स्लिप डिस्क के लिए योग – Yoga For Slip Disc in Hindi

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दिन भर बैठकर लैपटॉप पर काम करना या फिर भारी चीज उठाने पर सीधा असर कमर की हड्डी पर पड़ता है। मेडिकल भाषा में इसे स्लिप डिस्क या फिर हर्नियेटेड डिस्क कहा जाता है (1)। वैसे तो इस स्थिति से बचने के लिए शारीरिक गतिविधि जरूरी है, लेकिन योगासन को सबसे बेहतर विकल्प माना गया है। योगासन की मदद से न सिर्फ स्लिप डिस्क से बचा जा सकता है, बल्कि इस रोग से ग्रस्त मरीज को कुछ आराम भी मिल सकता है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम स्लिप डिस्क के लिए योग के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

नीचे है पूरी जानकारी

चलिए, सबसे पहले जानते हैं कि स्लिप डिस्क में योग किस प्रकार फायदा पहुंचा सकता है।

स्लिप डिस्क में कैसे लाभदायक है योग? – How Does Yoga Help with Slip Disc in Hindi

स्लिप डिस्क के लिए योग करना फायदेमंद हो सकता है। इस संबंध में प्रकाशित एक मेडिकल रिसर्च की मानें, तो इस स्थिति में पीठ के निचले भाग में भारी दर्द महसूस हो सकता है। प्रशिक्षक की देखरेख में योग करने से यह दर्द कम हो सकता है। दरअसल, योग से शरीर का लचीलापन और रिलैक्सेशन बढ़ता है, जो पीठ के निचले हिस्से के दर्द को कम कर सकता है (2)। इससे स्लिप डिस्क में कुछ हद तक राहत मिल सकती है।

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लेख के अगले भाग में स्लिप डिस्क के लिए योगासन बताए गए हैं।

स्लिप डिस्क के लिए योग – Yoga To Reduce Slipped Disc in Hindi

स्लिप डिस्क के लिए विभिन्न तरह के योगासन हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख आसानों के बारे में हम यहां बता रहे हैं। इन्हें आप किसी प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें। इन योगासनों से मरीज की स्थिति में सुधार जरूर हो सकता है, लेकिन सिर्फ इसके जरिए बीमारी का इलाज संभव नहीं है।

1. उष्ट्रासन

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स्लिप डिस्क से राहत पाने के लिए उष्ट्रासन अच्छा माध्यम साबित हो सकता है। दरअसल, यह एक बैकवर्ड बेन्डिंग योग है, जो पीठ के निचले हिस्से के दर्द को कम कर सकता है। स्लिप डिस्क की स्थिति में पीठ के निचले भाग में ज्यादा दर्द होता है (3) (4)। ऐसे में माना जा सकता है कि उष्ट्रासन स्लिप डिस्क को ठीक कर सकता है।

योग की प्रक्रिया :

  • सबसे पहले योग मैट बिछाकर वज्रासन की स्थिति में बैठ जाएं।
  • अब घुटनों के बल सीधे खड़े हो जाएं।
  • फिर लंबी सांस भरते हुए धीरे-धीरे पीछे की तरफ झुकें और दाएं हाथ से दाएं पैर व बाएं हाथ से बाएं पैर की एड़ी ठीक से पकड़ लें।
  • इस अवस्था में मुंह आसमान की ओर होगा।
  • इस मुद्रा में आने के बाद शरीर का सारा भार पैरों व हाथों पर होना चाहिए।
  • कुछ देर के लिए इसी मुद्रा में रहें व नियमित रूप से सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • फिर थोड़ी देर बाद धीरे-धीरे प्रारंभिक मुद्रा में वापस आ जाएं।
  • इस योग को रुक-रुक कर तीन से पांच बार कर सकते हैं।

सावधानियां:

  • अगर किसी को हर्निया की समस्या है, तो वो इस योग को करने से बचे।
  • उच्च रक्तचाप की स्थिति में इस योग को न करें।
  • शरीर में बहुत ज्यादा दर्द होने पर इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  • घुटनों में चोट या दर्द होने पर इस योग से दूर रहें।

2. भुजंगासन

Bhujangasana

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स्लिप डिस्क के लिए भुजंगासन के फायदे देखे जा सकते हैं (4)। यह योग रीढ़ को मजबूत बना सकता है। साथ ही यह निचली और ऊपरी पीठ वाले भाग को स्ट्रेच कर पीठ के दर्द को कम कर सकता है। इससे स्लिप डिस्क में होने वाला दर्द कम हो सकता है (5)।

योग की प्रक्रिया :

  • भुजंगासन को करने के लिए एक साफ स्थान पर योग मैट बिछाकर पेट के सहारे लेट जाएं।
  • मस्तक को जमीन पर टिका दें। साथ ही दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी बनाए रखें।
  • फिर अपने हाथों को कंधों के समांतर में ले आएं और हथेली को जमीन से टिका लें। अब लंबी सांस लेते हुए दोनों हाथों से एक साथ जमीन पर दबाव डालें और धीरे-धीरे शरीर के ऊपरी भाग को नाभि तक उठा लें।
  • शरीर को ऊपर उठाने के क्रम में पहले मस्तक, छाती और अंत में नाभि वाला भाग उठेगा।
  • इस मुद्रा में आने के बाद आसमान की तरफ देखें और कुछ देर इसी अवस्था में बने रहें।
  • इस समय शरीर के ऊपरी हिस्से का भार दोनों हाथों में एक सामान होगा। साथ ही नियमित रूप से सांस लेते रहें।
  • फिर धीमे-धीमे सांस छोड़ते हुए शुरुआती मुद्रा में आ जाएं।
  • यह भुजंगासन का एक चक्र हुआ। शुरुआत में इस योग के तीन से पांच चक्र कर सकते हैं।

सावधानियां:

भुजंगासन को निम्न स्थितियों में करने से बचना चाहिए (6):

  • इसे गर्भावस्था में न करें।
  • माहवारी के समय।
  • बांह-हाथ में दर्द होने पर।
  • जोड़ों में दर्द होने पर।
  • पसलियों या कलाइयों में फ्रैक्चर होने पर।

3. शलभासन

Shalabhasana

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शलभासन भी स्लिप डिस्क के लिए फायदेमंद हो सकता है (4)। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, स्लिप डिस्क के कारण पीठ में दर्द होती है। वहीं, शलभासन पीठ के दर्द को कम करने का काम कर सकता है (7)। इससे स्लिप डिस्क के लक्षण से निजात मिल सकती है।

योग की प्रक्रिया :

  • एक योग मैट बिछा लें और फिर पेट के बल लेट जाएं।
  • दोनों हाथ पीछे की तरफ हिप्स के पास रखें और हथेलियां आसमान की तरफ।
  • अब दोनों एड़ियों को जोड़ लें।
  • फिर धीमे-धीमे सांस भरते हुए दाएं पैर को ऊपर की ओर उठाएं। यह एकपाद शलभासन हुआ।
  • इस मुद्रा में थोड़ी देर बने रहने की कोशिश करें व सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया को सामान्य रखें।
  • इसके बाद दाएं पैर को धीरे-धीरे नीचे ले आएं और यही प्रक्रिया बाएं पैर के साथ भी करें।
  • बाएं पैर को नीचे लाने के कुछ सेकंड बाद दोनों पैर को एक साथ ऊपर उठाएं और जितनी देर हो सकें इसी मुद्रा में रहें।
  • इस प्रकार शलभासन का एक चक्र पूरा होगा।
  • कुछ सेकंड का विराम लेकर लगातार 4 बार कर सकते हैं।

सावधानियां:

  • रीढ़ की हड्डी या गर्दन में चोट होने पर इस आसन को करने से बचना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी के दौरान इस योग से परहेज करें।
  • हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और अस्थमा से पीड़ित होने पर इस योग को न करें।

4. सेतु बंध सर्वांगासन

Setu Bandha Sarvangasana

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एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, इस योग को करने पर पीठ के निचले भाग का दर्द कम हो सकता है। दरअसल, यह योग पीठ को स्ट्रेच करता है, जिससे दर्द कम हो सकता है, क्योंकि स्लिप डिस्क के कारण पीठ में दर्द होता है (8)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि सेतु बंद सर्वांगासन को स्लिप डिस्क के लिए योगासन में शामिल किया जा सकता है।

योग की प्रक्रिया :

  • सबसे पहले चटाई या योग मैट बिछाकर उस पर पीठ के बल लेट जाएं।
  • फिर दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर एड़ियों को हिप्स से टिका दें।
  • दोनों पैरों के बीच थोड़ी-सी दूरी बनाए रखें।
  • इसके बाद अपने दोनों हाथों से दोनों पैरों की एड़ियों को पकड़ें।
  • फिर गहरी सांस भरते हुए कमर को ऊपर उठाएं।
  • इस पोजीशन में आने पर ठुड्डी छाती पर टिकी होगी और सिर, गर्दन व कंधे जमीन से लगे रहेंगे।
  • अब थोड़ी देर इस मुद्रा में रहने की कोशिश करें और सामान्य रूप से सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • इसके बाद धीमे-धीमे सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं।
  • इस योग को पांच बार तक कर सकते हैं।

सावधानियां :

  • अगर किसी के पीठ व कंधे में तेज दर्द हो, तो इस आसन को न करें।
  • प्रेगनेंसी के दौरान इसे बिल्कुल न करें।

5. मकरासन

makarasana

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स्लिप डिस्क के लिए योगासन की सूची में मकरासन को भी शामिल किया जा सकता है (4)। एक वैज्ञानिक शोध में दिया गया है कि इस योग क्रिया को करने पर स्लिप्ड डिस्क, रीढ़ की हड्डी और रीढ़ की नसों को फायदा हो सकता है (9)। इससे स्लिप डिस्क की समस्या से कुछ हद तक राहत मिल सकती है।

योग की प्रक्रिया :

  • मकरासन को करने के लिए पेट के बल लेट जाएं।
  • अब दोनों हाथों को मोड़कर हथेली को अपने माथे के सामने ले आएं।
  • फिर अपने माथे को हाथों पर टिका लें।
  • इस दौरान दोनों पैरों के बीच लगभग एक फुट की दूरी होनी चाहिए।
  • इसके बाद अपने शरीर को पूरी तरह से ढीला छोड़ दें।
  • इसी मुद्रा में लगभग 15 मिनट तक बने रहें और गहरी व लंबी सांस लें।

सावधानियां :

  • हाथों और कलाइयों में तकलीफ होने पर इस योग को करने से बचें।
  • पेट की सर्जरी हुई है, तो इस योग को न करें।

6. शवासन

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स्लिप डिस्क से जूझ रहे व्यक्ति के लिए शवासन करना लाभदायक हो सकता है। इस योग को करने से पीठ का दर्द कम हो सकता है। साथ ही इसके नियमित अभ्यास से स्लिप डिस्क की स्थिति में सुधार हो सकता है (4)।

योग की प्रक्रिया :

  • शवासन करने के लिए योग मैट बिछा लें और उस पर पीठ के बल लेटकर आंखें बंद कर लें।
  • इस समय दोनों हाथों को शरीर से थोड़ा दूर रखें और हथेलियों का मुंह ऊपर की तरफ होना चाहिए। साथ ही दोनों पैरों के बीच एक से दो फिट की दूरी बनाकर रखें।
  • अब धीरे-धीरे सांस लेते रहें और मन को शांत करते हुए पूरा ध्यान सांसों पर लगाएं।
  • फिर लगभग 10 मिनट तक इसी मुद्रा में रहने की कोशिश करें।
  • इसके बाद दोनों हाथों को आपस में रगड़ें और फिर आंखों पर रखें।
  • अब धीरे धीरे आंखों को खोलें।

सावधानियां :

  • पीठ और रीड़ की हड्डी की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति विशेषज्ञ की सलाह और निगरानी में ही इस आसन को करें।
  • प्रेगनेंसी के समय इस योग को न करें।

नोट: ऊपर बताए गए योग को प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें।

पढ़ना जारी रखें

अब हम स्लिप डिस्क के लिए योगासन से संबंधित कुछ जरूरी टिप्स दे रहे हैं।

स्लिप डिस्क के लिए योग करते समय बरती जाने वाली सावधानियां- Precautions to be taken while doing yoga for slip disc in Hindi

स्लिप डिस्क के लिए योग करने से पहले और करते समय कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी होता है। ये सावधानियां कुछ इस प्रकार से हैं:

  • स्लिप डिस्क की स्थिति में किसी भी योग को करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
  • इस स्थिति में योग को विशेषज्ञ की निगरनी में ही करना चाहिए।
  • योग को हमेशा सुबह खाली पेट करना चाहिए।
  • इसे करते समय आरामदायक कपड़े पहने और मन को शांत रखें।
  • इस योग के दौरान स्लिप डिस्क वाले भाग में तेज दर्द होता है, तो योग को तुरंत करना बाद कर दें और इस बारे में योग विशेषज्ञ को बताएं।

स्लिप डिस्क की स्थिति कष्टदायक होती है। इससे जितना जल्दी उबरा जाए, उतना ही बेहतर है। ऐसे में योग करना फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि योग से रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है। इसलिए, अगर कोई ऊपर लेख में दिए योगासन करने की सोच रहा है, तो उसे विशेषज्ञ की निगरानी में ही करना चाहिए। उम्मीद करते हैं कि ये आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी और जानकारी के लिए आप हमारे अन्य आर्टिकल पढ़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या भुजंगासन स्लिप डिस्क के लिए अच्छा है?

हां, भुजंगासन स्लिप डिस्क के लिए अच्छा होता है (4)। इससे निचली व ऊपरी पीठ स्ट्रेच हो सकती है, जिससे स्लिप डिस्क में होने वाले पीठ दर्द को कुछ हद तक कम किया जा सकता है (5)। इसे करने की पूरी प्रक्रिया लेख में ऊपर बताई गई है।

क्या शवासन स्लिप डिस्क के लिए अच्छा है?

हां, स्लिप डिस्क की स्थिति में शवासन करना अच्छा होता है। यह आसन पीठ के दर्द को कम करने और स्लिप डिस्क के लक्षण से छुटकारा दिला सकता है (4)। इसे कैसे करना चाहिए, वो आप लेख में ऊपर पढ़ सकते हैं।

संदर्भ (Sources)

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  1. Herniated disk
    https://medlineplus.gov/ency/article/000442.htm
  2. Yoga as an Alternative and Complementary Treatment for Patients With Low Back Pain: A Systematic Review
    https://journals.sagepub.com/doi/full/10.1177/2156587212458693
  3. AN OBSERVATIONAL CLINICAL STUDY ON EFFECT OF USHTRASANA (YOGA) IN MANAGEMENT OF KATISHULA (LOW BACK PAIN) AND MANYASHULA (NECK PAIN)
    https://www.jreim-ayushjournal.com/?mno=191192
  4. ANKYLOSING SPONDYLITIS -CONTEMPORARY DETAILED ANALYSIS ON DIAGNOSIS MANAGEMENT AND MEDICATION
    https://www.academia.edu/33537989/ANKYLOSING_SPONDYLITIS_CONTEMPORARY_DETAILED_ANALYSIS_ON_DIAGNOSIS_MANAGEMENT_AND_MEDICATION?auto=download
  5. Importance of Bhujangasana in Daily Life
    https://www.ijtsrd.com/papers/ijtsrd29662.pdf
  6. The Impact of Stress Management among Dental Professionals
    https://www.academia.edu/37225968/The_Impact_of_Stress_Management_among_Dental_Professionals
  7. YOGA FOR LOWER BACK PAIN
    https://www.ijcrt.org/papers/IJCRT2005527.pdf
  8. Effect of Yoga on Pain Brain-Derived Neurotrophic Factor and Serotonin in Premenopausal Women with Chronic Low Back Pain
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4120477/
  9. SIGNIFICANCE OF ANIMALS IN YOGA POSES
    https://www.researchgate.net/publication/333682113_SIGNIFICANCE_OF_ANIMALS_IN_YOGA_POSES
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सरल जैन ने श्री रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान से संस्कृत और जैन दर्शन में बीए और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से पत्रकारिता में बीए किया है। सरल को इलेक्ट्रानिक मीडिया का लगभग 8 वर्षों का एवं प्रिंट मीडिया का एक साल का अनुभव है। इन्होंने 3 साल तक टीवी चैनल के कई कार्यक्रमों में एंकर की भूमिका भी निभाई है। इन्हें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडवंचर व वाइल्ड लाइफ शूट, कैंपिंग व घूमना पसंद है। सरल जैन संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी व कन्नड़ भाषाओं के जानकार हैं।

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