गिलोय के 12 फायदे, उपयोग और नुकसान – Giloy Benefits and Side Effects in Hindi

Medically Reviewed By Neha Srivastava, PG Diploma In Dietetics & Hospital Food Services
Written by , (शिक्षा- एमए इन जर्नलिज्म मीडिया कम्युनिकेशन)

प्राचीन काल में आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का उपयोग कर कई बीमारियों को दूर किया जाता था। समय के साथ-साथ साइंस में भी बदलाव हुआ, लेकिन आज भी जरूरत पड़ने पर कुछ मामलों में जड़ी बूटियों का सहारा लिया जाता है। इनमें से एक जड़ी बूटी है गिलोय। भले ही कई लोग इसके बारे में न जानते हों, लेकिन गिलोय के फायदे अनेक हैं। गिलोय के औषधीय गुण किस तरह स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव करते हैं, समझने के लिए यह लेख पढ़ें। इसके अलावा, यहां गिलोय के उपयोग व नुकसान भी जानिए।

पढ़ना शुरू करें

सबसे पहले जानिए कि गिलोय क्या है और फिर हम बताएंगे कि गिलोय से फायदा होता है या नहीं।

गिलोय क्‍या है – What is Giloy in Hindi

गिलोय एक बेल है, जो मुख्य रूप से जंगलों, खेतों की मेड़ों और पहाड़ों की चट्टानों पर पाई जाती है। इसकी तासीर गर्म होती है। इसके फल मटर के बीज जैसे दिखते हैं। इसका तना हरा और देखने में किसी रस्सी-सा लगता है। गर्मी के दिनों में इसपर छोटे पीले फूल लगते हैं, जो नर पौधे में गुच्छे के रूप में और मादा में अकेले मौजूद होते हैं। यही कारण है कि नर और मादा के रूप में गिलोय की पहचान इसके फूलों को देखकर की जाती है (1)। गिलोय की पत्तियां प्रोटीन, कैल्शियम व फास्फोरस से भरपूर होती हैं, इसलिए गिलोय के पत्ते के फायदे भी कई हैं (2)।

गिलोय का वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया है। इसकी बेल कई बीमारियों को अकेले ही ठीक करने की अद्भुत क्षमता रखती है, इसलिए इसे अमृता (अमृत के समान) के नाम से भी जाना जाता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह जिस भी पेड़ से लिपटकर बढ़ती है, उस पेड़ के कई औषधीय गुण गिलोय के औषधीय गुण में समाहित हो जाते हैं। इसी कारण नीम के पेड़ पर मौजूद गिलोय की बेल को लाभकारी और सबसे बेहतर माना जाता है।

आगे जानें

अब सीधे गिलोय के फायदे से जुड़ी विस्तृत जानकारी पर नजर डालते हैं।

गिलोय के फायदे – Benefits of Giloy in Hindi

गिलोय के फायदे कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में देखे जा सकते हैं। आइए, जानते हैं गिलोय से होने वाले फायदे से जुड़ी विस्तृत जानकारी।

1. प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए

प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से व्यक्ति बीमारी की चपेट में जल्दी आ जाता है। ऐसे में गिलोय का सेवन लाभकारी साबित हो सकता है। बताया जाता है कि गिलोय के औषधीय गुण में से एक इम्यूनोमॉड्यूलेटरी प्रभाव भी है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है (1 )। इस आधार पर माना जा सकता है कि गिलोय के लाभ प्रतिरोधक क्षमता के लिए भी हैं। प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में गिलोय जूस के फायदे ज्यादा देखे जाते हैं।

2. क्रोनिक फीवर को करे ठीक

क्रोनिक फीवर यानी पुराने बुखार में भी गिलोय के लाभ होते हैं। इसके लिए गिलोय के तने और पत्तियों को इस्तेमाल में लाएं। इनमें एंटीपायरेटिक यानी बुखार को ठीक करने वाला और एंटी-मलेरियल यानी मलेरिया इंफेक्शन को दूर करने वाला प्रभाव होता है। यही नहीं, गिलोय जूस के फायदे क्रोनिक कफ यानी पुरानी खांसी को ठीक करने में भी देखे जा सकते हैं। इसके लिए गिलोय के पत्ते के फायदे हो सकते हैं। लाभ पाने के लिए गिलोय की पत्तियों का रस या काढ़ा बनाकर उसे शहद के साथ बुखार होने पर ले सकते हैं (2)।

3. पाचन शक्ति बढ़ाए

गिलोय के फायदे पाचन शक्ति को दुरुस्त रखने में देखे जा सकते हैं। जी हां, गिलोय के औषधीय गुण में से एक यह भी है कि इससे पाचन संबंधी कई समस्याओं जैसे कि डायरिया और दस्त से उबरने में मदद मिल सकती है (2)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि पाचन तंत्र को मजबूत करने में भी गिलोय का उपयोग सहायक साबित हो सकता है। पाचन शक्ति को बढ़ाए रखने में सबसे अधिक गिलोय जूस के फायदे देखे जाते हैं।

4. डायबिटीज को करे नियंत्रित

डायबिटीज की समस्या में भी गिलोय के फायदे हो सकते हैं। इसके लिए गिलोय में मौजूद एंटी-हाइपरग्लाइसेमिक यानी ब्लड शुगर को कम करने वाले प्रभाव को फायदेमंद माना जाता है (2)। यही कारण है कि यह शरीर में इंसुलिन की सक्रियता को बढ़ाकर ब्लड शुगर को नियंत्रित कर सकता है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि गिलोय जूस के फायदे डायबिटीज में भी हो सकते हैं।

5. डेंगू से बचाव में सहायक

गिलोय को औषधीय गुणों का भंडार माना जाता है। इसमें कई ऐसे रसायन होते हैं, जिनके कारण यह इम्यूनोमॉड्यूलेटरी प्रभाव प्रदर्शित करता है। यह प्रभाव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता देता है। इन बीमारियों में मलेरिया और डेंगू जैसे वायरल इंफेक्शन भी शामिल हैं (3)। इस कारण डेंगू की समस्या से राहत पाने में गिलोय के फायदे बताए जा सकते हैं।

6. अस्थमा की समस्या में सहायक

अस्थमा की समस्या में राहत पाने के लिए भी गिलोय के लाभ हो सकते हैं। माना जाता है कि इसमें शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ श्वास संबंधी समस्याओं जैसे अस्थमा के लक्षणों को कम करने की भी प्रबल क्षमता मौजूद होती है। इसके लिए गिलाय के तने के जूस को शहद के साथ मिलाकर इस्तेमाल में ला सकते हैं (2)।

7. गठिया की समस्या में राहत

गिलोय से फायदा गठिया की परेशानी में भी हो सकता है। विशेषज्ञों की मानें, तो गिलोय के गुण में एंटी-इंफ्लेमेटरी यानी सूजन को कम करने वाला प्रभाव होता है। साथ ही इसमें एंटी-अर्थराइटिक और एंटी-ऑस्टियोपोरोटिक यानी जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत दिलाने वाले प्रभाव भी होते हैं। ये तीनों प्रभाव संयुक्त रूप से गठिया की समस्या को दूर करने में सहायक माने जाते हैं (2)।

8. यौन इच्छाओं को बढ़ाए

यौन इच्छाओं से जुड़ी समस्या में गिलोय की अहम भूमिका मानी जा सकती है। दरअसल, एक शोध में पाया गया है कि गिलोय में इम्यूनोमॉड्यूलेटरी यानी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला गुण मौजूद होता है। यह गुण शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता देने के साथ ऐफ्रडिजीएक (Aphrodisiac) प्रभाव के कारण यौन इच्छाओं को बढ़ाने में भी मदद कर सकता है (2)।

9. आंखों की समस्याओं में लाभकारी

आंखों से संबंधित विकारों से छुटकारा पाने के लिए भी गिलोय को इस्तेमाल में ला सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसमें पाया जाने वाला इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण आंखों के लिए भी फायदेमंद प्रभाव प्रदर्शित करता है (2)। इस संबंध में किए गए एक अन्य शोध में बताया गया है कि गिलोय के गुण आंखों से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा दिलाने में सहायक साबित हो सकते हैं (1)।

10. बवासीर में लाभकारी

बवासीर में गिलोय के लाभ देखे जा सकते हैं। एक अध्ययन में बताया गया है कि गिलोय का सेवन बवासीर से राहत दिला सकता है। दरअसल, धनवंतरी निघंटु में बताया गया है कि इसके औषधीय गुण खूनी बवासीर के इलाज में सहायक हो सकते हैं (4)।

एक अन्य अध्ययन में जिक्र मिलता है कि बवासीर की समस्या से निजात पाने के लिए इस पौधे के तने को दूध या पानी के साथ मिलाकर सेवन करने से राहत मिल सकती है। वहीं, इसके सेवन से बवासीर में होने वाले रक्तस्राव व कब्ज से भी छुटकारा पाया जा सकता है (5)। इस आधार पर माना जा सकता है कि गिलोय के फायदे बवासीर में देखे जा सकते हैं।

11. सूजन में राहत

गिलोय के उपयोग सूजन संबंधी समस्या में लाभकारी हो सकते हैं। एनसीबीआई पर प्रकाशित शोध की मानें, तो गिलोय में एंटी इंफ्लामेंटरी गुण होता है, जो सूजन से राहत दिलाने में सहायक हो सकता है (1)। चूहों पर किए गए शोध में देखा गया है कि एडिमा पीड़ित यानी सूजन संबंधी बीमारी में गिलोय का सेवन करने से राहत मिल सकती है (6)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि सूजन से राहत पाने में गिलोय लाभ हो सकते हैं।

12. बढ़ती उम्र के प्रभाव को घटाए

गिलोय के उपयोग से बढ़ती उम्र के प्रभाव को घटाया जा सकता है। कई रासायनिक तत्वों की उपलब्धता के कारण गिलोय में एंटी-एजिंग प्रभाव भी मौजूद होते हैं (7)। इस कारण यह सेहत संबंधी कई समस्याओं को दूर करने के साथ-साथ बढ़ती उम्र के प्रभाव को भी कम कर सकता है। इस कारण यह कहा जा सकता है कि संतुलित मात्रा में गिलोय का नियमित सेवन त्वचा को जवां बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

अभी और है

गिलोय के फायदे बताए जाने के बाद अब बारी है गिलोए में मौजूद पौष्टिक तत्वों की।

गिलोय के पौष्टिक तत्व – Giloy Nutritional Value in Hindi

जैसा कि हमने बताया कि यह एक बेल है और इसमें मौजूद रसायन ही इसके औषधीय गुणों के भंडार का कारण हैं। आइए, उन रसायनों पर एक नजर डालते हैं (8)।

  • क्विनोन्स
  • फ्लेवेनॉइड
  • पॉलीफेनोल्स और टैनिन
  • कूमैरिन्स
  • टरपेनोइड्स और एसेंशियल ऑयल्स
  • अल्कालोइड्स
  • लैक्टिक और पॉलीपेप्टाइड
  • ग्लाइकोसाइड
  • सैपोनिन्स
  • स्टेरायड्स

जानें उपयोग

गिलोय से फायदा किन पौष्टिक तत्वों के कारण होता है, यह समझने के बाद जानिए कि गिलोय का उपयोग कैसे करते हैं।

गिलोय का उपयोग – How to Use Giloy in Hindi

गिलोय का उपयोग करने के निम्न तरीके हैं। आइए, उनके बारे में थोड़ा जान लेते हैं।

  • गिलोय के तने और पत्तियों को पीसकर इसका जूस बना सकते हैं। इसके जूस की करीब 20 से 30 एमएल खुराक दिन में दो बार लेने की सलाह दी जाती है।
  • काढ़े के रूप में इसका इस्तेमाल 20 एमएल तक दिन में दो बार किया जा सकता है। इसके लिए इसकी जड़ और तने को उबाल कर इसका काढ़ा तैयार करना होगा।
  • मटर के बीज की तरह दिखने वाले इसके दो से चार फलों को भी सेवन के लिए इस्तेमाल में ला सकते हैं।

अंत तक पढ़ें लेख

गिलोय का उपयोग जानने के बाद गिलोय से होने वाले नुकसान पर नजर डाल लीजिए।

गिलोय के नुकसान – Side Effects of Giloy in Hindi

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि किसी भी चीज का अधिक सेवन कुछ दुष्परिणाम प्रदर्शित करता है। उसी प्रकार अधिक मात्रा में सेवन से गिलोय के नुकसान भी हो सकते हैं।

  • यह ब्लड शुगर को कम करता है, इसलिए डायबिटीज की दवा लेने वाले इसके उपयोग में सावधानी बरतें, नहीं तो ब्लड शुगर काफी कम हो सकता है (2)।
  • इसे पाचन शक्ति के लिए सहायक माना गया है, लेकिन गर्म तासीर के कारण इसकी अधिक मात्रा पेट से संबंधित जलन और गैस की समस्या का कारण बन सकता है।
  • गर्भवती महिलाएं इसके सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

गिलोय के फायदे जानने के बाद आप यह समझ गए होंगे कि यह कितनी गुणकारी बेल है। गिलोय के औषधीय गुण के कारण यह कई तरह की स्वास्थ्य समस्या से बचाव कर सकती है। बस यह ध्यान दें कि गिलोय के लाभ सीमित मात्रा में उपयोग करने से ही मिलेंगे। ऐसा न करने पर गिलोय के नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है। बस तो सतर्क रहें और खुद को स्वस्थ रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या गिलोय का सेवन रोज किया जा सकता है?

अपने औषधिय गुणों के कारण कई स्वास्थ समस्याओं में गिलोय लाभदायक हो सकती है। आयुष मंत्रालय द्वारा जारी एक जानकारी के अनुसार, दिन में दो बार 1 ग्राम गिलोय का सेवन करने से एंटी वायरल इंफेक्शन से राहत मिल सकती है (9)।

क्या गिलोय से वजन बढ़ सकता है?

हां, शोध की मानें, तो गिलोय जड़ के अर्क के सेवन से वजन में वृद्धि हो सकती है (1)।

गिलोय गर्म होता है या ठंडा?

गिलोय की तासीर गर्म होती है (1)।

क्या गिलोय को नींबू के साथ लिया जा सकता है?

हां, इम्यूनिटी ड्रिंक के रूप में दालचीनी, गिलोय व सूखी अदरक को गर्म करके उसमें नींबू का रस मिलाकर पी सकते हैं। आप चाहें, तो सिर्फ गिलोय और नींबू के रस को मिक्स करके भी पीने के उपयोग में ला सकते हैं।

संदर्भ (Sources):

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  1. Tinospora cordifolia: One plant many roles
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3644751/
  2. Tinospora cordifolia (Willd.) Hook. f. and Thoms. (Guduchi) – validation of the Ayurvedic pharmacology through experimental and clinical studies
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2924974/
  3. Optimized micropropagation protocol to establish high-yielding true-to-type plantations of elite genotypes of Tinospora cordifolia for consistent production of therapeutic compounds©
    https://pubag.nal.usda.gov/catalog/6287725
  4. Tinospora cordifolia(Guduchi)
    http://nopr.niscair.res.in/bitstream/123456789/9359/1/IJTK%203%283%29%20257-270.pdf
  5. Phytochemical analysis and assessment of in vitro antibacterial activity of Tinospora cordifolia
    https://www.ijcmas.com/vol-3-3/Priyanka%20Mishra
  6. Anti-inflammatory activity of Guduchi Ghana (aqueous extract of Tinospora Cordifolia Miers.)
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/25364210/
  7. Anti-Oxidant and Antimicrobial Studies of Tinospora cordifolia (Guduchi/Giloy) Stems and Roots under In Vitro Condition
    https://www.academia.edu/38834285/Anti_Oxidant_and_Antimicrobial_Studies_of_Tinospora_cordifolia_Guduchi_Giloy_Stems_and_Roots_under_In_Vitro_Condition
  8. TINOSPORA CORDIFOLIA: ETHNOBOTANY
    PHYTOPHARMACOLOGY AND PHYTOCHEMISTRY ASPECTS
  9. GUIDELINES for SIDDHA PRACTITIONERS for COVID 19
    https://www.ayush.gov.in/docs/siddha-guidelines.pdf

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पुजा कुमारी ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। इन्होंने वर्ष 2015 में अपने... more

Neha Srivastava

(PG Diploma In Dietetics & Hospital Food Services)
Neha Srivastava - Nutritionist M.Sc -Life Science PG Diploma in Dietetics & Hospital Food Services. I am a focused health... more

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