एसिडिटी और गैस के लिए योग – Yoga To Reduce Acidity and Gas in Hindi

Written by , (शिक्षा- एमए इन मास कम्युनिकेशन)

असंतुलित और बिगड़ा हुआ खान-पान पेट संबंधित कई परेशानियों का कारण बन सकता है, जिनमें एसिडिटी और गैस भी शामिल हैं। इन समस्याओं से शायद ही कोई आज तक बच पाया होगा। इससे राहत पाने के लिए लोग कई प्रकार के जतन करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि योगासन के जरिए एसिडिटी और गैस की समस्या पर काबू पाया जा सकता है। यही वजह है कि स्टाइलक्रेज के इस आर्टिकल में हम एसिडिटी और गैस के लिए योग के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। 

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लेख में सबसे पहले जानते हैं कि याेग एसिडिटी और गैस की समस्या में लाभदायक है या नहीं।

एसिडिटी में कैसे लाभदायक है योग – How Does Yoga Help with Acidity in Hindi

एसिडिटी और गैस की समस्या में सुधार करने के लिए योग लाभकारी साबित हो सकता है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक मेडिकल रिसर्च में साफ तौर से बताया गया है कि ध्यान और योग करने से पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं को कम किया जा सकता है, जिसमें एसिडिटी और गैस की समस्या शामिल हैं (1)।

वहीं, एक अन्य रिसर्च के अनुसार योग का अभ्यास पाचन संबंधित कई परेशानियों और उनके लक्षणों को रोकने में फायदेमंद हो सकता है। गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी) उनमें से एक है, जिसमें पेट में गैस के साथ ही एसिडिटी की समस्या भी हो सकती है। शोध में बताया गया है कि कपालभाती और अग्निसार क्रिया के नियमित अभ्यास से जीईआरडी के रोगियों के गंभीर लक्षणों में सुधार हो सकता है (2)।  इस आधार पर यह माना जा सकता है कि गैस और एसिडिटी के लिए योग फायदेमंद हाे सकता है।

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लेख के इस भाग में गैस और एसिडिटी के लिए योग से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं।

एसिडिटी और गैस के लिए योग- Yoga To Reduce Acidity and Gas in Hindi

लेख में नीचे एसिडिटी और गैस की समस्या को कम करने के लिए योग के विभिन्न आसन किस प्रकार लाभकारी हो सकते हैं, इसकी जानकारी दे रहे हैं।

1. हलासन

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कैसे है फायदेमंद:

एसिडिटी और गैस के लिए योग की लिस्ट में हलासन को शामिल किया जा सकता है। इस आसन को करते हुए शरीर हल की तरह दिखाई देता है, जिस वजह से इसे हलासन के नाम से जाना जाता है। एनसीबीआई पर प्रकाशित एक शोध में हलासन को कब्ज, अपच व अन्य पाचन संबंधित परेशानियों के लिए लाभकारी माना गया है। इस आधार पर माना जा सकता है कि नियमित रूप से हलासन का अभ्यास एसिडिटी और गैस की समस्या से राहत प्रदान कर सकता है (3)।

करने की विधि:

  • सबसे पहले समतल जगह पर एक योग मैट बिछा लें।
  • अब मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।
  • हाथों को शरीर से सटाकर रखना है और हथेलियों को जमीन की ओर रखें।
  • इसके बाद सांस लेते हुए अपने पैरों को ऊपर लेकर जाएं और 90 डिग्री का कोण बनाएं।
  • यदि पैरों को उठाने में परेशानी हो, तो हाथ से कमर को सहारा दे सकते हैं।
  • फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए पैरों की उंगलियों को जमीन से स्पर्श कराने का प्रयास करें।
  • अब हाथों को कमर से हटाकर जमीन पर पहले की तरह ही सीधा रख लें।
  • इस मुद्रा में सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
  • इसके बाद आराम आराम से वापस सामान्य मुद्रा में आ जाएं।
  • इस योगासन को आप अपनी क्षमता के अनुसार तीन से पांच बार कर सकते हैं।

सावधानियां:

  • पीरियड्स के दिनों में महिलाएं हलासन करने से परहेज करें।
  • गर्दन में चोट होने पर भी हलासन करने से बचें।
  • गर्भवती महिलाएं इस आसन से परहेज करें।
  • सर्वाइकल या रीढ़ से संबंधित समस्या से ग्रसित लोग हलासन का अभ्यास न करें।

2. वज्रासन

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कैसे है फायदेमंद: 

वज्रासन को डायमंड पोज भी कहा जाता है। गैस और एसिडिटी की समस्या के लिए वज्रासन लाभकारी हो सकता है। एक शोध में साफतौर से बताया गया है कि वज्रासन योग करने से पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद हो सकती है। शोध में बताया गया है कि यह ब्लड फ्लो को बढ़ा सकता है, जिससे कब्ज, एसिडिटी, पाइल्स, आंतों की गैस आदि में आराम मिल सकता है। इस तरह एसिडिटी और गैस के लिए योग में वज्रासन की गिनती की जा सकती है।

करने की विधि:

  • सबसे पहले मैट बिछाएं और घुटनों के बल बैठ जाएं।
  • ध्यान रहे कि दोनों पैरों के अंगूठों को साथ मिला लें। एड़ियों को अलग ही रखें।
  • अब नितंबों को एड़ियों पर टिकाएं और हथेलियां को घुटनों पर रख दें।
  • सिर और पीठ को बिल्कुल सीधा रखें।
  • घुटनों को आपस में मिलाऐं।
  • इसके बाद आंखों को बंद करें व सामान्य रूप से सांस लेना जारी रखें।
  • कम से कम दस मिनट तक इस अवस्था में बैठने का प्रयास करें।
  • यदि वज्रासन करते समय घुटनों में दर्द हो रहा हो तो जबरदस्ती इस आसन को न करें।
  • रोजाना एक से दो मिनट इस अवस्था में बैठने का प्रयास करें और धीरे-धीरे इसे करने का समय बढ़ाते रहें।

सावधानियां:

  • घुटने और पैरों में दर्द होने पर यह आसन नहीं करें।
  • घुटने या टखने की हड्डी के खिसकने पर इस आसन से परहेज करें।
  • हाइपोटेंशन यानी निम्न रक्तचाप वाले लोग वज्रासन नहीं करें।
  • अगर किसी के घुटनों की सर्जरी हुई है, तो यह आसन नहीं करें।
  • गर्भवति महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • रीढ़ की हड्डी में समस्या होने पर इसे बिल्कुल नहीं करें।

3. उष्ट्रासन

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कैसे है फायदेमंद:

उष्ट्रासन को अंग्रेजी में केमल पोज के नाम से जाना जाता है। इस आसन को करने से पेट संबंधी कई समस्याओं में राहत मिल सकती है। एक रिसर्च के अनुसार उष्ट्रासन आसन पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ कब्ज और अपच पर सकारात्मक प्रभाव दिखा सकता है (4)। वहीं, कब्ज की समस्या एसिडिटी और गैस का कारण बन सकता है (5)। इस आधार पर उष्ट्रासन को एसिडिटी और गैस की समस्या के लिए कारगर इलाज माना जा सकता है। 

करने की विधि:

  • सबसे पहले योग मैट पर वज्रासन की अवस्था में बैठें
  • इसके बाद घुटनों के बल खड़े हो जाएं।
  • अब लंबी सांस लें और पीछे की ओर झुकते हुए बाएं हाथ से बाएं पैर की एड़ी और दाएं हाथ से दाएं पैर की एड़ी को पकड़ें।
  • ध्यान रहे कि इस दौरान मुंह ऊपर यानी आसमान की तरफ हो।
  • इस स्थिति में शरीर का सारा वजन हाथों और पैरों पर होगा।
  • कुछ देर तक इसी मुद्रा में रहें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
  • इसके बाद शुरुआती अवस्था में आ जाएं।
  • इस आसन को चार से पांच बार तक किया जा सकता है। 

सावधानियां:

  • हर्निया और उच्च रक्तचाप के मरीजों को इस आसन को करने से बचना चाहिए।
  • किसी भी तरह का दर्द हो, तो भी इस आसन को नहीं करें।

4. पवनमुक्तासन

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कैसे है फायदेमंद:

पवनमुक्तासन के जरिए भी एसिडिटी और गैस की समस्या से राहत मिल सकती है। एक अध्ययन में साफ तौर से जिक्र मिलता है कि पाचन संबंधित परेशानियों के लिए पवनमुक्तासन बेहद लाभकारी हो सकता है (6)। 

इसके अलावा, एक अन्य शोध के अनुसार, इस आसन को नियमित तौर पर करने से मल त्याग की प्रक्रिया में सुधार के साथ कब्ज की समस्या के लिए कारगर माना गया है (6)। वहीं, लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि एसिडिटी और गैस की परेशानी कब्ज की वजह से हो सकती है। ऐसे में पवनमुक्तासन को एसिडिटी और गैस की समस्या के लिए फायदेमंद कहना गलत नहीं होगा।

करने की विधि:

  • जमीन पर मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं और हाथों को शरीर से सटा कर रखें।
  • गहरी सांस लें और दाएं पैर को घुटने से मोड़ें और दोनों हाथों से घुटने को पकड़ कर छाती से लगाने का प्रयास करें।
  • इसके बाद सांस छोड़ते हुए सिर को उठाएं और नाक को घुटने से स्पर्श कराने का प्रयास करें
  • कुछ सेकंड तक इसी अवस्था में बने रहें।
  • फिर पैरों और सिर को सांस छोड़ते हुए शुरुआती अवस्था में ले आएं।
  • दाएं पैर की प्रक्रिया पूरी होने पर इसी प्रकार से बाएं पैर के साथ करें।
  • फिर दोनों पैरों को साथ में लेकर इस प्रक्रिया को दोहराएं।
  • इस आसन को चार से पांच बार आसानी से किया जा सकता है।

सावधानियां:

  • यदि पीठ और कमर में दर्द या चोट हो, तो इस योग को करने से बचें।
  • इस योगासन को भोजन के बाद बिल्कुल नहीं करें।

5. अनुलोम विलोम

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कैसे है फायदेमंद:

अगर कोई एसिडिटी और गैस की समस्या से परेशान है, तो अनुलोम विलोम प्राणायाम का रोजाना अभ्यास करके इन परेशानियों से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है। दरअसल, एक शोध में शरीर में चर्बी की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए अनुलोम विलोम को लाभकारी बताया गया है (7)। वहीं, अधिक वजन एसिडिटी और गैस की समस्या के मुख्य कारणों में से एक है (8)। इन तथ्यों को देखते हुए अनुलोम विलोम को एसिडिटी और गैस की समस्या के लिए गुणकारी माना जा सकता है।

करने की विधि:

  • अनुलोम विलोम करने से पहले इस बात को ध्यान में रखें कि इसे दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली और अंगूठे के माध्यम से ही किया जाता है।
  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर पद्मासन मुद्रा में बैठ जाएं।
  • यदि पद्मासन मुद्रा में बैठने में समस्या हो रही हो, तो सुखासन मुद्रा में भी बैठ सकते हैं।
  • जिन लोगों को जमीन पर बैठने में परेशानी हो रही हो, तो वो कुर्सी पर बैठ सकते हैं।
  • इसके बाद आंखों को बंद करके कमर को सीधा करें।
  • एक लंबी सांस लें और धीरे धीरे छोड़ दें और मन को एकाग्र करने का प्रयास करें।
  • इसके बाद दाएं हाथ के अंगूठे से दाई ओर नाक के छिद्र को बंद करें और बाईं ओर की नाक के छिद्र से धीरे-धीरे सांस लें। सांस लेते वक्त बिल्कुल जोर न लगाएं।
  • अब बाद दाएं हाथ की मध्यमा उंगली से बाएं तरफ नाक के छिद्र को बंद करके दाईं ओर से अंगूठे को हटाएं और आराम आराम से सांस छोड़ें।
  • कुछ सेकंड तक आराम लें और दाएं हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद करें। फिर बाईं ओर वाले नाक के छिद्र से मध्यमा उंगली को हटाएं और आराम आराम से सांस छोड़ें।
  • इस प्रकार से अनोम विलोम का चक्र पूरा होता है। 
  • लगभग 10 मिनट तक रोज अनुलोम विलोम के पांच से लेकर सात चक्र तक किए जा सकते हैं।

सावधानियां:

  • शाम की तुलना में सुबह आठ बजे से पहले अनुलोम विलोम के फायदे ज्यादा हैं।
  • अगर कोई पहली दफा अनुलोम-विलोम कर रहा है, तो किसी योग प्रशिक्षक की देखरेख में इसका अभ्यास करें।
  • अनुलोम-विलोम का अधिक लाभ पाने के लिए खान-पान का भी खास ख्याल रखें।
  • यह जरूर सुनश्चित कर लें कि अनुलोम-विलोम करने के स्टेप सही हों।
  • गंभीर ह्रदय रोग, रक्तचाप संबंधि रोग से ग्रसित लोग डॉक्टरी परामर्श पर ही इस आसन के अभ्यास के लिए आगे बढ़ें।
  • प्रेग्नेंट महिलाएं भी इस योगासन को करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले।

6. भस्त्रिका प्राणायाम

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कैसे है फायदेमंद:

अनुलोम विलोम प्राणायाम के जैसे ही भस्त्रिका प्राणायाम भी गैस और एसिडिटी की समस्या से राहत दिलाने में लाभदायक हाे सकता है। इस बात की पुष्टी एक शोध से होती है। दरअसल, अत्यधिक वजन जीईआरडी के मुख्य कारणों में से एक है। रिसर्च पेपर में साफ तौर से बताया गया है कि भस्त्रिका प्राणायाम मोटापे को नियंत्रित करने के साथ जीईआरडी (एसिडिटी) को काफी हद तक कम कर सकता है (9)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि एसिडिटी और गैस के लिए योग की लिस्ट में भस्त्रिका प्राणायाम भी शुमार है। 

करने की विधि:

  • सबसे पहले समतल स्थान पर योगा मैट बिछाएं और उस पर पद्मासन मुद्रा में बैठ जाएं।
  • इस दौरान सिर, गला और रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखें।
  • अब नाक से लंबी और गहरी सांस लें। ध्यान रहे कि इस आसन को करते समय मुंह खुला न रहे।
  • गहरी सांस लें। इस प्रक्रिया के दौरान फेफड़े पूरी तरह फूलने चाहिए।
  • इसके बाद एक ही झटके में भरी हुई सांस को दोनों नाक के छिद्रो के माध्यम से छोड़ दें।
  • सांस इतनी तेजी से और झटके से छोड़नी चाहिए कि फेफड़े सांस छोड़ने के साथ सिकुड़ जाएं।
  • इस प्रकार झटके से सांस लेने और तेजी से छोड़ने पर भस्त्रिका का एक चक्र पूरा होता है।
  • शुरुआत में धीमे-धीमे करीब 10 – 12 चक्र पूरे किए जा सकते हैं।
  • इसके अभ्यस्त होने पर इसकी तीर्वता और चक्रों को अपनी क्षमता के अनुसार बढ़ाया जा सकता है।

सावधानियां:

  • शुरुआत में इस योगासन का अभ्यास धीमी गति से करना चाहिए। 
  • गंभीर समस्या से ग्रसित होने पर भस्त्रिका प्राणायाम नहीं करें।
  • गर्भवती को यह योग बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए।
  • अगर किसी की हाल ही में सर्जरी हुई है, तो इस योग को न करें।
  • पहली बार भस्त्रिका प्राणायाम कर रहे हैं, तो किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसका अभ्यास करें।

7. कपालभाति प्राणायाम

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कैसे है फायदेमंद:

गैस और एसिडिटी की समस्या को कम करने के लिए कपालभाति प्राणायाम कारगर साबित हो सकता है। एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक, कपालभाति पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियों पर सकारात्मक प्रभाव दर्शाता है। साथ ही यह श्वसन मार्ग को साफ करने और डायाफ्राम को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। डायाफ्रामिक को मजबूत कर यह पेट से अन्नप्रणाली तक गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स को कम कर सकता है (2)। बता दें कि एसिडिटी को गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स रोग के रूप में जाना जाता है।

करने की विधि:

  • सबसे पहले साफ और स्वच्छ जगह पर योग मैट बिछा लें।
  • इसके बाद सुखासन, वज्रासन या पद्मासन की मुद्र में बैठ जाएं। 
  • अब ध्यान मुद्रा में घुटने पर दोनों हाथों को रख लें। 
  • ध्यान रहे कि इस दौरान रीढ़ की हड्डी सीधी और आंखें बंद रखें।
  • इसके बाद गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। इस क्रिया को कम से कम 2 बार करें।
  • अब नाक से सांस को बाहर निकालें। इस दौरान पेट को अंदर की ओर खींचें।
  • ऐसा बिना रूके 15 से 20 बार करें।
  • ध्यान रहें इस दौरान मुंह बंद रहना चाहिए। मुंह से न सांस लें और न ही छोड़ें।
  • इस  प्रकार कम से कम 15 बार करने पर कपालभाति प्राणायाम का एक चक्र हो जाता है।
  • कपालभाति प्रणायाम के ऐसे तीन चक्र किए जा सकते हैं।
  • इसके बाद सुखासन में थोड़ी देर बैठें और ध्यान लगाएं।

सावधानियां:

  • जो लोग पहली बार कपालभाति प्रणायाम कर रहे हैं, वो किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही शुरू करें।
  • जिनको हाई ब्लड प्रेशर, मिर्गी, ह्रदय संबंधी समस्या और माइग्रेन है, वो कपालभाति प्राणायाम करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
  • अगर कोई गर्भवती है, तो कपलभाति करने से पहले एक बार डॉक्टर से परामर्श करे।
  • कपालभाति करने के कुछ देर पहले और बाद में कुछ खाए-पिएं नहीं।
  • जिन्हें दमा की शिकायत है, वो सावधानी से कपालभाति प्राणायाम करें।
  • मासिक धर्म के दौरान भी कपालभाती करने से बचें।
  • जिन लोगों को नाक से खून आने की समस्या है, उन्हें इस प्रणायाम को नहीं करना चाहिए।

8. पश्चिमोत्तानासन

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कैसे है फायदेमंद:

एसिडिटी और गैस की परेशानी से राहत पाने के लिए योगासन में पश्चिमोत्तानासन को भी शामिल किया जा सकता है। दरअसल, एक शोध में जिक्र मिलता है कि इर्रिटेबल बॉउल सिंड्रोम जैसी समस्या को कम करने के लिए पश्चिमोत्तानासन करना फायदेमंद हो सकता है (10)। बता दें, एसिडिटी और गैस इर्रिटेबल बॉउल सिंड्रोम के लक्षण हैं (11)। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि पश्चिमोत्तानासन गैस और एसिडिटी की समस्या में फायदेमंद हो सकता है।

करने की विधि:

  • जमीन पर योग मैट बिछाएं और अपने पैरों को आगे की ओर फैलाकर बैठ जाएं।
  • सुनिश्चित करें कि इस स्थिति में दोनों पैर आपस में सटे हों और घुटने बिल्कुल सीधे रहें।
  • वहीं, अभ्यास के दौरान सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी भी सीधी होनी चाहिए।
  • अब दोनों हाथ ऊपर की ओर उठाएं फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए आगे कि ओर झुकें और माथे को घुटनों से सटाते हुए हाथों से पैरों के अंगुठों को पकड़ने का प्रयास करें।
  • ध्यान रहे कि आगे झुकते समय घुटने मुड़ने नहीं चाहिए।
  • कुछ सेकंड के लिए इसी अवस्था में बने रहने का प्रयास करें और सामान्य गति से सांस लेते रहें।
  • अंत में एक गहरी सांस लेते हुए प्रारंभिक अवस्था में वापस आ जाएं।

सावधानियां:

  • पेट दर्द में इस आसन को न करें।
  • गर्भवती महिलाओं को इस आसन को न करने की सलाह दी जाती है।
  • ऐसे लोग जो अस्थमा, अल्सर और स्लिप डिस्क (जोड़ों से संबंधित विकार) जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं, उन्हें इस आसन को करने से बचना चाहिए।
  • पीठ, कमर या किसी अन्य अंग से संबंधित ऑपरेशन हुआ हो, तो इस आसन को करने का बिल्कुल भी प्रयास न करें।
  • डायरिया से पीड़ित लोगों को इस आसन को करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

खराब खानपान और बिगड़ती जीवनशैली की वजह से एसिडिटी और गैस की समस्या बहुत आम है। अगर समय रहते इनका इलाज न किया जाए, तो ये परेशानियां गंभीर रूप भी ले सकती हैं। वहीं, आर्टिकल में एसिडिटी और गैस के लिए योग बताए गए हैं, जिनकी मदद से पाचन संबंधित परेशानियों से बचा जा सकता है। एसिडिटी और गैस की समस्या से ग्रसित लोग इन योगासनों को अपनी जीवनशैली में शामिल कर सकते हैं। योगा के साथ ही संयमित खानपान का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि समस्या गंभीर हो, तो डॉक्टर से संपर्क करने में बिल्कुल भी देर न करें। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या भस्त्रिका प्राणायाम एसिडिटी के लिए अच्छा होता है?

हां, भस्त्रिका प्राणायाम एसिडिटी के लिए अच्छा माना जाता है। बशर्ते, इसे सही विधि से किया जाए तो (9)।

एसिडिटी के लिए कौन सा प्राणायाम सबसे अच्छा है?

एसिडिटी के लिए नियमित रूप से कपालभाती प्राणायाम करना अच्छा माना जाता है (2)।.

क्या कपालभाति एसिडिटी के लिए अच्छा है?

हां, कपालभाति एसिडिटी के लिए सुरक्षित और लाभदायक प्राणायाम हाे सकता है (2)।

संदर्भ

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  1. Irritable Bowel Syndrome: Yoga as Remedial Therapy
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4438173/
  2. Can yoga be used to treat gastroesophageal reflux disease?
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3734640/
  3. Yoga Practice Increases Minimum Muscular Fitness in Children with Visual Impairment
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4699502/?report=classic
  4. EFFECT OF YOGASANA ON DIGESTIVE SYSTEM
    http://www.iamj.in/posts/2017/images/upload/727_733.pdf
  5. Psyllium seed may be effective in the treatment of gastroesophageal reflux disease (GERD) in patients with functional constipation
    https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S225172941500021X
  6. Effect of four weeks pawanmuktasana yogic training on abdominal strength back strength and flexibility
    https://www.academia.edu/36677993/Effect_of_four_weeks_pawanmuktasana_yogic_training_on_abdominal_strength_back_strength_and_flexibility
  7. Therapeutic Role of Yoga in Type 2 Diabetes
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6145966/
  8. Symptoms & Causes of GER & GERD
    https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/acid-reflux-ger-gerd-adults/symptoms-causes
  9. EFFECT OF BHASTRIKA PRANAYAMA ON ABDOMINAL OBESITY IN MEN & WOMEN – A RANDOMIZED CONTROLLED TRIAL”
    http://repository-tnmgrmu.ac.in/10172/3/460215918jancy_rani.pdf
  10. Irritable Bowel Syndrome: Yoga as Remedial Therapy Vijaya Kavuri
    https://www.hindawi.com/journals/ecam/2015/398156/
  11. Bacterial Overgrowth and Irritable Bowel Syndrome: Unifying Hypothesis or a Spurious Consequence of Proton Pump Inhibitors
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2949084/
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