Written by , (शिक्षा- एमए इन मास कम्युनिकेशन)

किसी भी व्यक्ति के स्वस्थ रहने के लिए सबसे जरूरी है उसके पेट का स्वस्थ रहना। अगर पेट से संबंधित कोई भी समस्या होती है, तो उसका असर पूरे शरीर पर होता है। ऐसी ही पेट से जुड़ी एक समस्या अपेंडिक्स भी है। अपेंडिक्स की स्थिति में पेट में असहनीय दर्द उठता है। इस बीमारी का यूं तो मेडिकल ट्रीटमेंट ही करवाया जाता है, लेकिन योगासन की मदद से अपेंडिक्स के शुरुआती लक्षण को कुछ कम करने और अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बाद होने वाली जटिलताओं से बचने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से

स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम अपेंडिक्स के लिए योग की जानकारी लेकर आए हैं।

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लेख के शुरुआती भाग में अपेंडिक्स को दूर करने के लिए योग कैसे फायदेमंद होता है, यह जानिए।

अपेंडिक्स को दूर करने में कैसे लाभदायक है योग – How Does Yoga Help with Appendix in Hindi

अपेंडिक्स एक तरह की छोटी थैली होती है, जो बड़ी आंत से जुड़ी होती है। इसमें जब सूजन हो जाती है, तो इसे अपेंडिसाइटिस कहा जाता है। इस समस्या के होने पर मल कठोर हो जाता है। इसके अलावा, दस्त, बुखार, मतली और उल्टी जैसी समस्या हो सकती है (1)। इस समस्या के शुरुआती लक्षण और सर्जरी के बाद वाली जटिलताओं से राहत पाने के लिए योग करना फायदेमंद हो सकता है। एक वैज्ञानिक अध्ययन के दौरान कई समस्याओं को ठीक करने के लिए योग कराया गया, जिनमें से एक अपेंडिक्स भी है। इसे करने से वालों को अपेंडिक्स के कारण होने वाली असुविधाओं से कुछ राहत मिली (2)।

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अब जानते हैं कि अपेंडिक्स रोग के लिए योग में क्या-क्या करना चाहिए।

अपेंडिक्स के लिए योग – Yoga For Appendix in Hindi

सही योग के नियमित अभ्यास से अपेंडिक्स की सर्जरी के बाद योग असरदार साबित हो सकता है। नीचे अपेंडिक्स के लिए लाभदायक योग पढ़ें।

1. त्रिकोणासन (Trikonasana)

Trikonasana

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त्रिकोणासन के अभ्यास के समय शरीर से त्रिकोण यानी तीन कोने जैसा आकार बनता है। इसी कारण इस योग का नाम त्रिकोणासन रखा गया है। इसे अंग्रेजी में ट्रायंगल पोज भी कहा जाता है। इस योग को करने से पेट की मांसपेशियों पर असर पड़ता है। साथ ही यह अपेंडिक्स से होने वाली अन्य समस्याओं जैसे कि गैस, अपच और कब्ज से भी राहत दिला सकता है (3)।

योग करने की प्रक्रिया :

  • इस योग को करने के लिए घर या पार्क में साफ जगह पर योग मैट या चटाई बिछाकर सीधे खड़े हो जाएं।
  • इसके बाद दोनों पैरों को एक दूसरे से दूर करें और दोनों के बीच कम-से-कम दो फीट की दूरी रखें।
  • इस समय अपने दोनों हाथ को शरीर से सटाकर रखें।
  • फिर अपने दोनों हाथ को कंधे जितना ऊपर लाकर फैला लें।
  • इसके बाद गहरी सांस लेते हुए बाएं हाथ को ऊपर उठाकर हथेली को कान से चिपका लें।
  • साथ ही अपने दाएं पैर को बाहर की तरफ मोड़ें।
  • अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए कमर को दाई तरफ झुकाएं।
  • ऐसा करते समय पैर घुटने से मुड़ना नहीं चाहिए और कान से सटा हुआ हाथ भी वही रहेगा।
  • फिर बाएं हाथ को जमीन के समांतर लाने की कोशिश करें व दाएं हाथ से दाएं पैर के टखने को स्पर्श करने का प्रयास करें।
  • अब इसी स्थिति में करीब 15 से 20 सेकंड रहने की कोशिश करें और नियमित रूप से सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • इसके बाद सांस भरते हुए अपनी शुरुआती मुद्रा में आ जाएं।
  • अब कुछ सेकंड के बाद इस प्रक्रिया को दूसरी तरफ से भी दोहराएं।
  • शुरुआती अभ्यासक इस योग के तीन से पांच चक्र तक कर सकते हैं।

योग से जुड़ी सावधानियां :

  • जिन्हें ब्लड प्रेशर की समस्या है, वे इस योग को न करें।
  • अगर कमर, गर्दन, पीठ में दर्द या स्लिप डिस्क की समस्या है, तो इस आसन से परहेज करें।
  • जिन लोगों को बहुत ज्यादा चक्कर आते हैं, वे इस योग से दूर रहें।
  • साइटिका की समस्या वाले इस आसन को करने से बचें।

2. वृक्षासन (Vrikshasana)

Vrikshasana

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अपेंडिक्स दूर करने के लिए योग में वृक्षासन को शामिल कर सकते हैं। वृक्षासन को करते समय एक पैर में खड़ा होना होता है और इसमें शरीर एक पेड़ की तरह दिखाई देता है। यह योग अपेंडिक्स के लक्षण से छुटकारा दिलाने के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। इस संबंध में प्रकाशित एक रिसर्च में दिया है कि इस योग से पाचन को ठीक किया जा सकता है (4)। वहीं, हमने ऊपर बताया है कि अपेंडिक्स की स्थिति में मल कठोर हो जाता है (1)। इस आधार पर माना जाता है कि वृक्षासन से अपेंडिक्स के लक्षण कुछ कम हो सकते हैं।

योग करने की प्रक्रिया :

  • वृक्षासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले एक चटाई या योग मैट बिछाकर उस पर सीधे खड़े हो जाएं।
  • इसके बाद एक पैर को घुटने से मोड़कर पैर के तलवे को दूसरे पैर की जांघ पर टिका दें।
  • इस समय दूसरा पैर सीधा होगा और उसी पैर से शरीर का संतुलन बनाए रखना होगा।
  • अब इस मुद्रा में आने के बाद गहरी सांस भरकर दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए सिर के ऊपर ले आएं और दोनों हथेलियों को जोड़ लें।
  • इससे हाथों से नमस्कार की मुद्रा बन जाएगी।
  • इस समय कमर, रीढ़ की हड्डी और सिर एक समांतर रेखा में होने चाहिए।
  • करीब 5 मिनट तक इसी मुद्रा में रहने की कोशिश करें और सामान्य रूप से सांसें लेते व छोड़ते रहें।
  • फिर लंबी सांस लेते हुए शुरुआती मुद्रा में आ जाएं और पैरों को कुछ सेकंड आराम दें। यह वृक्षासन का आधा चक्र पूरा हुआ। अब इसे दूसरे पैर केसाथ भी कर सकते हैं।
  • इस योग को करीब 10 मिनट तक किया जा सकता है।

योग से जुड़ी सावधानियां :

  • जो लोग बहुत मोटे हैं, उन्हें इस योग को न करने की सलाह दी जाती है (5)।
  • गठिया से प्रभावित लोगों को इस आसन को नहीं करना चाहिए (5)।
  • वर्टीगो यानी सिर चकराने की समस्या से जूझ रहे लोगों को इससे परहेज करना चाहिए (5)।
  • अगर माइग्रेन या रक्तचाप की समस्या है, तो इस योग का अभ्यास न करें (6)।
  • गर्भवतियों को यह योग बिना प्रशिक्षक के नहीं करना चाहिए। दरअसल, इस योग के दौरान एक पैर से ही शरीर का संतुलन बनाना होता है, जिससे गिरने का खतरा बना रहता है।

3. पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana)

Paschimottanasana

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पश्चिमोत्तानासन को नियमित रूप से करने पर अपेंडिक्स की सर्जरी के बाद होने वाली असुविधाओं और इसके शुरुआती लक्षणों से राहत मिल सकती है। दरअसल, अपेंडिक्स के कारण मल कठोर हो सकता है (1)। कब्ज की स्थिति में भी मल कठोर होता है और यह योग कब्ज की समस्या से निजात दिला सकता है (7)। ऐसे में इसे करने पर अपेंडिक्स का लक्षण भी कम हो सकता है।

योग करने की प्रक्रिया :

  • सबसे पहले साफ जगह पर योग मैट बिछाकर दोनों पैर को सामने की तरफ फैलाकर बैठ जाएं।
  • इस समय दोनों पैर एक दूसरे से सटे हुए और घुटने सीधे रहने चाहिए।
  • फिर दोनों हाथों को उठाकर हल्की-हल्की सांस छोड़ते हुए सामने की तरफ झुकें और अपने माथे को घुटनों पर टिका दें।
  • साथ ही हाथों से पैरों के अंगुठों को स्पर्श करने या पकड़ने की कोशिश करें।
  • सामने की तरफ झुकते हुए या अंगूठे को पकड़ते हुए घुटनों को मोड़ना नहीं है।
  • अब थोड़ी देर इसी मुद्रा में बने रहें और सांस लेने की क्रिया को सामान्य रखें।
  • इसके बाद लंबी सांस लेते हुए शुरुआती मुद्रा में वापस आ जाएं।

योग से जुड़ी सावधानियां :

  • प्रेगनेंट महिलाओं को इस योग को नहीं करना चाहिए।
  • जिन लोगों को अल्सर, अस्थमा या स्लिप डिस्क की समस्या है, वे इस योग से दूर रहें।
  • अगर पेट की सर्जरी हुई है, तो इस आसन को न करें।
  • अगर किसी को डायरिया है, तो वे इस योग का अभ्यास न करें।

4. सर्वांगासन (Sarvangasana)

Sarvangasana

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इस योग में पीठ के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाया जाता है। एक मेडिकल रिसर्च की मानें, तो इस योग के निरंतर अभ्यास से बाउल मूवमेंट रेगुलेट होता है, जिससे कब्ज की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। साथ ही यह पेट में होने वाले दर्द को भी ठीक कर सकता है (8)। इससे अपेंडिक्स की स्थिति में कुछ हद तक सुधार हो सकता है।

योग करने की प्रक्रिया :

  • सर्वांगासन करने के लिए योग मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं।
  • इस समय दोनों हाथों को सीधा शरीर से सटाकर रखें।
  • इसके बाद धीरे-धीरे सांस लेते हुए पहले पैरों, फिर कूल्हों और अंत में कमर को ऊपर उठाएं।
  • शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए कमर को हाथों से सहारा दें और कोहनियों को जमीन पर टिका दें।
  • इस मुद्रा में आने के बाद दोनों पैर सटे हुए और बिल्कुल सीधे होने चाहिए।
  • इस समय शरीर का पूरा भार कंधों, कोहनियों व सिर पर रहेगा और ठुड्डी छाती को छू रही होगी।
  • कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहें और नियमित रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • अब धीरे-धीरे पैरों को जमीन पर ले आएं और प्रारंभिक मुद्रा में वापस आ जाएं।
  • इस योग के तीन से चार चक्र कर सकते हैं ।

योग से जुड़ी सावधानियां :

  • गर्भावस्था के समय इस योग को करने से बचें।
  • अगर उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या रीढ़ की हड्डी से संबंधित समस्या है, तो इस योग को न करें।
  • यदि किसी के गर्दन में असहनीय दर्द हो रहा है, तो इस योग से परहेज करें।

5. शशांकासन (Shashankasana)

Shashankasana

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इस योग को करने के लिए घुटनों के बल बैठकर धड़ वाले भाग को नीचे झुकाना होगा। एक रिसर्च के मुताबिक, यह आसन दस्त की समस्या से राहत दिला सकता है (9)। वहीं, अपेंडिक्स की समस्या होने पर दस्त जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं (1)।

योग करने की प्रक्रिया :

  • सबसे पहले एक स्वच्छ स्थान पर योग मैट या चटाई बिछाकर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  • इस समय दोनों हाथ सीधे घुटनों पर होंगे।
  • फिर लंबी सांस भरते हुए हाथों को सीधे ऊपर की तरफ उठाएं।
  • अब सांस छोड़ते हुए कमर वाले भाग को सामने की तरफ झुकाएं। साथ ही दोनों हाथों को नीचे लाकर जमीन पर टिका दें।
  • इस समय हाथ सीधे सामने की तरफ फैले हुए होने चाहिए और गर्दन या रीढ़ की हड्डी भी सीधी होनी चाहिए। साथ ही माथे से जमीन को छूने की भी कोशिश करें।
  • थोड़ी देर के लिए इसी मुद्रा में बने रहें और सामान्य गति से सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • अब सांस लेते हुए फिर से वज्रासन की मुद्रा में आ जाएं।
  • इस योग को विराम लेकर चार से पांच बार तक किया जा सकता है।

योग से जुड़ी सावधानियां :

  • अगर किसी को हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग की समस्या है, तो वे इस योग को डॉक्टर की सलाह पर ही करें।
  • जिन लोगों को पीठ दर्द की शिकायत होती है, वे इस योग के अभ्यास से बचें।
  • प्रेगनेंट महिलाओं को इस आसन से परहेज करना चाहिए।

लेख में बने रहें

6. अर्ध चंद्रासन (Ardha Chandrasana)

Ardha-Chandrasana

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अर्ध चंद्रासन के दौरान एक हाथ और एक पैर में खड़ा होना पड़ता है। यह योग पेट को मजबूत करता है और पाचन में सुधार कर सकता है। माना जाता है कि इससे अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बाद की स्थिति में सुधार हो सकता है (10)।

योग करने की प्रक्रिया :

  • इस योग को करने के लिए योग मैट बिछाकर उस पर सीधे खड़े हो जाएं।
  • इस समय दोनों पैरों के बीच करीब दो फीट की दूरी रखें।
  • अब दोनों हाथों को सीधे शरीर से दूर फैलाकर कंधे के बराबर ले आएं।
  • फिर धीरे-धीरे बाईं तरफ झुकते हुए बाएं हाथ को बाएं पैर के पास जमीन पर रख दें व दाएं पैर को ऊपर उठा लें।
  • इसके बाद अपने दाएं हाथ को सीधे आसमान की तरफ ऊपर उठाएं।
  • अब अपने गर्दन को मोड़कर चेहरे को ऊपर की तरफ कर लें और नजरें दाएं हाथ पर टिका दें।
  • इस समय बाया पैर व बाया हाथ जमीन पर होगा और दाया पैर व दाया हाथ आसमान की तरफ होगा।
  • इस दौरान शरीर का पूरा भार बाएं पैर व बाएं हाथ की उंगलियों पर होगा।
  • थोड़ी देर के लिए इसी मुद्रा में बने रहें और सामान्य रूप से सांस लें और छोड़ें।
  • अब धीरे-धीरे शुरुआती मुद्रा में आ जाएं। यह योग का आधा चक्र हुआ। अब इसे दूसरी तरफ से भी दोहराएं।
  • इस योग को रुक-रुककर चार से पांच बार तक कर सकते हैं।

योग से जुड़ी सावधानियां :

  • अगर किसी को बहुत चक्कर आते हैं, तो इस योग को करने से बचें।
  • जिन्हें निम्न रक्तचाप की समस्या है, वो इस आसन को न करें।
  • गर्दन या कमर में दर्द है, तो इस आसन को करने से परहेज करें।
  • दस्त होने पर इस योग को करने न करें

7. वीरभद्रासन (Virabhadrasana)

Virabhadrasana

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अपेंडिक्स के लिए योग में विराभद्रसान को भी शामिल कर सकते हैं। दरअसल, इस योग के नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है, जिससे कि अपेंडिक्स की समस्या को पनपने से रोका जा सकता है। फिलहाल, इस संबंध में किसी तरह का स्पष्ट वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है।

योग करने की प्रक्रिया :

  • वीरभद्रासन को करने के लिए एक समतल स्थान पर योग मैट या चटाई बिछा लें। फिर पैरों के बीच करीब 3 फीट की दूरी बनाकर खड़े हो जाएं।
  • अब अपने दोनों हाथों को एक साथ ऊपर उठाकर जोड़ लें।
  • इसके बाद अपने बाएं पैर को धीरे-धीरे 90 डिग्री तक घुमाएं।
  • अब शरीर को बाईं ओर घुमाएं व लंबी सांस लें और बाएं घुटने को मोड़ें।
  • इस समय बाया घुटना और टखना एक सीध में रहेंगे।
  • कुछ सेकंड के लिए इसी मुद्रा में बने रहें। फिर योग को विपरीत करते हुए शुरुआती मुद्रा में आ जाएं। यह आधा चक्र हुआ।
  • अब थोड़ी देर विराम लेने के बाद इस विधि को दूसरी ओर से भी करें।
  • इस योग को चार से पांच बार कर सकते हैं।

योग से जुड़ी सावधानियां :

  • रीढ़ और कमर में दर्द होने पर इस योग को न करें।
  • अगर पैरों से जुड़ी गंभीर समस्या है, तो इसे डॉक्टर की सलाह पर ही करें।

8. विपरीत करणी (Viparita Karani)

Viparita-Karani

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अपेंडिक्स दूर करने के लिए योग में विपरीत करणी योग भी शामिल है। इस योग को करने के दौरान पैरों को ऊपर उठाया जाता है, जिससे पेट वाले भाग पर असर पड़ता है। इससे पेट की मांसपेशियां मजबूत हो सकती है और साथ ही पाचन क्रिया बेहतर हो सकती है। इस आधार पर कह सकते हैं कि इससे अपेंडिक्स के लक्षण को कम करने और इससे जुड़ी सर्जरी करवाने के बाद यह योगासन फायदेमंद साबित हो सकता है।

योग करने की प्रक्रिया :

  • सबसे पहले दीवार के करीब योग मैट या चटाई बिछा लें।
  • अब दीवार की तरफ मुंह करके बैठ जाएं।
  • इसके बाद अपने दोनों हाथों से सपोर्ट लेते हुए धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें व कमर के नीचे वाले हिस्से को ऊपर उठाकर सीधे दीवार से टिका लें।
  • ऐसा करते समय कमर को हाथों से सहारा दें। इस दौरान कंधे, सिर और कोहनी जमीन पर ही रहेंगी।
  • इस समय शरीर का पूरा वजन कंधों और कोहनी पर होगा।
  • थोड़ी देर के लिए इसी अवस्था में रहें। फिर योग की प्रक्रिया को विपरीत करते हुए शुरुआती स्थिति में वापस आ जाएं।
  • इस योग को विराम लेकर 10 मिनट तक कर सकते हैं।

योग से जुड़ी सावधानियां :

  • इस योग को गर्भावस्था और पीरियड्स यानी मासिक धर्म के समय नहीं करना चाहिए।
  • मोतियाबिंद की समस्या होने पर इस आसन को करने से बचें।
  • उच्च रक्तचाप, ग्लूकोमा या हर्निया से पीड़ित व्यक्ति इस आसन को न करें।

लेख पढ़ते रहें

आगे जानिए कि अपेंडिक्स को दूर करने के लिए योग करते समय किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए।

अपेंडिक्स के लिए योग करते समय बरती जाने वाली सावधानियां- Precautions to be taken while doing yoga for Appendix in Hindi

किसी भी समस्या के लिए योग करते समय कुछ सावधानियों को बरतना बहुत जरूरी होता है। इसी तरह अपेंडिक्स के लिए भी योग करते समय निम्न बातों को ध्यान में जरूर रखें।

  • अपेंडिक्स के लिए किए जाने वाले योग को हमेशा विशेषज्ञ की निगरानी में ही करना चाहिए।
  • हमेशा योग को सुबह खाली पेट करना चाहिए। अगर कोई शाम के समय योग करने की सोच रहा है, तो वो योग करने से 3 घंटे पहले तक किसी चीज का सेवन न करें।
  • अगर किसी को गंभीर बीमारी है या सर्जरी हुई है, तो योग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
  • शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द होने पर योग करने से बचें।

योग निरोग रहने का सबसे अच्छा माध्यम है। इसे करने से न सिर्फ समस्याओं से छुटकारा मिलता है, बल्कि यह लोगों को स्वस्थ रखने में मदद भी कर सकता है। ऐसे में अपेंडिक्स के कारण होने वाली असुविधाओं और इसकी सर्जरी के बाद हुई परेशानी को दूर करने के लिए ऊपर लेख में बताए गए योग कर सकते हैं हम उम्मीद करते हैं कि इस लेख में दी गई सभी जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी।

संदर्भ (Sources) :

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  1. Appendicitis
    https://medlineplus.gov/ency/article/000256.htm
  2. REVIEW ON ALTERNATIVE THERAPY IN HEALTH AND MEDICINE
    http://citeseerx.ist.psu.edu/viewdoc/download?doi=10.1.1.278.5621&rep=rep1&type=pdf
  3. Significance of Trikonasana in Healthy Life
    https://www.ijtsrd.com/papers/ijtsrd26547.pdf
  4. Anatomical Exploration of Vrikshasana
    https://www.ijtsrd.com/papers/ijtsrd33365.pdf
  5. INTEGRATION OF AYUSH (AYURVEDA) WITH NATIONAL PROGRAM FOR PREVENTION AND CONTROL OF CANCER DIABETES CARDIOVASCULAR DISEASES AND STROKE (NPCDCS)
    https://main.mohfw.gov.in/sites/default/files/Guidelines%20and%20Training%20Mannual%20on%20Integration%20of%20%20Ayurveda%20in%20NPCDCS_0.pdf
  6. physical-education
    http://cbseacademic.nic.in/web_material/Manuals/physical-education-11.pdf
  7. List of the practices
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4699502/table/T1/
  8. Importance and benefits of Sarvangasana in daily life
    https://www.ijsdr.org/papers/IJSDR2011016.pdf
  9. Yogic versus conventional treatment in diarrhea-predominant irritable bowel syndrome: a randomized control study
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/15077462/
  10. UTILITY OF CHANDRA NAMASKARA IN DAILY LIFE
    https://wjpr.s3.ap-south-1.amazonaws.com/article_issue/1425967350.pdf
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