्सी कहीं भी आराम से बैठ कर किया जा सकता है।
  • सबसे पहले आराम से बैठें और अपनी पीठ को सीधा कर लें।
  • कुछ देर तक सामान्य तरीके से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • अब अपने अंगूठे और तर्जनी उंगली का इस्तेमाल करके कुछ सेकंड के लिए नाक को बंद कर सिर को ऊपर और नीचे की ओर हिलाएं।
  • यह प्रक्रिया करने के बाद अपनी उंगली को नाक से हटाकर आराम से कुछ सेकंड तक सामान्य तरीके से सांस लें और छोड़ें।
  • अब फिर से अंगूठे और तर्जनी से नाक को बंद कर पहले वाली क्रिया को दोहराएं।
  • इस प्रकार से इस प्रक्रिया को 3 से 4 बार किया जा सकता है।

सावधानी:

  • इस व्यायाम को करने के दौरान मुंह के बजाय हमेशा नाक से ही सांस लें।

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ब्रोंकाइटिस के लिए योगासन और एक्सरसाइज के फायदे जानने के बाद यहां हम बता रहे हैं कुछ सावधानियों के बारे में।

ब्रोंकाइटिस के लिए योग और एक्सरसाइज करते समय बरती जाने वाली सावधानियां- Precautions to be taken while doing yoga and Exercise for Bronchitis in Hindi

ब्रोंकाइटिस के लिए योग करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। यहां हम बता रहे हैं ब्रोंकाइटिस के लिए योगासन करने से पहले और इस दौरान बरती जाने वाली सावधानियाें के बारे में। ये सावधानियां कुछ इस प्रकार हैं:

  • सांस लेने के व्यायाम करते समय सांस लेने और सांस छोड़ने में जल्दबाजी न करें।
  • खाना खाने के तुरंत बाद योग और एक्सरसाइज न करें।
  • कभी भी अपनी क्षमता से ज्यादा सांस लेने की कोशिश न करें।
  • योग के दौरान मास्क का उपयोग न करें।
  • हमेशा अच्छे और शांत वातावरण में ही योग करें।
  • गर्भवती महिलाएं ऊपर बताए गए किसी भी योग को करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
  • शुरुआत में किसी एक्स्पर्ट की देखरेख में ही योगासन करें।

ब्रोंकाइटिस के लिए योगासन और व्यायाम इस समस्या में राहत का कार्य कर सकते हैं। इसके साथ ही योग से कई तरह की बीमारियों से भी बचाव में मदद मिल सकती है। ऐसे में अगर कोई ब्रोंकाइटिस की समस्या से परेशान है, तो वो ऊपर बताए गए ब्रोंकाइटिस के लिए योगासन द्वारा ब्रोंकाइटिस के लक्षणों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। वहीं, ऊपर बताए गए किसी भी ब्रोंकाइटिस के लिए योग को करने से पहले बताई गई सावधानियों का ध्यान भी जरूर रखें। साथ ही अगर कोई ब्रोंकाइटिस के लिए दवा का सेवन करता है, तो योग के साथ-साथ अपनी दवा को भी जारी रखें। जरूरत पड़े तो इस विषय में एक बार डॉक्टरी सलाह भी जरूर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या भुजंगासन ब्रोंकाइटिस में फायदेमंद है?

हां, भुजंगासन का नियमित अभ्यास फेफड़ों और श्वसन तंत्र के अन्य अंगों को सुचारू रूप से कार्य करने में मदद का काम कर सकता है, इससे ब्रोंकाइटिस में बलगम को कम करने में मदद मिल सकती है (14)।

क्या शवासन करने से ब्रोंकाइटिस में लाभ मिलता है?

हां, शवासन करने से ब्रोंकाइटिस में लाभ मिल सकता है (15)।

संदर्भ (Sources):

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  1. Acute Bronchitis
    https://medlineplus.gov/acutebronchitis.html
  2. Yoga therapy in chronic bronchitis
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/11273114/
  3. EFFECTS OF YOGA EXERCISES ON RESPIRATORY DISORDERS
    https://www.researchgate.net/publication/341312580_EFFECTS_OF_YOGA_EXERCISES_ON_RESPIRATORY_DISORDERS
  4. Yoga for Children
    https://icds-wcd.nic.in/nnm/NNM-Web-Contents/LEFT-MENU/Guidelines/Yoga_for_Children_of_age_3-6_years_English.pdf
  5. “Yoga and Pranayama to Improve Respiratory Pressure” Pulmonary Function and Boost Immune Responses to Combat the Present COVID-19 Pandemic
    https://www.rfppl.co.in/subscription/upload_pdf/suseela-lanka–ijamy-1602063736.pdf
  6. THE ROLE OF YOGA THERAPY IN THE MANAGEMENT OF BRONCHIAL ASTHMA (TAMAKA SHWASA)
    https://www.researchgate.net/publication/337970626_THE_ROLE_OF_YOGA_THERAPY_IN_THE_MANAGEMENT_OF_BRONCHIAL_ASTHMA_TAMAKA_SHWASA
  7. Kapalabhati pranayama: An answer to modern day polycystic ovarian syndrome and coexisting metabolic syndrome?
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4959327/
  8. The effect of various breathing exercises (pranayama) in patients with bronchial asthma of mild to moderate severity
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3017963/
  9. Deep breathing exercise education receiving and performing status of patients undergoing abdominal surgery
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6040853/
  10. “Role of yoga in attention” “concentratio” and memory of medical students
    http://njppp.com/fulltext/28-1531306776.pdf
  11. A STUDY TO ASSESS THE EFFECTIVENESS OF BREATHING EXERCISES ON HYPERTENSION AMONG PATIENTS WITH CHRONIC RENAL FAILURE IN SELECTED HOSPITAL AT COIMBATORE
    http://repository-tnmgrmu.ac.in/2432/1/3001313indukm.pdf
  12. THE EFFECTIVENESS OF BUTEYKO BREATHING EXERCISE (BBE) ON RESPIRATORY OUTCOME AMONG CHILDREN WITH BRONCHIAL ASTHMA ADMITTED IN PAEDIATRIC UNIT OF “MGMC&R” PUDUCHERRY
    https://aos.sbvjournals.com/doi/AOS/pdf/10.5005/jp-journals-10085-7206
  13. A randomised controlled trial of the Buteyko technique as an adjunct to conventional management of asthma
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/18249107/
  14. Yogic approach for the management of sinusitis
    https://www.ijoyppp.org/article.asp?issn=2347-5633;year=2017;volume=5;issue=1;spage=14;epage=17;aulast=Udayakumara
  15. Yoga for asthma
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6880926/
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