ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए 15 योगासन – Yoga To Increase Oxygen Level

Written by , (शिक्षा- एमए इन मास कम्युनिकेशन)

ऑक्सीजन के बिना जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती है। इसलिए, खुद को स्वस्थ रखना जरूरी है, ताकि शरीर में ऑक्सीजन की कमी न हो। खासकर, कोरोना काल में यह एहतियात बरतना जरूरी हो जाता है, क्योंकि कोविड-19 के कारण सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और इसे कोरोना का गंभीर लक्षण माना गया है (1)। ऐसे में योग आपके लिए मददगार हो सकता है, क्योंकि इसके जरिए शरीर में ऑक्सीजन के सही स्तर को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के लिए योगासन के बारे में बता रहे हैं। इनका नियमित अभ्यास शरीर में ऑक्सीजन लेवल को बनाए रखने में आपकी मदद कर सकता है।

पढ़ना शुरू करें

आइये, सबसे पहले हाइपोक्सिमिया के विषय में जानकारी हासिल कर लेते हैं।

हाइपोक्सिमिया क्या है?

एक स्वस्थ व्यक्ति के रक्त में 94 से 100 mm Hg तक ऑक्सीजन होती है। इस स्तर को संतुलित ऑक्सीजन लेवल माना जाता है। वहीं, जब रक्त में पर्याप्त ऑक्सीजन की मात्रा (94 mm Hg से कम) नहीं होती है, तो इस स्थिति को हाइपोक्सिमिया कहा जाता है (2)। हाइपोक्सिमिया के कारण हाइपोक्सिया (कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी) की समस्या हो सकती है यानी शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी (3)। नीचे हाइपोक्सिमिया के लक्षण और निदान से जुड़ी जानकारी साझा की गई है।

नीचे पूरी जानकारी है

नीचे जानिए ऑक्सीजन की कमी के लक्षण और निदान।

शरीर में ऑक्सीजन की कमी को कैसे पहचानें?

शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने पर इसके कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जिनके जरिए शरीर में घटते ऑक्सीजन लेवल को जाना जा सकता है (4) :

  •  चेहरे, होंठ या नाखूनों का रंग नीला होना
  •  सांस लेने में तकलीफ और गंभीर खांसी
  •  बेचैनी होना
  •  सीने में दर्द या जकड़न
  •  पल्स रेट का बढ़ना

इसके अलावा, निम्नलिखित निदान प्रक्रिया की मदद से भी ऑक्सीजन की मात्रा की कमी के बारे में जाना जा सकता है (5) (6) :

  1. पल्स ऑक्सीमीटर : पल्स ऑक्सीमीटर एक उपकरण है, जिसके अंदर किसी एक उंगली को डाला जाता है। इसके बाद ऑक्सीमीटर में दो तरह के डेटा नजर आते हैं, एक SpO2 और दूसरा PR Dpm। इसमें SpO2 ऑक्सीजन लेवल और PR Dpm हार्ट रेट के बारे में बताता है। इस प्रक्रिया में खून का सैंपल लिए बिना ही रक्त में ऑक्सीजन के स्तर की जानकारी मिल जाती है।
  1. ब्लड टेस्ट (रक्त की जांच) : इसके लिए धमनी से रक्त का सैंपल लेकर लैब में जांच की जाती है, क्योंकि धमनियों में मौजूद रक्त में ज्यादा ऑक्सीजन होता है। इस जांच के लिए कलाई के अंदर मौजूद धमनी से ब्लड सैंपल लिया जाता है, जिसे रेडिकल आर्टरी कहते हैं। इस जांच से रक्त में मौजूद ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का पता चल सकता है।

लेख को पढ़ते रहें

चलिए अब जानते हैं कि ऑक्सीजन लेवल को बढ़ाने में योग किस तरह मददगार हो सकता है।

ऑक्सीजन लेवल को नियंत्रित करने में कैसे लाभदायक है योग : How Yoga Therapy Affects the Blood Oxygen Level

योग का अभ्यास विभिन्न प्रक्रियाओं के जरिए शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। पढ़ें नीचे :

  1. श्वसन क्रिया में सुधार : श्वसन क्रिया ही ऑक्सीजन ग्रहण करने और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर करने का महत्वपूर्ण जरिया होती है। वहीं, योग के माध्यम से श्वसन प्रणाली को बेहतर किया जा सकता है। इससे ऑक्सीजन के अवशोषण को बढ़ावा मिल सकता है और ऑक्सीजन लेवल को संतुलित रखा जा सकता है (7)।
  1. फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाकर : फेफड़े शरीर के सबसे जरूरी अंगों में शामिल हैं। जब हम सांस लेते हैं, तब ऑक्सीजन फेफड़ों में जाती है और फिर वहां से रक्त के माध्यम से पूरे शरीर तक ऑक्सीजन पहुंचती है। इसलिए, ऑक्सीजन के सही स्तर को बनाए रखने के लिए फेफड़ों का मजबूत होना भी जरूरी है (8)। वहीं, नियमित योगाभ्यास से फेफड़े को अच्छी तरह से काम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही इनकी क्षमता में भी वृद्धि हो सकती है। इससे ऑक्सीजन का अवशोषण बढ़ सकता है और ऑक्सीजन की कमी दूर हो सकती है (9)।
  1. रक्त संचार में सुधार कर : विषय से जुड़े एक शोध में साफ तौर से जिक्र मिलता है कि योग का नियमित अभ्यास ब्लड फ्लो, हीमोग्लोबिन और लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने का काम कर सकता है, इससे शरीर की कोशिकाओं तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचने में मदद मिल सकती है (10)। ऐसे में हम कह सकते हैं कि ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के लिए योगासन का अभ्यास किया जा सकता है।

पढ़ना जारी रखें

अब हम ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग बताने जा रहे हैं।

ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग – 15 Yoga Asanas To Increase Oxygen Level In Body

शरीर में ऑक्सीजन लेवल को बढ़ाने और इसके सही स्तर को बनाए रखने के लिए कई योग किए जा सकते हैं, जिनमें से कुछ चुनिंदा योग हम नीचे बता रहे हैं।

नीचे जानिए ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने वाले योग और उन्हें करने का तरीका।

1. प्राणायाम (Pranayama)

Shutterstock

प्राणायाम सबसे आसान और ज्यादा किए जाने वाले योग है। इसके अंदर कई तरह के प्राणायाम आते हैं, जिनका अभ्यास किया जा सकता है। वहीं, एक वैज्ञानिक अध्ययन में दिया हुआ है कि कपालभाति प्राणायाम के दौरान होने वाली ब्रीदिंग एक्सरसाइज शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकती है (11)। नीचे हम प्राणायाम के कई प्रकार में से एक कपालभाति प्राणायाम करने का तरीका बता रहे हैं।

कपालभाति करने का तरीका :

  • कपालभाति प्राणायाम करने के लिए योग मैट या चटाई बिछाकर पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  • अब अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रख दें और हथेलियों को ज्ञान मुद्रा में कर लें।
  • इस समय रीढ़ की हड्डी व सिर सीधा होना चाहिए।
  • साथ ही मन को शांत रखें।
  • अब दोनों आंखों को बंद करें और दो से तीन बार गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। ध्यान रहे कि इस समय मुंह बंद रखना है और न ही मुंह से सांस लेनी है और न ही छोडनी है।
  • अब नाक से सांस को बाहर की ओर निकालें। साथ ही सांस छोड़ते समय पेट को अंदर की तरफ खीचें।
  • इसके बाद लगातार सांस छोड़ते रहना है और नाक से ही हल्की-हल्की लेनी है।
  • ऐसा एक से दो मिनट तक कर सकते हैं।
  • फिर कुछ सेकंड का ब्रेक लेकर इसे पुनः करना शुरू कर सकते हैं।
  • इस योग को 10 मिनट तक कर सकते हैं।

सावधानियां :

  •  किसी को अगर फेफड़ों से जुड़ी समस्या है, तो उन्हें इस योग को करने से बचना चाहिए।
  •  गंभीर हृदय रोग और उच्च रक्तचाप से जूझ रहे मरीज इस योग को न करें।
  •  श्वसन प्रणाली से संबंधित समस्या वाले इसे डॉक्टरी सलाह पर ही करें।

2. ताड़ासन (Tadasana)

Yoga-To-Increase-Oxygen-Level

Shutterstock

ताड़ासन को संस्कृत भाषा के दो शब्दों को मिलाकर बनाया है, जिसमें ताड़ का अर्थ है पर्वत और आसन यानि मुद्रा। इस योग मुद्रा में शरीर पर्वत के जैसा सीधा व स्थिर दिखाई देता है। इसी वजह से इसका नाम ताड़ासन पड़ा। वहीं, एक वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, योग करने पर फेफड़ों की कार्य क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है। इससे शरीर की कोशिकाओं को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिल सकती है। वहीं, लेख में दिए गए योगसन की सूची में ताड़ासन का नाम भी शामिल है (12)। ऐसे में, शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ावा देने के लिए रोजाना ताड़ासन का अभ्यास किया जा सकता है।

योग करने का तरीका :

  • ताड़ासन करने के लिए साफ और खुली जगह पर योग मैट बिछाकर सीधे खड़े हो जाएं।
  •  इस समय दोनों पैरों की एड़ियों को एक दूसरे से सटाकर कर रखें। साथ ही दोनों हाथों को सीधा नीचे की ओर बगल से सटाकर रखें।
  •  इसके बाद दोनों हथेलियों आगे की तरफ लाकर आपस में फंसा लें और धीरे-धीरे सिर के ऊपर ले जाएं।
  •  फिर धीरे-धीरे सांस लें और पंजों के बल खड़े होकर शरीर को ऊपर की तरफ खींचें।
  •  इस स्थिति में कुछ समय के लिए बने रहें और शरीर का संतुलन बनाए रखें। साथ ही सामान्य तरीके से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  •  इस समय शरीर का पूरा वजन दोनों पैरों के पंजों पर एक समान होगा।
  •  इसके बाद धीरे-धीरे सांस को छोड़ते हुए शुरुआती मुद्रा में आ जाएं।
  •  इस योग की प्रक्रिया को शुरुआत में चार से पांच बार कर सकते हैं। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार क्रम को बढ़ा सकते हैं।

सावधानियां :

ताड़ासन से जुड़ी कुछ सावधानियों को ध्यान में रखना जरूरी होता है, जिनमें ये शामिल हैं (13) :

3. सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar)

Yoga-To-Increase-Oxygen-Level

Shutterstock

सूर्य नमस्कार योग को दो शब्दों को जोड़कर बनाया गया है। इसमें पहला शब्द सूर्य यानी सूरज व दूसरा नमस्कार। इस योग को 12 चरणों में पूरा किया जाता है। वहीं, इस योग को करने पर पूरे शरीर के रक्त संचार को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही इस योग का नियमित अभ्यास शरीर में ऑक्सीजन को बढ़ाने का काम कर सकता है। ऐसे में, हम कह सकते हैं कि सूर्य नमस्कार करने से शरीर में ऑक्सीजन को संतुलित रखा जा सकता है (14)।

योग करने का तरीका :

सूर्य नमस्कार योग को करने का एक क्रमवार तरीका होता है। इस क्रमवार तरीके से करने पर ही इसके फायदे हो सकते हैं। नीचे जानिए सूर्य नमस्कार को करने का क्रमवार तरीका :

  • प्रणामासन : सबसे पहले योग मैट बिछाकर सीधे खड़े हो जाएं। फिर अपने दोनों हाथों को सीने के सामने लाकर जोड़ लें। इस समय व्यक्ति नमस्कार करने की मुद्रा में दिखाई देता है।
  • हस्तउत्तानासन : इस चरण में लंबी सांस भरते हुए दोनों हाथों को नमस्कार मुद्रा में सिर के ऊपर उठाएं। इस समय ध्यान रखें कि दोनों भुजाएं कानों को छूती हुई होनी चाहिए। साथ ही शरीर के ऊपरी भाग को जितना हो सके, उतना पीछे की ओर ले जाने की कोशिश करें।
  • पादहस्तासन : अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों को सामने की तरफ लाते हुए पेट के बल झुकें व दोनों हाथों से जमीन को छूने की कोशिश करें। इस समय माथा घुटनों का स्पर्श कर रहा होगा।
  • अश्व संचालनासन : फिर गहरी सांस भरते हुए दाएं पैर पर बैठें और बाएं पैर को अपनी क्षमता के अनुसार जितना हो सके पीछे ले जाएं। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि इस मुद्रा में बाएं पैर का घुटना जमीन का स्पर्श कर रहा होगा। इस स्थिति में बने रहने के साथ ही गर्दन को ऊपर उठाकर आसमान की तरफ देखें।
  • पर्वतासन : इस चरण में सांस छोड़ते हुए दाएं पैर को भी पीछे की तरफ ले जाएं। अब बाएं व दाएं पैर के पंजों को एक सीध में रखकर शरीर को बीच से ऊपर उठाने का प्रयास करें। इस समय दोनों हथेलियां व पंजे जमीन पर होंगे। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि इस समय हाथ और पैर एकदम सीधे होने चाहिए।
  • अष्टांगासन : अष्टांगासन में आने के लिए गहरी सांस लें और दोनों घुटनों को जमीन से लगा लें। फिर सांस को छोड़े बिना ही सीने व ठुड्डी से जमीन को छुएं। इस स्थिति में कमर व हिप्स ऊपर की तरफ उठे हुए होंगे।
  • भुजंगासन : इस चरण में सांस को छोड़े बिना कमर तक के भाग को जमीन पर टीका दें। अब कमर से ऊपर के भाग को धीरे धीरे उठाने का प्रयास करें। इस समय दोनों हथेलियां जमीन पर होनी चाहिए व गर्दन को ऊपर उठाकर आसमान की ओर देखें।
  • पर्वतासन : इसके बाद दोबारा पर्वतासन में आना होगा। इसके लिए सांस को धीरे-धीरे छोड़ते हुए शरीर के बीच के भाग को ऊपर की ओर उठाने का प्रयत्न करें। इस समय दोनों हाथ सीधे होने चाहिए और एड़ियों को जमीन का स्पर्श करवाएं। साथ ही नजरे नाभि पर बनाए रखने की कोशिश करें।
  • अश्व संचालनासन : अब लंबी सांस लेते हुए बाएं पैर को सामने की तरफ लाकर उस पर बैठ जाएं। वहीं, दाएं पैर को सीधा रखें और घुटने को जमीन पर टिका लें।
  • पादहस्तासन : फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए दाएं पैर को सामने की तरफ लाएं और हाथों को जमीन से टिकाते हुए दोनों पैरों को सीधा कर लें। साथ ही माथे से घुटनों को छूने का प्रयास करें।
  • हस्तउत्तानासन : इसके बाद गहरी व लंबी सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाएं और हथेलियों को आपस में जोड़कर अपनी क्षमता के अनुसार पीछे की तरफ झुकने का प्रयत्न करें।
  • प्रणामासन : इसके अंतिम चरण में फिर से प्रणाम आसन में आना है। इसके लिए सीधे खड़े होकर हाथों को सीने के सामने लाकर जोड़ लें और नमस्कार की स्थिति में आ जाएं।

सावधानियां :

  •  गर्भावस्था और मासिक चक्र के दौरान इस आसन को न करें।
  •  हर्निया से प्रभावित व्यक्ति को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  •  हाई ब्लड प्रेशर के मरीज इस योगासन को करने से बचें।
  •  अगर किसी के कमर में दर्द है, तो वे इस आसन को न करें।

4. त्रिकोणासन (Trikonasana)

Yoga-To-Increase-Oxygen-Level

Shutterstock

त्रिकोणासन को हठ योग के एक आसन में गिना जाता है। यह दो शब्दों के मेल से बना है, जिसमें पहला त्रिकोण अर्थात तीन कोण वाला और आसन यानी मुद्रा। इस योग के दौरान शरीर से एक त्रिकोण बनता है। वहीं, शरीर में ऑक्सीजन के स्तर में सुधार करने में त्रिकोणासन लाभकारी साबित हो सकता है। दरअसल, एक शोध में कुछ लोगों को कुछ चुनिंदा योगासन कराए गए, जिनमें अन्य फायदों के साथ ऑक्सीजन के स्तर में सुधार भी देखा गया। इन आसनों में त्रिकोणासन का नाम भी शामिल था (15)। ऐसे में, त्रिकोणासन का नियमित अभ्यास ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।

योग करने का तरीका :

  • त्रिकोणासन करने के लिए साफ व खुली जगह पर योग मैट या चटाई बिछाकर सीधे खड़े हो जाएं।
  •  इस समय दोनों पैरों के बीच एक से दो फुट की दूरी बनाकर रखें और हाथों को शरीर से चिपका कर रखें।
  •  अब अपनी दोनों बांहों को शरीर से दूर कंधे तक एक साथ फैला लें।
  •  फिर सांस लेते हुए बाएं हाथ को ऊपर उठाकर कान से सटा लें और दाएं पैर को बाहर की तरफ निकालकर मोड़ लें।
  •  इसके बाद सांस छोड़ते हुए कमर से दाई तरफ झुकें।
  •  इस समय घुटने मुड़ने नहीं चाहिए व बाएं हाथ को कान से सटाकर ही रखें।
  •  इसके बाद बाएं हाथ को जमीन के समानांतर लाने की कोशिश करें व साथ ही दाएं हाथ से बाएं टखने को छूने का प्रयत्न करें।
  •  कुछ सेकंड इसी मुद्रा में बने रहें और सांस लेने-छोड़ने की प्रक्रिया को सामान्य रखें।
  •  अब इस योग की क्रिया को विपरीत करते हुए पहले वाली मुद्रा में आ जाएं।
  •  अभी यह चक्र आधा हुआ है, कुछ सेकंड के विराम के बाद दूसरी तरफ से भी करें।
  •  इस योग के तीन से चार चक्र कर सकते हैं।

सावधानियां :

  • उच्च रक्तचाप की स्थिति में इस योगासन को न करें (16)।
  •  अगर किसी के कमर में दर्द है, तो इस योग से परहेज करें।
  •  पीठ व गर्दन में तेज दर्द होने पर इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  •  जिन्हें अधिक चक्कर आता है, वो इस योग से दूर रहें।

5. वृक्षासन (Vrikshasana)

Shutterstock

वृक्षासन यानी ट्री पोज को भी हठ योग का एक प्रकार माना जाता है। इस योग के समय शरीर वृक्ष के जैसा खड़ा नजर आता है। ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग के रूप में इस आसन को भी किया जा सकता है। दरअसल, ऐसा माना जाता है कि इस योग को करने पर श्वसन प्रणाली और रक्त संचार को बेहतर किया जा सकता है। इससे शरीर के ऑक्सीजन लेवल पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। फिलहाल, इस संबध में वैज्ञानिक अध्ययन का अभाव है।

योग करने का तरीका :

  •  इस योग के लिए योग मैट बिछाकर सीधे खड़े हो जाएं।
  •  अब बाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए बाएं पैर के तलवे को दाएं पैर की जांघ पर सटाकर रखने की कोशिश करें। इस समय ध्यान रखें कि दायां पैर सीधा रहे व पैर का संतुलन ठीक से बना रहे।
  •  जब शरीर का संतुलन ठीक से बन जाए, तब गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को एक साथ सिर के ऊपर ले जाकर नमस्कार की मुद्रा बना लें।
  • इस समय कमर, रीढ़ की हड्डी और सिर एक सीध में होने चाहिए। साथ ही शरीर का संतुलन बना रहना चाहिए।
  • अब कुछ मिनट तक इसी मुद्रा में बने रहने का प्रयास करें और सांस लेने व छोड़ने की प्रक्रिया को सामान्य रखें।
  •  इसके बाद सांस छोड़ते हुए योग को विपरीत करें और शुरुआती मुद्रा में आ जाएं।
  •  यह आधा चक्र हुआ है, अब इसे दूसरी ओर से भी दोहराएं।
  •  इस योग के तीन से चार चक्र कर सकते हैं।

सावधानियां :

  •  मोटापे से जूझ रहे व्यक्ति यह योग न करें।
  •  अगर किसी को गठिया की समस्या है, तो वो इस आसन से दूर रहें।
  •  निम्न या उच्च रक्तचाप और माइग्रेन की समस्या होने पर भी इस आसन से दूर रहें।
  •  गर्भवतियों को यह योग नहीं करना चाहिए।
  •  अगर किसी का सिर चकराता है, तो वो इस योग को करने से बचें।

6. मत्स्यासन (Matsyasana)

Yoga-To-Increase-Oxygen-Level

Shutterstock

मत्स्यासन को अंग्रेजी में फिश पोज भी कहा जाता है। यहां मत्स्य का मतलब मछली और आसन का मतलब मुद्रा है। इस योग के दौरान शरीर का आकार मछली की तरह दिखाई देता है। एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक, योग करने पर रक्त संचार बेहतर हो सकता है। इस अध्ययन किए जाने वाले योग में मत्स्यासन भी शामिल है। वहीं, हमने लेख में पहले भी बताया है कि रक्त संचार के बेहतर होने पर शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा में सुधार हो सकता है (17)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि मत्स्यासन ऑक्सीजन को बढ़ाने का काम कर सकता है।

योग करने का तरीका :

  •  इस योग के लिए योग मैट या चटाई बिछाकर पद्मासन की स्थिति में आ जाएं।
  • फिर धीरे-धीरे पीछे झुकते हुए पीठ के सहारे लेट जाएं।
  • अब कोहनियों को जमीन पर टिकाते हुए दाएं हाथ से बाएं पैर व बाएं हाथ से दाएं पैर को पकड़ने का प्रयास करें।
  • इसके बाद लंबी सांस भरते हुए छाती को ऊपर की तरफ उठाएं व सिर को अपनी क्षमता के अनुसार पीछे की तरफ ले जाएं।
  • थोड़ी देर के लिए इसी मुद्रा में बने रहें और नियमित रूप से सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • इसके बाद योग की क्रिया को विपरीत दिशा में करते हुए पहले वाली मुद्रा में आ जाएं।
  • इस योग के 5-6 च्रक किए जा सकते हैं।

सावधानियां :

  •  हाई बीपी या लो बीपी से परेशान व्यक्ति इसे न करें।
  •  अनिद्रा या माइग्रेन की समस्या है, तो इसे करने से बचें।
  •  पीठ के निचले भाग या गर्दन से जुड़ी समस्या है, तो मत्स्यासन से दूर रहें।

7. मकरासन (Makarasana)

Yoga-To-Increase-Oxygen-Level

Shutterstock

अगर जानना चाहते हैं कि योग से कैसे बढ़ाये ऑक्सीजन लेवल, तो इसके लिए मकरासन किया जा सकता है। एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर पब्लिश एक मेडिकल रिसर्च में दिया है कि योग करने पर श्वसन प्रणाली को स्वस्थ रखा जा सकता है। इससे ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इस रिसर्च में किए जाने वाले योग में मकरासन का नाम भी शामिल है (18)। साथ ही इस योग से फेफड़ों के क्षमता को भी बढ़ावा मिल सकता है (19)।

योग करने का तरीका :

  •  इस योग को करने के लिए एक साफ सुथरी जगह पर योग मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं।
  •  इस समय दोनों हाथ और पैरों को एकदम सीधा रखें। साथ ही दोनों पैरों के बीच एक से दो फीट की दूरी बनाकर रखें।
  •  अब शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें।
  •  फिर सिर, कंधों व सीने को हल्का ऊपर उठाएं।
  •  इसके बाद दोनों हाथों को कंधों से थोड़ा ऊपर उठाकर कोहनी से मोड़कर एक कलाई को दूसरी कलाई के ऊपर रख दें।
  •  अब सिर को हथेलियों के ऊपर रख दें और लंबी सांस लेकर आंखें बंद कर लें।
  •  फिर मन को शांत करते हुए दिमाग से बुरे ख्याल निकाल दें और सामान्य रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  •  कुछ मिनट बाद आंखें खोलते हुए शुरुआती मुद्रा में आ जाएं।
  •  इस योग को रोजाना 10 से 15 मिनट तक कर सकते हैं।

सावधानियां :

  •  गर्भवती महिलाएं इस योग को न करें।
  •  कोहनियों या हाथ में फ्रैक्चर की स्थिति में इस योग को न करें।
  •  अधिक मोटापा और उच्च रक्तचाप वाले इस आसन से दूर रहें।

8. बालासन (Balasana)

Shutterstock

बालासन को ‘चाइल्ड पोज’ के नाम से भी जाना जाता है। इस योग का नाम संस्कृत भाषा के दो शब्द बाल और आसन को मिलाकर रखा गया है। इसमें बाल का मतलब बच्चा और आसन का मतलब मुद्रा है। इस योग के दौरान शरीर का आकार एक छोटे बच्चे की तरह नजर आता है। वहीं, इस योग को करने से रक्त संचार बेहतर हो सकता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है (20)।

योग करने का तरीका :

  •  बालासन करने के लिए स्वच्छ स्थान पर योग मैट बिछाकर वज्रासन में आ जाएं।
  •  अब लंबी और गहरी सांस भरते हुए दोनों हाथों को आसमान की तरफ उठाएं। इस दौरान दोनों हाथों के बीच थोड़ी दूरी बनाए रखें व हथेलियां खुली होनी चाहिए।
  •  फिर धीमे-धीमे सांस छोड़ते हुए शरीर के ऊपरी भाग को आगे की ओर झुकाएं और माथे को जमीन पर आराम दें। इस दौरान दोनों हाथों आगे की तरफ जमीन पर होंगे।
  •  इस अवस्था में आने पर दोनों हाथ सामने और सिर जमीन पर होगा और छाती जांघों पर टिकी होगी। साथ ही सामान्य रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  •  अब अपनी क्षमतानुसार कुछ देर इसी मुद्रा में बने रहने की कोशिश करें।
  •  इसके बाद लंबी सांस लेते हुए वज्रासन में आएं और सांस छोड़ते हुए हाथों को नीचे करें।
  •  प्रतिदिन इस योग के तीन से चार चक्र किए जा सकते हैं।

सावधानियां :

  • घुटनों में फ्रैक्चर या चोट की स्थिति में इस योग से परहेज करें।
  • गर्भवतियां इस योग को न करें।
  • अगर सामने की ओर झुकने में समस्या होती है, तो इसे न करें।

9. अर्ध मत्स्येन्द्रासन (Ardha Matsyendrasana)

Shutterstock

अर्ध मत्स्येन्द्रासन को संस्कृत भाषा के चार शब्दों अर्ध, मत्स्य, इन्द्र व आसन से मिलाकर बनाया गया है। इस आसन को करना आसान नहीं है, पर इसके नियमित अभ्यास से इसे कुछ ही दिनों में आसानी से किया जा सकता है। वहीं, इस योग की मदद से भी शरीर में ऑक्सीजन के सही स्तर को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। दरअसल, विषय से जुड़े एक शोध में जिक्र मिलता है कि अर्ध मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास फेफड़ों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति करने में मदद कर सकता है (21)। इससे शरीर में सही ऑक्सीजन लेवल को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

योग करने का तरीका :

  •  सबसे पहले योग मैट बिछाकर दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएं। इस समय हाथ, पैर और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।
  •  फिर अपने दाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए बाएं पैर के ऊपर से लाकर बाएं पैर के घुटने के बगल में रखें।
  •  अब बाएं पैर को मोड़ें और बाएं पैर की एड़ी को दाएं कूल्हे के नीचे रख दें।
  •  फिर दाएं हाथ को बाएं घुटने के ऊपर से ले जाकर जांघ के करीब रख दें व दाएं हाथ से बाएं पैर के टखने को पकड़ने की कोशिश करें।
  •  इसके बाद गर्दन को बाईं तरफ अपनी क्षमता के अनुसार मोड़ें और पीछे देखें। साथ ही इस दौरान रीड की हड्डी को सीधा रखें।
  •  कुछ सेकंड इसी मुद्रा में बने रहें और सामान्य रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  •  इसके बाद योग की क्रिया को विपरीत करते हुए पहले वाली मुद्रा में आ जाएं।
  •  यह अर्ध चक्र हुआ है, अब इस क्रिया को दूसरी तरफ से भी दोहराएं।
  •  रोजाना इस योग के तीन से चार चक्र किए जा सकते हैं।

सावधानियां :

  •  अगर हाल ही में हृदय या पेट की सर्जरी हुई है, तो इस योग को करने से बचें।
  •  हर्निया और अल्सर की समस्या से जूझ रहे मरीज इस योग से दूर रहें।
  •  गर्भवती को यह योग को नहीं करना चाहिए।

10. भुजंगासन (Bhujangasana)

Shutterstock

ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग में भुजंगासन को भी शामिल किया जा सकता है। भुजंगासन को अंग्रेजी में ‘कोबरा पोज’ के नाम से जाना जाता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इस आसन के दौरान शरीर का आकार सांप जैसी दिखाई देता है। भुजंगासन योग को करने पर रक्त संचार और ऑक्सीजन की मात्रा में सुधार हो सकता है। इस बात की पुष्टि इससे संबंधित एक शोध में होती है (22)।

योग करने का तरीका :

  •  इस योग के लिए योग मैट या चटाई बिछाकर पेट के सहारे लेट जाएं और साथ ही दोनों हाथों को सिर के पास रखें व माथे को जमीन पर आराम दें।
  •  इस समय दोनों पैर तने हुए व इनके बीच एक फिट की दूरी होगी।
  •  इसके बाद दोनों हथेलियों को कंधों के बराबर ले आएं और फिर लंबी सांस लेते हुए हाथों से जमीन पर दबाव डालें और शरीर को नाभि तक ऊपर उठाएं।
  •  इसे उठाने के क्रम में पहले सिर, फिर छाती व अंत में नाभि वाला भाग ऊपर उठेगा।
  •  इस मुद्रा में आने के बाद नजरे आसमान की तरफ कर लें और थोड़ी देर ऐसे ही रहें।
  •  इस वक्त शरीर का वजन दोनों हाथों पर एक समान होना चाहिए। साथ ही नियमति रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  •  थोड़ी देर इस मुद्रा में रहने के बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं।
  •  इस योग के तीन से पांच चक्र कर सकते हैं।

सावधानियां :

कुछ स्थितियों में इस योग को नहीं करना चाहिए, इनमें ये शामिल हैं (23) :

11. उष्ट्रासन (Ustrasana)

Shutterstock

उष्ट्रासन योगासन करने ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ावा मिल सकता है। इस संबंध में प्रकाशित एक शोध में दिया है कि यह रक्त संचार में सुधार करने का काम कर सकता है। इसका सकारात्मक असर ऑक्सीजन लेवल पर भी नजर आ सकता है (22)।

योग करने का तरीका :

  • इसके लिए सबसे पहले योग मैट या चटाई बिछाकर वज्रासन की मुद्रा में आ जाएं।
  • इसके बाद घुटनों के बल खड़े हो जाएं और शरीर का संतुलन बनाए रखें।
  • अब लंबी सांस भरते हुए पीछे की तरफ धीरे-धीरे झुकते हुए बाएं हाथ से बाएं पैर की एड़ी व दाहिने हाथ से दाएं पैर की एड़ी को पकड़ लें। ध्यान रहे कि इस
  • समय शरीर का संतुलन बिगड़ने पर गिर सकते हैं, इसलिए धीरे-धीरे झुकें।
  • अब सिर को पीछे की तरफ झुकाकर आसमान की तरफ देखें।
  • इस वक्त शरीर का भार दोनों हाथों व पैर पर होगा।
  • कुछ मिनट इसी मुद्रा में बने रहने का प्रयास करें और नियमित रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • फिर धीरे-धीरे इस क्रिया को विपरीत करते हुए वज्रासन की मुद्रा में लौट आएं।
  • इस आसन के चार से पांंच चक्र किए जा सकते हैं।

सावधानियां :

  •  अगर किसी को हर्निया की समस्या है, तो वो इस योग करने से बचें।
  •  उच्च रक्तचाप के मरीज इस आसन से परहेज करें।
  •  घुटनों पर चोट या दर्द होने पर इस योग से दूर रहें।

12. धनुरासन (Dhanurasana)

Shutterstock

धनुरासन में शरीर का आकार धनुष की तरह दिखाई देता है। इसी वजह से इसका नाम धनुरासन पड़ा है। माना जाता है कि इस योग का नियमित अभ्यास भी ऑक्सीजन के स्तर में सुधार करने में मददगार हो सकता है। फिलहाल, इस पर वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है।

योग करने का तरीका :

  • धनुरासन करने के लिए एक साफ और शांत स्थान पर योग मैट या चटाई बिछा लें और पेट के सहारे लेट जाएं।
  •  अब दोनों पैर को घुटनों से मोड़कर टखनों को हाथों से पकड़ लें।
  •  फिर लंबी सांस लेते हुए सिर, छाती और जांघ को ऊपर उठाएं।
  •  इस पोजीशन में आने के बाद शरीर का आकार धनुष की तरह दिखाई देगा।
  •  शुरुआत में इस मुद्रा में आने में परेशानी हो सकती है। इस समय धनुरासन में आने के लिए शरीर पर ज्यादा दबाव न डालें।
  •  कुछ सेकंड तक इस मुद्रा में ही रहें व सामान्य तरीके से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  •  इसके बाद सांस छोड़ते हुए पहले वाली मुद्रा में आ जाएं।
  •  इस आसन को रोजाना 5-6 बार तक कर सकते हैं।

सावधानियां :

  •  हृदय रोग से जूझ रहे मरीज इस आसन को न करें।
  •  अगर किसी को उच्च रक्तचाप की समस्या है, तो उन्हें इस योग से बचने की सलाह दी जाती है।
  •  पेट के अल्सर व हर्निया से जूझ रहे व्यक्ति इस आसन से दूर रहें।

13. पवनमुक्तासन (Pawanmuktasana)

Shutterstock

अगर कोई सोच रहा है कि ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए, तो हम पवनमुक्तासन योग को करने की सलाह देंगे। दरअसल, इस योग के नियमित अभ्यास से शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। ऐसे में, कहा जा सकता है कि पवनमुक्तासन के जरिए ऑक्सीजन की कमी को दूर किया जा सकता है (24)।

योग करने का तरीका :

  •  सबसे पहले एक समतल स्थान पर योग मैट बिछाकर पीठ के सहारे लेट जाएं। इस समय दोनों हाथ शरीर से सटे होने चाहिए।
  •  इसके बाद लंबी सांस भरते हुए बाएं पैर को घुटने से मोड़ लें।
  •  फिर दोनों हाथों से घुटने को अच्छी तरह पकड़ें व छाती से लगाने का प्रयास करें।
  •  अब सांस को धीरे-धीरे छोड़ते हुए सिर को उठाएं व माथे को घुटने पर टिकाने की कोशिश करें।
  •  माथे को घुटने पर टिकाने के बाद कुछ देर इसी मुद्रा में बने रहें और सांस लेते व छोड़ते रहें।
  •  फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए पैर व सिर को पहले वाली मुद्रा में ले आएं।
  •  अब इस प्रक्रिया को दूसरे पैर के साथ भी करें।
  •  जैसे एक-एक पैर के साथ यह आसन किया, उसी तरह अब दोनों पैरों के साथ भी यह आसन करें।
  •  इस योग के तीन से चार चक्र किया जा सकता है।

सावधानियां :

  •  कमर में दर्द होने पर इस योग को नहीं करना चाहिए।
  •  पैरों को छाती की तरफ लेने जाने में अगर ज्यादा तकलीफ होती है, तो जितना हो सके उतना ही ले जाएं।

14. नौकासन (Naukasana)

Shutterstock

नौकासन को ‘बोट पोज’ के नाम से भी जाना जाता है। इस योग के दौरान शरीर नाव और वी आकार में दिखाई देता है। यह योग पूरे शरीर के रक्त संचार में सुधार करने का काम कर सकता है। साथ ही श्वसन क्रिया को भी बेहतर कर सकता है। इससे शरीर में ऑक्सीजन को बढ़ावा मिल सकता है। फिलहाल, इस संबंध में शोध का अभाव है।

योग करने का तरीका :

  • इस योग के लिए योग मैट या चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं।
  • अपने हाथों को जांघ के बगल में रखें और शरीर को एकदम सीधा रखें।
  • इसके बाद शरीर को ढीला छोड़ दें और अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें।
  • इसके बाद लंबी सांस लेते हुए सिर और पैर को 30 डिग्री पर उठाएं।
  • इस दौरान आपके हाथ आपके जांघ के ऊपर होंगे।
  • फिर इस मुद्रा में थोड़ी देर बने रहें और सामान्य रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • इसके बाद सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • यह एक चक्र पूरा हुआ, इसके 4-5 चक्र पूरे किए जा सकते हैं।
  • एक अन्य तरीका भी है, जिसमें सिर और पैरों को 45 डिग्री पर उठाकर वी आकार बनाया जाता है। इसे एडवांस्ड नौकासन कहा जाता है।

सावधानियां :

  •  अस्थमा और हृदय रोग के मरीज इस योग को न करें।
  •  हाथ, पैर, हिप्स या कंधे में चोट की स्थिति में इस आसन से बचना चाहिए।

15. शीर्षासन (Sirsasana)

Shutterstock

ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए, इसके जवाब में शीर्षासन को करने की सलाह दी जा सकती है। इस आसन के दौरान सिर के बल खड़ा होना पड़ता है, इसलिए इसे सावधानी के साथ करना होता है। यह योग शरीर के ऊपरी भाग और मस्तिष्क में ब्लड फ्लो यानि रक्त संचार को बढ़ाने में मदद कर सकता है। इससे ऑक्सीजन की मात्रा को संतुलित रखने में कुछ हद तक मदद मिल सकती है (25)। फिलहाल, इस विषय पर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

योग करने का तरीका :

  • शीर्षासन को करने के लिए एक स्वच्छ जगह पर योग मैट बिछाकर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  •  अब दोनों हाथों की उंगलियों को इंटरलॉक करके समाने की ओर झुककर हाथों को जमीन पर रखें।
  •  फिर सिर को झुकाकर जमीन पर दोनों हाथों के बीच में रख दें।
  •  इसके बाद दोनों पैरों को एक साथ धीरे-धीरे ऊपर उठाकर सीधा कर लें।
  •  इस समय शरीर को सिर के बल पूरी तरह सीधा रखें। साथ ही हाथों की मदद से संतुलन बनाए रखें।
  •  थोड़ी देर के लिए इसी अवस्था में रहें व नियमित रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  •  अब धीरे धीरे सांस छोड़ते हुए पैरों को नीचे लें आए और शुरुआती मुद्रा में आ जाएं।
  •  शुरुआती अभ्यासक प्रशिक्षक की मदद से इस योग दो से तीन बार कर सकते हैं।

सावधानियां :

  •  भुजाओं, पीठ, कंधे, सिर या गर्दन में दर्द है, तो इस आसन से दूर रहें।
  •  उच्च रक्तचाप के मरीज इस योग को करने से बचें।
  •  अगर किसी को कमजोरी महसूस हो रही है, तो वो इस आसन को न करें।
  •  गर्भवती महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिए।

लेख अंत तक पढ़ें

ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग के दौरान क्या करें और क्या नहीं, इसके बारे में आगे जानकारी दी गई है।

ऑक्सीजन बढ़ाने वाले योग करने के दौरान क्या करें और क्या न करें – Do’s and Don’ts while practicing Yoga to increase oxygen level in body

ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग के हर एक स्टेप में सावधानी बरतनी पड़ती है। इसे करते समय कब सांस लेनी और कब छोड़नी है, इन बातों को ध्यान में रखने के साथ ही योग के दौरान क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसकी भी जानकारी होना बहुत जरूरी है। पढ़ें नीचे :

क्या करें :

  •  ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग सुबह खुली और स्वच्छ जगह पर करें। इसके लिए पार्क में जाना अच्छा होगा।
  •  योग करने के लिए खास बनाए गए आरामदायक कपड़े पहनें। इससे योग के दौरान असहज महसूस नहीं करेंगे।
  •  योग के दौरान पीने के लिए ठंडे पानी की जगह गुनगुने पानी का चयन करें।
  •  अगर कोई शाम के समय योग करने का सोच रहा है, तो उन्हें बता दे कि योग से 4 घंटे पहले तक कुछ न खाएं।
  •  शुरुआत में 5 से 6 योग को मिलाकर 45 मिनट से 1 घंटे तक कर सकते हैं। समय के साथ-साथ योग और इसका समय बढ़ा सकते हैं।
  •  शुरुआती अभ्यासक प्रशिक्षक की मदद से ही योग करें।

क्या नहीं करें :

  •  योग करने के तुरंत बाद स्नान न करें। कम से कम 20 से 25 मिनट के बाद नहाएं।
  •  इसे करने के आधे घंटे तक कुछ न खाएं।
  •  असुविधाजनक कपड़ों में योग न करें।
  •  योग मुद्रा में होने के दौरान किसी से बात न करें।

दोस्तों, कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए लेख में बताए गए ऑक्सीजन को बढ़ाने वाले योग को गंभीरता से जरूर लें और इनका रोजाना अभ्यास करें। इन योगासनों से न सिर्फ ऑक्सीजन का स्तर संतुलित रखा जा सकता है, बल्कि ये कई शारीरिक समस्याओं से बचाव में आपकी मदद कर सकते हैं। वहीं, लेख में बताई गई सावधानियों का पालन भी जरूर करें। हम उम्मीद करते हैं कि कोरोना काल में योग आपको स्वस्थ बनाए रखने में मदद करेगा। इसी तरह स्वास्थ्य विषयों से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए जुड़े रहें स्टाइलक्रेज के साथ।

चलिए, अब कुछ जरूरी सवालों के जवाब जान लेते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रक्त में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं होने के लक्षण क्या हैं?

सांस लेने में परेशानी और चेहरे व होंठ के रंग का नीला पड़ना रक्त में ऑक्सीजन की कमी के लक्षण हो सकते हैं। इसके लक्षण से जुड़ी जानकारी के बारे में हमने ऊपर लेख में विस्तार से बताया है।

कौन से खाद्य पदार्थ रक्त में ऑक्सीजन बढ़ाने में मदद करते हैं?

रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन कर सकते हैं। साथ ही कम कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार भी मदद कर सकते हैं (26)। आयरन युक्त खाद्य पदार्थों में सूखा आलूबुखारा, किशमिश, खुबानी, सोयाबीन, राजमा, ब्रोकली व पालक आदि का सेवन किया जा सकता है (27)। इसके अलावा, इस विषय में डॉक्टरी सलाह भी ली जा सकती है।

मैं अपने ऑक्सीजन के स्तर को प्राकृतिक रूप से कैसे बढ़ा सकता हूं?

रक्त में प्राकृतिक रूप से ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने के लिए नौकासन, धनुरासन, उष्ट्रासन, भुजंगासन, बालासन, वृक्षासन और सूर्य नमस्कार के साथ ही कुछ अन्य योग को कर सकते हैं। इन योग को करने का तरीका ऊपर लेख में विस्तार से बताया गया है।

क्या प्राणायाम से ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है?

जी हां, प्राणायाम ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ा सकता है। दरअसल, प्राणायाम के दौरान की जाने वाली ब्रीदिंग एक्सरसाइज ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने का काम कर सकती है (11)। इसके लिए कपालभाति व अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम किए जा सकते हैं।

एक कमरे में ऑक्सीजन का स्तर कैसे बढ़ा सकते हैं?

एक कमरे में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने के लिए खिड़की को खुला रख सकते हैं। साथ ही कमरे में या खिड़की के पास छोटे-छोटे पौधों को गमले में रखा जा सकता है। ये पौधे हवा को साफ करने में मदद कर सकते हैं। वहीं, कमरे की खिड़कियां व दरवाजों को खोलकर कुछ देर टहला जा सकता है। अगर किसी को धूम्रपान करने की आदत है, तो उसे यह आदत तुरंत छोड़ देनी चाहिए। इसके अलावा, नियमित रूप से ब्रीदिंग एक्सरसाइज व योग करना चाहिए।

ऑक्सीजन के लिए कौन सा व्यायाम सबसे अच्छा है?

ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज को सबसे अच्छा माना जा सकता है। इसके लिए प्रोनल ब्रीदिंग, बुटेयको नोज ब्रीदिंग, अल्टरनेट नॉस्ट्रिल ब्रीदिंग और लायन ब्रीदिंग एक्सरसाइज को किया जा सकता है।

Sources

Articles on StyleCraze are backed by verified information from peer-reviewed and academic research papers, reputed organizations, research institutions, and medical associations to ensure accuracy and relevance. Read our editorial policy to learn more.

Was this article helpful?
The following two tabs change content below.

ताज़े आलेख